शामली जब्ती के बाद पश्चिमी यूपी में हड़कंप — 6 जिलों के डीएम ने 14 डिफॉल्टर चीनी मिलों को दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम: ₹840 करोड़ बकाए पर आरसी जारी करने की तैयारी

मेरठ/मुजफ्फरनगर (CaneUp विशेष पड़ताल — 16 सितंबर 2026, प्रातः 06:05 IST): शामली चीनी मिल के शीरा टैंक और 1.8 लाख क्विंटल चीनी गोदाम को सील किए जाने की साहसिक प्रशासनिक कार्रवाई के 24 घंटे के भीतर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिल लॉबी में जबर्दस्त हड़कंप मच गया है। बुधवार सुबह मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, मुरादाबाद और संभल के जिलाधिकारियों ने संयुक्त कड़ा रुख अपनाते हुए अपने-अपने जिलों की 14 डिफॉल्टर चीनी मिलों के महाप्रबंधकों को 72 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम (Deadlines: 19 सितंबर शाम 5:00 बजे तक) थमा दिया है।
प्रशासनिक समीक्षा के अनुसार, इन 14 मिलों पर पेराई सत्र 2025-26 का लगभग ₹840.60 करोड़ का गन्ना मूल्य बकाया लंबित है, जिसके चलते सवा लाख से अधिक किसान अपने बच्चों की स्कूल फीस, खाद-बीज और घरेलू खर्च के लिए परेशान हो रहे हैं।
📋 इन 14 मिलों पर लटकी जब्ती की तलवार
जिला प्रशासन द्वारा जारी डिफॉल्टर सूची के अनुसार निम्नलिखित मिलों को सीधे कारण बताओ नोटिस और अल्टीमेटम मिला है:
| जिला (District) | चीनी मिल का नाम (Sugar Mill Unit) | कुल बकाया राशि (Pending Arrears) | प्रभावित किसान (Farmers) |
|---|---|---|---|
| मेरठ | मवाना शुगर मिल्स | ₹92.40 करोड़ | 22,000 किसान |
| मेरठ/गाजियाबाद | मोदीनगर शुगर मिल | ₹78.50 करोड़ | 18,500 किसान |
| हापुड़ | सिंभावली शुगर मिल | ₹114.20 करोड़ | 26,000 किसान |
| हापुड़ | ब्रजनाथपुर चीनी मिल | ₹64.80 करोड़ | 14,000 किसान |
| बिजनौर | चांदपुर व बिलाई चीनी मिलें | ₹108.30 करोड़ | 24,500 किसान |
| मुजफ्फरनगर | तितावी व मोरना (सहकारी) | ₹52.60 करोड़ | 13,000 किसान |
| सहारनपुर | गांगोह व सरसावा यूनिट्स | ₹86.10 करोड़ | 19,000 किसान |
| संभल/मुरादाबाद | बिलारी व असमोली आंशिक | ₹74.20 करोड़ | 16,500 किसान |
| लखीमपुर खीरी | बजाज हिंदुस्थान (पलिया/गोला यूनिट्स) | ₹169.50 करोड़ | 38,000 किसान |
⚖️ धारा 17(4): भू-राजस्व की भांति होगी आरसी वसूली
मेरठ के जिलाधिकारी दीपक मीणा और मुजफ्फरनगर के डीएम उमेश मिश्रा ने सख्त लहजे में कहा:
“उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 की धारा 17 में स्पष्ट प्रावधान है कि 14 दिन के भीतर भुगतान न करने पर मिल को 15% वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। यदि 19 सितंबर की शाम 5:00 बजे तक मिलों ने किसानों के बैंक खातों में डीबीटी नहीं की, तो सोमवार 21 सितंबर को सभी 14 मिलों के चीनी व एथेनॉल स्टॉक को सील कर तहसीलदारों द्वारा भू-राजस्व (Land Revenue) की तरह नीलामी कराकर पाई-पाई वसूली जाएगी।”
🏦 एस्क्रो खाते की 85% राशि पर बैंकों को भी नोटिस
प्रशासन ने मिलों के फाइनेंसर बैंकों (SBI, PNB और HDFC) को भी पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि चीनी, एथेनॉल और बगास की बिक्री से आने वाली कुल राशि का 85 प्रतिशत अनिवार्य रूप से एस्क्रो खाते (Escrow Account) में डाला जाए और इसे केवल किसानों के गन्ने बकाए के भुगतान में ही रिलीज किया जाए। मिल प्रबंधन इस पैसे को किसी अन्य हेड या वर्किंग कैपिटल में डाइवर्ट नहीं कर सकता।
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