पश्चिमी यूपी में गन्ने पर ड्रोन छिड़काव के लिए SOP जारी, टॉप बोरर नियंत्रण हेतु 100 रुपये प्रति एकड़ अनुदान

पश्चिमी यूपी में गन्ने पर ड्रोन छिड़काव के लिए SOP जारी, टॉप बोरर नियंत्रण हेतु 100 रुपये प्रति एकड़ अनुदान
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Aamir Raza - 2026-08-30
मेरठ/सहारनपुर (विशेष संवाददाता)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 12 फीट ऊंचे खड़े गन्ने के खेतों में टॉप बोरर (चोटी बेधक कीट) और फंगल संक्रमण से निपटने के लिए कृषि विभाग ने ‘किसान ड्रोन छिड़काव मानक संचालन प्रक्रिया’ (Drone Spraying SOP 2026) जारी कर दी है। इसके साथ ही गन्ने के खेतों में कीटनाशक और नैनो यूरिया के छिड़काव के लिए सरकार ने प्रति एकड़ 100 रुपये का सीधा अनुदान देने की घोषणा की है।
गन्ने के लंबे और घने पौधों में पारंपरिक पीठ वाले स्प्रेयर से दवा का छिड़काव करना किसानों और मजदूरों के लिए अत्यंत कठिन और जोखिम भरा होता है। ड्रोन तकनीक से 1 एकड़ गन्ने के खेत में मात्र 7 से 8 मिनट में समान रूप से कीटनाशक का छिड़काव पूरा हो जाता है।
ड्रोन छिड़काव के मुख्य तकनीकी मानक (SOP)
कृषि रक्षा इकाई के संयुक्त निदेशक ने बताया कि ड्रोन का उपयोग करते समय किसानों और ऑपरेटरों को निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:
- उड़ान की ऊंचाई: गन्ने की सबसे ऊपरी पत्ती से 1.5 से 2 मीटर की ऊंचाई पर ही ड्रोन उड़ाया जाएगा।
- पानी की मात्रा: प्रति एकड़ कम से कम 25 से 30 लीटर पानी का घोल तैयार किया जाएगा, ताकि पत्तियों के निचली सतह तक दवा की बूंदें पहुंच सकें।
- हवा की गति: 10 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक तेज हवा चलने पर छिड़काव तुरंत रोक दिया जाएगा।
- अनुमोदित रसायन: केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा ड्रोन छिड़काव हेतु अनुमोदित कीटनाशक और जैव-उर्वरक ही उपयोग किए जाएंगे।
| छिड़काव का माध्यम | समय (प्रति एकड़) | पानी की खपत | लागत (प्रति एकड़) | सरकारी अनुदान के बाद खर्च |
|---|---|---|---|---|
| पारंपरिक हैंड स्प्रेयर | 4 से 5 घंटे | 150 से 200 लीटर | ₹500 (मजदूरी सहित) | कोई अनुदान नहीं |
| आधुनिक किसान ड्रोन | 7 से 8 मिनट | 25 से 30 लीटर | ₹350 प्रति एकड़ | मात्र ₹250 प्रति एकड़ |
80 प्रतिशत दवा की बचत और शत-प्रतिशत कीट नियंत्रण
मुजफ्फरनगर के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आर.के. तोमर ने बताया, “ड्रोन के पंखों से पैदा होने वाले डाउनवर्ड एयर प्रेशर (नीचे की ओर हवा का दबाव) के कारण दवा की सूक्ष्म बूंदें गन्ने की गोभ के अंदर तक घुस जाती हैं, जहां टॉप बोरर का लार्वा छिपा रहता है। इससे दवा की 40% बचत होती है और कीट पूरी तरह नष्ट हो जाता है।”
अमरोहा, मेरठ और मुजफ्फरनगर के किसान कृषि विभाग के पोर्टल upagriculture.com पर जाकर ‘कस्टम हायरिंग ड्रोन सेवा’ बुक कर सकते हैं।
पश्चिमी यूपी की अमरोहा जिले की चीनी मिलों जैसे अगवानपुर चीनी मिल, चंदनपुर मिल और बेलवाड़ा चीनी मिल ने भी अपने विकास केंद्रों पर ड्रोन पायलट तैनात किए हैं।
सुरक्षा मानक और पर्यावरण हितैषी छिड़काव
एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्रोन ऑपरेटरों को छिड़काव के समय पीपीई किट, मास्क और दस्ताने पहनना अनिवार्य होगा।
ड्रोन तकनीक से कीटनाशक सीधे पौधों पर गिरता है और हवा में नहीं फैलता, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों और मवेशियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। साथ ही भूजल प्रदूषण का खतरा भी 70 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
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