
उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक तक ‘गन्ना क्रांति का जनक’ मानी जाने वाली किस्म Co-0238 (करण-4) अब लाल सड़न (Red Rot) और चोटी बेधक कीट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो चुकी है। राज्य गन्ना अनुसंधान परिषद और गन्ना विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे चालू शरदकालीन बुवाई 2026 में Co-0238 का रकबा तेजी से घटाएं और इसकी जगह वैज्ञानिकों द्वारा अनुमोदित 5 नई उच्च-उपज और रोगरोधी किस्मों की बुवाई करें।
ये नई किस्में न केवल लाल सड़न से पूरी तरह सुरक्षित हैं, बल्कि इनमें चीनी की रिकवरी 13% से अधिक है और प्रति एकड़ 450 से 550 कुंतल तक की बंपर पैदावार मिलती है।
1. Co-0238 के 5 सर्वश्रेष्ठ विकल्प: विस्तृत तुलना सारणी
| किस्म का नाम (Variety) | परिपक्वता श्रेणी | औसत पैदावार (प्रति एकड़) | चीनी रिकवरी (%) | मुख्य विशेषताएं व रोग प्रतिरोधकता |
|---|---|---|---|---|
| 1. Co-15023 (करण-15) | अति अगेती (Early) | 480 से 520 कुंतल | 13.40% | बहुत तेजी से बढ़ने वाला, मोटा तना, लाल सड़न रोधी |
| 2. CoS-17231 (शाहजहांपुर) | अगेती (Early) | 490 से 540 कुंतल | 13.15% | मजबूत जड़ें, गिरने के प्रति सहनशील, बंपर कल्ले |
| 3. CoLk-14201 (इक्षु-1) | अगेती (Early) | 450 से 500 कुंतल | 13.20% | कम पानी में भी अच्छी पैदावार, सूखा व जलभराव रोधी |
| 4. Co-0118 (करण-2) | अगेती (Early) | 420 से 460 कुंतल | 13.00% | सीधा खड़ा रहने वाला गन्ना, उत्तम गुड़ और चीनी गुणवत्ता |
| 5. CoLk-16202 (इक्षु-6) | सामान्य/मध्यम | 460 से 510 कुंतल | 12.85% | पेड़ी (Ratoon) के लिए सर्वोत्तम, भारी टिलरिंग |
2. टॉप 3 किस्मों की गहराई से समीक्षा
1. Co-15023 (करण-15) — किसानों की पहली पसंद
- उत्पत्ति: आईसीएआर-गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय केंद्र, करनाल।
- पहचान: इसका गन्ना सीधा, हरा-पीलापन लिए हुए और तना मध्यम-मोटा होता है। आंखें अंडाकार और छिलका चिकना होता है।
- लाभ: यह किस्म रोपाई के मात्र 9 से 10 महीने में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। चीनी मिलें इस किस्म को पहले पखवाड़े में ही पेराई के लिए प्राथमिकता देती हैं।
2. CoS-17231 — यूपी गन्ना शोध परिषद की नई खोज
- उत्पत्ति: यूपी गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर।
- पहचान: लंबा, गठीला और गहरे हरे पत्तों वाला पौधा।
- लाभ: इसमें कल्लों (Tillers) की संख्या प्रति पौधा 8 से 12 तक निकलती है। ट्रेंच विधि में यह किस्म 550 कुंतल प्रति एकड़ तक का रिकॉर्ड उत्पादन देने में सक्षम है।
3. CoLk-14201 (इक्षु-1) — जलवायु परिवर्तन रोधी
- उत्पत्ति: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ।
- लाभ: जिन क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल में पानी की कमी होती है या मानसून में खेतों में पानी भर जाता है, वहां यह किस्म बिना किसी नुकसान के टिकती है।
3. शुद्ध और प्रमाणित बीज कहाँ से प्राप्त करें?
किसान भाई किसी बिचौलिए या अनधिकृत व्यापारी से महंगा बीज खरीदने के बजाय निम्नलिखित सरकारी केंद्रों से बुकिंग करें:
- संबंधित चीनी मिल की प्राथमिक बीज नर्सरी: प्रत्येक मिल गेट पर शोधित बीज के लिए स्पेशल काउंटर खुला है।
- सहकारी गन्ना विकास समिति: समिति सचिव के पास अपना आधार और किसान कोड देकर सब्सिडी वाला बीज बुक कराएं।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) व शोध केंद्र: शाहजहांपुर, मुजफ्फरनगर, सेवरही, और करनाल शोध फार्म।
बुवाई की सही तकनीक समझने के लिए शरदकालीन ट्रेंच बुवाई संपूर्ण गाइड और बीमारी से बचाव के लिए लाल सड़न 7 पक्के उपाय जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) — गन्ना किस्में
Q1. Co-15023 और CoS-17231 में से कौन सी किस्म ज्यादा बेहतर है?
उत्तर: अधिक उपजाऊ और भारी दोमट मिट्टी में Co-15023 अगेती मिठास के लिए श्रेष्ठ है, जबकि सामान्य व हल्की मिट्टी में अधिक कल्ले और बढ़वार के लिए CoS-17231 बेहतरीन परिणाम देती है।
Q2. क्या Co-0238 को पूरी तरह बंद कर दिया गया है?
उत्तर: विभाग ने इसे प्रतिबंधित नहीं किया है, लेकिन किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल हॉट वाटर शोधित बीज ही बोएं और धीरे-धीरे नई किस्मों की ओर शिफ्ट हों।
Q3. नई किस्मों का बीज मिलने में परेशानी होने पर कहाँ संपर्क करें?
उत्तर: अपनी सहकारी गन्ना विकास समिति के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक या अपनी चीनी मिल के केन मैनेजर (Cane Manager) से संपर्क करें।
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