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गन्ना बीज शोधन (Seed Treatment) की वैज्ञानिक विधि — 95% जमाव व फंगस से 100% सुरक्षा

Randhir Patil Randhir Patil Sep 2, 2026 अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST 3 min read
गन्ना बीज शोधन (Seed Treatment) की वैज्ञानिक विधि — 95% जमाव व फंगस से 100% सुरक्षा
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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मुख्य बिंदु (Quick Summary): गन्ना बुवाई में 30% तक नुकसान बिना शोधित बीज बोने के कारण होता है। बुवाई से पहले मात्र ₹150 प्रति एकड़ के खर्चे पर रासायनिक या जैविक बीज शोधन करके आप 95% से अधिक स्वस्थ जमाव और लाल सड़न रोग से शत-प्रतिशत सुरक्षा पा सकते हैं।

गन्ने की खेती में एक पुरानी कहावत है — “जैसा बीज, वैसा ईख”। गन्ने का बीज सीधे कटे हुए तने के टुकड़े होते हैं जिनके दोनों छोर खुले रहते हैं। जब बिना उपचारित बीज मिट्टी में दबाया जाता है, तो जमीन में मौजूद हानिकारक फंगस और दीमक कटे हुए सिरों से अंदर प्रवेश कर आंखों (Buds) को सड़ा देते हैं, जिससे खेत में जमाव मात्र 50 से 60% ही रह जाता है।

इस गाइड में गन्ने के बीज शोधन की प्रमाणित रासायनिक और जैविक विधियों की पूरी जानकारी दी गई है।


1. रासायनिक विधि: बाविस्टिन (कार्बेंडाजिम 50% WP) से उपचार

  • घोल का अनुपात: 200 लीटर पानी के ड्रम में 200 ग्राम बाविस्टिन (कार्बेंडाजिम) या 400 ग्राम मैंकोज़ेब घोलें।
  • डुबोने का समय: गन्ने के कटे हुए दो-दो आंख वाले टुकड़ों को जालीदार कट्टे या टोकरी में रखकर इस घोल में 15 मिनट तक पूरी तरह डुबोकर रखें
  • छाया में सुखाना: ड्रम से निकालकर टुकड़ों को 20 मिनट तक छायादार स्थान पर हवा लगने दें, फिर तुरंत खेत में बोएं।
  • लागत: मात्र ₹120 से ₹150 प्रति एकड़।

2. जैविक विधि: ट्राइकोडर्मा (Trichoderma Viride) से उपचार

यदि आप प्राकृतिक या जैविक गन्ने की खेती कर रहे हैं:

  • घोल का अनुपात: 100 लीटर पानी में 1 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर और 1 किलोग्राम पुराना गुड़ अच्छी तरह घोलें।
  • डुबोने का समय: गन्ने के टुकड़ों को 20 मिनट तक घोल में डुबोएं।
  • फायदा: ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद है जो गन्ने के टुकड़ों के चारों तरफ सुरक्षा कवच बना लेता है और लाल सड़न (Red Rot) के जीवाणुओं को खा जाता है।

3. दीमक और सफेद गिडार (White Grub) से बचाव हेतु कीटनाशक शोधन

यदि आपके खेत में दीमक या गिडार की समस्या रहती है:

  • फफूंदनाशक घोल में ही इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (100 मिली) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC (500 मिली) प्रति 200 लीटर पानी मिला लें।
  • इससे जमाव के शुरुआती 60 दिनों तक दीमक आंखों को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचा पाती।

4. बीज शोधन करते समय ध्यान रखने योग्य 4 सावधानियां

  1. कभी भी बासी या एक दिन पुराना फफूंदनाशक घोल इस्तेमाल न करें; प्रतिदिन ताजा घोल बनाएं।
  2. गन्ने के टुकड़े काटते समय धारदार गंडासे का प्रयोग करें ताकि आंखें न कुचलें।
  3. बीमार, सूखे या लाल धब्बे वाले गन्नों को बीज के रूप में कतई न छांटें।
  4. शोधन के बाद टुकड़ों को तेज धूप में न छोड़ें, अन्यथा आंखें सूख जाएंगी।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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