
नवंबर में जैसे-जैसे पेराई सत्र रफ्तार पकड़ता है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों गन्ना किसान एक ही सवाल से जूझते हैं — गन्ना कट गया, अब खेत खाली पड़ा है, इसमें क्या बोएं? अगर कटाई नवंबर के आखिर या दिसंबर में हुई है, तो जवाब साफ है: गेहूं। लेकिन देर से बोया गया गेहूं समय पर बोए गए गेहूं जैसा व्यवहार नहीं करता। इसकी बढ़वार का समय कम होता है, कल्ले कम फूटते हैं और मार्च की गर्मी दाना भरने से पहले ही आ धमकती है। फिर भी सही किस्म, ज्यादा बीज दर और सधी हुई खाद-सिंचाई से देर से बोए गेहूं से भी प्रति एकड़ 16 से 18 क्विंटल तक उपज ली जा सकती है। यह गाइड उसी देर से बुवाई का पूरा प्लान है — खेत की तैयारी से लेकर कटाई तक, कदम-दर-कदम।
समय का गणित: देर से बुवाई में क्या बदल जाता है
गेहूं की सामान्य बुवाई नवंबर के पहले पखवाड़े तक मानी जाती है। गन्ना कटाई के बाद बुवाई आमतौर पर 20 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच होती है, यानी 15 से 45 दिन की देरी। हर हफ्ते की देरी के साथ पौधे को बढ़ने का समय घटता है और दाना भरने की अवधि सिकुड़ती है। यही वजह है कि देर से बुवाई में तीन बातें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं — जल्दी पकने वाली किस्म, सामान्य से ज्यादा बीज दर और पहली सिंचाई का सही समय। इन तीनों को साध लिया तो देरी का नुकसान काफी हद तक कम हो जाता है।
| बुवाई का समय | स्थिति | क्या ध्यान रखें |
|---|---|---|
| 15 नवंबर तक | सामान्य बुवाई | सामान्य बीज दर और खाद ही काफी है |
| 16 नवंबर – 10 दिसंबर | थोड़ी देर | बीज दर 10–15% बढ़ाएं, जल्दी पकने वाली किस्म लें |
| 11 – 31 दिसंबर | ज्यादा देर | बीज दर 25% तक बढ़ाएं, किस्म का चुनाव सबसे अहम |
| जनवरी के बाद | बहुत देर | गेहूं की जगह चना, मसूर या सरसों पर विचार करें |
जनवरी के बाद गेहूं बोना आमतौर पर घाटे का सौदा होता है, क्योंकि मार्च-अप्रैल की गर्मी दाना पतला कर देती है। ऐसे खेत में दलहनी या तिलहनी फसल बेहतर विकल्प है।
कटाई के बाद खेत की तैयारी: 5 कदम, कोई शॉर्टकट नहीं
गन्ना कटाई के बाद खेत में ठूंठ, सूखी पत्तियां और जड़ों का जाल रह जाता है। सीधे बीज डाल देना सबसे बड़ी गलती है। तैयारी इस क्रम में करें:
- ठूंठ और पत्ती का निपटारा: हल्की जुताई से पहले सूखी पत्ती को खेत में ही फैला दें या किनारे इकट्ठा करें। पत्ती जलाने से बचना चाहिए — इससे मिट्टी के जीवाणु मरते हैं और जुर्माने का भी डर रहता है।
- गहरी जुताई: एक बार मिट्टी पलटने वाले हल या डिस्क हैरो से जुताई करें, ताकि गन्ने की जड़ों का जाल टूटे और मिट्टी भुरभुरी हो। इसके बाद 2–3 बार कल्टीवेटर चलाएं।
- पाटा और समतलीकरण: हर जुताई के बाद पाटा लगाएं। ऊंची-नीची जमीन पर पानी एक जगह ठहरेगा और दूसरी जगह सूखा रहेगा — देर से बोए गेहूं में यह असमानता सीधे उपज घटाती है।
- नमी की जांच: बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। अगर मिट्टी सूखी है तो हल्की पलेवा करके ही बुवाई करें, वरना अंकुरण कमजोर होगा।
- मेड़ और नाली: सिंचाई के लिए नाली साफ रखें, ताकि पहली सिंचाई में पानी पूरे खेत में एक समान पहुंचे।
गन्ने के बाद की मिट्टी में आमतौर पर नाइट्रोजन की कमी होती है, क्योंकि गन्ना लंबी अवधि की फसल है। इसलिए खाद की योजना मिट्टी परीक्षण के आधार पर बनाना सबसे अच्छा रहता है — और अगर परीक्षण नहीं हुआ है तो नीचे दी गई सामान्य सिफारिश से शुरुआत करें।
देर से बुवाई के लिए सही किस्म चुनें
किस्म का चुनाव देर से बुवाई में आधी सफलता है। देर से बोने के लिए वे किस्में चाहिए जो कम समय में पक जाएं और गर्मी सह सकें। उत्तर प्रदेश के लिए देर से बुवाई में अनुमोदित किस्मों में डीबीडब्ल्यू 173, एचडी 3059, एचयूडब्ल्यू 234 और पीबीडब्ल्यू 373 जैसी किस्में जानी जाती हैं। अपने जिले के लिए सबसे उपयुक्त किस्म की पुष्टि कृषि विज्ञान केंद्र या बीज भंडार से जरूर करें, क्योंकि किस्म की सिफारिश क्षेत्र के हिसाब से बदलती है।
| किस्म | खासियत | किन किसानों के लिए |
|---|---|---|
| डीबीडब्ल्यू 173 | देर से बुवाई के लिए उपयुक्त, अच्छा दाना | दिसंबर में बुवाई करने वालों के लिए |
| एचडी 3059 | गर्मी सहनशील, जल्दी पकती है | देर से बुवाई + गर्मी का डर वाले क्षेत्रों के लिए |
| एचयूडब्ल्यू 234 | पूर्वी यूपी में लोकप्रिय देर-से-बुवाई किस्म | पूर्वांचल के किसानों के लिए |
| पीबीडब्ल्यू 373 | देर से बुवाई की पुरानी भरोसेमंद किस्म | जिनके यहां नई किस्म का बीज न मिले |
बीज हमेशा प्रमाणित स्रोत से लें। घर का पुराना बीज इस्तेमाल करना हो तो अंकुरण जांच जरूर करें — 100 दाने गीले कपड़े में रखकर देखें, 85 से कम अंकुरे तो बीज बदल दें।
बीज दर और बीज उपचार: देर से बुवाई का सबसे बड़ा हथियार
समय पर बुवाई में प्रति एकड़ लगभग 40 किलोग्राम बीज काफी होता है, लेकिन देर से बुवाई में कल्ले कम फूटते हैं, इसलिए पौधों की संख्या बीज बढ़ाकर पूरी करनी पड़ती है। दिसंबर की बुवाई में प्रति एकड़ 50 से 60 किलोग्राम बीज रखें। बुवाई की गहराई 4–5 सेंटीमीटर से ज्यादा न हो — ज्यादा गहरा बीज देर से और कमजोर अंकुरित होता है। कतार से कतार की दूरी 22.5 सेंटीमीटर (लगभग 9 इंच) रखें।
बीज उपचार से दीमक और बीजजनित रोगों से बचाव होता है। बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित फफूंदनाशी से उपचारित करें। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। उपचारित बीज को छाया में सुखाकर ही बोएं, धूप में सुखाने से दवा का असर कम होता है।
खाद का पूरा हिसाब: कम समय में पूरी खुराक
देर से बोए गेहूं को खाद देर से नहीं मिलनी चाहिए — पौधे के पास समय कम है, इसलिए बुवाई के समय ही फास्फोरस और पोटाश की पूरी खुराक और नाइट्रोजन का एक हिस्सा दे देना जरूरी है।
| खाद | प्रति एकड़ सामान्य मात्रा | कब दें |
|---|---|---|
| डीएपी | लगभग 50 किलोग्राम | बुवाई के समय, बीज के साथ या नीचे |
| एमओपी (पोटाश) | लगभग 25 किलोग्राम | बुवाई के समय |
| यूरिया | कुल लगभग 100–110 किलोग्राम, तीन भागों में | बुवाई पर 40 किलो, पहली सिंचाई पर 35 किलो, दूसरी सिंचाई पर बाकी |
| जिंक सल्फेट | जरूरत हो तो 10 किलोग्राम | बुवाई के समय (जिंक की कमी वाले खेत में) |
अगर मिट्टी परीक्षण में फास्फोरस या पोटाश पर्याप्त दिखे तो मात्रा घटाई जा सकती है। यूरिया की आखिरी खुराक बाली निकलने से पहले ही पूरी कर लें — देर से डाला गया यूरिया हरा चारा बढ़ाता है, दाना नहीं। गोबर की खाद अगर उपलब्ध हो तो बुवाई से पहले खेत में मिला दें, यह मिट्टी की नमी रोकने में भी मदद करती है।
सिंचाई: पहली सिंचाई सबसे अहम
गेहूं में पहली सिंचाई का समय उपज तय करता है। देर से बोए गेहूं में पहली सिंचाई बुवाई के 20–22 दिन बाद, कल्ले फूटने की अवस्था में जरूर करें — इसे क्राउन रूट अवस्था कहते हैं। इस सिंचाई में देरी से कल्ले कम फूटते हैं और उपज सीधे घटती है।
| सिंचाई | समय | क्यों जरूरी |
|---|---|---|
| पहली | बुवाई के 20–22 दिन बाद | कल्ले फूटने की अवस्था, सबसे अहम |
| दूसरी | 40–45 दिन बाद | बढ़वार और गांठ बनने की अवस्था |
| तीसरी | 60–65 दिन बाद | बाली निकलने से पहले |
| चौथी | 80–85 दिन बाद | दूधिया दाना अवस्था |
| पांचवीं (जरूरत पर) | 100–105 दिन बाद | दाना भरने की अवस्था, गर्मी हो तो जरूर |
कुल 4–5 सिंचाइयां आमतौर पर काफी होती हैं। हल्की मिट्टी में सिंचाई का अंतर कम रखें और भारी मिट्टी में ज्यादा पानी एक साथ न भरें। मार्च में गर्म हवा चलने पर हल्की सिंचाई दाने को पतला होने से बचाती है।
खरपतवार: गेहूंसा सबसे बड़ा दुश्मन
गन्ने के बाद वाले खेत में गेहूंसा (फालारिस माइनर) का दबाव ज्यादा रहता है, क्योंकि गन्ने के खेत में यह खरपतवार पहले से मौजूद होता है। बुवाई के 30–35 दिन बाद खेत का निरीक्षण करें — अगर गेहूंसा दिखे तो अनुशंसित खरपतवारनाशी का छिड़काव करें। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। छिड़काव सुबह या शाम को करें, तेज धूप और हवा में नहीं। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए अलग दवा की जरूरत होती है, इसलिए पहले खरपतवार की पहचान करें, फिर दवा चुनें।
रोग और कीट पर नजर
देर से बोए गेहूं में भूरा रतुआ (ब्राउन रस्ट) और माहू (एफिड) पर नजर रखनी चाहिए। पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखें तो तुरंत कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें और अनुशंसित फफूंदनाशी का छिड़काव करें। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। माहू का हमला बाली निकलने के समय ज्यादा होता है — बाली के नीचे चिपके छोटे हरे कीट दिखें तो नियंत्रण में देर न करें। दीमक का डर हो तो बीज उपचार पहले से ही करवाएं, बाद में इलाज मुश्किल होता है।
लागत और आमदनी का हिसाब
देर से बोए गेहूं की लागत समय पर बोए गेहूं से थोड़ी ज्यादा होती है, क्योंकि बीज ज्यादा लगता है। लेकिन गन्ने के बाद खाली खेत में यह अतिरिक्त आय है — खेत वैसे भी खाली रहता।
| खर्च का मद | प्रति एकड़ अनुमानित खर्च |
|---|---|
| बीज (50–60 किलो) | लगभग 2,000–2,500 रुपये |
| खाद (डीएपी, यूरिया, पोटाश) | लगभग 3,000–3,500 रुपये |
| जुताई और बुवाई | लगभग 2,500–3,000 रुपये |
| सिंचाई (4–5 बार) | लगभग 2,000–3,000 रुपये |
| खरपतवार व रोग नियंत्रण | लगभग 800–1,200 रुपये |
| कटाई व मड़ाई | लगभग 2,500–3,000 रुपये |
| कुल लागत | लगभग 13,000–16,000 रुपये |
16 क्विंटल उपज पर, मंडी भाव या सरकारी खरीद दर के हिसाब से आमदनी का अनुमान खुद लगाएं — भाव हर साल बदलता है, इसलिए किसी पुराने भाव को इस साल का भाव मानकर हिसाब न लगाएं। बिक्री से पहले अपने नजदीकी क्रय केंद्र या मंडी का ताजा भाव जरूर पता करें।
7 आम गलतियां जो देर से बोए गेहूं को नुकसान पहुंचाती हैं
- सामान्य बीज दर से बुवाई — देर से बुवाई में 40 किलो बीज से पौधे कम रह जाते हैं।
- समय पर बोई जाने वाली किस्म चुनना — लंबी अवधि की किस्म मार्च की गर्मी में दाना नहीं भर पाती।
- पहली सिंचाई में देरी — 30 दिन बाद पहली सिंचाई से कल्ले आधे रह जाते हैं।
- खाद की आखिरी खुराक देर से देना — बाली के बाद डाला यूरिया दाना नहीं बढ़ाता।
- ठूंठ वाले खेत में बिना तैयारी बुवाई — अंकुरण असमान होता है।
- गेहूंसा को नजरअंदाज करना — यह गेहूं से पानी और खाद छीन लेता है।
- जनवरी के बाद भी गेहूं बो देना — बहुत देर की बुवाई में घाटा तय है, विकल्प फसल बेहतर है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
गन्ना कटाई के बाद गेहूं बोने के लिए सबसे देर कब तक बो सकते हैं? दिसंबर के आखिर तक बुवाई ठीक रहती है, बशर्ते किस्म देर से बुवाई वाली हो और बीज दर बढ़ा दी जाए। जनवरी के बाद गेहूं की जगह चना, मसूर या सरसों बेहतर विकल्प है।
देर से बोए गेहूं में बीज दर कितनी रखें? दिसंबर की बुवाई में प्रति एकड़ 50 से 60 किलोग्राम बीज रखें, जबकि समय पर बुवाई में 40 किलोग्राम काफी होता है। ज्यादा बीज से पौधों की संख्या पूरी होती है और कम कल्लों की भरपाई होती है।
गन्ने के बाद गेहूं में खाद कब और कितनी दें? बुवाई पर डीएपी और पोटाश की पूरी खुराक और यूरिया का एक हिस्सा दें, बाकी यूरिया पहली और दूसरी सिंचाई पर दो भागों में दें। बाली निकलने के बाद यूरिया देने से बचें।
गन्ने वाले खेत में गेहूंसा ज्यादा क्यों होता है? गन्ने के खेत में गेहूंसा पहले से मौजूद रहता है और उसके बीज मिट्टी में पड़े रहते हैं। इसलिए बुवाई के 30–35 दिन बाद खेत जरूर देखें और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित खरपतवारनाशी का छिड़काव करें। मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
क्या देर से बोए गेहूं की उपज समय पर बोए गेहूं जितनी हो सकती है? आमतौर पर थोड़ी कम रहती है, लेकिन सही किस्म, बढ़ी बीज दर और समय पर सिंचाई से अंतर काफी कम हो जाता है। 16 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ का लक्ष्य देर से बुवाई में भी हासिल किया जा सकता है।
गन्ना कटाई के बाद खेत खाली छोड़ना बेहतर है या गेहूं बोना? खेत खाली छोड़ने से न तो आय होती है और न मिट्टी को फायदा — खरपतवार बढ़ते हैं। गेहूं बोने से 4 महीने में अतिरिक्त आय मिलती है और अगली गन्ना बुवाई से पहले खेत का चक्र भी पूरा होता है।
आखिरी बात
गन्ना कटाई के बाद खाली खेत को दिसंबर तक खाली मत रहने दीजिए। सही किस्म चुनिए, बीज दर बढ़ाइए, पहली सिंचाई 20–22 दिन पर करिए और खाद का हिसाब बुवाई से ही साध लीजिए — देर से बोया गेहूं भी अच्छी उपज देगा। और अगर कटाई जनवरी तक खिंच जाए तो जिद करके गेहूं मत बोइए, चना-मसूर-सरसों में से कोई एक फसल चुनिए। खेत कभी खाली नहीं रहना चाहिए, यही गन्ना किसान की साल भर की आमदनी का सबसे आसान नियम है।
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