
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में स्थित एक प्रमुख चीनी मिल है। मुजफ्फरनगर “गन्ने की नगरी” के नाम से जाना जाता है और यहाँ गन्ने का उत्पादन पूरे देश में सबसे अधिक होता है। किनौनी मिल मुजफ्फरनगर के पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। यह मिल बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) समूह की है।
इस विस्तृत लेख में हम किनौनी शुगर मिल की क्षमता, पर्ची कैलेंडर 2026, भुगतान स्थिति, एमएसपी दर, किसानों के लिए उपयोगी सुझाव, संपर्क जानकारी और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देंगे।
आमिर जोया (Aamir Joya): किनौनी शुगर मिल के किसान भाइयों के लिए यह लेख एक संपूर्ण गाइड है। CaneUp.xyz पर हर मिल की विस्तृत और अपडेटेड जानकारी उपलब्ध है।
किनौनी शुगर मिल — एक नज़र में (TL;DR)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मिल का नाम | बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी |
| स्थान | किनौनी, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश |
| स्वामित्व | बजाज हिंदुस्थान लिमिटेड (BHL) |
| पेराई क्षमता | लगभग 12,000 TCD (टन केन डे) |
| जिला | मुजफ्फरनगर |
| गन्ना सत्र | नवंबर 2025 — अप्रैल 2026 (अनुमानित) |
| एमएसपी दर 2025-26 | ₹340/क्विंटल (सामान्य), ₹345/क्विंटल (अगेती प्रजाति) |
| भुगतान का तरीका | ऑनलाइन (DBT) |
| गन्ना विभाग हेल्पलाइन | 1800-180-1551 (टोल फ्री) |
किनौनी शुगर मिल का परिचय
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी मुजफ्फरनगर जिले के किनौनी क्षेत्र में स्थित है। मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक जिला है। यहाँ की उपजाऊ ज़मीन, पर्याप्त सिंचाई सुविधा और अनुकूल जलवायु गन्ने की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है।
मुजफ्फरनगर में बजाज की दो मिलें
मुजफ्फरनगर जिले में बजाज हिंदुस्थान की दो बड़ी मिलें हैं:
- बुढ़ाना शुगर मिल — जिले के पश्चिमी क्षेत्र के लिए
- किनौनी शुगर मिल — जिले के पूर्वी क्षेत्र के लिए
दोनों मिलें मिलकर मुजफ्फरनगर जिले के अधिकांश गन्ना किसानों को कवर करती हैं। इससे किसानों को अपना गन्ना बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
किनौनी क्षेत्र की भौगोलिक विशेषता
किनौनी मुजफ्फरनगर जिले का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ की ज़मीन बहुत उपजाऊ है और नहरों का अच्छा नेटवर्क है। गन्ने के अलावा यहाँ गेहूँ, चावल और सरसों भी उगाई जाती है, लेकिन गन्ना सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल है।
किनौनी शुगर मिल की पेराई क्षमता (TCD)
किनौनी शुगर मिल की पेराई क्षमता लगभग 12,000 TCD (टन केन डे) है। यह एक अच्छी क्षमता है जो हजारों किसानों के गन्ने की पेराई सुनिश्चित करती है।
क्षमता विश्लेषण
| मापदंड | विवरण |
|---|---|
| पेराई क्षमता | 12,000 TCD |
| वार्षिक चीनी उत्पादन | लाखों क्विंटल |
| रिकवरी दर | 10-12.5% (अनुमानित) |
| कार्य अवधि | नवंबर से अप्रैल |
| उप-उत्पाद | बैगास, मोलासेस, प्रेस मड |
| विद्युत उत्पादन | बैगास से बिजली |
किनौनी शुगर मिल का स्थान और आस-पास के क्षेत्र
आस-पास के प्रमुख क्षेत्र
| क्षेत्र | दूरी (अनुमानित) | विशेषता |
|---|---|---|
| मुजफ्फरनगर शहर | ~20 किमी | जिला मुख्यालय |
| बुढ़ाना | ~30 किमी | अन्य बजाज मिल |
| शामली | ~35 किमी | गन्ना उत्पादन क्षेत्र |
| जानसठ | ~15 किमी | प्रमुख बाज़ार |
| पुरकाज़ी | ~20 किमी | कृषि क्षेत्र |
गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026 — किनौनी
पर्ची कैलेंडर कैसे देखें?
चरण 1: उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग की वेबसाइट sugarcane.up.gov.in पर जाएँ।
चरण 2: “पर्ची जारी कैलेंडर” विकल्प चुनें।
चरण 3: जिला — मुजफ्फरनगर और मिल — किनौनी चुनें।
चरण 4: गन्ना पंजीकरण नंबर दर्ज करें।
चरण 5: पर्ची कैलेंडर देखें और अपनी तारीख नोट करें।
** ध्यान दें:** पर्ची की तारीख से चूकने पर दोबारा आवेदन करना पड़ेगा।
गन्ना भुगतान स्थिति 2026 — किनौनी
भुगतान स्थिति कैसे जाँचें?
चरण 1: sugarcane.up.gov.in पर जाएँ।
चरण 2: “भुगतान स्थिति” विकल्प चुनें।
चरण 3: पंजीकरण नंबर दर्ज करें।
चरण 4: भुगतान विवरण देखें।
** प्रो टिप:** भुगतान की स्थिति सप्ताह में एक बार ज़रूर चेक करें।
एमएसपी दर 2025-26 — गन्ना मूल्य
| प्रजाति | एमएसपी दर (प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| सामान्य गन्ना | ₹340 |
| अगेती प्रजाति | ₹345 |
| अनुबंधित गन्ना | अनुबंध के अनुसार |
किनौनी शुगर मिल — किसानों के लिए उपयोगी सुझाव
1. गन्ने की खेती के लिए सुझाव
- उन्नत प्रजाति का चयन करें (Co 0238, Co 0118)
- फरवरी-मार्च में अगेती बुआई करें
- ड्रिप सिंचाई का उपयोग करें
- जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाएँ
2. गन्ना बेचने की तैयारी
- पर्ची कैलेंडर समय पर देखें
- गन्ने की पत्तियाँ साफ करें
- गन्ने को सूखा रखें
- तौल रसीद ज़रूर लें
3. भुगतान सुनिश्चित करने के लिए
- बैंक खाता गन्ना पंजीकरण से लिंक हो
- आधार कार्ड बैंक से लिंक हो
- IFSC कोड सही हो
- मोबाइल नंबर बैंक में अपडेट हो
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी — संपर्क जानकारी
| संपर्क विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मिल का नाम | बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी |
| पता | किनौनी, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश |
| जिला | मुजफ्फरनगर |
| गन्ना विभाग हेल्पलाइन | 1800-180-1551 (टोल फ्री) |
| आधिकारिक वेबसाइट | bajajhindusthan.com |
| गन्ना विभाग वेबसाइट | sugarcane.up.gov.in |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: किनौनी शुगर मिल की पेराई क्षमता कितनी है?
उत्तर: बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी की पेराई क्षमता लगभग 12,000 TCD है।
Q2: किनौनी मिल में गन्ने का भुगतान कितने दिनों में मिलता है?
उत्तर: गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है।
Q3: किनौनी मिल के लिए पर्ची कैलेंडर कहाँ देखें?
उत्तर: sugarcane.up.gov.in पर “पर्ची जारी कैलेंडर” में मुजफ्फरनगर जिला और किनौनी मिल चुनकर देख सकते हैं।
Q4: किनौनी और बुढ़ाना मिल में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों बजाज हिंदुस्थान की मिलें हैं और मुजफ्फरनगर जिले में हैं। बुढ़ाना पश्चिमी क्षेत्र के लिए है, जबकि किनौनी पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए है।
गन्ने की खेती में सामान्य गलतियाँ
कई किसान गन्ने की खेती में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं, जिनसे बचना चाहिए:
- एक ही प्रजाति बार-बार उगाना — हर 3-4 साल में प्रजाति बदलें
- अधिक नाइट्रोजन डालना — संतुलित खाद का उपयोग करें
- सिंचाई का सही समय न जानना — मिट्टी की नमी जाँचकर सिंचाई करें
- गन्ने की तुड़ाई में देरी करना — पकने पर तुरंत काटें
- गन्ने को लंबे समय तक खेत में रखना — जल्दी मिल में पहुँचाएँ
गन्ने की फसल में रोग और कीट
गन्ने की फसल कई रोगों और कीटों से प्रभावित हो सकती है। इनसे बचाव के लिए सही जानकारी ज़रूरी है:
प्रमुख रोग:
- लाल सड़न: गन्ने के तने में लाल रंग की सड़न होती है
- पत्ती धारी रोग: पत्तियों पर धारियाँ दिखाई देती हैं
- गलन रोग: गन्ने का तना गल जाता है
प्रमुख कीट:
- तना छेदक: गन्ने के तने में छेद करता है
- ऊनी कीट: पत्तियों पर सफेद ऊन जैसा पदार्थ
- एफिड: पत्तियों का रस चूसता है
बचाव के उपाय:
- रोग प्रतिरोधी प्रजाति का चयन करें
- संक्रमित पौधों को तुरंत हटाएँ
- कीटनाशकों का सही समय पर छिड़काव करें
- फसल चक्र अपनाएँ
- कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें
गन्ने की कटाई के बाद देखभाल
गन्ने की कटाई के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण काम करने होते हैं:
- कटाई के बाद गन्ने को छाया में रखें
- 24-48 घंटे के भीतर मिल में पहुँचाएँ
- गन्ने को पानी से बचाएँ
- गन्ने की पत्तियाँ साफ करें
- गन्ने को सीधा रखें (टेढ़ा रखने से तौल में कमी आती है)
भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली:
DBT प्रणाली के तहत गन्ने का भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। इस प्रणाली के कई फायदे हैं:
- बिचौलियों की भूमिका समाप्त
- भुगतान में पारदर्शिता
- समय पर भुगतान
- किसान को पूरा पैसा सीधे मिलता है
भुगतान का गणना:
भुगतान की गणना निम्नलिखित आधार पर होती है:
| कारक | विवरण |
|---|---|
| गन्ने का वज़न | क्विंटल में |
| SAC% | शर्करा प्रतिशत |
| एमएसपी दर | प्रति क्विंटल मूल्य |
| कुल राशि | वज़न × SAC × दर |
भुगतान में देरी के कारण:
- बैंक खाते में तकनीकी समस्या
- आधार-बैंक लिंकिंग की कमी
- IFSC कोड गलत होना
- मोबाइल नंबर बैंक में अपडेट न होना
- मिल की आर्थिक स्थिति
गन्ना परिवहन की विस्तृत जानकारी
गन्ना परिवहन एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। सही तरीके से गन्ना ले जाने पर गन्ने की गुणवत्ता बनी रहती है और बेहतर मूल्य मिलता है।
परिवहन के लिए सुझाव:
- ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग करें
- गन्ने को रस्सी से मज़बूती से बाँधें
- ओवरलोडिंग से बचें — जुर्माना लग सकता है
- सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें
- पर्ची की तारीख के अनुसार योजना बनाएँ
- गन्ने को ढककर ले जाएँ (धूप और पानी से बचाव)
- रास्ते में गन्ना न गिरने दें
परिवहन में सामान्य गलतियाँ:
- ओवरलोडिंग करना
- गन्ने को बिना बाँधे ले जाना
- गीले गन्ने का परिवहन करना
- गलत तारीख पर गन्ना ले जाना
- बिना पर्ची के गन्ना ले जाना
गन्ने की सिंचाई की विस्तृत जानकारी
गन्ने की फसल के लिए सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है। गन्ने को पूरे सत्र में 8-10 सिंचाई की ज़रूरत होती है।
सिंचाई का समय:
| मौसम | सिंचाई का अंतराल |
|---|---|
| गर्मी | 10-12 दिन |
| सर्दी | 15-20 दिन |
| बरसात | ज़रूरत के अनुसार |
सिंचाई के तरीके:
- पारंपरिक सिंचाई: नालियों से पानी देना — अधिक पानी लगता है
- ड्रिप सिंचाई: बूँद-बूँद करके पानी देना — 30-40% पानी की बचत
- स्प्रिंकलर सिंचाई: फव्वारे से पानी देना — 20-30% पानी की बचत
जल निकासी:
बरसात के मौसम में जल निकासी का उचित प्रबंधन बहुत ज़रूरी है। खेत में पानी जमा होने से गन्ने की जड़ें सड़ सकती हैं और फसल बर्बाद हो सकती है।
जल निकासी के उपाय:
- खेत में नालियाँ बनाएँ
- खेत के चारों ओर मेड़ बनाएँ
- अतिरिक्त पानी बाहर निकालें
- नहरों की सफाई करें
गन्ने की खेती में सामान्य गलतियाँ
कई किसान गन्ने की खेती में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं, जिनसे बचना चाहिए:
- एक ही प्रजाति बार-बार उगाना — हर 3-4 साल में प्रजाति बदलें
- अधिक नाइट्रोजन डालना — संतुलित खाद का उपयोग करें
- सिंचाई का सही समय न जानना — मिट्टी की नमी जाँचकर सिंचाई करें
- गन्ने की तुड़ाई में देरी करना — पकने पर तुरंत काटें
- गन्ने को लंबे समय तक खेत में रखना — जल्दी मिल में पहुँचाएँ
गन्ने की फसल में रोग और कीट
गन्ने की फसल कई रोगों और कीटों से प्रभावित हो सकती है। इनसे बचाव के लिए सही जानकारी ज़रूरी है:
प्रमुख रोग:
- लाल सड़न: गन्ने के तने में लाल रंग की सड़न होती है
- पत्ती धारी रोग: पत्तियों पर धारियाँ दिखाई देती हैं
- गलन रोग: गन्ने का तना गल जाता है
प्रमुख कीट:
- तना छेदक: गन्ने के तने में छेद करता है
- ऊनी कीट: पत्तियों पर सफेद ऊन जैसा पदार्थ
- एफिड: पत्तियों का रस चूसता है
बचाव के उपाय:
- रोग प्रतिरोधी प्रजाति का चयन करें
- संक्रमित पौधों को तुरंत हटाएँ
- कीटनाशकों का सही समय पर छिड़काव करें
- फसल चक्र अपनाएँ
- कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें
गन्ने की कटाई के बाद देखभाल
गन्ने की कटाई के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण काम करने होते हैं:
- कटाई के बाद गन्ने को छाया में रखें
- 24-48 घंटे के भीतर मिल में पहुँचाएँ
- गन्ने को पानी से बचाएँ
- गन्ने की पत्तियाँ साफ करें
- गन्ने को सीधा रखें (टेढ़ा रखने से तौल में कमी आती है)
भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली:
DBT प्रणाली के तहत गन्ने का भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है। इस प्रणाली के कई फायदे हैं:
- बिचौलियों की भूमिका समाप्त
- भुगतान में पारदर्शिता
- समय पर भुगतान
- किसान को पूरा पैसा सीधे मिलता है
भुगतान का गणना:
भुगतान की गणना निम्नलिखित आधार पर होती है:
| कारक | विवरण |
|---|---|
| गन्ने का वज़न | क्विंटल में |
| SAC% | शर्करा प्रतिशत |
| एमएसपी दर | प्रति क्विंटल मूल्य |
| कुल राशि | वज़न × SAC × दर |
भुगतान में देरी के कारण:
- बैंक खाते में तकनीकी समस्या
- आधार-बैंक लिंकिंग की कमी
- IFSC कोड गलत होना
- मोबाइल नंबर बैंक में अपडेट न होना
- मिल की आर्थिक स्थिति
गन्ना परिवहन की विस्तृत जानकारी
गन्ना परिवहन एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। सही तरीके से गन्ना ले जाने पर गन्ने की गुणवत्ता बनी रहती है और बेहतर मूल्य मिलता है।
परिवहन के लिए सुझाव:
- ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग करें
- गन्ने को रस्सी से मज़बूती से बाँधें
- ओवरलोडिंग से बचें — जुर्माना लग सकता है
- सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें
- पर्ची की तारीख के अनुसार योजना बनाएँ
- गन्ने को ढककर ले जाएँ (धूप और पानी से बचाव)
- रास्ते में गन्ना न गिरने दें
परिवहन में सामान्य गलतियाँ:
- ओवरलोडिंग करना
- गन्ने को बिना बाँधे ले जाना
- गीले गन्ने का परिवहन करना
- गलत तारीख पर गन्ना ले जाना
- बिना पर्ची के गन्ना ले जाना
गन्ने की सिंचाई की विस्तृत जानकारी
गन्ने की फसल के लिए सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण है। गन्ने को पूरे सत्र में 8-10 सिंचाई की ज़रूरत होती है।
सिंचाई का समय:
| मौसम | सिंचाई का अंतराल |
|---|---|
| गर्मी | 10-12 दिन |
| सर्दी | 15-20 दिन |
| बरसात | ज़रूरत के अनुसार |
सिंचाई के तरीके:
- पारंपरिक सिंचाई: नालियों से पानी देना — अधिक पानी लगता है
- ड्रिप सिंचाई: बूँद-बूँद करके पानी देना — 30-40% पानी की बचत
- स्प्रिंकलर सिंचाई: फव्वारे से पानी देना — 20-30% पानी की बचत
जल निकासी:
बरसात के मौसम में जल निकासी का उचित प्रबंधन बहुत ज़रूरी है। खेत में पानी जमा होने से गन्ने की जड़ें सड़ सकती हैं और फसल बर्बाद हो सकती है।
जल निकासी के उपाय:
- खेत में नालियाँ बनाएँ
- खेत के चारों ओर मेड़ बनाएँ
- अतिरिक्त पानी बाहर निकालें
- नहरों की सफाई करें
गन्ने की खेती से अतिरिक्त आय
गन्ने की खेती से केवल गन्ना बेचकर ही नहीं, बल्कि अन्य तरीकों से भी आय की जा सकती है:
1. गन्ने के बीच अन्य फसलें:
- गन्ने की पंक्तियों के बीच मटर, आलू या सरसों उगाई जा सकती है
- इससे अतिरिक्त आय होती है
- ज़मीन का पूरा उपयोग होता है
2. गन्ने की पत्तियाँ:
- गन्ने की पत्तियों से कागज़ बनाया जाता है
- पत्तियों का उपयोग चारे के रूप में किया जा सकता है
- कुछ किसान पत्तियाँ बेचकर भी आय कमाते हैं
3. गन्ने का रस:
- गन्ने का ताज़ा रस बेचकर अतिरिक्त आय
- गुड़ बनाकर बेचना
- छोटे पैमाने पर चीनी बनाना
4. गन्ने का बैगास:
- बैगास (गन्ने का रेशा) बेचकर आय
- बैगास से कागज़ और बोर्ड बनाए जाते हैं
- बैगास से बिजली उत्पादन
किसान कल्याण योजनाएँ
भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना किसानों के लिए कई योजनाएँ चला रही हैं:
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि:
- हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता
- सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है
- तीन किस्तों में भुगतान
2. गन्ना विकास योजना:
- नई प्रजातियों के बीज पर सब्सिडी
- ड्रिप सिंचाई पर सब्सिडी
- जैविक खेती पर सब्सिडी
3. फसल बीमा योजना:
- प्राकृतिक आपदा से फसल की सुरक्षा
- कम प्रीमियम पर बीमा
- फसल नुकसान पर मुआवज़ा
4. कृषि ऋण योजना:
- कम ब्याज पर कृषि ऋण
- गन्ने की खेती के लिए आसान ऋण
- समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज में छूट
गन्ना किसानों के अधिकार
हर गन्ना किसान को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए:
- एमएसपी से कम पर गन्ना बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता
- 14 दिनों में भुगतान पाने का अधिकार
- देरी पर ब्याज पाने का अधिकार
- तौल रसीद पाने का अधिकार
- शिकायत दर्ज करने का अधिकार
- गन्ना समिति में भाग लेने का अधिकार
गन्ना किसानों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क
गन्ना किसानों को कुछ महत्वपूर्ण संपर्क नंबर अपने पास रखने चाहिए:
| संपर्क | नंबर |
|---|---|
| गन्ना विभाग हेल्पलाइन | 1800-180-1551 |
| किसान कॉल सेंटर | 1800-180-1551 |
| प्रधानमंत्री किसान हेल्पलाइन | 155261 |
गन्ना खेती में तकनीक का उपयोग
आज के डिजिटल युग में तकनीक का उपयोग गन्ना खेती में भी किया जा रहा है:
- मोबाइल ऐप से पर्ची कैलेंडर देखना
- ऑनलाइन भुगतान स्थिति जाँचना
- मौसम की जानकारी प्राप्त करना
- कृषि विशेषज्ञों से ऑनलाइन सलाह लेना
- गन्ना पंजीकरण ऑनलाइन करना
किनौनी क्षेत्र में गन्ने की खेती की चुनौतियाँ
किनौनी क्षेत्र में गन्ने की खेती कुछ चुनौतियों का सामना करती है:
- जल स्तर नीचे जाना — सिंचाई की लागत बढ़ रही है
- मज़दूरों की कमी — तुड़ाई में परेशानी
- गन्ने के दाम में उतार-चढ़ाव
- मौसम की अनिश्चितता
- कीट और रोग का खतरा
इन चुनौतियों से निपटने के उपाय:
- ड्रिप सिंचाई अपनाएँ — पानी की बचत होगी
- मशीनी तुड़ाई का उपयोग करें — मज़दूरों पर निर्भरता कम होगी
- फसल बीमा करवाएँ — मौसम के जोखिम से सुरक्षा
- उन्नत प्रजाति उगाएँ — अधिक उपज और बेहतर रिकवरी
- जैविक खेती अपनाएँ — लागत कम होगी
गन्ना किसानों के लिए सरकारी पोर्टल
गन्ना किसानों के लिए कई सरकारी पोर्टल उपलब्ध हैं:
- sugarcane.up.gov.in — उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग
- upgov.up.nic.in — उत्तर प्रदेश सरकार
- pmkisan.gov.in — प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
- agricoop.nic.in — कृषि सहकारिता विभाग
निष्कर्ष
बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल किनौनी मुजफ्फरनगर जिले के गन्ना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई है। लगभग 12,000 TCD की पेराई क्षमता वाली यह मिल हजारों किसान परिवारों की आजीविका का आधार है। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे पर्ची कैलेंडर नियमित रूप से देखें, गन्ने की गुणवत्ता बनाए रखें और भुगतान की स्थिति पर नज़र रखें। CaneUp.xyz पर किनौनी और अन्य सभी चीनी मिलों की ताज़ा जानकारी उपलब्ध है।
गन्ना किसानों की जय!
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अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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