योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: 19 साल बाद मथुरा की छाता चीनी मिल में लगेगा 3.96 करोड़ लीटर क्षमता का एथेनॉल प्लांट — ब्रज के किसानों को मिला बड़ा तोहफा

लखनऊ / मथुरा (CaneUp विशेष ब्यूरो — 16 सितंबर 2026): उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्रज क्षेत्र के गन्ना किसानों की पिछले डेढ़ दशक से चली आ रही सबसे बड़ी मांग को पूरा करते हुए ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में मथुरा जनपद स्थित छाता सहकारी चीनी मिल (Chhata Cooperative Sugar Mill) में 3.96 करोड़ लीटर वार्षिक क्षमता का अत्याधुनिक ‘ड्यूल-मोड एथेनॉल डिस्टिलरी प्लांट’ स्थापित करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लगा दी गई है।
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि — “छाता चीनी मिल वर्ष 2008 में पूर्ववर्ती बसपा सरकार के समय बंद कर दी गई थी। पिछले 19 वर्षों से इस क्षेत्र का किसान अपनी गन्ने की फसल को लेकर दर-दर भटक रहा था। अब इस मिल के विशाल परिसर में ग्रीन एनर्जी के तहत भारी निवेश करके ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिससे ब्रज क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं को रोजगार और गन्ना किसानों को उनकी उपज का शत-प्रतिशत लाभकारी मूल्य मिलेगा।”
⚙️ क्या है ‘ड्यूल-मोड एथेनॉल प्लांट’ की तकनीक?
इस आधुनिक डिस्टिलरी प्लांट की सबसे बड़ी खूबी इसका ड्यूल-फीडस्टॉक (Dual Feedstock) आधारित संचालन है:
- पेराई सीजन (अक्टूबर से अप्रैल): जब क्षेत्र में गन्ने की फसल तैयार होगी, तब यह प्लांट सीधे गन्ने के रस (Direct Cane Juice), बी-हैवी शीरे (B-Heavy Molasses) और सिरप से सीधे 100% शुद्ध एथेनॉल बनाएगा।
- ऑफ-सीजन (मई से सितंबर): जब चीनी मिलों का पेराई सत्र समाप्त हो जाएगा, तब यह प्लांट बंद नहीं होगा। इसे मक्का (Maize), टूटे हुए चावल (Broken Rice) और क्षतिग्रस्त खाद्यान्न (Damaged Foodgrains) से एथेनॉल बनाने के मोड पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।
- 24x7 साल भर संचालन: इस तकनीक से प्लांट पूरे 330 दिन संचालित होगा, जिससे मिल की वित्तीय स्थिति सदैव मजबूत रहेगी और किसानों के भुगतान में कभी कोई गतिरोध नहीं आएगा।
📍 इन जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
| जनपद / क्षेत्र | वर्तमान स्थिति | छाता एथेनॉल प्लांट शुरू होने के बाद लाभ |
|---|---|---|
| मथुरा (छाता, कोसीकलां, गोवर्धन) | गन्ना रकबा सिमट गया था, किसान कोल्हू पर ₹220 में गन्ना बेच रहे थे। | 25,000+ किसानों को स्थानीय क्रय केंद्र और सीधा एस्क्रो भुगतान मिलेगा। |
| आगरा व हाथरस | स्थानीय स्तर पर कोई बड़ी मिल न होने से किसान धान/गेहूं पर निर्भर थे। | किसान दोबारा गन्ने की नगदी खेती शुरू कर सकेंगे और आय दोगुनी होगी। |
| अलीगढ़ व राजस्थान सीमावर्ती क्षेत्र | भरतपुर व कामां के सीमावर्ती किसानों को ढुलाई में भारी खर्च उठाना पड़ता था। | छाता मिल के नजदीकी होने से परिवहन लागत (Cartage) में 60% बचत होगी। |
🌾 किसानों की प्रतिक्रिया: “एथेनॉल प्लांट के साथ चीनी पेराई भी हो चालू”
कैबिनेट के इस फैसले का भारतीय किसान यूनियन और स्थानीय किसान संघर्ष समिति ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सरकार के सामने एक जरूरी मांग भी रखी है:
- किसान नेताओं का कहना है कि छाता में पहले 1,250 TCD क्षमता की चीनी मिल चलती थी।
- सरकार को केवल डिस्टिलरी तक सीमित न रहकर चीनी पेराई का पहिया भी दोबारा घुमाना चाहिए, ताकि किसानों को खांड, गुड़ और चीनी का स्थानीय कोटा भी उपलब्ध हो सके।
- गन्ना मंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रथम चरण में एथेनॉल प्लांट का निर्माण पीपीपी (PPP) या सहकारिता मॉडल पर 12 से 14 महीने के अंदर पूरा किया जाएगा, जिसके बाद चीनी उत्पादन इकाई के आधुनिकीकरण पर भी विचार किया जाएगा।
🇮🇳 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग में उत्तर प्रदेश की बादशाहत
भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य रखा है। उत्तर प्रदेश वर्तमान में 160 करोड़ लीटर से अधिक वार्षिक एथेनॉल उत्पादन के साथ देश में पहले स्थान पर है। मथुरा की छाता मिल में 3.96 करोड़ लीटर क्षमता जुड़ने से उत्तर प्रदेश की डिस्टिलरी क्षमता और अधिक मजबूत होगी, जिससे विदेशी कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी।
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