कैबिनेट बैठक में नहीं बढ़ा गन्ने का भाव: योगी सरकार ने SAP वृद्धि का ऐलान नहीं किया, 9 साल में ₹3.30 लाख करोड़ भुगतान का दावा

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ने के दाम बढ़ने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से किसानों को बड़ी उम्मीद थी कि सरकार पेराई सत्र से पहले गन्ने का नया भाव घोषित करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लंबे समय से मूल्य वृद्धि की मांग कर रहे गन्ना किसानों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए गन्ना भुगतान से जुड़े बड़े आंकड़े जरूर सामने रखे — उनका दावा है कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश के गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
कैबिनेट बैठक के बाद क्या बोले मुख्यमंत्री
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान गन्ना किसानों को 3 लाख 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किया गया है। राज्य सरकार के मुताबिक, इस भुगतान से प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं और अधिकांश मिलें गन्ने की आपूर्ति के बाद तय समय पर भुगतान कर रही हैं।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि गन्ना किसानों को फसल बेचने के बाद पैसे के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता, जिससे उन्हें खेती की लागत चुकाने, अगली फसल की तैयारी करने और घरेलू जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है। सरकार ने गन्ना किसानों को किए गए भुगतान को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है।
गन्ने का नया भाव क्यों नहीं घोषित हुआ
गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। किसानों के लिए गन्ने का भाव उनकी आमदनी पर सीधा असर डालता है, और किसान संगठनों की ओर से बार-बार मूल्य वृद्धि की मांग रखी जाती रही है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश में अगेती गन्ना प्रजातियों का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों का 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। उसी आधार पर इस पेराई सत्र में गन्ना बिक रहा है।
ताजा कैबिनेट बैठक में मूल्य वृद्धि को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। इसका मतलब यह है कि जब तक सरकार नया निर्णय नहीं लेती, तब तक किसानों को गन्ने का भाव मौजूदा स्तर पर ही मिलेगा। किसान संगठनों का कहना है कि खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए भाव में बढ़ोतरी अब जरूरत बन गई है।
पेराई सत्र की दहलीज पर किसानों की चिंता
गन्ने का यह मुद्दा ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रदेश में पेराई सत्र बस शुरू होने वाला है। पश्चिमी यूपी की कई मिलें अक्टूबर के मध्य से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, और किसानों का गन्ना मिल गेट तक पहुंचने लगा है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले भाव तय न होना किसानों के बीच असंतोष बढ़ा सकता है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। गन्ना यहां प्रमुख नकदी फसलों में से एक है और बड़ी संख्या में किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए इसकी खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में उचित मूल्य और भुगतान में देरी किसानों के लिए सबसे अहम मुद्दे बने हुए हैं।
सरकार के भुगतान के दावे की पड़ताल
सरकार का दावा है कि नौ वर्षों में 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान डिजिटल तरीके से सीधे किसानों के खातों में किया गया है — औसतन हर वर्ष लगभग 36-37 हजार करोड़ रुपये।
हालांकि, भुगतान के इन दावों के साथ बकाये की समस्या भी बनी हुई है। राज्य के कुछ मिल क्षेत्रों में किसानों का बकाया अभी भी लंबित है — हाल के महीनों में बरेली की बहेड़ी चीनी मिल जैसे मामलों में बकाये की वसूली के लिए जमीन नीलामी तक की प्रक्रिया चली है। किसानों की नजर इसलिए सरकार के अगले फैसले पर टिकी है — न सिर्फ भाव बढ़ोतरी पर, बल्कि लंबित बकाये के निपटारे पर भी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि ऋण और फसल क्षतिपूर्ति के भी आंकड़े
कैबिनेट बैठक के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने सिर्फ गन्ने का ही नहीं, बल्कि कृषि ऋण और फसल क्षतिपूर्ति से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। सरकार के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करोड़ों किसानों को फसल ऋण दिया गया है और प्राकृतिक आपदाओं से हुई फसल हानि के बदले लाखों किसानों को क्षतिपूर्ति पहुंचाई गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़क, रेल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का भी जिक्र किया, जिससे किसानों को अपनी उपज मंडियों और चीनी मिलों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
किसानों के लिए आगे क्या मायने रखता है
गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का भाव कब तय होगा। सरकारी हलकों में संकेत मिले हैं कि भाव पर फैसला अलग से लिया जाएगा, लेकिन ताजा कैबिनेट बैठक में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। किसान संगठनों का दबाव लगातार बना हुआ है, और आगामी दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज होने की आशंका है।
इस बीच किसानों को सलाह है कि वे अपने गन्ना सट्टा, पर्ची और भुगतान की स्थिति की जानकारी ई-गन्ना ऐप या संबंधित चीनी मिल के पोर्टल से नियमित रूप से जांचते रहें। भुगतान से जुड़ी किसी शिकायत के लिए जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल करें। एसएमएस के जरिए जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है।
निष्कर्ष
कैबिनेट बैठक में गन्ने के भाव को लेकर कोई फैसला न होना किसानों के लिए झटका जरूर है, लेकिन सरकार के 3.30 लाख करोड़ रुपये भुगतान के दावे यह भी दिखाते हैं कि गन्ना क्षेत्र पर सरकार की पैनी नजर है। अब किसानों की नजर सरकार के अगले कदम पर है — देखना होगा कि पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी का फैसला होता है या नहीं।
आपके सवाल
क्या कैबिनेट बैठक में गन्ने का भाव बढ़ाया गया?
नहीं। 8 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गन्ने का नया भाव घोषित नहीं किया गया। पेराई सत्र 2025-26 के लिए अगेती गन्ना प्रजातियों का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों का 390 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जो फिलहाल लागू रहेगा।
सरकार ने गन्ना भुगतान को लेकर क्या दावा किया है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि पिछले नौ वर्षों में यूपी के गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे करीब 48 लाख किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।
यूपी में इस समय कितनी चीनी मिलें चल रही हैं?
सरकार के मुताबिक, प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए भाव कब तय होगा?
इसका आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है। सरकार ने ताजा कैबिनेट बैठक में इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। घोषणा होते ही किसान आधिकारिक सूचनाओं के माध्यम से जान सकेंगे।
भुगतान में देरी की शिकायत कहां करें?
जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें या टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर कॉल करें। एसएमएस जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्रोत: किसान इंडिया (9 अक्टूबर 2026), गांव जंक्शन (9 अक्टूबर 2026)
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