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यमुनानगर महापंचायत 4 अक्टूबर: राकेश टिकैत के आह्वान पर पंचकूला-सहारनपुर हाईवे जाम, गन्ना भाव पर बड़ा प्रदर्शन — यूपी पर क्या असर पड़ेगा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 5, 2026 • 6 min read
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यमुनानगर महापंचायत 4 अक्टूबर: राकेश टिकैत के आह्वान पर पंचकूला-सहारनपुर हाईवे जाम, गन्ना भाव पर बड़ा प्रदर्शन — यूपी पर क्या असर पड़ेगा
अंतिम अपडेट: October 5, 2026 3:44 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

महापंचायत खत्म हुई और हजारों किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर सड़क पर उतर आए। रविवार, 4 अक्टूबर को हरियाणा के यमुनानगर के औरंगाबाद में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की किसान महापंचायत के बाद किसानों ने पंचकूला-सहारनपुर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। महापंचायत में धान की खरीद और गन्ने के भाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा गया था, और रोष इतना गहरा था कि किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

यह खबर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यूपी के किसान नेता राकेश टिकैत ने सीधी चेतावनी दी है — जरूरत पड़ी तो हरियाणा-यूपी बॉर्डर दोबारा सील किया जा सकता है। पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले भाव को लेकर आंदोलन की यह लहर यूपी के 122 चीनी मिल क्षेत्रों तक पहुंच सकती है।

4 अक्टूबर को क्या हुआ: महापंचायत से हाईवे जाम तक

लल्लूराम डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, औरंगाबाद में आयोजित किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे। उनके साथ भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान भी मौजूद थे। महापंचायत में धान खरीद में देरी और गन्ने के दाम को लेकर सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला गया।

महापंचायत खत्म होते ही तनाव बढ़ गया। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने हाईवे जाम करने का ऐलान किया और उनके आह्वान के तुरंत बाद किसान सड़कों की ओर बढ़ गए। पंचकूला-सहारनपुर हाईवे पर चक्का जाम कर दिया गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। किसान नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और साफ कह दिया कि कोई भी प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन देने प्रशासनिक दफ्तरों में नहीं जाएगा — अधिकारी खुद हाईवे पर आकर किसानों का ज्ञापन लें।

राकेश टिकैत की तीन बड़ी बातें

महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने तीन बातें ऐसी कहीं, जिनका असर सीधे यूपी तक पहुंचता है।

पहली — टिकैत ने याद दिलाया कि यह वही किसान हैं, जिन्होंने 13 महीनों तक दिल्ली की सीमाओं को घेरे रखा था। यानी आंदोलन की क्षमता को लेकर उन्होंने साफ संदेश दिया।

दूसरी — उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हरियाणा के किसान फैसला लेते हैं तो उत्तर प्रदेश-हरियाणा बॉर्डर को दोबारा सील किया जा सकता है। यह चेतावनी यूपी के गन्ना किसानों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे पश्चिमी यूपी के जिले हरियाणा की सीमा से सटे हैं और दोनों राज्यों के बीच गन्ने और अन्य फसलों की आवाजाही होती रहती है।

तीसरी — टिकैत ने कहा कि सरकार की खराब नीतियों की वजह से देश का युवा अब खेती-किसानी से दूर भाग रहा है। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश के किसान भी अपनी फसल बेचने हरियाणा आते थे, लेकिन आज खुद हरियाणा का किसान परेशान है।

“अधिकारी हाईवे पर आएं” — किसानों की शर्त

हाईवे पर बैठे किसान नेताओं ने अपनी शर्त साफ कर दी — कोई भी प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन देने प्रशासनिक दफ्तरों में नहीं जाएगा, अधिकारी खुद हाईवे पर आकर ज्ञापन लें। रतन मान ने कहा कि धान की सरकारी खरीद के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन मंडियों में पर्याप्त बारदाना तक नहीं पहुंचा है। गन्ने के दामों को लेकर भी किसानों में गहरा रोष है, और सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण किसान बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

गन्ने के भाव पर रोष: यूपी के किसानों से क्या जुड़ाव

यह महापंचायत हरियाणा में हुई, लेकिन गन्ने के भाव का मुद्दा यूपी के किसानों से सीधे जुड़ता है। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में बस कुछ दिन बचे हैं और यूपी के किसान भी भाव को लेकर आंदोलित हैं — अमरोहा में ₹600 प्रति क्विंटल की मांग और 20 अक्टूबर की डेडलाइन दी जा चुकी है, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में भी किसान संगठन सक्रिय हैं।

ऐसे में यमुनानगर की महापंचायत और हाईवे जाम एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है — भाव का मुद्दा अब एक राज्य की सीमा में नहीं रह गया है। द इंडियन विटनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, टिकैत ने संकेत दिया कि किसानों के मुद्दों को लेकर संगठन भविष्य में बड़े आंदोलन का फैसला कर सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) करेगा। अब सबकी नजर एसकेएम की आगामी बैठक पर है।

2026-27 में भाव की असल तस्वीर: एफआरपी तय, एसएपी अभी बाकी

भाव की लड़ाई के बीच तथ्य क्या कहते हैं, यह समझना जरूरी है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को 2026-27 चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया था। यह 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर है — हर 0.1 प्रतिशत अधिक रिकवरी पर ₹3.56 प्रति क्विंटल प्रीमियम और कम रिकवरी पर इतनी ही कटौती। जिन मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है, वहां किसानों को ₹338.30 प्रति क्विंटल मिलेगा।

लेकिन एफआरपी न्यूनतम भाव है, जो पूरे देश में लागू होता है। उत्तर प्रदेश में असल भाव राज्य परामर्शित मूल्य यानी एसएपी से तय होता है। पिछले सीजन (2025-26) का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) था, लेकिन पेराई सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — विभाग में मंथन चल रहा है और किसान संगठन दबाव बना रहे हैं।

पेराई से पहले यूपी के किसान यह न भूलें

भाव की लड़ाई अपनी जगह, लेकिन पेराई शुरू होने से पहले हर किसान को तीन काम निपटा लेने चाहिए। पहला — अपना गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांच लें; रकबा या किस्म में गड़बड़ी हो तो तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं। दूसरा — बैंक खाता सक्रिय रखें और आधार से लिंक कराएं, ताकि भुगतान में देरी न हो। तीसरा — गन्ना समिति की सदस्यता 10 अक्टूबर 2026 तक जरूर ले लें, वरना इस सत्र में मिल को गन्ना नहीं बेच पाएंगे। किसी भी शिकायत के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क किया जा सकता है।

जवाब जानिए

प्रश्न: यमुनानगर की महापंचायत कब और कहां हुई? उत्तर: रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के यमुनानगर के औरंगाबाद में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की ओर से किसान महापंचायत आयोजित की गई।

प्रश्न: महापंचायत के बाद क्या हुआ? उत्तर: महापंचायत के बाद किसानों ने पंचकूला-सहारनपुर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया और सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। उनकी शर्त है कि अधिकारी खुद हाईवे पर आकर ज्ञापन लें।

प्रश्न: राकेश टिकैत ने क्या चेतावनी दी? उत्तर: टिकैत ने कहा कि जरूरत पड़ी तो हरियाणा-यूपी बॉर्डर दोबारा सील किया जा सकता है। उन्होंने 13 महीने तक दिल्ली की सीमाएं घेरने का हवाला देते हुए आंदोलन की क्षमता का संदेश दिया।

प्रश्न: 2026-27 में गन्ने का भाव तय हुआ है क्या? उत्तर: केंद्र ने एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश का एसएपी (जो असल भाव तय करता है) अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछले सीजन का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल था।

प्रश्न: यूपी के किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा? उत्तर: पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कर रही हैं और भाव पर आंदोलन तेज है। किसानों को सलाह है कि सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता और गन्ना समिति सदस्यता (10 अक्टूबर तक) समय पर ठीक कर लें।

स्रोत: लल्लूराम डॉट कॉम (4 अक्टूबर 2026), द इंडियन विटनेस — हिंदी (4 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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