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गन्ने के साथ मसूर-गेहूं बोकर एक खेत से दो कमाई: 2026-27 रबी में अंतरवर्तीय फसल से ₹30,000 तक अतिरिक्त आय का पूरा फार्मूला

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 13, 2026 • 9 min read
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गन्ने के साथ मसूर-गेहूं बोकर एक खेत से दो कमाई: 2026-27 रबी में अंतरवर्तीय फसल से ₹30,000 तक अतिरिक्त आय का पूरा फार्मूला
अंतिम अपडेट: October 13, 2026 3:40 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

शरदकालीन गन्ना (अक्टूबर-नवंबर में बोया जाने वाला) किसानों के लिए सबसे ज्यादा उपज देने वाला मौसम है — लेकिन बुवाई के बाद पहले 120 दिन खेत की कतारों के बीच की खाली जमीन बेकार पड़ी रहती है। अगर उसी खाली जगह में गेहूं, सरसों, मसूर या आलू जैसी रबी फसल बो दी जाए, तो उसी एकड़ से दो फसलें मिलती हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, सही अंतरवर्तीय फसल से प्रति एकड़ ₹25,000 से ₹30,000 तक की अतिरिक्त सकल कमाई संभव है — यह हिसाब मंडी भाव और फसल के चुनाव पर निर्भर करता है, इसलिए आगे के खंड में हमने खर्च-आय का पूरा गणित खुलकर दिखाया है।

2026-27 का रबी सीजन बस शुरू होने वाला है — यही अंतरवर्तीय फसल बोने का सही समय है। इस गाइड में जानिए: कौन-सी सह फसल गन्ने के साथ जमती है, कतार की दूरी कितनी हो, खाद-पानी का बंटवारा कैसे करें, और वो गलतियां जो एक सीजन का फायदा बर्बाद कर देती हैं।

अंतरवर्तीय फसल क्या है — 120 दिन का “खाली खेत” काम कैसे आएगा

अंतरवर्तीय फसल (intercropping) का मतलब है मुख्य फसल की कतारों के बीच दूसरी फसल उगाना। गन्ना बुवाई के बाद अंकुरण और शुरुआती बढ़वार में करीब 3-4 महीने धीमा रहता है — इस अवधि में कतारों के बीच जमीन, धूप और पानी बेकार जाता है।

शरदकालीन गन्ना आमतौर पर 120 सेंटीमीटर (4 फीट) की दूरी पर बोया जाता है। दो गन्ना-कतारों के बीच करीब 2.5-3 फीट चौड़ी पट्टी खाली रहती है — वहीं दो-तीन पंक्तियां गेहूं, मसूर, चना या सरसों की आराम से आ जाती हैं। सह फसल 100-120 दिन में कट जाती है, जब तक गन्ना अपनी असली बढ़वार शुरू करता है।

यह कोई नया तरीका नहीं है — भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ सहित कई कृषि विज्ञान केंद्र दशकों से अंतरवर्तीय खेती की सिफारिश कर रहे हैं। लेकिन इस काम में अनुशासन जरूरी है: गलत फसल या गलत दूरी चुन ली, तो गन्ना दब जाता है।

कौन-सी सह फसल गन्ने के साथ जमती है — 2026-27 की सूची

सह फसल का नियम सरल है: वो फसल जो गन्ने से छोटी रहे, कम छाया दे, 100-130 दिन में कट जाए, और जिसकी जड़ें गन्ने से पोषण न छीनें। तालिका में उप्र के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प:

सह फसलउपयुक्त किस्म (उदाहरण)बुवाई समयअवधिलगभग उपज (प्रति एकड़)
गेहूंHD-2967, HD-3226, DBW-187नवंबर110-120 दिन8-10 क्विंटल
सरसोंवरुणा, RH-749अक्टूबर अंतिम-नवंबर100-115 दिन5-7 क्विंटल
मसूरDPL-62, IPL-316नवंबर110-125 दिन4-6 क्विंटल
चनाAvarodhi, RVG-202अक्टूबर-नवंबर100-120 दिन5-8 क्विंटल
आलूकुफरी ज्योति, कुफरी बहारअक्टूबर80-100 दिन20-30 क्विंटल
लहसुनG-1, G-41अक्टूबर120-140 दिन15-20 क्विंटल
मटरअरकेलनवंबर90-110 दिन15-20 क्विंटल (हरी फली)
धनियापत्ता/बीज किस्मेंनवंबर90-120 दिनपरिस्थिति अनुसार

दालें (मसूर, चना, मटर) एक छिपा हुआ फायदा देती हैं — इनकी जड़ों की गांठों में राइजोबियम बैक्टीरिया हवा की नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करता है, जिससे गन्ने को बाद में अतिरिक्त नाइट्रोजन मिलती है। सरसों तेल वाली फसल है और बाजार भाव अच्छा रहने पर आमदनी सबसे तेज देती है।

एक बात ध्यान रखें: प्याज और टमाटर जैसी ज्यादा खाद-पानी मांगने वाली सब्जियां अंतरवर्तीय के लिए ठीक नहीं — ये गन्ने से पोषण छीन लेती हैं।

कतार दूरी का गणित: 120 सेंटीमीटर ही क्यों

अंतरवर्तीय खेती में दूरी ही आधी सफलता है। मानक सिफारिश:

  • गन्ना 120 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं — दो कतारों के बीच की पट्टी में सह फसल की 2-3 पंक्तियां लगाएं।
  • जोड़ीदार पंक्ति विधि (60:120 सेंटीमीटर) भी लोकप्रिय है — दो गन्ना-कतारें 60 सेंटीमीटर पर, फिर 120 सेंटीमीटर का खाली गैप। इस गैप में गेहूं की 3 पंक्तियां आसानी से आती हैं।
  • सह फसल की पंक्तियों को गन्ना-कतार से कम से कम 15-20 सेंटीमीटर दूर रखें — ताकि गन्ने के अंकुर दबें नहीं।

अगर गन्ना 75-90 सेंटीमीटर पर बोया है (पुरानी आदत), तो अंतरवर्तीय फसल मत बोएं — जगह कम पड़ती है और गन्ना दब जाता है। पहले दूरी ठीक करें, फिर सह फसल।

खाद का हिसाब: गन्ने और सह फसल की थाली अलग-अलग

सबसे बड़ी गलती यहीं होती है — किसान गन्ने के लिए डाली खाद को ही “काफी” मान लेता है। सच यह है कि सह फसल का अपना भोजन चाहिए, वरना वो गन्ने की थाली में से खाएगी।

  • सह फसल को उसकी पूरी अनुशंसित खाद अलग से दें — जैसे गेहूं को बुवाई के समय डीएपी और यूरिया का बेसल डोज, अपने मानक अनुसार।
  • गन्ने की खाद में कटौती बिल्कुल न करें — बुवाई के समय वाला नाइट्रोजन-फॉस्फोरस का पूरा हिस्सा दें।
  • दाल वाली सह फसल (मसूर, चना) को बीज उपचार के साथ राइजोबियम कल्चर जरूर लगाएं — इससे गन्ने को बाद में मुफ्त नाइट्रोजन मिलती है।
  • सह फसल कटने के बाद उसका पराली/अवशेष खेत में ही दबा दें — यह जैविक पदार्थ बनकर गन्ने की बढ़वार में काम आता है।

खाद की मात्रा हर खेत की मिट्टी के हिसाब से अलग होती है — मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

सिंचाई का तालमेल: एक पानी, दो फायदे

अच्छी खबर: सह फसल को अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती — गन्ने के नियमित पानी में ही सह फसल पल जाती है। बस दो बातों का ध्यान रखें:

  1. पहली सिंचाई समय पर — शरदकालीन बुवाई के 25-30 दिन बाद गन्ने की पहली सिंचाई ही सह फसल के अंकुरण-स्थापना का भी आधार बनती है।
  2. पानी खड़ा न हो — सरसों, मसूर, चना जैसी फसलों को जलभराव से भारी नुकसान होता है। खेत की नालियां साफ रखें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।

सर्दी में पाला पड़ने पर सह फसल (खासकर सरसों, आलू) को हल्की सिंचाई करके बचाया जा सकता है — यह गन्ने के लिए भी फायदेमंद रहता है।

खरपतवार और कीट प्रबंधन में सावधानी

सह फसल होने से खरपतवार कम उगते हैं (जमीन ढकी रहती है), लेकिन दवाई चुनते समय सावधानी जरूरी है:

  • खरपतवारनाशी चुनते वक्त दोनों फसलों की सहनशीलता जांचें — गेहूं वाली दवाई गन्ने पर और गन्ने वाली दवाई सह फसल पर नुकसान कर सकती है। सुरक्षित विकल्प: बुवाई के 25-30 दिन बाद एक हल्की गुड़ाई/निराई, जिससे दोनों फसलों के खरपतवार निकल जाते हैं।
  • सह फसल पर कीट (जैसे सरसों पर माहू/चेपा) दिखे तो दवाई का चुनाव इस तरह करें कि गन्ने के लाभकारी कीटों (ट्राइकोग्रामा जैसे परजीवी) को नुकसान न हो।
  • रसायन का नाम, मात्रा और समय तय करने से पहले कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

खर्च-आय का पूरा हिसाब (प्रति एकड़, 2026-27 अनुमानित)

यह हिसाब एक एकड़ शरदकालीन गन्ने + सह फसल का है। भाव अनुमानित हैं — अंतिम कमाई मंडी भाव पर निर्भर करेगी।

मदअनुमानित राशि
सह फसल बीज (गेहूं 40 किग्रा)₹1,200–1,500
अतिरिक्त खाद (सह फसल हिस्सा)₹1,500–2,000
बुवाई/निराई मजदूरी (अतिरिक्त)₹2,000–2,500
कुल अतिरिक्त खर्च₹4,700–6,000
गेहूं उपज 8-10 क्विंटल × घोषित एमएसपी₹19,400–24,250
अतिरिक्त शुद्ध आय (लगभग)₹13,000–19,000

और अगर सह फसल आलू हो तो गणित और तेज हो जाता है — 20-25 क्विंटल आलू अच्छा भाव मिलने पर ₹20,000–30,000 तक की सकल कमाई दे सकता है, जिससे शुद्ध अतिरिक्त आय ₹15,000–25,000 तक पहुंचती है। लहसुन और मसूर भाव के हिसाब से इससे भी ऊपर जा सकते हैं। यही वजह है कि सही फसल चुनने पर ₹25,000–30,000 तक की अतिरिक्त कमाई का दावा ठोस जमीन पर है — बशर्ते भाव और मौसम साथ दें।

एक और छिपी बचत: सह फसल से खरपतवार कम होते हैं, तो 1-2 निराई की मजदूरी बचती है — और दाल वाली फसल गन्ने की खाद का खर्च भी घटाती है।

वो 7 गलतियां जो सह फसल बर्बाद कर देती हैं

  1. गलत दूरी — 75-90 सेंटीमीटर पर गन्ना बोकर सह फसल डालना। गन्ना दबता है, दोनों फसलें खराब।
  2. देर से बुवाई — नवंबर के बाद बोई सह फसल गन्ने की बढ़वार के समय तक खेत में रहती है और प्रतिस्पर्धा करती है। अक्टूबर-नवंबर की खिड़की न चूकें।
  3. अलग खाद न देना — सह फसल गन्ने की खाद खा जाती है, गन्ना कमजोर।
  4. लंबी अवधि वाली फसल — 140+ दिन वाली फसल मत बोएं; सह फसल 120 दिन के अंदर कट जानी चाहिए।
  5. जलभराव की अनदेखी — दलहन-तिलहन को खड़े पानी में जड़ सड़न होती है।
  6. गलत खरपतवारनाशी — एक फसल की दवाई दूसरी को जला देती है।
  7. कटाई में देरी — सह फसल पकने के बाद खेत में न रखें; देर से कटाई गन्ने की बढ़वार रोकती है।

कटाई का समय: पहले सह फसल, फिर गन्ना

नियम एकदम साफ है: सह फसल पकते ही काट लें — गेहूं मार्च-अप्रैल, सरसों फरवरी-मार्च, आलू जनवरी-फरवरी में निकल जाता है। सह फसल कटते ही गन्ने को भरपूर धूप, जगह और पोषण मिलता है — और खेत में दबाया गया अवशेष उसे खाद की तरह काम आता है।

कटाई के तुरंत बाद गन्ने में पहली टॉप-ड्रेसिंग (यूरिया) दे दें — यह गन्ने की असली बढ़वार का टर्निंग पॉइंट है।

आपके सवाल

प्रश्न 1: क्या सह फसल से गन्ने की उपज घटती है? नहीं — अगर दूरी (120 सेंटीमीटर), सही फसल और अलग खाद का अनुशासन रखा जाए। शोध और किसानों के अनुभव बताते हैं कि सह फसल से गन्ने की उपज पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता, बल्कि दाल वाली फसलें नाइट्रोजन देकर फायदा पहुंचाती हैं। गलत दूरी या देर से कटाई ही नुकसान करती है।

प्रश्न 2: पेड़ी (रटून) गन्ने में भी सह फसल बो सकते हैं? पेड़ी में कतारें पहले से तय होती हैं और शुरुआती बढ़वार तेज होती है, इसलिए पेड़ी में अंतरवर्तीय फसल की सलाह आमतौर पर नहीं दी जाती। यह तरीका शरदकालीन नई बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त है।

प्रश्न 3: गन्ने के साथ गेहूं बोने से गेहूं की उपज कितनी आती है? 120 सेंटीमीटर की पट्टी में 2-3 पंक्ति गेहूं से प्रति एकड़ लगभग 8-10 क्विंटल उपज मिलती है — यह खाली गेहूं के खेत से कम है, लेकिन यह जमीन वैसे भी खाली पड़ी होती।

प्रश्न 4: सह फसल के लिए बीज कितना लगेगा? पूरे खेत के मानक से करीब 40-50% बीज लगता है, क्योंकि सह फसल खेत के हिस्से में ही बोई जाती है। जैसे गेहूं में प्रति एकड़ लगभग 40 किग्रा बीज पर्याप्त रहता है।

प्रश्न 5: क्या ड्रिप सिंचाई वाले खेत में सह फसल संभव है? हां, बल्कि ड्रिप में और भी आसान है — गन्ने की ड्रिप लाइन के बीच सह फसल को पानी मिल जाता है। बस ड्रिप लाइन बिछाते समय सह फसल की पंक्तियों का ध्यान रखें।

प्रश्न 6: 2026-27 में सह फसल की बुवाई का सबसे सही समय कब है? शरदकालीन गन्ना अक्टूबर में बोएं और सह फसल उसी के 10-15 दिन के अंदर (अक्टूबर अंतिम सप्ताह से नवंबर मध्य तक) बो दें। देर से बुवाई से सह फसल गन्ने की बढ़वार के समय तक खेत में फंसी रहती है।

निष्कर्ष

एक एकड़ शरदकालीन गन्ने के साथ सही सह फसल बोना खेती का सबसे सस्ता “दूसरा आय स्रोत” है — अतिरिक्त खर्च ₹5,000-6,000 के आसपास, और संभावित अतिरिक्त कमाई ₹25,000-30,000 तक। शर्तें तीन हैं: 120 सेंटीमीटर की दूरी, 120 दिन में कटने वाली फसल, और सह फसल की अलग खाद। 2026-27 का रबी सीजन शुरू हो चुका है — बुवाई की खिड़की अभी खुली है, देर न करें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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