
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित एक प्रमुख चीनी मिल है। बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) समूह की यह मिल बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों गन्ना किसानों की आजीविका का आधार है। बिजनौर उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक जिलों में से एक है, और बिलाई मिल इस जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में गिनी जाती है।
इस विस्तृत लेख में हम बिलाई शुगर मिल की क्षमता, पर्ची कैलेंडर 2026, भुगतान स्थिति, एमएसपी दर, किसानों के लिए उपयोगी सुझाव, संपर्क जानकारी और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देंगे। यदि आप बिजनौर जिले के गन्ना किसान हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।
रिफ़ौल (Rifaul): CaneUp.xyz के माध्यम से हम किसान भाइयों तक सटीक और अपडेटेड जानकारी पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। बिलाई शुगर मिल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बात इस लेख में मिलेगी। हम नियमित रूप से इस लेख को अपडेट करते रहते हैं ताकि आपको हमेशा ताज़ा जानकारी मिलती रहे।
बिलाई शुगर मिल — एक नज़र में (TL;DR)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मिल का नाम | बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई |
| स्थान | बिलाई, बिजनौर, उत्तर प्रदेश |
| स्वामित्व | बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) |
| पेराई क्षमता | लगभग 12,000 TCD (टन केन डे) |
| जिला | बिजनौर |
| गन्ना सत्र | नवंबर 2025 — अप्रैल 2026 (अनुमानित) |
| एमएसपी दर 2025-26 | ₹340/क्विंटल (सामान्य), ₹345/क्विंटल (अगेती प्रजाति) |
| भुगतान का तरीका | ऑनलाइन (DBT) |
| गन्ना विभाग हेल्पलाइन | 1800-180-1551 (टोल फ्री) |
बिलाई शुगर मिल का परिचय
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई बिजनौर जिले के बिलाई क्षेत्र में स्थित है। बिजनौर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख गन्ना उत्पादक जिला है, जहाँ गन्ना खेती मुख्य फसल है। यह मिल बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) समूह की है, जो भारत की सबसे बड़ी चीनी उत्पादक कंपनी है। बजाज समूह की स्थापना 1931 में हुई थी और तब से यह कंपनी गन्ना किसानों की सेवा कर रही है।
बिलाई मिल बिजनौर जिले के गन्ना किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। इस मिल के कारण हजारों किसानों को अपना गन्ना पास में ही बेचने की सुविधा मिलती है। मिल के आसपास के गाँवों में अधिकांश किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। गन्ने की खेती से न केवल किसानों को आय होती है, बल्कि मिल में काम करने वाले मज़दूरों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों को भी रोज़गार मिलता है।
मिल का इतिहास और महत्व
बिलाई शुगर मिल का निर्माण कई वर्ष पहले हुआ था। बजाज समूह ने इस मिल को स्थापित करके बिजनौर जिले के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समय के साथ मिल में आधुनिक तकनीक अपनाई गई है, जिससे पेराई क्षमता और चीनी उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है।
मिल में नई मशीनें, बेहतर बॉयलर और आधुनिक एप्रोच चैनल सिस्टम लगाए गए हैं। इन सुधारों के कारण मिल की रिकवरी दर भी बेहतर हुई है। रिकवरी दर का अर्थ है कि 100 किलो गन्ने से कितनी चीनी बनती है। अधिक रिकवरी दर का सीधा लाभ किसानों को मिलता है।
बिजनौर — गन्ना उत्पादन का केंद्र
बिजनौर जिला गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित है, जहाँ की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु गन्ने की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है। यही कारण है कि बिजनौर में गन्ने का उत्पादन प्रति हेक्टेयर अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। बिजनौर में कई चीनी मिलें हैं, जिनमें बजाज हिंदुस्थान की बिलाई और गंगनौली दोनों मिलें शामिल हैं।
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियाँ बिजनौर जिले को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा यहाँ नहरों का भी अच्छा नेटवर्क है, जिससे सिंचाई की समस्या कम होती है। यहाँ के किसान पीढ़ियों से गन्ने की खेती कर रहे हैं और उन्हें इसमें महारत हासिल है।
बिलाई शुगर मिल की पेराई क्षमता (TCD)
बिलाई शुगर मिल की पेराई क्षमता लगभग 12,000 TCD (टन केन डे) है। इसका अर्थ है कि मिल प्रतिदिन 12,000 टन गन्ने की पेराई कर सकती है। यह एक बड़ी क्षमता है और हजारों किसानों के गन्ने की पेराई सुनिश्चित करती है।
क्षमता और प्रदर्शन
| मापदंड | विवरण |
|---|---|
| पेराई क्षमता | 12,000 TCD |
| वार्षिक चीनी उत्पादन | लाखों क्विंटल |
| रिकवरी दर | 10-12% (अनुमानित) |
| कार्य अवधि | नवंबर से अप्रैल |
| उप-उत्पाद | बैगास, मोलासेस, प्रेस मड |
| विद्युत उत्पादन | बैगास से बिजली |
रिकवरी दर क्या है?
रिकवरी दर का अर्थ है कि 100 किलो गन्ने से कितनी चीनी बनती है। यदि रिकवरी दर 11% है, तो 100 किलो गन्ने से लगभग 11 किलो चीनी बनेगी। अधिक रिकवरी दर का मतलब है कि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। रिकवरी दर गन्ने की प्रजाति, मिट्टी, जलवायु और खेती के तरीके पर निर्भर करती है।
उप-उत्पादों का महत्व
चीनी मिल से निकलने वाले उप-उत्पाद भी बहुत महत्वपूर्ण हैं:
- बैगास: गन्ने का रेशा, जिससे बिजली बनाई जाती है
- मोलासेस: शीरा, जिससे इथेनॉल बनाया जाता है
- प्रेस मड: खाद के रूप में उपयोग
- फ़िल्टर केक: खेतों में खाद के रूप में
बिलाई शुगर मिल का स्थान और आस-पास के क्षेत्र
स्थान
बिलाई शुगर मिल बिजनौर जिले के बिलाई क्षेत्र में स्थित है। बिजनौर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित एक महत्वपूर्ण जिला है। यह जिला गंगा नदी के तट पर स्थित है, जिससे यहाँ की ज़मीन बहुत उपजाऊ है।
आस-पास के प्रमुख क्षेत्र
| क्षेत्र | दूरी (अनुमानित) | विशेषता |
|---|---|---|
| बिजनौर शहर | ~20 किमी | जिला मुख्यालय |
| नगीना | ~25 किमी | प्रमुख बाज़ार |
| धामपुर | ~30 किमी | गन्ना उत्पादन क्षेत्र |
| गंगनौली | ~15 किमी | अन्य बजाज मिल |
| मुरादाबाद | ~60 किमी | प्रमुख शहर |
| नजीबाबाद | ~35 किमी | व्यापारिक केंद्र |
बिलाई के गन्ना ब्लॉक
बिलाई मिल के अंतर्गत कई गन्ना ब्लॉक आते हैं। इन ब्लॉकों के गाँवों के किसान अपना गन्ना इसी मिल में बेचते हैं। हर ब्लॉक में एक गन्ना समिति कार्यालय होता है, जहाँ किसान अपना पंजीकरण करा सकते हैं, पर्ची के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026 — बिलाई
गन्ना पर्ची कैलेंडर किसानों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इसमें उन तारीखों की जानकारी होती है जिन पर किसान अपना गन्ना मिल में बेच सकते हैं। पर्ची कैलेंडर हर सत्र में नया जारी किया जाता है। इसमें किसान का नाम, पंजीकरण नंबर, गाँव का नाम, तारीख, समय और गेट नंबर जैसी जानकारी होती है।
पर्ची कैलेंडर कैसे चेक करें?
चरण 1: उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट sugarcane.up.gov.in पर जाएँ।
चरण 2: “पर्ची जारी कैलेंडर” विकल्प पर क्लिक करें।
चरण 3: अपना जिला (बिजनौर) और मिल (बिलाई) का चयन करें।
चरण 4: अपना गन्ना पंजीकरण नंबर या गाँव का नाम दर्ज करें।
चरण 5: पर्ची कैलेंडर डाउनलोड करें या ऑनलाइन देखें। प्रिंटआउट निकालना न भूलें।
पर्ची कैलेंडर के फायदे
- तय तारीख पर गन्ना बेचने की सुविधा
- मिल के बाहर अनावश्यक इंतज़ार से छुटकारा
- गन्ने की ताज़गी और गुणवत्ता बनी रहती है
- भुगतान में तेज़ी आती है
- परिवहन लागत में बचत होती है
- गन्ने की शर्करा (SAC) बनी रहती है
पर्ची कैलेंडर के प्रकार
| पर्ची प्रकार | उपयोग |
|---|---|
| सामान्य पर्ची | नियमित गन्ना आपूर्ति के लिए |
| अगेती पर्ची | अगेती गन्ने की तुड़ाई के लिए |
| विशेष पर्ची | विशेष परिस्थितियों में जारी |
** सावधानी:** पर्ची कैलेंडर में दी गई तारीख का सख्ती से पालन करें। तारीख गुज़रने के बाद गन्ना बेचने के लिए दोबारा पर्ची लेनी पड़ेगी। पर्ची खो जाने पर गन्ना समिति के कार्यालय से दोबारा प्राप्त की जा सकती है।
गन्ना भुगतान स्थिति 2026 — बिलाई
भुगतान किसानों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा है। बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई द्वारा भुगतान DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है। इस प्रणाली के कारण बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और किसानों को उनका पूरा भुगतान सीधे मिलता है।
भुगतान स्थिति कैसे जानें?
चरण 1: गन्ना विभाग की वेबसाइट sugarcane.up.gov.in पर जाएँ।
चरण 2: “भुगतान स्थिति” (Payment Status) पर क्लिक करें।
चरण 3: अपना पंजीकरण नंबर दर्ज करें।
चरण 4: भुगतान की तारीख, राशि और स्थिति देखें।
भुगतान प्रक्रिया के चरण
| चरण | कार्य | समय-सीमा |
|---|---|---|
| 1 | गन्ना तौल और गुणवत्ता जाँच | उसी दिन |
| 2 | तौल रसीद जारी | उसी दिन |
| 3 | भुगतान गणना | 1-2 दिन |
| 4 | DBT हस्तांतरण | 14 दिनों के भीतर |
भुगतान में देरी हो तो क्या करें?
यदि 14 दिनों के भीतर भुगतान न मिले, तो निम्नलिखित कदम उठाएँ:
- सबसे पहले अपनी तौल रसीद की जाँच करें
- बैंक खाता विवरण सत्यापित करें — खाता नंबर और IFSC कोड सही हो
- गन्ना समिति के कार्यालय में शिकायत दर्ज करें — लिखित शिकायत दें
- जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें
- गन्ना विभाग की टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर कॉल करें
** प्रो टिप:** भुगतान की स्थिति नियमित रूप से चेक करते रहें। कभी-कभी बैंक खाते में तकनीकी खराबी के कारण भुगतान अटक सकता है। ऐसे में बैंक शाखा में जाकर पता करें।
एमएसपी दर 2025-26 — गन्ना मूल्य
भारत सरकार हर साल गन्ने का एमएसपी (Minimum Support Price) तय करती है। यह वह न्यूनतम मूल्य है जो किसानों को गन्ने के लिए मिलना अनिवार्य है। कोई भी चीनी मिल इससे कम कीमत पर गन्ना नहीं खरीद सकती।
गन्ना मूल्य 2025-26
| प्रजाति | एमएसपी दर (प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| सामान्य गन्ना | ₹340 |
| अगेती प्रजाति | ₹345 |
| अनुबंधित गन्ना | अनुबंध शर्तों के अनुसार |
एमएसपी, FRP और SAP में अंतर
| शब्द | पूरा नाम | विवरण |
|---|---|---|
| FRP | Fair and Remunerative Price | केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य |
| SAP | State Advised Price | राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य |
| MSP | Minimum Support Price | न्यूनतम समर्थन मूल्य |
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार SAP (State Advised Price) तय करती है, जो आमतौर पर FRP से अधिक होती है। यह किसानों के लिए फायदेमंद है।
एमएसपी से अधिक मूल्य की संभावना
कई बार चीनी मिलें एमएसपी से अधिक मूल्य भी देती हैं। यह इस पर निर्भर करता है:
- चीनी के बाज़ार भाव
- मिल की आर्थिक स्थिति
- गन्ने की गुणवत्ता (SAC%)
- सरकार की नीतियाँ
- मिल की रिकवरी दर
भुगतान की समय-सीमा
उत्तर प्रदेश सरकार के नियमानुसार, चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। यदि 14 दिनों में भुगतान नहीं होता, तो मिल को ब्याज देना पड़ता है।
बिलाई शुगर मिल — किसानों के लिए उपयोगी सुझाव
1. गन्ने की बुआई के टिप्स
- फरवरी-मार्च में अगेती बुआई करें — इससे अधिक उपज मिलती है
- प्रमाणित बीज का उपयोग करें — Co 0238, Co 0118 जैसी प्रजातियाँ अच्छी हैं
- पंक्तियों में उचित दूरी रखें (75-90 सेमी)
- सिंचाई का उचित प्रबंधन करें
- जैविक खाद का प्रयोग करें
2. गन्ने की तुड़ाई के समय
- गन्ने को पूरी तरह पकने दें — अधपका गन्ना कम मूल्य देता है
- तुड़ाई से पहले पत्तियाँ हटाएँ
- गन्ने को 24-48 घंटे के भीतर मिल में पहुँचाएँ
- लंबे समय तक कटा गन्ना न रखें (शर्करा कम होती है)
- गन्ने को धूप से बचाकर रखें
3. भुगतान सुनिश्चित करने के लिए
- बैंक खाता और आधार लिंक करवाएँ
- तौल रसीद संभालकर रखें
- पंजीकरण नंबर याद रखें
- भुगतान में देरी पर तुरंत शिकायत करें
- बैंक खाते में मोबाइल नंबर अपडेट हो
4. गन्ना परिवहन के लिए
- ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग करें
- गन्ने को रस्सी से मज़बूती से बाँधें
- ओवरलोडिंग से बचें — जुर्माना लग सकता है
- पर्ची की तारीख के अनुसार परिवहन की योजना बनाएँ
- सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें
5. गन्ने की सिंचाई
- गन्ने को 8-10 सिंचाई की ज़रूरत होती है
- गर्मियों में 10-12 दिनों में सिंचाई करें
- बरसात में जल निकासी का प्रबंधन करें
- ड्रिप सिंचाई से 30-40% पानी की बचत होती है
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई — संपर्क जानकारी
| संपर्क विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मिल का नाम | बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई |
| पता | बिलाई, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश |
| जिला | बिजनौर |
| गन्ना विभाग हेल्पलाइन | 1800-180-1551 (टोल फ्री) |
| आधिकारिक वेबसाइट | bajajhindusthan.com |
| गन्ना विभाग वेबसाइट | sugarcane.up.gov.in |
** ध्यान दें:** मिल से सीधे संपर्क के लिए गन्ना विभाग की हेल्पलाइन का उपयोग करें। आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम संपर्क जानकारी उपलब्ध होती है।
बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड — कंपनी प्रोफाइल
बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) भारत की अग्रणी चीनी उत्पादक कंपनी है। 1931 में स्थापित, यह कंपनी दशकों से गन्ना किसानों की सेवा कर रही है। कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है।
BHL की विशेषताएँ
- भारत की सबसे बड़ी चीनी उत्पादक
- उत्तर प्रदेश में कई मिलों का संचालन
- आधुनिक तकनीक और मशीनरी
- किसान-हितैषी नीतियाँ
- पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता
- इथेनॉल उत्पादन में अग्रणी
उत्तर प्रदेश में BHL की मिलें
बजाज हिंदुस्थान की उत्तर प्रदेश में 8 चीनी मिलें हैं। ये मिलें विभिन्न जिलों में स्थित हैं और लाखों किसानों को सेवा प्रदान करती हैं:
| मिल का नाम | जिला |
|---|---|
| बरखेरा | पीलीभीत |
| बिलाई | बिजनौर |
| बुढ़ाना | मुजफ्फरनगर |
| गंगनौली | बिजनौर |
| गोला गोकरननाथ | लखीमपुर खीरी |
| खम्भारखेड़ा | लखीमपुर खीरी |
| किनौनी | मुजफ्फरनगर |
| कुंदरखी | मुरादाबाद |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: बिलाई शुगर मिल की पेराई क्षमता कितनी है?
उत्तर: बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई की पेराई क्षमता लगभग 12,000 TCD है। यह मिल प्रतिदिन 12,000 टन गन्ने की पेराई कर सकती है, जिससे हजारों किसानों को लाभ मिलता है।
Q2: बिलाई मिल में गन्ने का भुगतान कैसे मिलता है?
उत्तर: भुगतान DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान होना अनिवार्य है। यदि देरी हो तो गन्ना समिति से संपर्क करें।
Q3: बिलाई शुगर मिल के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर कहाँ देखें?
उत्तर: उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की वेबसाइट sugarcane.up.gov.in पर “पर्ची जारी कैलेंडर” विकल्प में बिजनौर जिला और बिलाई मिल चुनकर पर्ची कैलेंडर देख सकते हैं। अपना गन्ना पंजीकरण नंबर दर्ज करना होगा।
Q4: बिलाई मिल में गन्ने की एमएसपी दर क्या है?
उत्तर: 2025-26 सत्र के लिए एमएसपी दर ₹340/क्विंटल (सामान्य) और ₹345/क्विंटल (अगेती प्रजाति) है। यह दर भारत सरकार द्वारा निर्धारित है और सभी चीनी मिलों पर लागू होती है।
गन्ने की खेती में सामान्य गलतियाँ
कई किसान गन्ने की खेती में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं, जिनसे बचना चाहिए:
- एक ही प्रजाति बार-बार उगाना — हर 3-4 साल में प्रजाति बदलें
- अधिक नाइट्रोजन डालना — संतुलित खाद का उपयोग करें
- सिंचाई का सही समय न जानना — मिट्टी की नमी जाँचकर सिंचाई करें
- गन्ने की तुड़ाई में देरी करना — पकने पर तुरंत काटें
- गन्ने को लंबे समय तक खेत में रखना — जल्दी मिल में पहुँचाएँ
गन्ने की फसल में रोग और कीट
गन्ने की फसल कई रोगों और कीटों से प्रभावित हो सकती है। इनसे बचाव के लिए सही जानकारी ज़रूरी है:
प्रमुख रोग:
- लाल सड़न: गन्ने के तने में लाल रंग की सड़न होती है
- पत्ती धारी रोग: पत्तियों पर धारियाँ दिखाई देती हैं
- गलन रोग: गन्ने का तना गल जाता है
प्रमुख कीट:
- तना छेदक: गन्ने के तने में छेद करता है
- ऊनी कीट: पत्तियों पर सफेद ऊन जैसा पदार्थ
- एफिड: पत्तियों का रस चूसता है
बचाव के उपाय:
- रोग प्रतिरोधी प्रजाति का चयन करें
- संक्रमित पौधों को तुरंत हटाएँ
- कीटनाशकों का सही समय पर छिड़काव करें
- फसल चक्र अपनाएँ
- कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें
गन्ने की कटाई के बाद देखभाल
गन्ने की कटाई के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण काम करने होते हैं:
- कटाई के बाद गन्ने को छाया में रखें
- 24-48 घंटे के भीतर मिल में पहुँचाएँ
- गन्ने को पानी से बचाएँ
- गन्ने की पत्तियाँ साफ करें
- गन्ने को सीधा रखें (टेढ़ा रखने से तौल में कमी आती है)
गन्ने की सिंचाई की विस्तृत जानकारी
गन्ने की फसल के लिए सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है। गन्ने को पूरे सत्र में 8-10 सिंचाई की ज़रूरत होती है।
सिंचाई का समय:
| मौसम | सिंचाई का अंतराल |
|---|---|
| गर्मी | 10-12 दिन |
| सर्दी | 15-20 दिन |
| बरसात | ज़रूरत के अनुसार |
सिंचाई के तरीके:
- पारंपरिक सिंचाई: नालियों से पानी देना — अधिक पानी लगता है
- ड्रिप सिंचाई: बूँद-बूँद करके पानी देना — 30-40% पानी की बचत
- स्प्रिंकलर सिंचाई: फव्वारे से पानी देना — 20-30% पानी की बचत
जल निकासी:
बरसात के मौसम में जल निकासी का उचित प्रबंधन बहुत ज़रूरी है। खेत में पानी जमा होने से गन्ने की जड़ें सड़ सकती हैं और फसल बर्बाद हो सकती है।
जल निकासी के उपाय:
- खेत में नालियाँ बनाएँ
- खेत के चारों ओर मेड़ बनाएँ
- अतिरिक्त पानी बाहर निकालें
- नहरों की सफाई करें
निष्कर्ष
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल बिलाई बिजनौर जिले के गन्ना किसानों के लिए एक भरोसेमंद औद्योगिक इकाई है। लगभग 12,000 TCD की पेराई क्षमता वाली यह मिल हजारों किसान परिवारों की आजीविका का स्रोत है। मिल की आधुनिक तकनीक और अच्छी प्रबंधन व्यवस्था के कारण किसानों को समय पर भुगतान मिलता है।
किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे पर्ची कैलेंडर नियमित रूप से देखें, गन्ने की गुणवत्ता बनाए रखें और भुगतान की स्थिति पर नज़र रखें। CaneUp.xyz पर बिलाई शुगर मिल और अन्य सभी मिलों की अपडेटेड जानकारी उपलब्ध है। हमारा प्रयास है कि हर किसान को सही और समय पर जानकारी मिल सके।
गन्ना किसानों की जय!
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