सीएम योगी का कड़ा फरमान — 30 सितंबर तक सभी 120 चीनी मिलें पूरी करें ओवरहॉलिंग, 15 अक्टूबर से शुरू होगी पेराई

लखनऊ / मेरठ (CaneUp ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी 120 चीनी मिलों (निजी, सहकारी एवं निगम) को निर्देशित किया है कि संयंत्रों की ओवरहॉलिंग, बॉयलर हाइड्रोलिक ट्रायल, रोलर ग्रूविंग और बिजली उत्पादन टर्बाइनों की मरम्मत का कार्य प्रत्येक दशा में 30 सितंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर और बागपत) के गन्ना बहुल क्षेत्रों में गन्ने की अगेती किस्मों की बहुतायत और गेहूं की समय पर बुवाई को सुनिश्चित करने के लिए पेराई कार्य 15 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच अनिवार्य रूप से शुरू कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
🚨 14 चीनी मिलों को कारण बताओ नोटिस जारी
समीक्षा बैठक के दौरान गन्ना आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में पाया गया कि प्रदेश की 14 निजी चीनी मिलों में मेंटेनेंस कार्य निर्धारित समय-सारिणी से 10 से 15 दिन पीछे चल रहा है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित मिल प्रबंधनों को 48 घंटे के भीतर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया गया है।
| मंडल / क्षेत्र | कुल चीनी मिलें | मेंटेनेंस पूर्ण (अनुमानित) | पेराई प्रारंभ की संभावित तिथि |
|---|---|---|---|
| सहारनपुर व मेरठ मंडल | 31 मिलें | 88% पूर्ण | 15 - 20 अक्टूबर 2026 |
| मुरादाबाद व बरेली मंडल | 28 मिलें | 84% पूर्ण | 22 - 28 अक्टूबर 2026 |
| लखनऊ व तराई बेल्ट (लखीमपुर, सीतापुर) | 34 मिलें | 82% पूर्ण | 25 अक्टूबर - 1 नवंबर 2026 |
| गोरखपुर, बस्ती व अयोध्या मंडल | 27 मिलें | 79% पूर्ण | 1 - 5 नवंबर 2026 |
⚙️ मिलों में इन 5 प्रमुख तकनीकी जांचों की होगी थर्ड-पार्टी ऑडिट
गन्ना विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेराई सत्र के बीच में मिलों के बार-बार ‘नो-केन’ या तकनीकी ब्रेकडाउन के कारण किसानों की तौल प्रभावित न हो, इसके लिए नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (NSI) कानपुर और वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों द्वारा 1 से 7 अक्टूबर के बीच सभी मिलों का फिजिकल ऑडिट किया जाएगा:
- बॉयलर प्रेशर एवं हाइड्रोलिक टेस्टिंग: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के मानकों के अनुरूप चिमनी उत्सर्जन और स्टीम जनरेशन क्षमता की जांच।
- क्रशिंग रोलर एवं कटर नाइफ्स की धार: गन्ने की पिराई में 11% से अधिक रस निष्कासन सुनिश्चित करने के लिए रोलर्स की ग्रूविंग।
- इथेनॉल डिस्टिलरी व डिस्टिलेशन कॉलम: बी-हेवी मोलासिस और सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन की पाइपलाइन लीकेज टेस्टिंग।
- सह-उत्पादन (Cogeneration) पावर प्लांट: राज्य ग्रिड को हरित बिजली आपूर्ति के लिए टरबाइन लोड टेस्टिंग।
- डिजिटल तौल कांटे व बारकोड प्रिंटर: क्रय केंद्रों पर स्थापित कंप्यूटरों का ई-गन्ना सर्वर से रियल-टाइम डेटा सिंक टेस्ट।
👨🌾 किसानों को क्या होगा सीधा लाभ?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान हर साल मिलें देर से चलने के कारण गेहूं और आलू की बुवाई में पिछड़ जाते हैं। 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने पर:
- गेहूं बुवाई के लिए खाली होंगे खेत: अगेती प्रजाति (Co-0118, Co-15023) का गन्ना कटने के बाद किसान 15 नवंबर से पहले गेहूं की बुवाई कर सकेंगे।
- कोल्हू व क्रशर पर औने-पौने दाम में बेचने की मजबूरी खत्म: निजी मिलें जल्दी चालू होने से किसानों को सरकारी राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) पर पूरी पर्चियां मिलेंगी।
- पर्ची कैलेंडर का समय पर वितरण: समितियों द्वारा 5 अक्टूबर तक डिजिटल सट्टा पर्ची कैलेंडर ई-गन्ना ऐप पर लाइव कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 1 अक्टूबर से सभी जिलों में मिल वार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और तय समय पर इंडेंट जारी न करने वाली मिलों पर एस्मा (ESMA) के तहत विधिक कार्रवाई की जाए।
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