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गन्ना बीज शोधन बाविस्टिन व ट्राइकोडर्मा विधि 2026 — लाल सड़न व उकठा से 100% सुरक्षा

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
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गन्ना बीज शोधन बाविस्टिन व ट्राइकोडर्मा विधि 2026 — लाल सड़न व उकठा से 100% सुरक्षा
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): बुवाई से पूर्व मात्र ₹200 प्रति एकड़ का बीज शोधन करने से गन्ने में 90% तक स्वस्थ अंकुरण मिलता है और लाल सड़न (Red Rot), उकठा व दीमक का प्रकोप शून्य हो जाता है।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ा सबक यह रहा है कि जमीन में बोए जाने वाले बीज की प्राथमिक सुरक्षा ही पूरी फसल के भविष्य का निर्धारण करती है। राज्य भर में विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ) और मध्य एवं तराई क्षेत्रों (लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, गोंडा) में पिछले कुछ वर्षों में लाल सड़न रोग (Red Rot / Colletotrichum falcatum), उकठा रोग (Wilt) और दीमक के कारण किसानों की हजारों एकड़ खड़ी फसल सूखकर बर्बाद हुई है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गन्ने में लगने वाले 80% कवक जनित (Fungal) और भूमि जनित रोग सीधे गन्ने के बीज के पोरों (Setts) या बुवाई के समय कटी हुई खुली सतह से प्रवेश करते हैं। यदि किसान बुवाई से ठीक पहले गन्ना बीज शोधन (Sugarcane Seed Treatment) की वैज्ञानिक विधि अपना लें, तो मात्र ₹200 से ₹300 प्रति एकड़ के सामान्य खर्च में न केवल 85% से 90% तक अंकुरण (Germination) सुनिश्चित होता है, बल्कि फसल को जीवन भर के लिए कवक जनित जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा कवच मिल जाता है। इस लेख में हम रासायनिक (Bavistin / Carbendazim) और जैविक (Trichoderma Viride) बीज शोधन की संपूर्ण विधि को चरणबद्ध समझेंगे।

1. बीज शोधन न करने से होने वाले 5 भयंकर नुकसान

अक्सर किसान समय की कमी या लापरवाही के कारण सीधे खेत से काटा हुआ गन्ना टुकड़ों में काटकर मिट्टी में दबा देते हैं। बिना शोधन के बुवाई करने पर निम्नलिखित गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं:

  1. अंकुरण में 35% से 40% की भारी गिरावट: मिट्टी में मौजूद कवक (Fungus) गन्ने की आंख (Bud) को अंकुरित होने से पहले ही सड़ा देते हैं, जिससे खेत में जगह-जगह नागे (Gaps) छूट जाते हैं।
  2. लाल सड़न (Red Rot) का प्राथमिक संक्रमण: यदि बीज के किसी टुकड़े में लाल सड़न का सूक्ष्म बीजाणु मौजूद है, तो वह पूरी कतार के अन्य स्वस्थ टुकड़ों को भी संक्रमित कर देता है और जुलाई-अगस्त के मॉनसून में पूरा खेत सूख जाता है।
  3. दीमक और सफेद लट (Termite & White Grub) का हमला: कटी हुई पोरियों से निकलने वाले मीठे रस की गंध से दीमक आकर्षित होती है और आंख के अंकुर को अंदर से खोखला कर देती है।
  4. पौधों में असमान वृद्धि (Uneven Tillering): रोगग्रस्त बीज से निकलने वाले कल्ले कमजोर, पीले और पतले रह जाते हैं जिससे मिल योग्य गन्नों (Millable Canes) की संख्या घट जाती है।
  5. री-प्लांटिंग का अतिरिक्त आर्थिक बोझ: नागे भरने (Gap Filling) के लिए किसान को दोबारा मजदूर लगाने पड़ते हैं और अतिरिक्त बीज खरीदना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत 25% बढ़ जाती है।

2. रासायनिक बीज शोधन (Chemical Treatment) की संपूर्ण वैज्ञानिक विधि

रासायनिक विधि त्वरित और अत्यंत प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है। यह बुवाई के तुरंत बाद मिट्टी में मौजूद फफूंद और कीड़ों को गन्ने की पोरियों के पास फटकने नहीं देती:

(क) आवश्यक रासायनिक सामग्रियां एवं सटीक अनुपात (प्रति एकड़):

रसायन का प्रकारव्यापारिक नाम व सांद्रताप्रति 100 लीटर पानी में मात्राकार्य व सुरक्षा क्षेत्र
कवकनाशी (Fungicide - विकल्प 1)कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी (Bavistin)200 ग्रामलाल सड़न, स्मट और उकठा फफूंद को नष्ट करता है
कवकनाशी (Fungicide - विकल्प 2)थायोफैनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी (Topsin-M)200 ग्रामसिस्टेमिक फफूंदनाशक, ऊतकों में गहराई तक रक्षा करता है
कवकनाशी (Fungicide - विकल्प 3)एजोक्सीस्ट्रोबिन + डाइफेनोकोनाजोल (Amistar Top)100 मिलीआधुनिक कवकनाशी, नई पीढ़ी के लाल सड़न स्ट्रेन पर असरदार
कीटनाशक (Insecticide)इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल (Confidor)150 से 200 मिलीदीमक, सफेद लट और प्रारंभिक कंसुआ कीड़ों से सुरक्षा
विकास प्रेरक (Growth Promoter)ह्यूमिक एसिड 98% (Humic Acid Flakes)100 ग्रामजड़ों का तेजी से विकास और 100% आंख फुटाव

(ख) रासायनिक घोल तैयार करने और डुबोने की 4-चरणीय विधि:

[100 लीटर का सीमेंट टैंक या ड्रम] ➔ [फफूंदनाशक + कीटनाशक घोलें] ➔ [गन्ने के टुकड़े जालीदार बैग में 15 मिनट डुबोएं] ➔ [छाया में 10 मिनट सुखाकर बुवाई करें]
  1. खेत के किनारे एक 200 लीटर का प्लास्टिक ड्रम या 5×3 फीट का पक्का हौद बनाएं।
  2. उसमें 100 लीटर साफ पानी भरकर 200 ग्राम बाविस्टिन और 150 मिली इमिडाक्लोप्रिड अच्छी तरह डंडे से घोलें।
  3. गन्ने के 2 या 3 आंख वाले टुकड़ों को जालीदार कट्टों (Net Bags) में भरकर इस घोल में पूरी तरह डुबो दें।
  4. टुकड़ों को ठीक 15 से 20 मिनट तक डूबा रहने दें ताकि दवा कटे हुए सिरों और आंख के छिलकों में पूरी तरह समा जाए।
  5. घोल से निकालकर टुकड़ों को छायादार स्थान पर तिरपाल पर 10-15 मिनट हवा लगने दें, फिर तुरंत नाली में बिछाकर बुवाई करें।

3. जैविक बीज शोधन (Organic / Bio-Treatment) — ट्राइकोडर्मा विरिडी विधि

जो किसान प्राकृतिक, जैविक या कम रासायनिक लागत वाली खेती करना चाहते हैं, उनके लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma Viride / Harzianum) और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस (Pseudomonas) का उपयोग वरदान है:

(क) ट्राइकोडर्मा की कार्यप्रणाली समझें:

ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद (Beneficial Bio-fungicide) है। जब इसे गन्ने के बीज पर लगाया जाता है, तो यह गन्ने की पोरियों के चारों ओर एक सुरक्षात्मक जैविक ढाल (Bio-shield) बना लेता है। यह मिट्टी में मौजूद लाल सड़न के हानिकारक कवक (Colletotrichum) को खाकर समाप्त कर देता है और पौधों की जड़ों को तेजी से फैलने में मदद करता है।

(ख) ट्राइकोडर्मा से बीज शोधन का सटीक फॉर्मूला:

  • लिक्विड ट्राइकोडर्मा: 500 मिली प्रति 100 लीटर पानी (अथवा पाउडर फॉर्म में 1 किग्रा प्रति 100 लीटर पानी)।
  • गुड़ का शीरा (Jaggery Solution): 1 किग्रा पुराना गुड़ पानी में उबालकर ठंडा करके घोल में मिलाएं (यह ट्राइकोडर्मा के जीवाणुओं को ऊर्जा प्रदान करता है)।
  • डुबोने का समय: गन्ने के टुकड़ों को 20 से 30 मिनट तक इस जैविक घोल में डूबा रहने दें।

(ग) ट्राइकोडर्मा समृद्ध गोबर खाद (Enriched FYM for Soil):

बीज शोधन के साथ-साथ 2 किग्रा ट्राइकोडर्मा पाउडर को 100 किग्रा अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर छाया में 7 दिनों तक जूट की बोरी से ढककर रखें। जब उस पर सफेद फफूंद की परत आ जाए, तो इसे बुवाई के समय ट्रेंच नाली में बेसल डोज के रूप में डालें।

4. उष्ण जल उपचार (Hot Water Treatment - MHAT) तकनीक

उत्तर प्रदेश के गन्ना शोध संस्थानों (जैसे यूपी काउंसिल ऑफ सुगरकेन रिसर्च, शाहजहांपुर व सेवरही) और चीनी मिलों के फार्मों पर प्रजनक बीज (Breeder Seed) तैयार करने के लिए उष्ण आर्द्र वायु उपचार (Moist Hot Air Treatment - MHAT) का उपयोग किया जाता है:

  • तापमान व समय: गन्ने के बीज को 54°C तापमान पर गर्म पानी में ठीक 2 घंटे अथवा 50°C पर नम गर्म हवा में 2.5 घंटे रखा जाता है।
  • लाभ: इस तापमान पर गन्ने के ऊतकों के अंदर छिपे हुए सभी वायरस, माइकोप्लाज्मा (Grassy Shoot Disease) और रेड रॉट के सुप्त बीजाणु पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जबकि गन्ने की आंख को कोई नुकसान नहीं होता।
  • किसानों के लिए सलाह: किसान भाई अपनी नजदीकी चीनी मिल या गन्ना शोध परिषद से हमेशा ‘उपचारित फाउंडेशन बीज (Treated Foundation Seed)’ ही अपनी नर्सरी के लिए खरीदें।

5. बीज शोधन के दौरान बरती जाने वाली 7 सावधानियां

  1. ताजा कटे हुए बीज का उपचार: बीज काटने के 24 घंटे के भीतर ही शोधन करें। कई दिनों से कटे हुए सूखे टुकड़ों पर शोधन का असर कम हो जाता है।
  2. रसायन और ट्राइकोडर्मा को एक साथ न मिलाएं: कभी भी बाविस्टिन (केमिकल) और ट्राइकोडर्मा (बायो) को एक ही ड्रम में एक साथ न घोलें, क्योंकि रासायनिक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा के जीवित जीवाणुओं को मार देगा।
  3. दवा के घोल की अवधि: एक बार तैयार किया गया 100 लीटर रासायनिक घोल अधिकतम 40 से 50 क्विंटल बीज (लगभग 2 एकड़) के उपचार के लिए पर्याप्त होता है। इसके बाद घोल का असर कम हो जाता है, अतः नया घोल बनाएं।
  4. सुरक्षात्मक उपकरण: दवा घोलते समय हाथों में रबर के दस्ताने (Gloves) और चेहरे पर मास्क अवश्य लगाएं।
  5. छाया में सुखाना: उपचारित टुकड़ों को कभी भी तेज चिलचिलाती धूप में न सुखाएं, इससे दवा की परत टूट जाती है।
  6. धारदार हसिया/दाव का उपयोग: गन्ने के टुकड़े काटते समय धारदार औजार का इस्तेमाल करें ताकि पोरियां फटे नहीं। फटी हुई पोरियों में फंगस जल्दी लगता है।
  7. बची हुई दवा का निस्तारण: शोधन के बाद बचे हुए घोल को पशुओं के पीने के पानी के स्रोतों, तालाबों या नालियों से दूर खाली खेत में गड्ढा खोदकर दबाएं।

6. प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शोधन का प्रभाव व परिणाम

उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग द्वारा पश्चिमी यूपी के मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और तराई के लखीमपुर, पीलीभीत में चलाए गए ‘आदर्श बीज शोधन अभियान’ के आंकड़े दर्शाते हैं:

मानक पैमानाबिना शोधन वाला खेतबाविस्टिन उपचारित खेतट्राइकोडर्मा जैविक उपचारित खेत
औसत अंकुरण दर55% से 60%85% से 90%80% से 85%
प्रति एकड़ नागे (Gaps)30% से 40% नागे5% से कम नागे8% से कम नागे
लाल सड़न का प्रकोप20% से 45% फसल प्रभावित0% से 2% (लगभग शून्य)1% से 3%
औसत उपज प्रति एकड़350 से 400 क्विंटल550 से 620 क्विंटल520 से 580 क्विंटल
शुद्ध अतिरिक्त लाभआधार स्तर₹40,000 से ₹60,000 अधिक₹35,000 से ₹50,000 अधिक

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

गन्ना बीज शोधन में बाविस्टिन की कितनी मात्रा डालनी चाहिए?

100 लीटर पानी में 200 ग्राम बाविस्टिन (कार्बेन्डाजिम 50% WP) घोलकर गन्ने के टुकड़ों को 15 मिनट डुबोना चाहिए।

क्या बीज शोधन से लाल सड़न (Red Rot) की बीमारी 100% रुक जाती है?

हां, यदि बीज में प्रारंभिक बाहरी फफूंद है तो बीज शोधन से वह नष्ट हो जाती है। हालांकि अत्यधिक आंतरिक संक्रमित बीज को बोने से बचना चाहिए।

क्या ट्राइकोडर्मा और कीटनाशक एक साथ मिला सकते हैं?

ट्राइकोडर्मा के साथ केमिकल फफूंदनाशक नहीं मिला सकते, लेकिन इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक को अलग से या जैविक कीटनाशक (ब्यूवेरिया बासियाना) के साथ उपयोग कर सकते हैं।

एक एकड़ गन्ने के लिए कितने लीटर शोधन घोल की आवश्यकता होती है?

एक एकड़ के 25 से 30 क्विंटल बीज को उपचारित करने के लिए लगभग 100 से 150 लीटर घोल की आवश्यकता होती है।

क्या बीज शोधन के बाद गन्ने को तुरंत बोना जरूरी है?

उपचार के बाद टुकड़ों को छाया में 10-15 मिनट हल्का सुखाकर उसी दिन (अधिकतम 4-6 घंटे के भीतर) नाली में बो देना चाहिए।

दीमक से बचाव के लिए बीज शोधन में कौन सी दवा सबसे अच्छी है?

इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (150-200 मिली प्रति 100 लीटर) या क्लोरपायरीफॉस 20% EC दीमक से 100% सुरक्षा प्रदान करता है।

क्या गन्ने की केवल आंख (Single Bud) का भी शोधन किया जा सकता है?

हां, सिंगल बड चिप्स को ट्रे में रखने से पहले 5 मिनट के लिए बाविस्टिन के घोल में डुबोकर ही कोकोपीट में रोपाई की जाती है।

गन्ना शोधन के लिए पक्का हौद न हो तो क्या करें?

आप खेत में एक 5 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा गड्ढा खोदकर उसमें मोटी प्लास्टिक पॉलीथिन बिछाकर अस्थायी शोधन टैंक बना सकते हैं।

क्या पुराने गुड़ का घोल ट्राइकोडर्मा में मिलाना जरूरी है?

हां, 1 किग्रा गुड़ का घोल ट्राइकोडर्मा के फफूंद जीवाणुओं को तेजी से मल्टीप्लाई (सक्रिय) करने में मदद करता है।

बीज शोधन की दवाएं सरकारी अनुदान पर कहां मिलती हैं?

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के राजकीय कृषि बीज भंडारों और गन्ना विकास परिषदों पर फफूंदनाशक व ट्राइकोडर्मा 50% से 75% सरकारी अनुदान पर उपलब्ध रहते हैं।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

7. सिंगल बड (Single Bud) और चिप बड (Chip Bud) नर्सरी में बीज शोधन की विशेष प्रो-ट्रे विधि

आधुनिक समय में किसान भाई गन्ना बीज की 80% बचत करने के लिए प्रो-ट्रे (Pro-Tray) नर्सरी विधि तेजी से अपना रहे हैं। इस विधि में बीज शोधन का तरीका पारंपरिक टुकड़ों से थोड़ा भिन्न होता है:

(क) प्रो-ट्रे नर्सरी हेतु चिप बड शोधन के 4 चरण:

  1. बड कटर द्वारा आंख की कटाई: स्वस्थ्य व रोगमुक्त गन्ने से केवल आंख (Bud Eye) को कटर द्वारा सावधानीपूर्वक काटें।
  2. सक्रिय घोल में डुबोना: 100 लीटर पानी में 100 ग्राम बाविस्टिन और 50 मिली क्लोरपायरीफास मिलाएं। चिप बड को एक जालीदार थैले में भरकर इस घोल में केवल 5 मिनट के लिए डुबोएं।
  3. छाया में सुखाना: शोधन के बाद बड्स को किसी हवादार छायादार स्थान पर सूती कपड़े पर 15 मिनट तक फैलाएं ताकि अतिरिक्त नमी सूख जाए।
  4. कोकोपीट व ट्राइकोडर्मा का मिश्रण: प्रो-ट्रे में भरी जाने वाली कोकोपीट में 1 किग्रा ट्राइकोडर्मा विरिडी प्रति 50 किग्रा कोकोपीट की दर से पहले से मिलाकर रखें।

(ख) प्रो-ट्रे शोधन के आश्चर्यजनक परिणाम:

  • 98% अंकुरण दर: पारंपरिक विधि में जहां 35-40% गन्ने की आंखें ही उग पाती हैं, वहीं शोधित प्रो-ट्रे बड्स में 98% अंकुरण सुनिश्चित होता है।
  • बीज लागत में भारी कमी: प्रति एकड़ 30-35 क्विंटल बीज के स्थान पर केवल 4-5 क्विंटल गन्ने की आंखों से पूरा खेत तैयार हो जाता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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