
मुख्य बिंदु (Quick Summary): खेत में गन्ना ज्यादा है लेकिन सट्टे पर पर्चियां कम मिल रही हैं? जानिए उत्तर प्रदेश गन्ना सट्टा नियमावली के 5 वैधानिक नियम, बेसिक कोटा बढ़ाने का 85% फॉर्मूला और अतिरिक्त सट्टा आवेदन।
उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों के सामने पेराई सत्र के दौरान सबसे बड़ी व्यावहारिक व आर्थिक पीड़ा यह होती है कि ‘खेत में 500 क्विंटल गन्ना खड़ा है, लेकिन सट्टे पर पर्चियां मात्र 200 क्विंटल (लगभग 20-25 पर्ची) की ही मिली हैं’। जब किसान की पर्चियां समाप्त हो जाती हैं और खेत में गन्ना खड़ा रह जाता है, तो किसान को मजबूरन अपना गन्ना सस्ते दामों पर कोल्हू या क्रशर (Crushers/Jaggery Units) पर ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल के औने-पौने भाव में बेचना पड़ता है जिससे प्रति एकड़ ₹40,000 से ₹60,000 का सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
किसानों को अक्सर यह गलतफहमी होती है कि बेसिक कोटा (Basic Quota) एक बार तय होने के बाद बदला नहीं जा सकता। जबकि हकीकत यह है कि उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 और गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ द्वारा जारी ‘सट्टा एवं आपूर्ति नीति’ के तहत किसानों को अपना बेसिक कोटा और पर्चियों की संख्या कानूनी रूप से बढ़वाने के 5 अचूक वैधानिक अधिकार दिए गए हैं।
इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम बेसिक कोटे की गणितीय गणना, 3-वर्षीय औसत चक्र, जीपीएस सर्वे रकबा वृद्धि, अतिरिक्त सट्टा (Additional Satta) पाने के नियम और समिति में आपत्ति दर्ज कराने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया विस्तार से समझेंगे।
1. बेसिक कोटा (Basic Quota) क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?
गन्ना आपूर्ति व्यवस्था में बेसिक कोटा वह मानक मात्रा (क्विंटल में) है जो चीनी मिल को आपके सट्टे पर अनिवार्य रूप से खरीदनी ही होती है।
3-वर्षीय औसत फॉर्मूला (3-Year Average Formula):
$$\text{नया बेसिक कोटा} = \left(\frac{\text{सत्र 2023-24 आपूर्ति} + \text{सत्र 2024-25 आपूर्ति} + \text{सत्र 2025-26 आपूर्ति}}{3}\right) \times 85%$$
- 85% का सिद्धांत: यदि किसी किसान ने पिछले 3 वर्षों में औसतन 1,000 क्विंटल गन्ना प्रतिवर्ष चीनी मिल को सप्लाई किया है, तो उसका आगामी सत्र के लिए स्थायी बेसिक कोटा $1000 \times 0.85 = \mathbf{850 \text{ क्विंटल}}$ निर्धारित किया जाएगा।
- प्रति पर्ची वजन: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्यतः 1 पर्ची = 9 क्विंटल (ट्रॉली/बुग्गी के अनुसार 18 या 27 क्विंटल) मानी जाती है। अतः 850 क्विंटल कोटे पर किसान को लगभग $\frac{850}{9} \approx \mathbf{94 \text{ पर्चियां}}$ मिलेंगी।
2. बेसिक कोटा व पर्चियां बढ़ाने के 5 अचूक वैधानिक तरीके
तरीका 1: शत-प्रतिशत पर्चियों की आपूर्ति करना (100% Slip Utilization)
बेसिक कोटा बढ़ाने का सबसे पहला और स्थायी नियम यह है कि चालू सत्र में मिल द्वारा जितनी भी पर्चियां आपको जारी की जाएं, उन सभी पर्चियों पर अपनी ही तौल कराएं। यदि आप पर्ची लैप्स होने देंगे या कोल्हू पर गन्ना बेचेंगे, तो 3 साल का औसत गिर जाएगा और अगले साल कोटा स्वतः घट जाएगा।
तरीका 2: जीपीएस सर्वे में वास्तविक रकबा और नई पेड़ी दर्ज कराना
जून-जुलाई के दौरान जब गन्ना पर्यवेक्षक जीपीएस मशीन लेकर सर्वे करने आता है, तो मौके पर उपस्थित रहकर अपने पूरे खेत की पैमाइश कराएं। यदि आपने गेहूं काटकर ग्रीष्मकालीन या शरदकालीन नया गन्ना बोया है, तो उसे सर्वे शीट में दर्ज कराकर हस्ताक्षर करें।
तरीका 3: ‘आपदा वर्ष निष्कासन (Disaster Year Dropping Rule)’
यदि पिछले 3 वर्षों में से किसी एक वर्ष में आपके खेत में बाढ़, सूखा या रेड रॉट की बीमारी के कारण आपूर्ति 50% से कम रही थी, तो आप गन्ना विकास समिति में प्रार्थना पत्र देकर उस विशिष्ट खराब वर्ष को औसत गणना से बाहर (Drop) करवा सकते हैं। इससे आपका औसत केवल शेष दो अच्छे वर्षों के आधार पर निकाला जाएगा और कोटा तुरंत बढ़ जाएगा।
तरीका 4: अतिरिक्त सट्टा (Additional Quota) का लाभ लेना
यदि आपका बेसिक कोटा 400 क्विंटल है लेकिन इस वर्ष खेत में पैदावार 700 क्विंटल है, तो शासन के नियमानुसार आप ‘अतिरिक्त सट्टा’ प्राप्त कर सकते हैं:
- सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक): कुल कोटे का 100% तक अतिरिक्त सट्टा (अधिकतम 600 क्विंटल तक)।
- लघु किसान (1 से 2 हेक्टेयर): 50% तक अतिरिक्त सट्टा।
- बृहद किसान: 25% तक अतिरिक्त सट्टा (पखवाड़ा 8 से 11 के बीच फ्री पर्चियों के रूप में)।
तरीका 5: जमीन क्रय करने या वरासत दर्ज होने पर सट्टा जोड़ना (Clubbing)
यदि आपने हाल ही में कोई नया कृषि खेत खरीदा है अथवा पैतृक जमीन की वरासत आपके नाम दर्ज हुई है, तो नई खतौनी संलग्न करके पुराना बेसिक कोटा नए रकबे के साथ जोड़कर (Clubbing of Quotas) पर्चियों की संख्या दोगुनी कराई जा सकती है।
3. पर्ची बढ़ाने के लिए ‘प्रारूप-घ’ आपत्ति आवेदन की 4-चरणीय प्रक्रिया
यदि CaneUp पोर्टल (enquiry.caneup.in) पर प्री-कैलेंडर देखने के बाद आपको लगता है कि आपका बेसिक कोटा कम दर्ज किया गया है, तो प्रतिवर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच ‘सट्टा मेला / आपत्ति निवारण’ में आवेदन करें:
[enquiry.caneup.in पर प्री-कैलेंडर जांचें] ➔ [समिति से प्रारूप-घ फॉर्म लें] ➔ [खतौनी + जीपीएस सर्वे रसीद लगाएं] ➔ [ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक आदेश] ➔ [पोर्टल पर पर्ची वृद्धि]
- चरण 1: सहकारी गन्ना विकास समिति के कार्यालय या अपने गांव के गन्ना विकास केंद्र पर जाएं।
- चरण 2: ‘सट्टा संशोधन एवं कोटा वृद्धि प्रार्थना पत्र (Form-D)’ प्राप्त करें।
- चरण 3: फॉर्म में अपना ग्रोवर कोड, वास्तविक गन्ना रकबा, वर्तमान बेसिक कोटा और आपेक्षित कोटे का विवरण भरें तथा नवीनतम खतौनी व घोषणा पत्र संलग्न करें।
- चरण 4: ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (SCDI) द्वारा स्थलीय सत्यापन आख्या के आधार पर आदेश पारित किया जाता है और 7 कार्य दिवसों में CaneUp ERP पोर्टल पर पर्चियों की संख्या बढ़ा दी जाती है।
4. सट्टा विभाजन (Bifurcation) व संयुक्त परिवार में कोटा वितरण नियम
जब परिवार में पैतृक सट्टा 1,500 क्विंटल का होता है और तीन भाइयों के बीच सट्टे का बंटवारा होता है, तो निम्नलिखित नियम लागू होते हैं:
- समान अंश विभाजन: राजस्व खतौनी में दर्ज भूमि अंश (Share) के अनुसार 1,500 क्विंटल को 500-500 क्विंटल के 3 स्वतंत्र सट्टों में बांट दिया जाता है।
- नए सट्टे पर अतिरिक्त पर्ची पात्रता: अलग सट्टा बनते ही प्रत्येक भाई ‘लघु/सीमांत किसान’ की श्रेणी में आ जाता है जिससे तीनों भाइयों को अपने-अपने सट्टे पर 50% से 100% तक अतिरिक्त पर्चियों (Free Slips) की पात्रता मिल जाती है।
5. उत्तर प्रदेश के प्रमुख चीनी मिल क्षेत्रों में बेसिक कोटा विवाद और उनका समाधान
| जनपद / मिल क्षेत्र | प्रमुख समस्या | आधिकारिक समाधान प्रक्रिया |
|---|---|---|
| मुजफ्फरनगर (खतौली, मंसूरपुर) | अधिक पैदावार के बावजूद बेसिक कोटा पुराना रहना | सट्टा मेले में ‘फसल कटाई प्रयोग (CCE) रसीद’ लगाकर अतिरिक्त कोटा लें |
| लखीमपुर खीरी (गोला, पलिया) | बाढ़ के कारण पिछले साल की शून्य आपूर्ति | ‘आपदा वर्ष निष्कासन (Rule of Calamity Year Exclusion)’ का प्रार्थना पत्र दें |
| शामली व बागपत | जीपीएस सर्वे में पेड़ी का रकबा पौधा गन्ने में दर्ज होना | पर्यवेक्षक की स्थलीय जांच कराकर सट्टा संशोधन प्रारूप-घ जमा करें |
| बिजनौर (धामपुर, स्योहारा) | भूमि की चकबंदी (Consolidation) के बाद गाटा संख्या बदलना | नई चकबंदी खतौनी (CH-45) संलग्न करके कोटा रि-मैपिंग कराएं |
6. बेसिक कोटे से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियां एवं कैलेंडर 2026
- 15 जून से 15 जुलाई: जीपीएस सर्वे एवं किसान घोषणा पत्र (Declaration Form) सत्यापन।
- 1 अगस्त से 20 अगस्त: प्राथमिक सर्वे सट्टा प्रदर्शन (Draft Satta Display in Villages)।
- 1 सितंबर से 30 सितंबर: सट्टा संशोधन मेला व प्रारूप-घ आपत्ति निस्तारण (Final Dispute Resolution)।
- 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर: अंतिम 12 पखवाड़े का सट्टा आपूर्ति कैलेंडर एवं पर्ची निर्गमन लाइव होना।
7. बेसिक कोटा बढ़ाने का 12-माह का वार्षिक एक्शन प्लान (Yearly Action Calendar)
| महीना / समय सीमा | किसान को क्या कार्रवाई करनी है? | कोटा व पर्ची पर प्रभाव |
|---|---|---|
| जनवरी से मार्च | चालू पेराई सत्र की सभी निर्गत पर्चियों पर समय पर 100% आपूर्ति पूरी करें | 3-वर्षीय औसत का आधार मजबूत होता है |
| अप्रैल से मई | ग्रीष्मकालीन खाली खेतों में गन्ने की नई बुवाई व पेड़ी की जुताई पूरी करें | आगामी जीपीएस सर्वे हेतु नया रकबा तैयार |
| जून से जुलाई | गन्ना पर्यवेक्षक के जीपीएस सर्वे के समय स्वयं खेत पर उपस्थित होकर पैमाइश कराएं | वास्तविक रकबा 100% कंप्यूटर में दर्ज |
| अगस्त (1 से 20 अगस्त) | ग्राम पंचायत में प्रदर्शित ‘कच्चा सट्टा / प्री-कैलेंडर’ में अपने रकबे व कोटे की जांच करें | लिपिकीय त्रुटि तुरंत पकड़ में आती है |
| सितंबर (1 से 30 सितंबर) | सट्टा संशोधन मेले में प्रारूप-घ भरकर अतिरिक्त सट्टा व कोटा वृद्धि का आवेदन दें | ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक द्वारा कोटा स्वीकृति |
| अक्टूबर (15 अक्टूबर) | eGanna ऐप पर अंतिम 12 पखवाड़े का सट्टा कैलेंडर डाउनलोड करें और पर्चियों की पुष्टि करें | बंपर पर्चियों के साथ समय पर पेराई शुरू |
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)
गन्ना बेसिक कोटा बढ़ाने का सरकारी फॉर्मूला क्या है?
बेसिक कोटा पिछले 3 वर्षों में मिल को की गई वास्तविक आपूर्ति के औसत का 85% होता है। चालू सत्र में 100% पर्चियों की आपूर्ति करने से अगले साल कोटा बढ़ जाता है।
खेत में गन्ना ज्यादा होने पर क्या अतिरिक्त पर्चियां मिल सकती हैं?
हां, शासन के नियमानुसार सीमांत और लघु किसानों को उनके बेसिक कोटे के अतिरिक्त 50% से 100% तक अतिरिक्त सट्टा (Free Parchi) पखवाड़ा 8 से 11 में दिया जाता है।
प्री-कैलेंडर में पर्ची कम दिखने पर आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि क्या है?
प्रतिवर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलने वाले ‘सट्टा संशोधन मेला’ के दौरान किसान अपनी गन्ना समिति में आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
क्या नया खेत खरीदने पर बेसिक कोटा बढ़ता है?
हां, नई खतौनी और दाखिल खारिज की प्रति समिति में जमा करके नए रकबे के अनुपात में बेसिक कोटा तुरंत बढ़ाया जा सकता है।
एक पर्ची में कितने क्विंटल गन्ने का वजन माना जाता है?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 सामान्य पर्ची 9 क्विंटल (बड़ी ट्रॉली सट्टे पर 18 या 27 क्विंटल) की मानी जाती है।
यदि किसी साल बाढ़ से गन्ना सूख गया हो तो क्या कोटा घट जाएगा?
नहीं, किसान ‘आपदा वर्ष निष्कासन नियम’ के तहत प्रार्थना पत्र देकर उस आपदा वर्ष को 3-वर्षीय औसत गणना से बाहर करवा सकता है।
eGanna ऐप पर बेसिक कोटा कैसे चेक करें?
eGanna ऐप में लॉगिन करके ‘Grower Details’ में जाएं, वहां ‘Basic Quota (in Quintals)’ स्पष्ट लिखा दिखाई देता है।
क्या गन्ना पर्यवेक्षक खेत का सर्वे बढ़ा सकता है?
हां, यदि भौतिक रूप से खेत में गन्ना मौजूद है, तो पर्यवेक्षक स्थलीय जांच करके वास्तविक रकबा दर्ज करता है।
सट्टा आपत्ति फॉर्म के साथ कौन से दस्तावेज लगाने होते हैं?
नवीनतम राजस्व खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और किसान घोषणा पत्र संलग्न करना अनिवार्य होता है।
कोटा न बढ़ने पर उच्चाधिकारियों से कहां अपील करें?
आप जिला गन्ना अधिकारी (DCO) कार्यालय में द्वितीय अपील कर सकते हैं अथवा टोल-फ्री 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र
- उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
- गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
- ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
- विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in
8. सट्टा संशोधन अवधि (1 से 15 सितंबर) में कोटा बढ़ाने की विस्तृत चेकलिस्ट एवं प्रपत्र
उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त के वार्षिक सट्टा एवं आपूर्ति नीति आदेशों के अनुसार, प्रतिवर्ष 1 सितंबर से 15 सितंबर के मध्य राज्य की सभी सहकारी गन्ना समितियों में ‘सट्टा प्रदर्शन एवं आपत्ति निस्तारण मेला’ आयोजित किया जाता है। इस अवधि में बेसिक कोटा बढ़वाने की आधिकारिक प्रक्रिया निम्नलिखित है:
(क) बेसिक कोटा एवं सट्टा वृद्धि हेतु आवश्यक दस्तावेज चेकलिस्ट:
- प्रपत्र संख्या 4 (आपत्ति एवं संशोधन आवेदन पत्र): समिति कार्यालय से प्राप्त कर पूर्ण भरा हुआ आवेदन।
- नवीनतम भू-अभिलेख (Khasra-Khatauni): राजस्व विभाग द्वारा प्रमाणित खतौनी की प्रति, जिसमें किसान की कुल जोत का स्पष्ट विवरण हो।
- गन्ना सर्वेक्षण पर्ची (Survey Slip): वर्ष 2026-27 के दौरान जीपीएस व हैंडहेल्ड मशीन द्वारा किए गए सर्वेक्षण की प्रमाणित रसीद।
- उपज बढ़ोतरी घोषणा पत्र (Yield Enhancement Declaration): यदि किसान ने ड्रिप सिंचाई, ट्रेंच विधि या सह-फसली खेती अपनाकर प्रति हेक्टेयर 1,000 क्विंटल से अधिक उत्पादन लिया है, तो कृषि विशेषज्ञ या ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (CDI) द्वारा सत्यापित उत्पादकता प्रमाण पत्र।
(ख) सट्टा वृद्धि के 3 प्रमुख कानूनी नियम:
- अधिकतम सट्टा सीमा (Bonding Ceiling):
- सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक): अधिकतम 850 क्विंटल तक सट्टा।
- लघु किसान (1 से 2 हेक्टेयर): अधिकतम 1,700 क्विंटल तक सट्टा।
- वृहद किसान (2 हेक्टेयर से अधिक): अधिकतम 3,000 क्विंटल तक सट्टा (अतिरिक्त सट्टे के साथ)।
- पारिवारिक सट्टा विभाजन (Partition of Satta): यदि पिता के नाम दर्ज सट्टे का विभाजन बेटों के मध्य होना है, तो राजस्व खतौनी में नाम दर्ज होने के आधार पर प्रत्येक हिस्सेदार का नया बेसिक कोटा उनकी भूमि के अनुपात में अलग-अलग निर्धारित किया जाता है।
- अपील का अधिकार: यदि समिति सचिव आपके वैध आवेदन पर विचार नहीं करते हैं, तो 15 सितंबर के बाद 7 दिनों के भीतर आप संबंधित उप गन्ना आयुक्त (Deputy Cane Commissioner) के समक्ष प्रथम अपील दायर कर सकते हैं।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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