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पश्चिमी यूपी में 75 मिमी तक बारिश दर्ज — जलभराव से लाल सड़न रोकने को कॉपर फफूंदनाशक एडवाइजरी

Randhir Patil Randhir Patil Sep 2, 2026 3 min read
पश्चिमी यूपी में 75 मिमी तक बारिश दर्ज — जलभराव से लाल सड़न रोकने को कॉपर फफूंदनाशक एडवाइजरी
अंतिम अपडेट: September 2, 2026 9:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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मुजफ्फरनगर / बिजनौर: मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए येलो अलर्ट के अनुसार आज 2 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। पिछले 24 घंटों में बिजनौर में सर्वाधिक 75 मिमी, मुजफ्फरनगर में 58 मिमी, सहारनपुर में 62 मिमी और शामली में 44 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस भारी बारिश से जहां एक ओर तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर निचले इलाकों और भारी दोमट मिट्टी वाले खेतों में पानी भर जाने से गन्ने की फसल पर लाल सड़न (Red Rot) और उकठा (Wilt) रोग के अचानक फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के पादप रोग विशेषज्ञों ने स्थिति को देखते हुए आज शाम किसानों के लिए एक आपातकालीन जलभराव एवं रोग प्रबंधन एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि यदि खेत में 48 घंटे से अधिक पानी खड़ा रहा, तो मिट्टी में हवा का संचार बंद हो जाएगा और जड़ों में कोलेटोट्राइकम फंगस का संक्रमण तेजी से तने के अंदर प्रवेश कर जाएगा।

खेत से जल निकासी और फफूंदनाशक ड्रेचिंग के 4 कदम

गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानों को निम्नलिखित तात्कालिक कदम उठाने की सलाह दी है:

  1. नालियां बनाकर पानी तुरंत निकालें: गन्ने के खेत के निचले सिरे पर फावड़े से गहरी नाली खोदकर पानी को पास के नाले या चकरोड की खाई में बाहर निकालें। खेत में किसी भी स्थान पर पानी जमा न रहने दें।
  2. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग: जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरते ही कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% डब्ल्यूपी (Copper Oxychloride) की 2.5 ग्राम प्रति लीटर मात्रा या बाविस्टिन (कार्बेंडाजिम) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर गन्ने की जड़ों के पास ड्रेचिंग (जड़ों को भिगोना) करें।
  3. ब्लीचिंग पाउडर का बुरकाव: यदि खेत में कीचड़ अधिक है और स्प्रेयर नहीं चल सकता, तो प्रति एकड़ 4 से 5 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर को सूखी बालू में मिलाकर खेत की सतह पर बुरक दें। इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस नष्ट हो जाएंगे।
  4. नाइट्रोजन खाद पर पूर्ण रोक: इस समय खेत में किसी भी स्थिति में यूरिया न डालें। यूरिया डालने से पौधा कोमल हो जाता है और फंगस तथा चोटी बेधक कीट का हमला कई गुना बढ़ जाता है।

कृषि विज्ञान केंद्रों की टीमें तैनात

सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों की विशेष टीमें कल सुबह से जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को मौके पर सलाह देंगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जो किसान समय रहते जलनिकासी कर लेंगे, उनकी फसल को नुकसान नहीं होगा बल्कि यह बारिश गन्ने के तने की लंबाई बढ़ाने में मददगार साबित होगी। किसान किसी भी प्रकार की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क कर सकते हैं।

चोटी बेधक कीट से भी बचाव जरूरी

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अधिक नमी वाले मौसम में चोटी बेधक (Top Borer) कीट के पतंगे तेजी से अंडे देते हैं। किसान भाई खेत में फेरोमोन ट्रैप और प्रकाश प्रपंच लगाएं ताकि वयस्क कीटों को आकर्षित कर नष्ट किया जा सके।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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