उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक तक ‘जादुई किस्म’ मानी जाने वाली Co-0238 (करण-4) अब किसानों और चीनी मिलों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। राज्य के कुल गन्ना रकबे के लगभग 70-80% हिस्से पर छाई रही इस प्रजाति पर ‘लाल सड़न’ (Red Rot - गन्ने का कैंसर) और टॉप बोरर का ऐसा कहर टूटा है कि खड़ी फसलें सूखकर बर्बाद हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (शाहजहांपुर) और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR, लखनऊ) ने किसानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि Co-0238 की नई बुवाई पूरी तरह बंद कर दें और उसकी जगह सरकार द्वारा अनुमोदित रोग-प्रतिरोधी एवं उच्च पैदावार वाली नई किस्मों को अपनाएं।
आइए जानते हैं कि Co-0238 की जगह कौन-सी नई किस्में (CoS 17231, CoLk 16202, Co-15023, Co-0118) सबसे बेहतर हैं, उनकी पैदावार कितनी है और उनका असली बीज कहाँ से मिलेगा।
Co-0238 क्यों फेल हुई?
- रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) खत्म: किसी भी किस्म का जीवनकाल 8 से 10 वर्ष का होता है। Co-0238 पर लगातार फंगस के म्यूटेशन से इसकी प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता शून्य हो चुकी है।
- लागत में भारी उछाल: इस किस्म को बचाने के लिए किसान प्रति एकड़ ₹10,000 से ₹15,000 केवल कीटनाशकों और फफूंदनाशकों (Fungicides) पर खर्च कर रहे हैं, फिर भी फसल नहीं बच रही।
- पेड़ी फसल में भारी नुकसान: Co-0238 की पेड़ी (Ratoon Crop) में लाल सड़न 90% तक फैल जाती है।
शीर्ष 4 नई रोग-प्रतिरोधी गन्ना किस्में: संपूर्ण तुलना चार्ट
| विशेषता | CoS 17231 | CoLk 16202 | Co 15023 | Co 0118 |
|---|
| अनुमोदन संस्थान | गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर | IISR, लखनऊ | SBI, कोयंबटूर / करनाल | SBI, करनाल |
| परिपक्वता श्रेणी | अगेती (Early) | अगेती (Early) | अति-अगेती (Super Early) | अगेती (Early) |
| औसत पैदावार (टन/हेक्टेयर) | 90 - 105 टन (400-450 कुं/एकड़) | 85 - 100 टन (380-420 कुं/एकड़) | 80 - 95 टन (350-400 कुं/एकड़) | 85 - 95 टन (360-400 कुं/एकड़) |
| चीनी रिकवरी (%) | 13.0 - 13.5% | 12.8 - 13.2% | 13.5 - 14.2% (सर्वाधिक) | 12.8 - 13.0% |
| लाल सड़न प्रतिरोधक | 100% रोधी (Immune) | अति रोधी (High Resistant) | मध्यम रोधी (जलभराव से बचाएं) | रोधी (Resistant) |
| तने की मोटाई व ठोसपन | मध्यम मोटा, ठोस, कोई खोखलापन नहीं | मोटा, हरा-पीला, सीधा खड़ा रहने वाला | मध्यम, रसदार, मीठा | मध्यम, छिलाई में आसान |
| पेड़ी (Ratoon) क्षमता | उत्कृष्ट (Excellent) | बहुत अच्छी | अच्छी | बहुत अच्छी |
1. CoS 17231: Co-0238 का सबसे सटीक विकल्प
- विशेषताएं: यह किस्म शाहजहांपुर शोध संस्थान द्वारा विशेष रूप से पश्चिमी और मध्य यूपी के लिए विकसित की गई है। इसमें लाल सड़न का एक भी लक्षण नहीं पाया गया है।
- बढ़वार और वजन: गन्ने की लंबाई 10 से 12 फीट तक होती है और अगोला हमेशा हरा-भरा रहता है, जिससे पशुओं के लिए बेहतरीन चारा भी मिलता है।
- गिरने के प्रति रोधी: इसकी जड़ें जमीन में गहरी जाती हैं, इसलिए तेज आंधी-बारिश में फसल गिरती (Lodging) नहीं है।
2. CoLk 16202: मध्य एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश का वरदान
- विशेषताएं: लखनऊ संस्थान द्वारा जारी यह किस्म कम पानी और मध्यम जलभराव दोनों परिस्थितियों को सहन कर सकती है।
- ठोस गन्ना: इसका तना अंदर से पूरी तरह ठोस होता है, जिससे दीमक या तना छेदक कीट आसानी से अंदर नहीं घुस पाते।
- लागत में बचत: इस किस्म में किसी महंगे कीटनाशक या अतिरिक्त फफूंदनाशक की आवश्यकता नहीं पड़ती।
3. Co-15023: चीनी मिलों की पहली पसंद (अति-अगेती)
- विशेषताएं: यह किस्म मात्र 9 से 10 महीने में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है।
- उच्चतम रिकवरी: इसकी चीनी रिकवरी 14% से अधिक है, जिससे मिलें इसे प्राथमिकता से खरीदती हैं और इस पर वजन में कोई कटौती नहीं होती।
- सावधानी: इसे जलभराव वाले निचले खेतों में न लगाएं; ऊंची जमीन पर ट्रेंच विधि से इसकी बंपर पैदावार मिलती है।
इन नई किस्मों का प्रमाणित बीज कहाँ से प्राप्त करें?
किसान भाई किसी भी अज्ञात या निजी व्यापारी से अधिक दामों में बीज न खरीदें। आधिकारिक बीज केवल निम्नलिखित स्रोतों से ही लें:
- संबंधित चीनी मिल की नर्सरी: आपकी चीनी मिल के गन्ना विकास विभाग (Cane Development Office) द्वारा किसानों को सब्सिडी पर सिंगल बड (Single Bud) या तैयार पौध दी जा रही है।
- गन्ना शोध परिषद (शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, सेवरही केन्द्र): शोध केंद्रों पर ऑनलाइन बुकिंग द्वारा ब्रीडर और फाउंडेशन सीड उपलब्ध कराया जाता है।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK): आपके जिले के केवीके फार्म पर भी इन किस्मों के बीज प्लॉट तैयार किए गए हैं।
- महिला स्वयं सहायता समूह (Nursery SHG): राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत गांव स्तर पर तैयार की गई ट्रे-नर्सरी (Tray Nursery) से मात्र ₹1.50 से ₹2.00 प्रति पौधे की दर से पौध प्राप्त करें।
नई किस्म लगाते समय 3 बातें ध्यान रखें
- सिंगल बड / ट्रेंच विधि अपनाएं: बीज की बचत के लिए 1 आंख के टुकड़े काटकर 4 से 5 फीट की दूरी पर लगाएं।
- बीज शोधन अनिवार्य: बुवाई से पहले बीजों को ट्राइकोडर्मा या कार्बेंडाजिम घोल से अवश्य उपचारित करें।
- मिश्रित बुवाई न करें: नए बीज को पुराने Co-0238 वाले खेत के बिल्कुल पास न लगाएं ताकि बीमारी का संक्रमण न फैले।
निष्कर्ष
Co-0238 का युग अब समाप्त हो चुका है। यदि आप आगामी शरदकालीन बुवाई (सितंबर-अक्टूबर 2026) में CoS 17231 या CoLk 16202 को अपनाते हैं, तो न केवल आपकी लागत आधी हो जाएगी बल्कि पैदावार और मुनाफा भी सुरक्षित रहेगा।
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