
गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता है — भुगतान कब मिलेगा? 2026 में भी कई चीनी मिलों ने किसानों का पैसा नहीं दिया है। पूरे भारत में लगभग ₹50,000 करोड़ बकाया है।
| राज्य | बकाया राशि | बकाया % |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | ₹18,000 करोड़ | 15% |
| महाराष्ट्र | ₹12,000 करोड़ | 20% |
| कर्नाटक | ₹8,000 करोड़ | 25% |
| पंजाब | ₹5,000 करोड़ | 10% |
| अन्य | ₹7,000 करोड़ | — |
| मिल का नाम | भुगतान % | बकाया |
|---|---|---|
| बजाज हिंदुस्तान (सभी यूनिट) | 95% | ₹500 करोड़ |
| बलरामपुर चिनी | 90% | ₹800 करोड़ |
| त्रिवेणी इंजीनियरिंग | 88% | ₹600 करोड़ |
| धामपुर शुगर | 85% | ₹400 करोड़ |
| द्वारिकेश शुगर | 82% | ₹300 करोड़ |
| मिल का नाम | भुगतान % | बकाया |
|---|---|---|
| कुछ छोटी मिलें | 40–50% | ₹200–500 करोड़ |
2025 में चीनी का भाव ₹3,500/क्विंटल था, जो 2026 में ₹3,200/क्विंटल तक गिर गया। मिलों की आमदनी कम हुई है।
सरकार ने चीनी एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है। मिलें विदेश में चीनी नहीं बेच पा रहीं।
कुछ मिलों ने एथेनॉल बनाया लेकिन OMC (Oil Marketing Companies) से पैसा नहीं मिला।
कई छोटी मिलें कर्ज में डूबी हैं और किसानों का भुगतान नहीं कर पा रहीं।
नजदीकी गन्ना समिति में जाकर भुगतान की जानकारी ले सकते हैं।
लिखित शिकायत दें और रसीद लें।
ऐप में “शिकायत दर्ज करें” पर क्लिक करें।
अगर 30 दिन में जवाब न मिले तो जिला गन्ना अधिकारी से मिलें।
अगर कोई सुनवाई न हो तो किसान आयोग या कोर्ट में केस कर सकते हैं।
गन्ना भुगतान की समस्या गंभीर है, लेकिन सरकार कदम उठा रही है। किसानों को eGanna App पर नजर रखनी चाहिए और समय पर शिकायत करनी चाहिए। CaneUp पर भुगतान की हर अपडेट सबसे पहले मिलेगी।
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