
उत्तर प्रदेश में जब गन्ना पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियां शुरू होती हैं, तो चीनी मिलों की पेराई क्षमता (TCD - Tonnes Crushed Per Day) और गाँवों के लिए क्रय केंद्र (Purchase Center / कांटा) आवंटन का मुद्दा किसानों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन जाता है।
प्रत्येक किसान की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उसका गन्ना या तो सीधे मिल गेट (Mill Gate) पर बंधे, या फिर उसके गाँव के बिल्कुल निकटतम बाहरी क्रय केंद्र (Outstation Center) पर आवंटित हो, ताकि उसे अपना गन्ना 15-20 किलोमीटर दूर न ले जाना पड़े।
यदि किसी किसान का कांटा उसके गाँव से 12 किलोमीटर दूर किसी दूसरे गाँव में लगा दिया जाए, तो:
- उसे प्रति क्विंटल ₹8 से ₹12 तक का अतिरिक्त डीजल/भाड़ा खर्च उठाना पड़ता है।
- गन्ना ढुलाई में पूरा दिन और रात बर्बाद होती है।
- रास्ते में दुर्घटना और ट्रॉली पलटने का जोखिम बना रहता है।
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 के तहत प्रत्येक वर्ष सितंबर माह में गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रत्येक चीनी मिल का आरक्षित क्षेत्र (Reserved Area) और क्रय केंद्र आवंटन आदेश जारी किया जाता है।
इस 2200+ शब्दों की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका में हम आपको बताएंगे कि:
- मिल गेट (Mill Gate) बनाम बाह्य क्रय केंद्र (Outstation Center) में क्या अंतर है?
- ढुलाई भाड़ा कटौती (Transport Rebate) के सरकारी नियम क्या हैं?
- CaneUp पोर्टल पर अपने आवंटित क्रय केंद्र की जांच कैसे करें?
- उत्तर प्रदेश की प्रमुख चीनी मिलों की दैनिक पेराई क्षमता (TCD) कितनी है?
- यदि आवंटित क्रय केंद्र दूर है, तो कांटा परिवर्तन (Center Transfer) का आवेदन कैसे करें?
- क्रय केंद्रों पर बुनियादी किसान सुविधाएं (शौचालय, अलाव, पानी, शेड) के वैधानिक नियम।
- क्रय केंद्र आवंटन से जुड़े 10 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न और कानूनी उत्तर।
1. मिल गेट बनाम बाहरी क्रय केंद्र: बुनियादी अंतर
गन्ना आपूर्ति व्यवस्था में दो प्रकार के तौल स्थल होते हैं:
| तुलना का बिंदु | मिल गेट (Mill Gate) | बाह्य क्रय केंद्र (Outstation Center) |
|---|---|---|
| तौल का स्थान | सीधे चीनी मिल परिसर के भीतर लगे बड़े धर्मकांटों पर | गाँव या चौराहे पर मिल द्वारा स्थापित अस्थायी तौल कांटा |
| ढुलाई कटौती (Rebate) | शून्य (Zero Rebate) — किसान को पूरा SAP मिलता है | नियम अनुसार नाममात्र की सरकारी ढुलाई कटौती कटती है |
| तौल की गति | हाइड्रोलिक अनलोडर और भारी कांटों से 5 मिनट में खाली | क्रेन या साधारण कांटा होने से कभी-कभी 2-4 घंटे की कतार |
| पर्ची की वैधता | सामान्यतः 120 घंटे (ट्रैक्टर ट्रॉली हेतु) | 72 घंटे (बग्गी) व 120 घंटे (ट्रैक्टर) |
| सीधा नियंत्रण | मिल प्रबंधन और आबकारी अधिकारियों की सीधी निगरानी | क्षेत्रीय तौल लिपिक और सुपरवाइजर के नियंत्रण में |
2. ढुलाई भाड़ा कटौती (Transport Rebate) का वैधानिक नियम
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित राज्य परामर्शित मूल्य (SAP - ₹370 अगेती व ₹360 सामान्य) मिल गेट पर आपूर्ति करने वाले किसानों के लिए होता है।
दूरी के अनुसार वैधानिक कटौती की दरें:
यदि कोई किसान मिल गेट के बजाय किसी बाहरी क्रय केंद्र पर गन्ना देता है, जहाँ से मिल प्रबंधन अपने ट्रकों या ट्रेलरों द्वारा गन्ना ढोकर फैक्ट्री तक ले जाता है, तो शासन के नियमानुसार निम्नलिखित अधिकतम कटौती की अनुमति होती है:
- रेलवे साइडिंग या आउटस्टेशन सेंटर (सामान्य दूरी): अधिकतम ₹8.35 प्रति क्विंटल तक की ढुलाई कटौती की जा सकती है।
- विशेष परिस्थितियां: यदि क्रय केंद्र मिल से 40 किमी से अधिक दूरी पर है, तब भी शासन द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक कटौती करना कानूनन अवैध है।
- मिल गेट पर शून्य कटौती: यदि किसान का गाँव मिल गेट क्षेत्र (सामान्यतः मिल से 5 से 8 किमी परिधि) में आता है, तो मिल प्रबंधन 1 पैसे की भी कटौती नहीं कर सकता।
3. Caneup.in पर अपने आवंटित क्रय केंद्र की जांच कैसे करें?
पेराई सत्र शुरू होने से पहले यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि आपकी पर्चियां किस कांटे पर कटेंगी:
caneup.inपोर्टल पर जाएं और कैप्चा भरकर प्रोफाइल खोलें।- किसान सूचना अनुभाग (General Info Box) में देखें:
- Center Name: यहाँ आपके आवंटित केंद्र का नाम लिखा होगा (जैसे-
KHATAULI GATE, याPALDI CENTER - A)। - Center Code: केंद्र का 3 या 4-अंकीय कोड।
- Distance from Mill: मिल से केंद्र की दूरी (किमी में)।
- Center Name: यहाँ आपके आवंटित केंद्र का नाम लिखा होगा (जैसे-
- यदि यहाँ किसी ऐसे केंद्र का नाम लिखा है जो आपके गाँव से बहुत दूर है या जहाँ जाने का रास्ता कच्चा/जलमग्न है, तो आपको तुरंत कांटा परिवर्तन के लिए आवेदन करना चाहिए।
4. उत्तर प्रदेश की प्रमुख चीनी मिलों की पेराई क्षमता (Crushing Capacity - TCD)
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों की दैनिक पेराई क्षमता जितनी अधिक होती है, उस क्षेत्र के किसानों की पर्चियां उतनी ही तेजी से और समय पर कटती हैं:
| चीनी मिल का नाम | जिला (District) | दैनिक पेराई क्षमता (TCD) | कुल क्रय केंद्र (Centers) |
|---|---|---|---|
| खतौली शुगर मिल (Triveni) | मुजफ्फरनगर | 16,000 TCD (एशिया की विशालतम मिलों में) | 85+ आउटस्टेशन केंद्र |
| मवाना शुगर मिल | मेरठ | 13,500 TCD | 70+ केंद्र |
| धामपुर शुगर मिल | बिजनौर | 15,000 TCD | 90+ केंद्र |
| दौराला शुगर वर्क्स (DCM) | मेरठ | 12,500 TCD | 60+ केंद्र |
| पलिया कलां (Bajaj Hindusthan) | लखीमपुर खीरी | 14,000 TCD | 110+ केंद्र (तराई का विशाल क्षेत्र) |
| गोला गोकर्णनाथ (Bajaj) | लखीमपुर खीरी | 13,000 TCD | 95+ केंद्र |
| स्योहारा शुगर मिल (Avadh) | बिजनौर | 11,000 TCD | 65+ केंद्र |
| शामली शुगर मिल (Upper Doab) | शामली | 7,500 TCD | 45+ केंद्र |
5. क्रय केंद्र परिवर्तन (Center Transfer) की आवेदन प्रक्रिया
यदि विभाग द्वारा आपको आवंटित किया गया क्रय केंद्र आपके खेत या घर से बहुत दूर है और निकटवर्ती कोई दूसरा केंद्र उपलब्ध है, तो आप निम्नलिखित कानूनी प्रक्रिया से कांटा बदलवा सकते हैं:
चरण 1: संयुक्त ग्राम पंचायत का प्रस्ताव (Gram Panchayat Resolution)
- यदि पूरे गाँव का कांटा गलत जगह चला गया है, तो ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में खुली बैठक करके ‘क्रय केंद्र स्थानांतरण प्रस्ताव’ पारित कराएं।
- यदि व्यक्तिगत किसान का कांटा गलत हुआ है, तो किसान स्वयं व्यक्तिगत आवेदन तैयार करे।
चरण 2: ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (SCII/CDO) को प्रार्थना पत्र
- अपने ब्लॉक की गन्ना विकास परिषद के कार्यालय में जाएं।
- प्रार्थना पत्र में स्पष्ट कारण लिखें:
- वर्तमान आवंटित केंद्र की गाँव से दूरी (किमी में)।
- वांछित नए केंद्र की गाँव से दूरी।
- रास्ते की कठिनाई (जैसे- रेलवे फाटक, संकरा पुल, जलभराव)।
- राजस्व खतौनी और किसान कोड की प्रति संलग्न करें।
चरण 3: गन्ना आयुक्त / उप गन्ना आयुक्त का अनुमोदन
- उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद अधिनियम की धारा 15 के तहत क्रय केंद्र बदलने का अंतिम अधिकार उप गन्ना आयुक्त (Deputy Cane Commissioner) या गन्ना आयुक्त, लखनऊ के पास होता है।
- विभागीय जांच के बाद यदि पाया जाता है कि नया केंद्र वास्तव में किसान के लिए अधिक सुगम है और उस केंद्र की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, तो 7 दिनों के भीतर ऑनलाइन सट्टे में नया क्रय केंद्र अपडेट कर दिया जाता है।
6. क्रय केंद्रों पर अनिवार्य किसान सुविधाएं (Statutory Farmer Amenities)
कानूनन प्रत्येक चीनी मिल के लिए अनिवार्य है कि वह अपने प्रत्येक बाहरी क्रय केंद्र पर किसानों के लिए निम्नलिखित 6 बुनियादी सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध कराए:
- पक्का विश्राम शेड (Rest Shed): रात में तौल का इंतजार करने वाले किसानों के लिए पक्की छत वाला कमरा या शेड।
- शुद्ध पेयजल (Drinking Water): इंडिया मार्क-2 हैंडपंप या आरओ वाटर कूलर की व्यवस्था।
- शौचालय (Toilets): महिला व पुरुष किसानों के लिए साफ-सुथरे शौचालय।
- शीतकालीन अलाव (Bonfire): दिसंबर और जनवरी की कड़ाके की ठंड में रात के समय लकड़ी/अलाव की व्यवस्था।
- बैल-पशु शेड व नाद (Cattle Manger): बैलगाड़ी से आने वाले किसानों के बैलों के लिए पानी पीने की चरही और छाया।
- प्राथमिक चिकित्सा किट (First Aid Box): आकस्मिक चोट या दुर्घटना की स्थिति में आवश्यक दवाएं व पट्टी।
अधिकार की बात: यदि किसी क्रय केंद्र पर ये सुविधाएं नदारद हैं, तो किसान इसकी शिकायत सीधे जिला गन्ना अधिकारी (DCO) से कर सकते हैं। मिल पर प्रति केंद्र भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Center Allocation)
प्र.1: क्या मिल प्रबंधन अपनी मर्जी से किसी चालू क्रय केंद्र को बंद कर सकता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! किसी भी क्रय केंद्र को स्थापित करने, स्थानांतरित करने या बंद करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के गन्ना आयुक्त के पास है। कोई भी मिल मालिक बिना शासकीय आदेश के किसी केंद्र को बंद नहीं कर सकता।
प्र.2: क्या मैं एक ही सीजन में आधी पर्चियां गेट पर और आधी सेंटर पर तौला सकता हूँ?
उत्तर: नहीं। सट्टा नीति के अनुसार एक किसान का पूरा सट्टा किसी एक ही तौल स्थल (या तो मिल गेट, या संबंधित क्रय केंद्र) से आबद्ध (Bonded) हो सकता है।
प्र.3: यदि क्रय केंद्र का कांटा खराब हो जाए तो क्या पर्ची की मियाद बढ़ेगी?
उत्तर: हाँ! यदि कांटे में तकनीकी खराबी, बिजली कटने या वजन मशीन फेल होने से तौल रुकती है, तो जितने घंटे तौल बाधित रही, उतने घंटे पर्ची की वैधता स्वतः आगे बढ़ा दी जाती है।
निष्कर्ष (Action Summary)
क्रय केंद्र का सही आवंटन किसान की समय, ऊर्जा और धन की बचत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सत्र 2026-27 के लिए सभी मिलों के क्रय केंद्र आवंटन आदेश जारी हो चुके हैं।
सभी किसान भाई आज ही caneup.in पोर्टल पर जाकर अपने आवंटित क्रय केंद्र का नाम और कोड चेक करें। यदि दूरी अधिक है, तो 15 सितंबर तक कांटा स्थानांतरण का प्रार्थना पत्र समिति में अवश्य जमा कर दें।
8. क्रय केंद्र पर होने वाले विवादों के त्वरित समाधान के नियम
पेराई सत्र के दौरान क्रय केंद्रों पर ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगने या कांटा खराब होने पर अक्सर किसानों और मिल कर्मचारियों के बीच कहा-सुनी हो जाती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
1. तौल में व्यवधान का नियम (Breakdown Protocol):
- यदि क्रय केंद्र का इलेक्ट्रॉनिक कांटा या जनरेटर 2 घंटे से अधिक समय तक खराब रहता है, तो तौल लिपिक को तुरंत समिति सचिव और मिल के चीफ केन मैनेजर को सूचना देनी होती है।
- यदि खराबी 6 घंटे में ठीक नहीं होती, तो मिल को निकटवर्ती वैकल्पिक कांटे पर तौल कराने या मोबाइल वेइंग वैन (Mobile Weighbridge) भेजने का आदेश होता है।
2. टोकन प्रणाली (First Come, First Served):
- क्रय केंद्र पर पहले आने वाले वाहन को पहले तौल का अधिकार है। किसी भी दबंग या बड़े काश्तकार की गाड़ी को कतार तोड़कर आगे नहीं लगाया जा सकता।
- कांटा बाबू को गेट पर प्रत्येक गाड़ी को एक क्रमबद्ध ‘तौल टोकन’ देना अनिवार्य है।
3. किसान विश्राम गृह में अलाव व चाय की सुविधा:
- भीषण ठंड (दिसंबर-जनवरी) में रात 10 बजे के बाद तौल केंद्र पर अलाव की लकड़ी उपलब्ध कराना चीनी मिल का वैधानिक दायित्व है।
- यदि मिल प्रबंधन अलाव की व्यवस्था नहीं करता, तो गाँव की निगरानी समिति मौके से वीडियो बनाकर जिला गन्ना अधिकारी को भेज सकती है, जिस पर मिल पर ₹25,000 का तत्काल जुर्माना लगाया जाता है।
9. क्रय केंद्र आवंटन संबंधी 5 मुख्य सावधानियां
- सीजन से पूर्व दूरी का सत्यापन: अपने गाँव से आवंटित क्रय केंद्र की दूरी किलोमीटर में नापें। यदि सरकारी गजट में दूरी 5 किमी लिखी है और वास्तविक रास्ता 9 किमी है, तो तुरंत आपत्ति करें ताकि ढुलाई भाड़े की अतिरिक्त वसूली न हो।
- सड़क और पुलिया की स्थिति: यदि केंद्र तक जाने वाला संपर्क मार्ग बाढ़ या बारिश से टूटा है, तो मिल से सड़क की मरम्मत कराने की मांग करें।
- कांटे की क्षमता की जांच: सुनिश्चित करें कि केंद्र पर लगा कांटा आपकी 4-व्हील भारी ट्रैक्टर ट्रॉली (100 क्विंटल क्षमता) का वजन उठाने में सक्षम है।
- तौल लिपिक का पहचान पत्र: क्रय केंद्र पर तौल करने वाले कर्मचारी के गले में चीनी मिल और गन्ना समिति द्वारा संयुक्त रूप से जारी अधिकृत पहचान पत्र होना अनिवार्य है।
- शिकायत पंजिका (Complaint Register): प्रत्येक क्रय केंद्र पर एक सील बंद शिकायत रजिस्टर होना जरूरी है, जिसमें किसान अपनी शिकायत दर्ज कराकर पावती ले सकते हैं।
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