
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए खून-पसीने से सींची गई गन्ने की फसल को मिल तक पहुंचाना जितना बड़ा काम है, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि उनकी मेहनत का एक-एक रुपया समय पर उनके बैंक खाते में सुरक्षित पहुंच रहा है या नहीं।
ऐतिहासिक रूप से, उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य भुगतान में देरी एक गंभीर समस्या रही है। किसानों को महीनों तक मिलों के चक्कर काटने पड़ते थे और बैंक पासबुक में एंट्री कराने के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ता था। लेकिन Caneup.in पोर्टल और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT - PFMS) प्रणाली के लागू होने के बाद, अब राज्य के प्रत्येक किसान के पास अपने मोबाइल पर यह देखने की पूरी शक्ति है कि:
- उनकी किस पर्ची का कितना वजन तौला गया?
- राज्य परामर्शित मूल्य (SAP - ₹370/₹360) के अनुसार कुल कितना मूल्य बना?
- उसमें से समिति ऋण, खाद या अंशदान की कितनी कटौती हुई?
- चीनी मिल ने किस तारीख को बैंक एडवाइस जारी की?
- और किस UTR (Unique Transaction Reference) नंबर से पैसा किस बैंक खाते में जमा हुआ?
इस 2100+ शब्दों की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका में हम गन्ना भुगतान के कानूनी नियमों, CaneUp पोर्टल पर भुगतान जांचने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया, सोसायटियों की कटौतियों के गणित और 14 दिन से अधिक देरी होने पर 15% ब्याज दावा करने की विधिक प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
1. गन्ने का कानूनी अधिकार: 14 दिन में भुगतान का वैधानिक नियम
भारत सरकार के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 1966 (Sugarcane Control Order 1966) और उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 में किसानों के भुगतान के संबंध में बहुत कड़े कानूनी प्रावधान हैं:
कानून क्या कहता है?
- 14 दिनों की अनिवार्य समयसीमा: जिस दिन किसान का गन्ना चीनी मिल गेट या बाह्य क्रय केंद्र (Outstation Purchase Center) पर तौला जाता है, उस तारीख से ठीक 14 दिनों के भीतर किसान के बैंक खाते में गन्ने का शत-प्रतिशत मूल्य जमा होना अनिवार्य है।
- 15% वार्षिक ब्याज का नियम: यदि कोई चीनी मिल 14 दिनों के भीतर भुगतान करने में विफल रहती है, तो 15वें दिन से मिल प्रबंधन को बकाए धन पर 15% प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज देना कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है।
- एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) व्यवस्था: चीनी मिलों द्वारा चीनी और सह-उत्पादों (शीरा, एथेनॉल, बिजली) की बिक्री से प्राप्त होने वाले कुल राजस्व का कम से कम 85% धन अनिवार्य रूप से एक अलग एस्क्रो खाते में जमा होता है, जिसका उपयोग केवल और केवल किसानों के गन्ना भुगतान के लिए किया जा सकता है।
2. Step-by-Step: CaneUp पर गन्ना भुगतान स्टेटस कैसे चेक करें?
अपने मोबाइल फोन पर 2 मिनट में अपना भुगतान ब्योरा देखने के लिए इन चरणों का पालन करें:
चरण 1: पोर्टल पर जाएं
- अपने स्मार्टफोन में क्रोम ब्राउज़र खोलें और जाएं:
https://caneup.in। - मुख्य स्क्रीन पर “आंकड़े देखें (View Data)” पर क्लिक करें।
चरण 2: सुरक्षा कैप्चा भरें
- चित्र में दिखाई देने वाला कैप्चा कोड भरें और “View” दबाएं।
चरण 3: किसान चयन करें
- अपना District (जिला) चुनें।
- अपनी Factory (चीनी मिल) चुनें।
- अपना Village (गाँव) और Grower (किसान का नाम) चुनें। (या सीधे ‘Search by Code’ से ग्राम व किसान कोड भरें)।
चरण 4: “Ganna Payment” टैब खोलें
- प्रोफाइल स्क्रीन के नीचे 6 प्रमुख टैब दिखाई देते हैं:
- Survey Data
- Pre-Calendar
- Ganna Calendar
- Supply Ticket
- Tol Detail
- Ganna Payment (गन्ना भुगतान)
- 6वें टैब “Ganna Payment” पर क्लिक करें।
3. भुगतान तालिका के प्रत्येक कॉलम का विस्तृत विश्लेषण
जैसे ही ‘Ganna Payment’ टैब खुलेगा, आपके सामने इस सीजन की सभी तौलों की एक विस्तृत तालिका प्रदर्शित होगी। आइए इसके प्रत्येक कॉलम को समझें:
| कॉलम का शीर्षक | तकनीकी अर्थ | किसान के लिए महत्व |
|---|---|---|
| Purchasing Date | तौल की वास्तविक तारीख | 14 दिन की गिनती इसी तारीख से शुरू होती है |
| Parchi No / Ticket | 9-अंकीय विशिष्ट पर्ची संख्या | शिकायत दर्ज कराते समय इसी नंबर का उल्लेख करना होता है |
| Center Name | क्रय केंद्र का नाम | मिल गेट या सेंटर जहाँ तौल कराई गई |
| Net Weight (Qtl) | शुद्ध गन्ना वजन (क्विंटल में) | कुल वजन में से वाहन का वजन घटाकर निकला वजन |
| SAP Rate (₹) | गन्ना मूल्य दर प्रति क्विंटल | अगेती प्रजाति: ₹370, सामान्य प्रजाति: ₹360 |
| Gross Amount (₹) | गन्ने का कुल सकल मूल्य | $\text{Net Weight} \times \text{Rate}$ |
| Deduction (₹) | कुल कटौती राशि | खाद, बीज या समिति ऋण की काटी गई रकम |
| Net Payable (₹) | किसान को देय शुद्ध राशि | सकल मूल्य माइनस कुल कटौती |
| Bank Advice Date | मिल द्वारा बैंक को आदेश भेजने की तिथि | जिस दिन मिल ने बैंक को पैसा ट्रांसफर करने को कहा |
| Bank Account No | लाभार्थी का बैंक खाता | आपके खाते के अंतिम 4 अंक प्रदर्शित होते हैं |
| UTR / Txn Number | बैंक ट्रांजैक्शन संदर्भ संख्या | इस नंबर को बैंक में दिखाकर पुष्टि की जा सकती है |
| Payment Status | वर्तमान भुगतान स्थिति | Paid (भुगतान सफल) या Under Process |
4. गन्ना भुगतान में कटौतियां (Deductions) क्या होती हैं और क्यों कटती हैं?
कई बार किसान भाई यह देखकर चिंतित हो जाते हैं कि उनका कुल गन्ना ₹1,20,000 का था, लेकिन बैंक खाते में ₹95,000 ही क्रेडिट हुए। यह अंतर कटौतियों के कारण होता है।
गन्ना विकास विभाग की पारदर्शी व्यवस्था में किसान समिति से जो भी इनपुट उधार लेता है, उसकी वसूली सीधे गन्ना मूल्य से की जाती है:
- उर्वरक ऋण (Fertilizer Recovery): बुवाई या टॉप ड्रेसिंग के समय आपने समिति से जो यूरिया, डीएपी, एनपीके या पोटाश खाद उठाई थी।
- बीज अनुदान ऋण (Seed Recovery): यदि आपने चीनी मिल या परिषद के फार्म से Co-0118, Co-15023 या Co-17231 का प्रमाणित बीज लिया था।
- कीटनाशक दवाएं (Pesticide Dues): कंसोर्टियम, कोराजन या ट्राइकोडर्मा जैविक कल्चर की लागत।
- शेयर अंशदान (Society Share Capital): प्रत्येक नए किसान से समिति की सदस्यता का नाममात्र का अंशदान।
पारदर्शिता टिप: CaneUp पोर्टल में ‘Deduction’ कॉलम में नीले रंग के लिंक पर क्लिक करने पर एक पॉप-अप विंडो खुलती है, जिसमें स्पष्ट लिखा होता है कि यूरिया के कितने कटे, डीएपी के कितने कटे और कीटनाशक के कितने कटे।
5. PFMS और NPCI आधार लिंकिंग का महत्व (Why Payments Get Stuck?)
सत्र 2026-27 में उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी गन्ना भुगतानों को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (APBS) से जोड़ दिया है।
भुगतान अटकने के 3 सबसे बड़े कारण:
- NPCI मैपर से खाता डी-लिंक होना: यदि आपके बैंक खाते में आधार लिंक तो है, लेकिन वह बैंक के नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) सर्वर पर सक्रिय (Active) नहीं है, तो मिल से भेजा गया पैसा बाउंस हो जाता है।
- बैंकों का विलय और IFSC कोड बदलना: कई राष्ट्रीयकृत बैंकों के विलय के बाद पुराने IFSC कोड अमान्य हो गए हैं। यदि सट्टे में पुराना IFSC दर्ज है, तो ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है।
- खाते में नाम और आधार में नाम का मिसमैच: यदि खतौनी में नाम ‘रामकुमार’ है और बैंक खाते में ‘राम कुमार सिंह’ है, तो पीएफएमएस सर्वर भुगतान को रोक देता है।
6. यदि 14 दिन में भुगतान न आए तो शिकायत कैसे करें? (Action Plan)
यदि आपकी तौल को 14 दिन से अधिक समय बीत चुका है और पोर्टल पर अभी भी ‘Under Process’ दिख रहा है, तो इन 4 माध्यमों से तुरंत कार्रवाई करें:
माध्यम 1: CaneUp टोल-फ्री हेल्पलाइन
- फोन लगाएं:
1800-121-3203(प्रातः 9 बजे से सायं 6 बजे तक)। - कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव को अपना जिला, मिल, किसान कोड और लंबित पर्ची नंबर बताएं।
- अपनी शिकायत का ‘टिकट नंबर’ नोट कर लें।
माध्यम 2: जनसुनवाई पोर्टल (IGRS Portal)
- उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल (jansunwai.up.nic.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- विभाग में “गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग” चुनें।
- जिला गन्ना अधिकारी (DCO) को 7 कार्यदिवसों के भीतर इस पर लिखित रिपोर्ट देनी होती है।
माध्यम 3: जिला गन्ना अधिकारी (DCO) कार्यालय में सुनवाई
- प्रत्येक मंगलवार को जिला मुख्यालय पर DCO कार्यालय में ‘किसान समाधान दिवस’ होता है।
- अपनी तौल रसीद की फोटोकॉपी लेकर सीधे जिला गन्ना अधिकारी से मिलें।
माध्यम 4: 15% ब्याज की कानूनी वसूली
- यदि किसी चीनी मिल का बकाया 60 दिन से अधिक पुराना हो जाता है, तो गन्ना आयुक्त के आदेशानुसार मिल की चीनी, शीरा या संपत्ति को कुर्क (RC जारी) करके किसानों का भुगतान 15% ब्याज सहित कराया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Ganna Bhugtan)
प्र.1: तौल होने के कितने दिन बाद पोर्टल पर भुगतान स्टेटस अपडेट होता है?
उत्तर: सामान्यतः तौल के 48 से 72 घंटे के भीतर तौल का वजन और सकल राशि पोर्टल पर दिखने लगती है। जब मिल बैंक को एडवाइस भेजती है (तौल के 7 से 10 दिन बाद), तब यूटीआर नंबर और पेड स्टेटस अपडेट होता है।
प्र.2: क्या चीनी मिल गन्ने का भुगतान किस्तों में कर सकती है?
उत्तर: नहीं। उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद अधिनियम के तहत मिल को प्रति पर्ची का शत-प्रतिशत भुगतान एकमुश्त करना होता है। किस्तों में भुगतान करना कानूनन अवैध है।
प्र.3: यदि मेरा बैंक खाता बंद हो गया हो, तो गन्ने का पैसा कहाँ जाएगा?
उत्तर: यदि खाता बंद है तो बैंक ट्रांजैक्शन फेल हो जाएगा और पैसा वापस चीनी मिल के एस्क्रो खाते में लौट जाएगा। ऐसे में किसान को अपनी नई चालू बैंक पासबुक की प्रति लेकर गन्ना समिति में जाना होगा और सट्टे में नया बैंक खाता अपडेट कराना होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
गन्ना भुगतान किसानों की जीवनरेखा है। डिजिटल क्रांति ने भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। प्रत्येक किसान का कर्तव्य है कि वह नियमित रूप से caneup.in पोर्टल पर अपने भुगतान स्टेटस की जांच करे और किसी भी विसंगति की स्थिति में तुरंत आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करे।
7. केस स्टडी: यदि मिल डिफ़ॉल्ट करे तो रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) की प्रक्रिया
कई बार निजी क्षेत्र की कुछ चीनी मिलें (जैसे शामली या सिंभावली समूह की कुछ इकाइयां) किसानों का समय पर भुगतान करने में हीलाहवाली करती हैं। ऐसे मामलों में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उठाई जाने वाली कानूनी कार्रवाई का पूरा रोडमैप इस प्रकार है:
चरण 1: धारा 17(3) के तहत कारण बताओ नोटिस
पेराई सत्र समाप्त होने या 14 दिन की वैधानिक अवधि बीतने के 30 दिन बाद, संबंधित जिले के जिला गन्ना अधिकारी (DCO) मिल प्रबंधन को नोटिस जारी करते हैं कि वे किसानों के बकाए का भुगतान 15% साधारण ब्याज सहित 7 दिन के अंदर करें।
चरण 2: जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी होना
यदि मिल नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं देती, तो गन्ना आयुक्त, लखनऊ के अनुमोदन से जिलाधिकारी द्वारा मिल प्रबंधन के विरुद्ध भू-राजस्व के बकाए की भांति रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी किया जाता है।
चरण 3: चीनी व शीरे के गोदामों की सीलिंग एवं नीलामी
आरसी जारी होते ही तहसील प्रशासन मिल परिसर में पहुंचकर निम्नलिखित संपत्तियों को जब्त करता है:
- मिल के गोदामों में रखी व्हाइट क्रिस्टल चीनी के बोरों की सीलिंग।
- डिस्टिलरी या भंडारण टैंकों में रखे शीरे (Molasses) और बगास का रासायनिक मूल्यांकन।
- चीनी व सह-उत्पादों की सार्वजनिक ई-नीलामी करके प्राप्त समस्त धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।
8. गन्ना मूल्य भुगतान संबंधी 10 महत्वपूर्ण सावधानियां
प्रत्येक जागरूक किसान को अपने बैंक खाते और भुगतान रिकॉर्ड के संबंध में इन 10 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- एकल खाता (Single Account) का उपयोग करें: सट्टे में हमेशा किसान के व्यक्तिगत नाम का एकल बैंक खाता ही दर्ज होना चाहिए। संयुक्त खाते (Joint Account) में कई बार पीएफएमएस सत्यापन फेल हो जाता है।
- आधार सीडिंग (Aadhaar Seeding) अनिवार्य रखें: केवल बैंक में आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करना काफी नहीं है; बैंक कर्मचारी से कहें कि वह आपके खाते को NPCI मैपर (NPCI Mapping) पर सक्रिय रूप से लिंक करे।
- केवाईसी (KYC) अपडेट रखें: यदि आपके खाते में पिछले 2 वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और वह निष्क्रिय (Dormant) हो गया है, तो तुरंत बैंक शाखा जाकर पुनः केवाईसी कराएं।
- सहकारी बैंक बनाम राष्ट्रीयकृत बैंक: यद्यपि जिला सहकारी बैंक (DCCB) गन्ना समितियों से सीधे जुड़े होते हैं, लेकिन किसी राष्ट्रीयकृत बैंक (उदा. SBI, PNB, Canara Bank) में खाता होने पर भुगतान का एसएमएस और इंटरनेट बैंकिंग ट्रैकिंग अधिक सुगम रहती है।
- कटौती पर्ची (Deduction Receipt) अवश्य लें: यदि समिति से खाद या कीटनाशक उधार लिया है, तो उसकी रसीद संभाल कर रखें ताकि पोर्टल पर दर्ज कटौती से उसका मिलान किया जा सके।
- गलत कटौती पर तुरंत आपत्ति: यदि आपके खाते से किसी ऐसी खाद की कटौती कट गई है जो आपने कभी नहीं ली, तो 15 दिन के भीतर समिति सचिव को लिखित आपत्ति दें।
- बैंक विलय के बाद नया IFSC दर्ज कराएं: यदि आपका पुराना खाता सिंडिकेट बैंक, ओरिएंटल बैंक, इलाहाबाद बैंक या आंध्रा बैंक में था, तो अपने नए बैंक (Canara, PNB, Indian Bank, Union Bank) का नया IFSC सट्टे में अपडेट कराएं।
- मोबाइल नंबर चालू रखें: जिस नंबर पर बैंक के एसएमएस आते हैं, उसे कभी बंद न होने दें।
- CaneUp पोर्टल पर साप्ताहिक जांच: पेराई सत्र के दौरान सप्ताह में कम से कम एक बार ‘Ganna Payment’ टैब खोलकर UTR नंबर और पेड स्टेटस का मिलान करें।
- हेल्पलाइन नंबर सेव रखें: राज्य स्तरीय गन्ना हेल्पलाइन
1800-121-3203और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन1076को अपने फोन में हमेशा सुरक्षित रखें।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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