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प्रति एकड़ कितना गन्ना बीज चाहिए? 2026-27 में बीज दर, सेट्स गिनती और 25% तक बीज बचत का पूरा हिसाब-किताब

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 2, 2026 • 12 min read
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प्रति एकड़ कितना गन्ना बीज चाहिए? 2026-27 में बीज दर, सेट्स गिनती और 25% तक बीज बचत का पूरा हिसाब-किताब
अंतिम अपडेट: November 2, 2026 7:02 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बुवाई से पहले हर गन्ना किसान के मन में एक ही सवाल होता है — प्रति एकड़ कितना बीज डालें कि न तो बीज बर्बाद हो और न ही खेत में जगह खाली रह जाए। सीधा जवाब यह है कि परंपरागत तरीके से तीन आँख वाले सेट्स बोने पर प्रति एकड़ लगभग 28 से 32 क्विंटल बीज गन्ना लगता है, चौड़ी कतार वाली ट्रेंच विधि में यह मात्रा घटकर लगभग 22 से 26 क्विंटल रह जाती है, और सिंगल बड चिप या एसटीपी नर्सरी विधि अपनाने पर मुख्य खेत के लिए बीज गन्ने की जरूरत और भी कम हो जाती है क्योंकि नर्सरी में पौधे तैयार करके रोपे जाते हैं।

लेकिन यह जवाब तभी काम करता है जब आप अपने खेत की कतार दूरी, गन्ने की किस्म और सेट्स के आकार के हिसाब से गिनती करके बीज मंगवाएं। अंदाजे से बीज मंगवाने पर या तो बुवाई के बीच में बीज कम पड़ जाता है और आधा खेत सूखे बीज से बोना पड़ता है, या फिर ज्यादा बीज बच जाता है जो सूखकर बेकार हो जाता है। इस गाइड में आप सीखेंगे कि सेट्स की गिनती कैसे करें, किस विधि में कितना बीज लगता है, अच्छा बीज कैसे पहचानें और 25 प्रतिशत तक बीज बचाने के व्यावहारिक उपाय क्या हैं।

बीज दर हर खेत में एक जैसी क्यों नहीं होती

गन्ने का बीज दरअसल बीज नहीं, बल्कि गन्ने के टुकड़े होते हैं जिन्हें सेट्स कहते हैं। एक सेट में दो या तीन आँखें होती हैं, और हर आँख से एक पौधा निकलता है। बीज की मात्रा चार बातों पर निर्भर करती है। पहली, कतारों के बीच की दूरी — कतारें जितनी चौड़ी होंगी, प्रति एकड़ कतारों की कुल लंबाई उतनी ही कम होगी और बीज भी कम लगेगा। दूसरी, सेट्स का आकार — तीन आँख वाले सेट्स लंबे होते हैं इसलिए उनकी संख्या कम लगती है, जबकि दो आँख वाले सेट्स छोटे होते हैं इसलिए संख्या ज्यादा लगती है, हालांकि वजन का अंतर उतना बड़ा नहीं होता। तीसरी, गन्ने की किस्म — मोटे और भारी गन्ने की किस्मों में प्रति सेट वजन ज्यादा होता है, पतले गन्ने में कम। चौथी, अंकुरण की दर — अगर बीज स्वस्थ है और नमी ठीक है तो 85 प्रतिशत से ज्यादा आँखें फूटती हैं, लेकिन कमजोर या सूखे बीज में यह दर गिरकर 60 प्रतिशत तक आ सकती है, जिससे खाली जगह भरने के लिए अलग से बीज चाहिए होता है।

इसलिए बीज दर को हमेशा क्विंटल और सेट्स की संख्या, दोनों तरह से समझना चाहिए। सिर्फ क्विंटल में हिसाब करने से मोटे-पतले गन्ने का फर्क छिप जाता है, और सिर्फ संख्या में हिसाब करने से सेट्स के आकार का फर्क छिप जाता है। सही तरीका यह है कि पहले अपने खेत की कतार दूरी के हिसाब से सेट्स की संख्या निकालें, फिर उस संख्या को औसत सेट वजन से गुणा करके क्विंटल निकालें।

सेट्स की गिनती का आसान हिसाब

गिनती का सूत्र बहुत सीधा है। एक एकड़ का क्षेत्रफल लगभग 4047 वर्ग मीटर होता है। इसे कतारों के बीच की दूरी (मीटर में) से भाग देने पर प्रति एकड़ कतारों की कुल लंबाई मीटर में मिल जाती है। फिर इस लंबाई को एक सेट की लंबाई से भाग देने पर सेट्स की संख्या मिल जाती है।

उदाहरण के लिए 90 सेंटीमीटर (3 फुट) की कतार दूरी पर प्रति एकड़ कतारों की कुल लंबाई लगभग 4500 मीटर होती है। अगर तीन आँख वाला सेट औसतन 35 से 40 सेंटीमीटर लंबा है और सेट्स को सिरे से सिरा मिलाकर बोया जाता है, तो लगभग 11,000 से 13,000 सेट्स प्रति एकड़ लगेंगे। एक स्वस्थ सेट का वजन आमतौर पर 200 से 250 ग्राम के आसपास होता है, इसलिए कुल वजन लगभग 25 से 32 क्विंटल प्रति एकड़ बैठता है। यही वजह है कि अलग-अलग स्रोतों में बीज दर के आंकड़े थोड़े अलग दिखते हैं — वे अलग कतार दूरी और अलग सेट आकार मानकर चलते हैं।

कतार दूरीप्रति एकड़ कतार लंबाई (लगभग)तीन आँख सेट्स (लगभग)बीज मात्रा (लगभग)
75 सेंटीमीटर5400 मीटर13,500–15,00030–35 क्विंटल
90 सेंटीमीटर4500 मीटर11,000–13,00028–32 क्विंटल
120 सेंटीमीटर (ट्रेंच)3375 मीटर8,500–10,00022–26 क्विंटल
150 सेंटीमीटर (चौड़ी ट्रेंच)2700 मीटर7,000–8,50018–22 क्विंटल

ये आंकड़े अनुमानित हैं और किस्म, सेट्स की मोटाई और बुवाई की विधि के हिसाब से थोड़े ऊपर-नीचे हो सकते हैं। लेकिन हिसाब का तरीका यही है, और इसी तरीके से आप अपने खेत के लिए सही मात्रा निकाल सकते हैं। ध्यान रहे कि ट्रेंच विधि में कतार चौड़ी होने से बीज कम लगता है, लेकिन गन्ने के कल्ले ज्यादा निकलते हैं और प्रति कतार उपज बढ़ जाती है, इसलिए कम बीज का मतलब कम उपज नहीं है।

बुवाई की विधि के हिसाब से बीज दर

परंपरागत समतल या नाली विधि में तीन आँख वाले सेट्स सिरे से सिरा मिलाकर बोए जाते हैं और बीज दर सबसे ज्यादा, लगभग 28 से 32 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है। यह विधि सरल है और छोटे किसान के लिए सबसे आसान है, लेकिन इसमें बीज की खपत ज्यादा होती है।

ट्रेंच विधि में कतारें 120 सेंटीमीटर या उससे चौड़ी होती हैं, इसलिए बीज दर घटकर लगभग 22 से 26 क्विंटल प्रति एकड़ रह जाती है। साथ में अंतरवर्तीय फसल की जगह भी मिल जाती है, जिससे एक ही खेत से दोहरी कमाई का रास्ता खुलता है।

दो आँख वाले सेट्स की विधि में सेट्स छोटे होते हैं, इसलिए संख्या ज्यादा लगती है — लगभग 15,000 से 18,000 सेट्स प्रति एकड़ — लेकिन कुल वजन लगभग उतना ही रहता है, 26 से 30 क्विंटल के आसपास। दो आँख वाले सेट्स का फायदा यह है कि एक ही गन्ने से ज्यादा सेट्स बनते हैं और बीज गन्ने की बर्बादी कम होती है।

सिंगल बड चिप विधि में गन्ने की सिर्फ एक आँख वाला छोटा टुकड़ा लेकर नर्सरी में पौधा तैयार किया जाता है और फिर मुख्य खेत में रोपाई की जाती है। इसमें बीज गन्ने की जरूरत सबसे कम होती है — नर्सरी के लिए एक एकड़ की रोपाई हेतु लगभग 2 से 4 क्विंटल बीज गन्ना ही पर्याप्त माना जाता है, बशर्ते नर्सरी की देखभाल ठीक से हो। एसटीपी यानी स्पेस्ड ट्रांसप्लांटिंग तकनीक भी इसी सिद्धांत पर काम करती है। इन विधियों में शुरुआती मेहनत ज्यादा लगती है, लेकिन बीज की बचत सबसे बड़ी होती है और पौधों की एकरूपता भी बेहतर रहती है।

किस्म और बीज गन्ने की उम्र का फर्क

बीज के लिए हमेशा 8 से 10 महीने पुराना, स्वस्थ और रोगमुक्त गन्ना चुनें। बहुत पुराना गन्ना लेने से आँखों की फूटने की क्षमता घट जाती है और बहुत छोटा गन्ना लेने से सेट्स कमजोर बनते हैं। गन्ने के ऊपरी एक-तिहाई हिस्से की आँखें सबसे ज्यादा सक्रिय होती हैं, इसलिए बीज के लिए ऊपर का हिस्सा बेहतर माना जाता है। निचले हिस्से की आँखें अपेक्षाकृत कम सक्रिय होती हैं।

मोटी किस्मों में प्रति सेट वजन ज्यादा होता है, इसलिए क्विंटल में बीज दर थोड़ी ज्यादा दिखेगी, लेकिन सेट्स की संख्या लगभग उतनी ही रहेगी। पतली किस्मों में वजन कम होगा, इसलिए क्विंटल कम दिखेगा। यही कारण है कि बीज खरीदते समय सिर्फ क्विंटल के भाव पर फैसला न करें — यह भी देखें कि उस क्विंटल में कितने स्वस्थ सेट्स बन रहे हैं और उनकी आँखें कैसी हैं।

लाल सड़न (रेड रॉट) या अन्य रोग से ग्रस्त गन्ने को बीज के लिए कभी न लें। रोगग्रस्त बीज से न सिर्फ अंकुरण घटता है, बल्कि रोग पूरे खेत में फैल जाता है और अगले साल पेड़ी की फसल भी कमजोर हो जाती है। बीज गन्ने को काटते समय गन्ने के अंदर का रंग देखें — साफ और हल्का रंग स्वस्थ बीज की निशानी है, जबकि लाल या भूरे धब्बे रोग का संकेत हैं।

अच्छा बीज पहचानने के 7 मानक

पहला, गन्ना रोगमुक्त और कीटमुक्त हो — तना छेदक या पायरिला से ग्रस्त गन्ना बीज के लायक नहीं है। दूसरा, आँखें उभरी हुई, साफ और सूखी न हों — सिकुड़ी या काली आँखें नहीं फूटेंगी। तीसरा, गन्ना न तो ज्यादा सूखा हो और न ही ज्यादा गीला — सूखे गन्ने की आँखें मर जाती हैं। चौथा, गन्ने की उम्र 8 से 10 महीने के बीच हो। पाँचवाँ, बीज गन्ना उसी किस्म का हो जो आपके क्षेत्र और मिल के लिए स्वीकृत है, ताकि पेराई के समय किस्म को लेकर कोई परेशानी न हो। छठा, सेट्स काटते समय धारदार औजार का इस्तेमाल करें ताकि आँखों को चोट न लगे — कुचली हुई आँखें सड़ जाती हैं। सातवाँ, बीज गन्ने को काटने के बाद ज्यादा दिन तक खुले में न रखें — 2 से 3 दिन के अंदर बुवाई कर देना सबसे अच्छा रहता है, और अगर रखना ही पड़े तो छायादार जगह पर पानी छिड़ककर रखें।

बीज उपचार भी उतना ही जरूरी है जितना बीज का चयन। सेट्स को बुवाई से पहले फफूंदनाशक या जैविक उपचार से उपचारित किया जाता है ताकि मिट्टी में मौजूद फफूंद से शुरुआती सड़न न हो। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। उपचार के बाद सेट्स को थोड़ी देर छाया में सुखाकर ही बोएं, गीले सेट्स को सीधे धूप में न डालें।

25 प्रतिशत तक बीज बचाने के व्यावहारिक उपाय

पहला उपाय है कतार दूरी बढ़ाना — जहाँ संभव हो, 75 सेंटीमीटर की जगह 90 या 120 सेंटीमीटर की कतार रखें, खासकर ट्रेंच विधि में। दूसरा उपाय है दो आँख वाले सेट्स का इस्तेमाल — इससे एक गन्ने से ज्यादा सेट्स बनते हैं। तीसरा उपाय है सिंगल बड नर्सरी — एक एकड़ की रोपाई के लिए नर्सरी विधि से बीज गन्ने की खपत कई गुना घट जाती है। चौथा उपाय है अच्छा अंकुरण — स्वस्थ बीज, सही नमी और सही गहराई पर बुवाई से अंकुरण 85 प्रतिशत से ऊपर रहता है, जिससे खाली जगह भरने के लिए अलग से बीज नहीं चाहिए होता। पाँचवाँ उपाय है सही गहराई — सेट्स को बहुत गहरा या बहुत उथला न बोएं, दोनों ही स्थितियों में अंकुरण घटता है। छठा उपाय है बुवाई के 30 से 45 दिन के अंदर खाली जगह भरना — देर से भरी गई जगह के पौधे मुख्य फसल से पिछड़ जाते हैं। सातवाँ उपाय है बीज गन्ने की कटाई में बर्बादी रोकना — आँखों के बीच से काटने की बजाय आँखों से थोड़ा हटकर काटें ताकि हर सेट में पूरी आँख सुरक्षित रहे।

इन उपायों को एक साथ अपनाने पर बीज की बचत 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है, और कुछ खेतों में नर्सरी विधि से यह बचत और भी ज्यादा होती है। बचत का मतलब सिर्फ बीज का पैसा बचाना नहीं है — कम बीज में अच्छी फसल का मतलब है कि बचा हुआ गन्ना मिल को बेचकर भी आमदनी हो सकती है।

प्रति एकड़ लागत का नमूना हिसाब

मान लीजिए परंपरागत विधि से प्रति एकड़ 30 क्विंटल बीज लगता है और बीज गन्ने का भाव गन्ने के सामान्य भाव के आसपास है। अगर बीज की मात्रा 30 से घटकर 23 क्विंटल रह जाए तो 7 क्विंटल गन्ना बचता है, जिसे मिल को बेचा जा सकता है या अगले खेत की बुवाई में लगाया जा सकता है। पाँच एकड़ के किसान के लिए यह बचत 35 क्विंटल तक पहुँच जाती है — यानी लगभग एक एकड़ की बुवाई का बीज मुफ्त में निकल आता है। इसके अलावा कम बीज का मतलब है कम ढुलाई, कम कटाई मजदूरी और कम भंडारण की परेशानी।

दूसरी तरफ, बीज में कंजूसी करना भी नुकसानदेह है। अगर बीज कम पड़ जाए और खेत में 20 प्रतिशत जगह खाली रह जाए तो उपज का नुकसान बीज की बचत से कई गुना ज्यादा होगा, क्योंकि खाली जगह पर न तो कल्ले निकलेंगे और न ही गन्ना बनेगा। इसलिए लक्ष्य यह होना चाहिए कि बीज न ज्यादा हो, न कम — हिसाब से पूरा हो।

आम गलतियाँ जिनसे बचें

सबसे बड़ी गलती है बिना गिनती के बीज मंगवाना — पड़ोसी ने जितना डाला, उतना डाल देना सही तरीका नहीं है, क्योंकि उसकी कतार दूरी और किस्म अलग हो सकती है। दूसरी गलती है रोगग्रस्त या पुराना गन्ना बीज के लिए ले लेना, क्योंकि सस्ता बीज महँगा पड़ता है। तीसरी गलती है बीज गन्ने को काटकर कई दिन तक धूप में छोड़ देना, जिससे आँखें सूख जाती हैं। चौथी गलती है बहुत गहरी बुवाई — गहरे बोए गए सेट्स देर से फूटते हैं और कई आँखें सड़ जाती हैं। पाँचवीं गलती है खाली जगह को नजरअंदाज करना — बुवाई के एक महीने बाद खेत का चक्कर लगाकर खाली जगह भरना उतना ही जरूरी है जितनी बुवाई।

आपके सवाल

क्या प्रति एकड़ बीज दर हर किस्म के लिए एक जैसी होती है? नहीं। मोटी किस्मों में वजन ज्यादा और पतली किस्मों में वजन कम होता है, इसलिए क्विंटल में दर अलग दिखेगी। सेट्स की संख्या का हिसाब कतार दूरी और सेट आकार से करें, फिर वजन निकालें।

ट्रेंच विधि में बीज कम क्यों लगता है? क्योंकि कतारें चौड़ी होती हैं, इसलिए प्रति एकड़ कतारों की कुल लंबाई कम हो जाती है। कम लंबाई में कम सेट्स लगते हैं, लेकिन चौड़ी कतार में कल्ले ज्यादा निकलते हैं।

सिंगल बड चिप विधि छोटे किसान के लिए ठीक है? हाँ, लेकिन इसके लिए नर्सरी की देखभाल सीखनी पड़ती है — पानी, छाया और समय पर रोपाई। पहली बार छोटे क्षेत्र में आजमाकर देखें, फिर पूरा खेत इसी विधि से बोएं।

बीज गन्ना कितने दिन पहले काट सकते हैं? सबसे अच्छा है बुवाई से 1 से 2 दिन पहले काटना। अगर पहले काटना पड़े तो छायादार जगह पर रखें और समय-समय पर हल्का पानी छिड़कें, ताकि आँखें सूखें नहीं।

खाली जगह कितने दिन में भरनी चाहिए? बुवाई के 30 से 45 दिन के अंदर। इससे भरे गए पौधे मुख्य फसल के साथ बढ़ते हैं और उपज में ज्यादा अंतर नहीं आता।

क्या बीज उपचार जरूरी है? हाँ, यह सस्ता बीमा है। उपचार से शुरुआती फफूंद सड़न कम होती है और अंकुरण बेहतर रहता है। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

निष्कर्ष

गन्ने की बीज दर का हिसाब कोई अंदाजा नहीं, बल्कि एक सीधा गणित है — कतार दूरी से कतार लंबाई निकालें, सेट आकार से संख्या निकालें और संख्या से वजन निकालें। परंपरागत विधि में प्रति एकड़ लगभग 28 से 32 क्विंटल, ट्रेंच विधि में लगभग 22 से 26 क्विंटल और नर्सरी विधि में इससे भी कम बीज लगता है। अच्छा बीज चुनें, सही गहराई पर बोएं, समय पर खाली जगह भरें और जहाँ संभव हो नर्सरी विधि अपनाएं — यही चार बातें बीज की 25 प्रतिशत तक बचत और अच्छी उपज, दोनों का रास्ता हैं। बुवाई से पहले एक बार गिनती करके बीज मंगवाना वह छोटा कदम है जो पूरे सत्र की लागत और उपज, दोनों पर असर डालता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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