CM योगी का बड़ा एक्शन — UP में 179 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक, जमाखोरों पर लगेगा ESMA

लखनऊ: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में कृत्रिम उछाल और कालाबाजारी की आशंकाओं पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। 22 अगस्त 2026 को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में चीनी की कोई कमी नहीं है। प्रदेश की चीनी मिलों में इस समय 179.38 लाख क्विंटल चीनी का भारी स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने साफ कर दिया है कि मुनाफाखोरी या कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले जमाखोरों के खिलाफ एस्मा (ESMA - Essential Services Maintenance Act) के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यूपी की चीनी मिलों में स्टॉक का पूरा ब्योरा
समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की निजी, सहकारी और निगम क्षेत्र की मिलों में पर्याप्त चीनी सुरक्षित है:
| मिल की श्रेणी (Mill Category) | उपलब्ध चीनी स्टॉक (लाख क्विंटल) | हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| निजी चीनी मिलें (Private Mills) | 150.50 लाख क्विंटल | ~83.9% |
| सहकारी चीनी मिलें (Cooperative Mills) | 23.60 लाख क्विंटल | ~13.2% |
| निगम की चीनी मिलें (Corporation Mills) | 5.28 लाख क्विंटल | ~2.9% |
| कुल उपलब्ध चीनी स्टॉक | 179.38 लाख क्विंटल | 100% |
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह स्टॉक आगामी त्योहारी महीनों और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आवश्यकता से अधिक है।
जमाखोरों पर शिकंजा: स्टॉक सीमा और नए कड़े नियम
बाजार में सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं के लिए सख्त सीमाएं तय की हैं:
- थोक व्यापारी व डीलर्स: अधिकतम 400 मीट्रिक टन का स्टॉक रख सकते हैं और इसे अधिकतम 30 दिनों तक ही भंडारित किया जा सकता है।
- बल्क कंज्यूमर्स (10 MT+/माह): प्रतिमाह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाली इकाइयों को अधिकतम 15 दिनों का स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
- फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश: सभी जिलाधिकारियों (DMs) को चीनी मिलों, थोक विक्रेताओं और खुदरा गोदामों की मौके पर जाकर औचक जांच (Physical Verification) करने का निर्देश दिया गया है।
15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र, मिलों को तैयारी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी पेराई सत्र 2026-27 को 15 अक्टूबर से शुरू करने की सभी तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं। इसके साथ ही मिलों को किसानों के पिछले बकाया गन्ना मूल्य का शत-प्रतिशत भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करने का कड़ा आदेश दिया गया है।
⚠️ सरकार की दो टूक चेतावनी: चीनी आवश्यक वस्तु है। यदि कोई व्यापारी या मिल मालिक स्टॉक छुपाकर कृत्रिम अभाव पैदा करने की कोशिश करेगा, तो उस पर ESMA और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
(स्रोत: ANI, Hindustan Times, Economic Times, Rediff)
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