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कटाई के बाद अगोला फेंक रहे हैं? 4% यूरिया उपचार से बनाएं पौष्टिक चारा — चारा खर्च आधा, दूध में कोई कमी नहीं

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 16, 2026 • 9 min read
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कटाई के बाद अगोला फेंक रहे हैं? 4% यूरिया उपचार से बनाएं पौष्टिक चारा — चारा खर्च आधा, दूध में कोई कमी नहीं
अंतिम अपडेट: October 16, 2026 1:40 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

दिसंबर की सुबह है। चीनी मिल के गेट पर ट्रॉलियों की लंबी कतार लगी है, खेत में गन्ना कट रहा है और खेत के एक कोने में अगोले का बड़ा ढेर धू-धू कर जल रहा है। यही नजारा हर साल पेराई सत्र में उत्तर प्रदेश के लगभग हर गन्ना बेल्ट में दिखता है। अब दूसरी तरफ देखिए — जनवरी-फरवरी में जब हरा चारा खत्म हो जाता है, तो वही किसान महंगा भूसा खरीदने के लिए मजबूर होता है और दुधारू पशुओं का दूध घटने लगता है।

हिसाब सीधा है: एक हेक्टेयर गन्ने की फसल से कटाई के समय 8 से 10 टन तक अगोला और हरी पत्ती निकलती है। यानी एक एकड़ में भी करीब 3-4 टन। यह “कचरा” नहीं, आपके पशुओं के लिए मुफ्त का चारा भंडार है — बस इसे खिलाने का सही तरीका आना चाहिए। कच्चा अगोला पशु को सीधे खिलाने पर ज्यादा फायदा नहीं देता, लेकिन 4 प्रतिशत यूरिया उपचार के बाद इसका कच्चा प्रोटीन 3 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच जाता है (पशु पोषण पर हुए शोध अध्ययनों के अनुसार)। यानी भूसे से कई गुना बेहतर चारा, लगभग मुफ्त में।

इस गाइड में हम जानेंगे कि अगोले को पौष्टिक चारे में बदलने की पूरी वैज्ञानिक विधि क्या है, साइलेज कैसे बनाएं, खिलाते समय किन बातों का ध्यान रखें और इससे आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।

1. अगोला आखिर है क्या — और किसान इसके साथ क्या करते हैं

अगोला गन्ने के पौधे का ऊपरी हरा हिस्सा है — पत्तियों वाला वह भाग जिसे मिल गन्ने के साथ नहीं लेती। कटाई के समय किसान इसे खेत में ही काटकर अलग कर देते हैं। इसके साथ किसान आमतौर पर तीन में से एक काम करते हैं: खेत में ही जला देते हैं, खेत के किनारे सड़ने के लिए छोड़ देते हैं, या कभी-कभार पशुओं को कच्चा खिला देते हैं।

जलाना सबसे नुकसानदेह विकल्प है। अगोला जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत के लाभदायक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, धुएं से वायु प्रदूषण होता है और वह पोषक तत्व राख बनकर उड़ जाता है जो मिट्टी या पशु के काम आ सकता था। पराली प्रबंधन की तरह ही अगोले को जलाने से बचना चाहिए — इसके बेहतर उपयोग मौजूद हैं, जिनमें पशु चारा सबसे फायदेमंद विकल्प है।

2. कच्चे अगोले की सच्चाई — क्यों सीधे खिलाने से फायदा नहीं

अगोले में ऊर्जा तो होती है, लेकिन कच्चे रूप में इसकी दो बड़ी कमियां हैं। पहली, इसमें कच्चा प्रोटीन मात्र 2.5 से 3 प्रतिशत के आसपास होता है — दुधारू पशु की जरूरत से बहुत कम। दूसरी, इसमें रेशा (फाइबर) बहुत ज्यादा और कठोर होता है, जिसे पशु का पेट आसानी से पचा नहीं पाता। नतीजा: पशु पेट तो भर लेता है, लेकिन शरीर को पोषण नहीं मिलता और धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। पशु पोषण विशेषज्ञ इसे “पेट भरा, शरीर भूखा” वाली स्थिति कहते हैं।

इसीलिए वैज्ञानिक तरीका यह है कि अगोले का उपचार (ट्रीटमेंट) करके उसकी पाचन क्षमता और प्रोटीन दोनों बढ़ा लिए जाएं। नीचे दोनों सिद्ध विधियां दी गई हैं।

3. यूरिया उपचार (अमोनियेशन) — 7 स्टेप में पौष्टिक चारा तैयार

यह विधि दशकों से पशु पोषण विज्ञान में इस्तेमाल हो रही है और गन्ने की पत्ती व अगोले पर इसके परिणाम शोध में दर्ज हैं। 4 प्रतिशत यूरिया उपचार से अगोले का कच्चा प्रोटीन 3 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 12 प्रतिशत हो जाता है और रेशा नरम पड़ने से पाचन भी सुधरता है।

स्टेप 1 — अगोला इकट्ठा करें और कतरें: कटाई के तुरंत बाद ताजा अगोला इकट्ठा करें। इसे 2-3 इंच के टुकड़ों में कतर लें — कुट्टी मशीन हो तो सबसे अच्छा, नहीं तो दरांती से भी काम चल जाएगा। बारीक कतरने से यूरिया घोल अच्छी तरह लगता है।

स्टेप 2 — यूरिया घोल तैयार करें: 100 किलो अगोले के लिए लगभग 4 किलो यूरिया लें और इसे 50-60 लीटर साफ पानी में पूरी तरह घोल लें। यही 4 प्रतिशत की मानक दर है। मात्रा को लेकर कोई संदेह हो तो अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।

स्टेप 3 — परत-दर-परत छिड़काव करें: जमीन पर पॉलीथीन बिछाकर उस पर अगोले की 6-8 इंच मोटी परत बिछाएं और उस पर यूरिया घोल का छिड़काव करें। फिर अगली परत बिछाकर फिर छिड़काव करें। इस तरह पूरा ढेर तैयार कर लें। घोल हर हिस्से में पहुंचना चाहिए, कहीं सूखा हिस्सा न रहे।

स्टेप 4 — हवा बंद करके ढकें: पूरे ढेर को मोटी पॉलीथीन शीट से इस तरह ढकें कि हवा अंदर न जा सके। किनारों को मिट्टी से दबा दें। हवा बंद होने पर यूरिया से निकलने वाली अमोनिया गैस रेशे को नरम करती है और प्रोटीन बढ़ाती है — यही इस विधि का विज्ञान है।

स्टेप 5 — 21 दिन इंतजार करें: ढके हुए ढेर को लगभग 3 सप्ताह तक ऐसे ही रहने दें। इस दौरान ढक्कन बार-बार न खोलें।

स्टेप 6 — खोलकर हवा लगाएं: 21 दिन बाद पॉलीथीन हटाकर अगोले को 1-2 दिन खुली हवा में फैला दें ताकि अमोनिया की तेज गंध उड़ जाए। गंध जाने के बाद ही पशु को खिलाएं — गंध वाला चारा पशु खाता नहीं और नुकसान भी कर सकता है।

स्टेप 7 — सूखी जगह भंडारण करें: तैयार चारे को नमी से बचाकर रखें। सही भंडारण में यह कई महीनों तक काम आता है — ठीक चारा संकट वाले महीनों (जनवरी से मार्च) के लिए।

4. साइलेज: अगोला संरक्षित करने का दूसरा पक्का रास्ता

अगर आप बड़े स्तर पर अगोला बचाना चाहते हैं तो साइलेज बेहतर विकल्प है। इसमें हरे अगोले को कतरकर गड्ढे, टंकी या ड्रम में दबा-दबाकर भरा जाता है और हवा निकालकर बंद कर दिया जाता है। 40-45 दिन में खमीरीकरण (फर्मेंटेशन) से यह पौष्टिक, सुपाच्य चारा बन जाता है।

शोध अध्ययनों में अगोले के साइलेज में 1 प्रतिशत यूरिया, 2 प्रतिशत शीरा और 0.5 प्रतिशत नमक मिलाने का फॉर्मूला सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है — इसे खिलाने वाली बछियों और गायों में प्रजनन या दूध पर कोई नकारात्मक असर नहीं देखा गया। घरेलू स्तर पर सादा साइलेज (बिना मिश्रण) भी बनाया जा सकता है; मिश्रण वाली विधि अपनाने से पहले पशु पोषण विशेषज्ञ से मात्रा की पुष्टि करा लें।

साइलेज का सबसे बड़ा फायदा: यह 6-8 महीने तक खराब नहीं होता। अक्टूबर-नवंबर में बना साइलेज गर्मियों के चारा संकट में भी काम आता है।

5. पशु को खिलाने के 5 सुनहरे नियम

  1. धीरे-धीरे शुरुआत करें: पहले दिन से पूरा आहार न बदलें। 7-10 दिन में धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं ताकि पशु का पेट अभ्यस्त हो जाए।
  2. अकेला न खिलाएं, मिलाकर खिलाएं: उपचारित अगोला कुल सूखे चारे का आधे से ज्यादा हिस्सा न हो — इसे हरे चारे, भूसे या दाने के साथ मिलाकर दें। संतुलित आहार ही दूध बढ़ाता है।
  3. खनिज मिश्रण साथ दें: अगोले में कैल्शियम-फॉस्फोरस जैसे खनिज कम होते हैं। रोज के आहार में खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्सचर) जरूर शामिल करें।
  4. साफ पानी हमेशा उपलब्ध रखें: सूखा चारा खाने वाले पशु को ज्यादा पानी चाहिए। पानी की कमी से पाचन गड़बड़ाता है।
  5. गर्भवती और दुधारू पशु पर नजर रखें: शोध में उपचारित अगोले का साइलेज गर्भवती गायों में सुरक्षित पाया गया है, फिर भी ब्याने वाली या बीमार पशु को खिलाने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लें। दूध में कोई कमी या पशु में सुस्ती दिखे तो मात्रा घटा दें।

6. हिसाब-किताब — जेब पर कितना असर पड़ेगा

चलिए एक सामान्य हिसाब लगाते हैं। मान लीजिए आपके पास 2 भैंसें हैं और सर्दियों के 3 महीनों में आपको बाहर से चारा खरीदना पड़ता है:

मदअनुमानित खर्च/बचत
1 टन अगोले का यूरिया उपचार (यूरिया + पॉलीथीन + मेहनत)लगभग 800-1,000 रुपये
इतने ही पोषण का भूसा/चारा बाजार से खरीदने परकई हजार रुपये
3 महीने में 2 पशुओं पर संभावित बचत8,000-12,000 रुपये तक

(यह अनुमानित हिसाब है — असली बचत आपके क्षेत्र के चारा भाव और पशुओं की संख्या पर निर्भर करेगी।) सबसे बड़ी बात: अगोला आपके खेत से मुफ्त में निकलता है, जबकि भूसा हर साल महंगा होता जा रहा है। एक बार विधि सीख लेने के बाद यह हर साल की स्थायी बचत बन जाती है।

7. ये 5 गलतियां भूलकर भी न करें

  • यूरिया का घोल सीधे पशु को न पिलाएं — यह जहरीला हो सकता है। यूरिया सिर्फ अगोले के उपचार में इस्तेमाल होता है, पशु के पीने के लिए कभी नहीं।
  • बिना उपचार के ज्यादा अगोला न खिलाएं — कच्चा अगोला ज्यादा खिलाने से पशु कमजोर होता है, जैसा ऊपर समझाया गया है।
  • फफूंद लगा या सड़ा अगोला न खिलाएं — बारिश में भीगा या काला पड़ा अगोला फेंक दें, उससे पशु बीमार पड़ सकता है।
  • अमोनिया की गंध वाला चारा न खिलाएं — उपचार के बाद हवा में फैलाकर गंध उड़ाना जरूरी स्टेप है, इसे छोड़ें नहीं।
  • जलाना जारी न रखें — जो अगोला चारे में न जा सके, उसे खेत में मल्चिंग के रूप में बिछा दें — नमी बचेगी और खरपतवार दबेगा।

8. अगोले के अन्य उपयोग — चारा न बने तो भी बेकार नहीं

अगर आपके पास पशु नहीं हैं तो भी अगोला काम का है। इसे कतरकर खेत में मल्चिंग की तरह बिछाने से मिट्टी की नमी बचती है और खरपतवार कम उगता है। गोबर के साथ मिलाकर कंपोस्ट बनाने पर यह बेहतरीन जैविक खाद बनता है। कुछ किसान इसे पड़ोसी पशुपालकों को बेचकर भी अतिरिक्त आय कमा रहे हैं — चारा संकट के महीनों में उपचारित अगोले की मांग रहती है।

आपके सवाल

सवाल: क्या अगोला खिलाने से दूध में कमी या बदबू आती है? जवाब: सही उपचार के बाद और संतुलित मात्रा में खिलाने पर शोध में दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पाया गया। गंध की समस्या तभी आती है जब अमोनिया की गंध वाला चारा बिना हवा लगाए खिला दिया जाए — स्टेप 6 का पालन करें तो यह दिक्कत नहीं होगी।

सवाल: यूरिया उपचार में यूरिया ज्यादा पड़ जाए तो क्या होगा? जवाब: निर्धारित 4 प्रतिशत से ज्यादा यूरिया डालना खतरनाक हो सकता है — अमोनिया विषाक्तता का खतरा रहता है। हमेशा नाप-तौल कर मात्रा लें और संदेह हो तो कृषि विज्ञान केंद्र से पूछें।

सवाल: क्या छोटे किसान (1-2 पशु वाले) के लिए यह विधि व्यावहारिक है? जवाब: बिल्कुल। 100-200 किलो अगोले का छोटा ढेर भी इसी विधि से तैयार हो सकता है। पॉलीथीन और यूरिया का खर्च कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं आता।

सवाल: उपचारित अगोला कितने दिन तक रखा जा सकता है? जवाब: सूखी, हवादार जगह में 3-4 महीने आसानी से चलता है। साइलेज बनाकर रखा जाए तो 6-8 महीने तक सुरक्षित रहता है।

सवाल: क्या अगोले को बिना कतरे सीधा खिला सकते हैं? जवाब: पशु लंबे टुकड़े चबाने में दिक्कत महसूस करता है और काफी हिस्सा बर्बाद करता है। 2-3 इंच के टुकड़े करने से खपत और पाचन दोनों बेहतर होते हैं।

सवाल: बरसात में भीगा अगोला उपचार के लायक है? जवाब: हल्की नमी ठीक है, लेकिन सड़ा या फफूंद लगा अगोला उपचार के लायक नहीं — उसे खाद के गड्ढे में डाल दें।

निष्कर्ष

गन्ना किसान के लिए अगोला दोहरी कमाई का जरिया है — एक तरफ गन्ने से मिल का भुगतान, दूसरी तरफ अगोले से पशुओं का सस्ता चारा। 4 प्रतिशत यूरिया उपचार एक सिद्ध, सस्ती और सरल विधि है जो बेकार समझे जाने वाले अगोले को 12 प्रतिशत प्रोटीन वाले पौष्टिक चारे में बदल देती है। इस पेराई सत्र में अगोला जलाने के बजाय इसका एक छोटा ढेर उपचार करके देखिए — नतीजा खुद आपकी पशुशाला बताएगी। मात्रा और विधि को लेकर कोई भी संदेह हो तो अपने नजदीकी पशु चिकित्सक या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना न भूलें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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