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Co 0238 का विकल्प: टॉप 5 नई गन्ना किस्में 2026 — CoS 13235, CoLk 14201, Co 15023, Co 0118 व CoPb 95 की तुलना

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
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Co 0238 का विकल्प: टॉप 5 नई गन्ना किस्में 2026 — CoS 13235, CoLk 14201, Co 15023, Co 0118 व CoPb 95 की तुलना
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): रेड रॉट (Red Rot) के कारण Co 0238 का रकबा तेजी से घट रहा है। जानिए CoS 13235, CoLk 14201, Co 15023, Co 0118 और CoPb 95 में से आपकी मिट्टी व क्षेत्र के लिए कौन सी किस्म सबसे ज्यादा पैदावार और मुनाफा देगी।

उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग और गन्ना अर्थव्यवस्था में पिछले एक दशक तक ‘चमत्कारी किस्म (Miracle Variety)’ के रूप में राज करने वाली गन्ना प्रजाति Co 0238 (करण-4) अब अपने जीवन चक्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। भारतीय गन्ना प्रजनन संस्थान (ICAR-SBI), करनाल द्वारा विकसित इस किस्म ने उत्तर प्रदेश की औसत गन्ना उत्पादकता को 60 टन/हेक्टेयर से बढ़ाकर 80 टन/हेक्टेयर से ऊपर पहुंचाया था और राज्य को देश का नंबर एक चीनी उत्पादक राज्य बनाया था।

परंतु पिछले 4-5 वर्षों में इस किस्म की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Genetic Resistance) पूरी तरह टूट चुकी है। लाल सड़न रोग (Red Rot - Colletotrichum falcatum) के नए और अत्यधिक आक्रामक स्ट्रेनों (जैसे CF-07, CF-08, CF-12) के हमले के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बिजनौर, बागपत) से लेकर लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और शाहजहांपुर तक Co 0238 के लाखों हेक्टेयर खेत मॉनसून के दौरान रातों-रात सूखकर लाल हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार एवं गन्ना विकास विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पेराई सत्र 2026-27 और आगामी बुवाई सत्रों में Co 0238 के स्थान पर नई प्रमाणित अगेती किस्मों को प्रतिस्थापित (Replace) किया जाए। इस विस्तृत एवं शोधपरक विश्लेषण में हम उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित शीर्ष 5 नई गन्ना किस्मों — CoS 13235, CoLk 14201, Co 15023, Co 0118 और CoPb 95 की पैदावार, चीनी परता, कल्लों की संख्या, मिट्टी की उपयुक्तता और रोग प्रतिरोधक क्षमता का संपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।

1. Co 0238 के पतन के वैज्ञानिक कारण — इसे बदलना अब क्यों अनिवार्य है?

  1. मोनोकल्चर का दुष्परिणाम (Monoculture Hazards): उत्तर प्रदेश के कुल गन्ना रकबे के लगभग 85% हिस्से पर केवल एक ही किस्म Co 0238 बो दी गई थी। जब किसी विशाल भूभाग पर एक ही आनुवंशिकी वाली फसल लगातार बोई जाती है, तो रोगाणुओं (Pathogens) को म्यूटेट होकर नया हमलावर स्ट्रेन बनाने का सबसे अनुकूल अवसर मिलता है।
  2. लाल सड़न (Red Rot) के प्रति शून्य प्रतिरोधक क्षमता: आज Co 0238 में रेड रॉट के प्रति 0% प्रतिरोधकता बची है। यदि खेत में 1% भी संक्रमण हो तो 15 दिनों में पूरा खेत सूख जाता है।
  3. चीनी मिलों द्वारा अस्वीकृति और डिडक्शन: चीनी मिलों ने Co 0238 में चीनी परता गिरने और रस में गलन व बदबू आने के कारण इसके सट्टे में कटौती करना और नई किस्मों को 100% प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।
  4. पेड़ी फसल (Ratoon) का पूर्ण विनाश: Co 0238 की पेड़ी में लाल सड़न का प्रकोप पौधा गन्ने से 3 गुना अधिक होता है, जिससे किसान को पहले ही साल में खेत जोतना पड़ता है।

2. टॉप 5 नई अगेती गन्ना किस्मों का विस्तृत प्रोफाइल

1. CoS 13235 (उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा विकसित)

  • विशेषताएं: यह किस्म वर्तमान में Co 0238 का सबसे सटीक और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरी है। इसका तना मोटा, ठोस और आकर्षक पीले-हरे रंग का होता है।
  • औसत पैदावार: 90 से 105 टन प्रति हेक्टेयर (400 से 500 क्विंटल प्रति एकड़)।
  • चीनी परता (Pol in Cane): 13.5% से 14.2% (अत्यंत उच्च)।
  • कल्लों की संख्या: प्रति पौधा 7 से 9 मजबूत कल्ले।
  • रोग प्रतिरोधकता: लाल सड़न और उकठा रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी (Resistant)।
  • किस क्षेत्र के लिए उत्तम: पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य उत्तर प्रदेश और तराई के सभी दोमट व भारी मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए सर्वोत्कृष्ट।

2. CoLk 14201 (भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान - IISR, लखनऊ)

  • विशेषताएं: यह ‘इक्षु-सुगंधा’ के नाम से भी जानी जाती है। गन्ने का तना लंबा, सीधा और गांठों पर कोई कांटे या रोएं नहीं होते, जिससे कटाई व छिलाई बेहद आसान होती है।
  • औसत पैदावार: 95 से 110 टन प्रति हेक्टेयर (420 से 520 क्विंटल प्रति एकड़)।
  • चीनी परता: 13.8% से 14.5%।
  • विशेष गुण: यह जलभराव (Waterlogging) और सूखे दोनों ही विपरीत परिस्थितियों को सहन करने की असाधारण क्षमता रखती है।
  • रोग प्रतिरोधकता: लाल सड़न के प्रति 100% प्रतिरोधी।

3. Co 15023 (ICAR-सुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, करनाल)

  • विशेषताएं: यह भारत की सबसे तेज गति से पकने वाली (Super-Early) किस्म है। मात्र 8 से 9 महीने में ही इसमें 18% से 19% ब्रिक्स (Brix) मिठास आ जाती है।
  • औसत पैदावार: 85 से 95 टन प्रति हेक्टेयर (380 से 450 क्विंटल प्रति एकड़)।
  • चीनी परता: 14.5% से 15.0% (राज्य में सबसे अधिक)।
  • सावधानी: इसकी बढ़वार बहुत तेज होती है, अतः इसे गिरने से बचाने के लिए 4.5 फीट ट्रेंच बुवाई, मिट्टी चढ़ाना और 2 बार बंधाई करना अनिवार्य है।
  • सर्वोत्तम उपयोग: चीनी मिलों को सत्र के पहले पखवाड़े (अक्टूबर-नवंबर) में पेराई के लिए प्रीमियम दरों पर आपूर्ति हेतु।

4. Co 0118 (करनाल केंद्र द्वारा विकसित पुरानी विश्वसनीय अगेती किस्म)

  • विशेषताएं: यह एक अत्यंत ठोस और कठोर बाहरी छाल वाला गन्ना है, जिसे जंगली जानवर (नीलगाय, सुअर, गीदड़) बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
  • औसत पैदावार: 80 से 90 टन प्रति हेक्टेयर (350 से 400 क्विंटल प्रति एकड़)।
  • चीनी परता: 13.2% से 13.8%।
  • विशेष गुण: पाले (Frost) और तेज हवाओं के प्रति बेहद सहनशील, तेज आंधी में भी कभी नहीं गिरता।

5. CoPb 95 (PAU एवं ICAR द्वारा विकसित)

  • विशेषताएं: पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों (सहारनपुर, शामली, बागपत) में अत्यधिक सफल। इसका गन्ना मध्यम-मोटा और तेजी से बढ़ने वाला होता है।
  • औसत पैदावार: 85 से 100 टन प्रति हेक्टेयर (380 से 460 क्विंटल प्रति एकड़)।
  • विशेष गुण: पेड़ी फसल में जबरदस्त फुटाव देता है और भारी मिट्टी में भी शानदार जमाव प्रदर्शित करता है।

3. टॉप 5 किस्मों का संपूर्ण वैज्ञानिक तुलनात्मक चार्ट (Comparison Matrix)

तुलनात्मक पैरामीटरCo 0238 (पुरानी किस्म)CoS 13235CoLk 14201Co 15023Co 0118CoPb 95
परिपक्वता वर्ग (Maturity)अगेती (Early)अगेती (Early)अगेती (Early)अति-अगेती (Super Early)अगेती (Early)अगेती (Early)
औसत पैदावार (क्विंटल/एकड़)450-500 (यदि स्वस्थ रहे)450-520420-500400-480380-420400-460
चीनी रिकवरी (%)12.5-13.0%13.5-14.2%13.8-14.5%14.5-15.0%13.2-13.8%13.0-13.5%
लाल सड़न (Red Rot) रोधी❌ अत्यंत संवेदनशील (0%)✅ 100% प्रतिरोधी✅ 100% प्रतिरोधी✅ प्रतिरोधी✅ प्रतिरोधी✅ मध्यम प्रतिरोधी
टॉप बोरर (Top Borer) प्रभाव❌ भारी प्रकोप🟡 मध्यम सहिष्णु🟢 उच्च सहिष्णु🟡 मध्यम🟢 कठोर तना, कम कीट🟡 मध्यम
तने की मोटाई (Diameter)2.6 - 2.8 सेमी2.8 - 3.2 सेमी2.5 - 2.8 सेमी2.4 - 2.7 सेमी2.3 - 2.5 सेमी2.6 - 2.9 सेमी
गिरने के प्रति प्रतिरोधकता❌ आसानी से गिरता है🟢 मजबूत जड़ तंत्र🟢 सीधा खड़ा रहता है🟡 बंधाई जरूरी🟢 कभी नहीं गिरता🟢 सीधा खड़ा रहता है
पेड़ी (Ratoon) क्षमता❌ बीमारी से नष्ट🟢 बंपर कल्ले🟢 उत्कृष्ट पेड़ी🟡 मध्यम पेड़ी🟢 शानदार पेड़ी🟢 शानदार पेड़ी

4. जिलावार एवं मिट्टी अनुसार किस किस्म का चयन करें?

उत्तर प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी की प्रकृति भिन्न है, अतः अपने जिले के अनुसार सही किस्म का चयन करें:

  1. सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़:
    • प्रथम प्राथमिकता: CoS 13235 और CoLk 14201।
    • द्वितीय प्राथमिकता: Co 15023 (सत्र के पहले माह की पर्चियों के लिए) और CoPb 95।
  2. बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली:
    • प्रथम प्राथमिकता: CoS 13235 और Co 0118 (भारी दोमट और खादर क्षेत्रों के लिए उत्तम)।
  3. लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर (तराई बेल्ट):
    • प्रथम प्राथमिकता: CoLk 14201 (जलभराव व बाढ़ सहने में नंबर-1) और CoS 13235।
  4. गोंडा, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, गोरखपुर (पूर्वांचल):
    • प्रथम प्राथमिकता: CoS 13235 और CoLk 14201 तथा मध्यम देर से पकने वाली CoSe 14451।

5. नई किस्मों का असली और प्रमाणित बीज कहां से प्राप्त करें?

नई किस्मों के नाम पर बाजार में नकली बीज बेचने वाले बिचौलियों से सावधान रहें। केवल निम्नलिखित आधिकारिक सरकारी व अर्ध-सरकारी स्रोतों से ही प्रमाणित बीज खरीदें:

[गन्ना विकास परिषद नर्सरी] ➔ [चीनी मिल का रिसर्च फार्म] ➔ [IISR लखनऊ / SBI करनाल] ➔ [प्रगतिशील पंजीकृत बीज उत्पादक किसान]
  1. यूपी गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर (UPCSR): शाहजहांपुर मुख्य केंद्र तथा क्षेत्रीय केंद्रों (मुजफ्फरनगर, सेवरही, गोला गोकर्णनाथ) से सिंगल बड या सेटलिंग्स बुक करें।
  2. भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ: रायबरेली रोड स्थित संस्थान से ऑनलाइन टोकन प्रणाली द्वारा बीज वितरण किया जाता है।
  3. चीनी मिलों के केन डेवलपमेंट फार्म (Cane R&D Farms): आपकी क्षेत्रीय चीनी मिल द्वारा किसानों को अनुदानित दरों पर नई किस्मों का बीज उपलब्ध कराया जाता है जिसका भुगतान किसान के गन्ना सट्टे से आसान किस्तों में काटा जाता है।
  4. महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) नर्सरी: गन्ना विभाग के ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ के तहत महिला समूहों द्वारा सिंगल बड ट्रे नर्सरी में तैयार स्वस्थ पौधे मात्र ₹1.50 से ₹2.00 प्रति पौधा की दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

6. नई किस्मों की बुवाई के समय ध्यान रखने योग्य 5 स्वर्णिम नियम

  1. सिंगल बड या दो आंख के टुकड़े काटें: नई किस्मों का बीज महंगा और सीमित होता है, अतः 3 आंख के बजाय सिंगल बड चिप्स काटकर ट्रे में पौध तैयार करें। 1 एकड़ में मात्र 15 से 18 क्विंटल बीज पर्याप्त होता है।
  2. अनिवार्य बीज शोधन: भले ही नई किस्में रेड रॉट रोधी हैं, लेकिन बाविस्टिन (कार्बेन्डाजिम) या ट्राइकोडर्मा से 15 मिनट शोधन अवश्य करें ताकि मिट्टी के अन्य जीवाणु नुकसान न पहुंचाएं।
  3. लाइन से लाइन की दूरी 4.5 से 5 फीट रखें: नई किस्मों (विशेषकर CoS 13235) में कल्लों का फुटाव बहुत ज्यादा होता है। कम दूरी पर बोने से कल्ले धूप के अभाव में मर जाते हैं।
  4. समय पर मिट्टी चढ़ाना व बंधाई: Co 15023 और CoS 13235 की बढ़वार 12-14 फीट तक जाती है, इसलिए जून माह में 20 सेमी मिट्टी अवश्य चढ़ाएं और अगस्त में दोहरी बंधाई करें।
  5. सट्टे में किस्म का सही अंकन कराएं: जीपीएस सर्वे और सट्टा घोषणा पत्र भरते समय अपनी नई किस्म का नाम (जैसे CoS 13235) स्पष्ट दर्ज कराएं ताकि मिल द्वारा अगेती श्रेणी की पहली पर्चियां आवंटित की जा सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

Co 0238 का सबसे अच्छा और सीधा विकल्प कौन सा है?

वर्तमान में CoS 13235 और CoLk 14201 को Co 0238 का सबसे बेहतरीन, अधिक पैदावार देने वाला और 100% लाल सड़न रोधी विकल्प माना गया है।

क्या Co 15023 बहुत जल्दी गिर जाती है?

Co 15023 की वानस्पतिक वृद्धि बहुत तेज होती है, इसलिए यदि इसे 4.5 फीट ट्रेंच विधि से बोकर जून में मिट्टी चढ़ा दी जाए और अगस्त में बंधाई की जाए तो यह बिल्कुल नहीं गिरती।

नई गन्ना किस्मों के बीज पर क्या सरकार कोई सब्सिडी देती है?

हां, उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग द्वारा ‘बीज ग्राम योजना’ के तहत नई अगेती किस्मों के फाउंडेशन व प्रजनक बीज पर ₹100 से ₹150 प्रति क्विंटल तक का अनुदान दिया जाता है।

क्या CoS 13235 में पायरिला या टॉप बोरर का प्रकोप होता है?

CoS 13235 में Co 0238 की तुलना में 70% कम कीट प्रकोप होता है, लेकिन मॉनसून पूर्व कोराजन का एक ड्रेंचिंग स्प्रे करना अनुशंसित है।

जलभराव वाले खेतों के लिए कौन सी किस्म सबसे उत्तम है?

लखीमपुर, पीलीभीत और तराई के जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए CoLk 14201 और CoSe 14451 सबसे उपयुक्त और सहनशील किस्में हैं।

Co 0118 की खेती करने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

Co 0118 का तना अत्यधिक कठोर होता है जिससे नीलगाय, जंगली सुअर और बंदर इसे नुकसान नहीं पहुंचा पाते और यह तेज आंधी में भी सीधी खड़ी रहती है।

क्या चीनी मिलें नई किस्मों के गन्ने को प्राथमिकता पर खरीदती हैं?

हां, चीनी मिलें CoS 13235, CoLk 14201 और Co 15023 से अधिक चीनी रिकवरी मिलने के कारण इनकी पर्चियां पेराई सत्र के पहले पखवाड़े से ही प्राथमिकता पर जारी करती हैं।

सिंगल बड नर्सरी से 1 एकड़ खेत के लिए कितने पौधों की जरूरत होती है?

4.5 फीट की दूरी पर 1 एकड़ खेत में लगभग 8,000 से 9,000 पौधों (Setts/Seedlings) की आवश्यकता होती है।

क्या CoPb 95 उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में बोई जा सकती है?

CoPb 95 मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर) और हरियाणा/पंजाब से सटे क्षेत्रों के लिए अधिक अनुशंसित है।

नकली बीज की पहचान कैसे करें?

प्रमाणित बीज के साथ हमेशा संस्थान का ‘सीड टैग (Seed Certificate Tag)’ और बिल प्राप्त होता है। किसी भी अनजान नर्सरी से बिना टैग के बीज न खरीदें।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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