
इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।
पेराई सत्र 2026-27 के नजदीक आते ही पूरे उत्तर प्रदेश और देश भर के गन्ना किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस साल गन्ने का भाव क्या रहेगा? क्या उत्तर प्रदेश सरकार राज्य परामर्शित मूल्य (SAP - State Advised Price) को बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करेगी, जैसा कि किसान संगठन मांग कर रहे हैं?
डीजल, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की बढ़ती लागत तथा खुले बाजार में चीनी की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल (₹65-70 प्रति किलो) के बीच किसानों का तर्क है कि जब तक गन्ने का रेट कम से कम ₹450 से ₹600 प्रति क्विंटल नहीं किया जाएगा, तब तक गन्ने की खेती घाटे का सौदा बनी रहेगी।
आइए इस विश्लेषण में जानते हैं कि वर्तमान में क्या भाव मिल रहा है, किसान ₹600 की मांग क्यों कर रहे हैं और सरकार की ओर से क्या संकेत मिल रहे हैं।
गन्ने के मूल्य निर्धारण के दो मुख्य तंत्र हैं:
| गन्ने की प्रजाति | वर्तमान सरकारी दर (SAP) | किसानों की मांग (2026-27) |
|---|---|---|
| अगेती प्रजाति (Early Variety - जैसे Co-0118, Co-15023) | ₹370 / क्विंटल | ₹600 / क्विंटल |
| सामान्य प्रजाति (General Variety) | ₹360 / क्विंटल | ₹580 / क्विंटल |
| अनुपयुक्त प्रजाति (Rejected Variety) | ₹355 / क्विंटल | ₹550 / क्विंटल |
भारतीय किसान यूनियन (BKU), राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन सौंपकर गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की पुरजोर मांग की है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) के अनुसार 1 एकड़ गन्ने की फसल तैयार करने में जुताई, बीज, खाद (DAP/यूरिया/पोटाश), सिंचाई, कीटनाशक (कोराजन, फंगीसाइड) और छिलाई-कटाई का खर्च ₹55,000 से ₹65,000 तक पहुंच चुका है।
स्वामीनाथन फार्मूला के तहत फसल की कुल लागत में जमीन का किराया और किसान के परिवार की मजदूरी जोड़कर उस पर 50% का मुनाफा मिलना चाहिए। इस हिसाब से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹550 से ₹600 प्रति क्विंटल बैठता है।
| पक्ष | रुख और तर्क |
|---|---|
| किसान संगठन | ₹600 से कम भाव मंजूर नहीं; लागत दोगुनी हो चुकी है, अगर भाव नहीं बढ़ा तो रकबा और घटेगा। |
| चीनी मिल एसोसिएशन (ISMA) | मिलों का कहना है कि अचानक इतना बड़ा उछाल देने से मिलों की नकदी तरलता (Liquidity) प्रभावित होगी और भुगतान में देरी होगी। मिलें ₹15-20 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी की वकालत कर रही हैं। |
| यूपी सरकार | सरकार का रुख किसान-हितैषी रहा है। सूत्रों के मुताबिक आगामी चुनावों और किसानों की नाराजगी को देखते हुए सरकार SAP में ₹25 से ₹40 प्रति क्विंटल तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार कर रही है। |
2021-22: ₹350 / क्विंटल (अगेती)
2022-23: ₹350 / क्विंटल (अगेती - कोई बदलाव नहीं)
2023-24: ₹370 / क्विंटल (अगेती - ₹20 की बढ़ोतरी)
2025-26: ₹370 / क्विंटल (अगेती)
2026-27 (प्रस्तावित): ₹395 - ₹410 / क्विंटल (संभावित)
उत्तर प्रदेश में गन्ने के नए सत्र (2026-27) की पेराई 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होने का निर्देश दिया गया है। परंपरा के अनुसार राज्य सरकार कैबिनेट बैठक में सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह में आधिकारिक गन्ना मूल्य (SAP) का ऐलान करती है।
हालांकि ₹600 प्रति क्विंटल की मांग सैद्धांतिक रूप से किसानों की बढ़ती लागत के अनुसार जायज है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर सरकार द्वारा इस सत्र में गन्ने का भाव ₹395 से ₹410 प्रति क्विंटल के बीच घोषित किए जाने की प्रबल संभावना है।
किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपना सर्वे और सट्टा समय पर जांच लें ताकि जैसे ही नया भाव घोषित हो, उन्हें अपनी पहली पर्ची से ही बढ़े हुए भाव का पूरा लाभ मिल सके।
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