9.18 लाख किसानों के खाते में ₹493 करोड़ भेजे योगी ने — बाढ़-ओलावृष्टि से खराब फसल वालों को 10 दिन में राहत

गोरखपुर से आई सोमवार की सबसे बड़ी किसान खबर यह है: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9,18,091 किसानों के बैंक खातों में ₹493 करोड़ की कृषि निवेश अनुदान राशि सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से भेज दी। यह रकम उन किसानों के लिए है जिनकी फसल पिछले हफ्ते बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से खराब हुई। मुख्यमंत्री का दावा है कि आपदा के महज 8 से 10 दिन के भीतर सर्वे करके राहत किसानों तक पहुंचा दी गई — बिना बिचौलिए के, सीधे खाते में। पेराई सीजन की दहलीज पर खड़े गन्ना किसानों के लिए भी यह खबर अहम है, क्योंकि ओलावृष्टि और जलभराव में खराब हुए गन्ने का मुआवजा पाने का रास्ता इसी व्यवस्था से खुलता है।
कार्यक्रम कहां हुआ और क्या घोषित हुआ
टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्यक्रम सोमवार (12 अक्टूबर) को गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ ऑडिटोरियम और सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री ने यहीं से DBT बटन दबाकर 9,18,091 किसानों के खातों में ₹493 करोड़ की राशि ट्रांसफर की। भाजपा सांसद रवि किशन भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों से प्राप्त डिजिटल फसल सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर यह भुगतान किया गया है। हांस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने साफ किया कि डिजिटल सर्वे और DBT व्यवस्था की वजह से ही मुआवजा सही लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस मानसून सीजन में अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब ₹1,000 करोड़ की सहायता दी जा चुकी है।
सिर्फ फसल नहीं — मकान, पशुधन और हादसे के लिए भी मदद
इंडियन मास्टरमाइंड्स की 13 अक्टूबर की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, इस ₹493 करोड़ के अलावा सरकार ने पहले ही फसल क्षति के लिए 1,29,326 किसानों को करीब ₹78 करोड़ और मौत, पशुधन व मकान क्षति के मामलों में ₹225.93 करोड़ का भुगतान कर दिया था।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा में मौत होने पर पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर ₹4 लाख की सहायता दी जाए। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की सहायता का भी ऐलान किया गया — हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यह मदद ₹493 करोड़ वाली राशि से अलग है। बिजली गिरने समेत दुर्घटना के योग्य मामलों में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत किसान, बटाईदार और उनके परिवार के सदस्य ₹5 लाख तक की सहायता पा सकते हैं।
15 अक्टूबर से खरीद केंद्र: धान, ज्वार, बाजरा, मक्का
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज के खरीद केंद्र खुलेंगे। इन केंद्रों पर धान, ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद होगी, किसानों की उपज खरीदने की कोई मात्रा-सीमा नहीं रखी गई है और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में होगा। अन्य जिलों में खरीद तय दिन से शुरू होने की बात भी कार्यक्रम में कही गई।
गन्ना किसानों के लिए इसका एक और मतलब है — पेराई सीजन शुरू होने से पहले खेत से नकदी का प्रवाह। खरीफ की दूसरी फसलों की खरीद में तेजी से किसानों के पास तरलता बढ़ेगी, जो गन्ने की कटाई-ढुलाई और रबी की बुवाई के खर्च में काम आएगी।
कृषि मंत्री ने रखे गन्ने के आंकड़े
कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी गन्ने से जुड़े आंकड़े रखे। इंडियन मास्टरमाइंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र पर ₹69,163 करोड़ खर्च किए हैं, गन्ने का मूल्य ₹280 से बढ़ाकर ₹400 प्रति क्विंटल किया गया है और गन्ना किसानों को कुल ₹3.25 लाख करोड़ का भुगतान हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पिछले नौ वर्षों में किसानों को ₹6,125 करोड़ का मुआवजा मिलने का दावा भी उन्होंने किया।
यहां एक बात ध्यान रखने लायक है — ₹400 प्रति क्विंटल की SAP 2025-26 सीजन की है। फैक्ट-इंटिग्रिटी नियम के मुताबिक, अगर 2026-27 के SAP की घोषणा अभी नहीं हुई है, तो पुराने सीजन का भाव नए सीजन का नहीं माना जा सकता। किसान परची और आपूर्ति के रेट के लिए गन्ना विभाग की ताजा अधिसूचना का ही इंतजार करें।
गन्ना किसानों के लिए क्या करना जरूरी
बाढ़ और ओलावृष्टि में गन्ने का नुकसान अक्सर पूरी तरह उभरता नहीं दिखता, इसलिए मुआवजा पाने के लिए डिजिटल फसल सर्वे में नुकसान का दर्ज होना सबसे अहम है। किसान इन कदमों पर ध्यान दें:
- सर्वे में नुकसान दर्ज कराएं: लेखपाल/कृषि विभाग के डिजिटल फसल सर्वे में अपनी फसल क्षति का रिकॉर्ड जरूर करवाएं — DBT भुगतान इसी सर्वे के आधार पर होता है।
- खाता और आधार लिंक रखें: बैंक खाता, आधार और जमीन के अभिलेख जुड़े हों, ताकि DBT अटके नहीं।
- शिकायत हो तो हेल्पलाइन: गन्ना विभाग की टोल-फ्री किसान हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर संपर्क करें (यह नंबर आधिकारिक स्रोत से सत्यापित है)।
- फोटो-रिकॉर्ड रखें: खेत में हुए नुकसान की तस्वीरें और तारीख संभालकर रखें — वेरिफिकेशन में काम आती हैं।
मुख्यमंत्री के राजनीतिक दावे
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उन्होंने 2014 में चक्रवात हुदहुद का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र ने तब ₹3,200 करोड़ भेजे थे, लेकिन किसानों तक सिर्फ ₹800 करोड़ पहुंचा। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने पर जांच करवाई और किसानों को अलग से राहत का इंतजाम किया गया। ये मुख्यमंत्री के आरोप हैं, विपक्ष की ओर से इनका खंडन पहले भी आता रहा है।
आगे क्या
15 अक्टूबर से प्रभावित जिलों में खरीद केंद्र खुलने के साथ, इस राहत की असली परीक्षा यह होगी कि अंतिम छोर के किसान तक कितनी तेजी से पैसा पहुंचता है। गन्ना किसान अपनी तरफ से एक काम जरूर करें — नुकसान का सर्वे-रिकॉर्ड दुरुस्त रखें, क्योंकि DBT की पूरी व्यवस्था इसी रिकॉर्ड पर टिकी है। पेराई सीजन में परची-पर्ची की दौड़ से पहले यह राहत कुछ किसानों के लिए शुरुआती पूंजी बन सकती है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द हंस इंडिया, इंडियन मास्टरमाइंड्स (13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें)
पूछे जाने वाले प्रश्न
₹493 करोड़ की राहत किन किसानों को मिली है? बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से जिन 9,18,091 किसानों की फसल खराब हुई, उन्हें डिजिटल फसल सर्वे के आधार पर कृषि निवेश अनुदान DBT से भेजा गया है।
गन्ना किसानों को इसका क्या फायदा है? ओलावृष्टि और जलभराव में खराब हुए गन्ने की भरपाई भी इसी आपदा-राहत व्यवस्था से हो सकती है — शर्त है कि नुकसान डिजिटल सर्वे में दर्ज हो। 15 अक्टूबर से खुल रहे खरीद केंद्रों से धान-ज्वार की नकदी भी मिलेगी।
आपदा में मौत या मकान क्षति पर कितनी मदद मिलेगी? आपदा में मृत्यु पर ₹4 लाख (24 घंटे में), पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान पर ₹1.20 लाख (मुख्यमंत्री आवास योजना) और दुर्घटना बीमा योजना में ₹5 लाख तक की सहायता का प्रावधान है।
धान खरीद केंद्र कब से खुलेंगे? मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार, अतिवृष्टि प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से धान, ज्वार, बाजरा और मक्का के खरीद केंद्र खुलेंगे; खरीद की कोई मात्रा-सीमा नहीं रखी गई है।
इस सीजन गन्ने का SAP क्या है? ₹400/क्विंटल की SAP 2025-26 सीजन की है। 2026-27 के SAP की आधिकारिक घोषणा होने तक गन्ना विभाग की ताजा अधिसूचना का इंतजार करें — पुराना भाव नया भाव नहीं माना जा सकता।
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