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गन्ना भुगतान का 14 दिन नियम — देरी पर 15% ब्याज मांगने का कानूनी अधिकार कैसे इस्तेमाल करें?

Randhir Patil Randhir Patil Sep 5, 2026 3 min read
गन्ना भुगतान का 14 दिन नियम — देरी पर 15% ब्याज मांगने का कानूनी अधिकार कैसे इस्तेमाल करें?
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 के तहत चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति के ठीक 14 दिनों के भीतर किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। 14 दिन से अधिक देरी होने पर मिल को 15% वार्षिक साधारण ब्याज देना ही होगा।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि वे अपनी फसल समय पर चीनी मिल को सौंप देते हैं, लेकिन मिलें महीनों तक उनका पैसा दबाए रखती हैं। कई किसान यह नहीं जानते कि राज्य के गन्ना कानूनों और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेशों के तहत किसानों को 14 दिन में भुगतान और विलंब पर 15% ब्याज पाने का अटूट कानूनी अधिकार प्राप्त है।

इस मास्टरक्लास में जानिए कि कानून क्या कहता है और किसान अपने ब्याज की मांग कैसे कर सकते हैं।


Yogi Adityanath
Yogi Adityanath
@myogiadityanath
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का हित सर्वोपरि है। प्रदेश की सभी 122 चीनी मिलों को समयबद्ध रूप से पेराई शुरू करने और किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान 14 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। किसानों के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

1. यूपी गन्ना पूर्ति अधिनियम 1953 की धारा 17 (Section 17)

उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 में स्पष्ट उल्लेख है:

  • 14 दिन की मियाद: किसान द्वारा क्रय केंद्र या मिल गेट पर गन्ना तौलने की तिथि से लेकर अगले 14 कैलेंडर दिनों के भीतर पूरा गन्ना मूल्य किसान के खाते में पहुंचना अनिवार्य है।
  • 15% साधारण ब्याज: यदि चीनी मिल 14 दिनों के भीतर भुगतान करने में असमर्थ रहती है, तो 15वें दिन से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक मिल प्रबंधन को 15% वार्षिक साधारण ब्याज (Simple Interest) जोड़कर भुगतान करना होगा।

2. एस्क्रो खाता व्यवस्था (Escrow Account Mechanism)

सरकार ने मिलों द्वारा किसानों का पैसा हड़पने से रोकने के लिए एस्क्रो खाता प्रणाली लागू की है:

  • चीनी मिल द्वारा बेची जाने वाली चीनी, शीरा और एथेनॉल से प्राप्त होने वाले कुल राजस्व का कम से कम 85% हिस्सा सीधे एक विशेष बैंक खाते (Escrow Account) में जमा होता है।
  • इस खाते का नियंत्रण जिलाधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी (DCO) के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है।
  • यह 85% पैसा किसी अन्य मद में खर्च नहीं हो सकता और सीधे किसानों के बैंक खातों में आरटीजीएस द्वारा भेजा जाता है।

3. रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) और गोदाम कुर्की की प्रक्रिया

यदि कोई मिल बार-बार नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं करती:

  1. गन्ना आयुक्त द्वारा आरसी जारी: गन्ना आयुक्त मिल के खिलाफ भू-राजस्व बकाए (Land Revenue Arrears) की तरह वसूली प्रमाण पत्र (RC) जारी करते हैं।
  2. जिलाधिकारी द्वारा गोदाम सील: डीएम के आदेश पर एसडीएम और पुलिस बल मिल के चीनी व शीरा गोदामों को सील कर देते हैं।
  3. सरकारी नीलामी: सील की गई चीनी की नीलामी सरकारी दर पर कराकर प्राप्त धनराशि सीधे किसानों के खातों में डीबीटी कर दी जाती है।

4. किसान अपना ब्याज क्लेम कैसे करें?

  • अपनी गन्ना विकास समिति के माध्यम से या सीधे उप गन्ना आयुक्त कार्यालय में धारा 17 के तहत ‘विलंबित भुगतान ब्याज मांग प्रार्थना पत्र’ प्रस्तुत करें।
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट के कई आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि ब्याज पर किसानों का पहला विधिक हक है और मिल प्रबंधन दिवालिया (IBC) होने पर भी किसानों के बकाए को नहीं दबा सकता।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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