
इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में नया पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते शेष हैं। ऐसे में राज्य के 48 लाख से अधिक गन्ना किसानों की सबसे बड़ी चिंता पिछले पेराई सत्र (2025-26) के बकाया गन्ना भुगतान (Pending Cane Dues) को लेकर है।
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17(3) के अनुसार चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर भुगतान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि मिल 14 दिन के अंदर भुगतान नहीं करती, तो किसान को 15% वार्षिक दर से ब्याज (Interest) पाने का कानूनी अधिकार है।
इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि उत्तर प्रदेश में कुल कितना भुगतान हो चुका है, किन मिलों ने 100% भुगतान कर दिया है और डिफॉल्टर मिलों से 15% ब्याज सहित अपना पैसा कैसे प्राप्त करें।
उत्तर प्रदेश शासन और गन्ना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए किसानों का 100% गन्ना मूल्य समय पर उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया है:
| चीनी मिल समूह / मिल का नाम | जिला | भुगतान प्रतिशत | औसत भुगतान समय |
|---|---|---|---|
| त्रिवेणी इंजीनियरिंग (सभी 7 मिलें) | मुजफ्फरनगर, देवबंद, सबितगढ़, खतौली आदि | 100% | 7 से 10 दिन |
| बलरामपुर चीनी मिल्स (सभी 10 इकाइयां) | बलरामपुर, बभनान, हैदरगढ़, अकबरपुर | 100% | 8 से 12 दिन |
| डीसीएम श्रीराम समूह | हरदोई, अजबापुर, रूपापुर | 100% | 6 से 9 दिन |
| धामपुर बायो-ऑर्गेनिक्स | बिजनौर, संभल, मीरगंज | 99.8% | 10 से 14 दिन |
| दौराला शुगर मिल (DCM) | मेरठ | 100% | 7 दिन |
दूसरी ओर, कुछ निजी मिल समूहों की लापरवाही के कारण हजारों किसानों का भुगतान अभी भी फंसा हुआ है:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट किया है कि:
$$\text{देय ब्याज (Interest)} = \frac{\text{बकाया राशि} \times 15 \times \text{विलंब के दिन}}{365 \times 100}$$
यदि आपकी मिल ने 14 दिन से अधिक समय से भुगतान रोक रखा है:
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर को नए सत्र की शुरुआत से पहले सभी डिफॉल्टर चीनी मिलों को पुराने सत्र का 100% भुगतान निपटाना होगा, अन्यथा उनके नए सत्र के पेराई लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
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