
पेराई सत्र 2026-27 का बिगुल बजने में अब गिने-चुने हफ्ते बचे हैं। अक्टूबर के आखिरी हफ्तों से उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलें एक-एक करके चलना शुरू कर देंगी, और जैसे ही मिल चलेगी, गन्ना कटाई की रेस शुरू हो जाएगी। हर साल यही होता है — जिस किसान की कटाई की तैयारी पहले से होती है, उसका गन्ना समय पर तौला जाता है, पर्ची समय पर मिलती है और भुगतान भी समय पर आता है। और जिसकी तैयारी नहीं होती, वह श्रमिकों के पीछे भागता है, हार्वेस्टर की लाइन में लगता है और कटा हुआ गन्ना खेत में पड़ा-पड़ा सूखता रहता है।
कटा हुआ गन्ना जितनी देर खेत में पड़ा रहता है, उसका वजन उतना घटता है और चीनी की मात्रा भी कम होती जाती है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह एकदम साफ है — कटाई के बाद गन्ना जितनी जल्दी मिल पहुंचे, उतना बेहतर। 24 से 48 घंटे के अंदर गन्ना मिल के यार्ड में होना चाहिए। इसके लिए अक्टूबर में ही 7 काम निपटा लेने चाहिए। यह गाइड उन्हीं 7 तैयारियों का पूरा प्लान है।
तैयारी 1: पके गन्ने की पहचान — सही समय पर कटाई शुरू करें
कटाई की सबसे पहली तैयारी है यह जानना कि आपका गन्ना कटने लायक पका है या नहीं। कच्चा गन्ना काटने से चीनी कम मिलती है और मिल भी नाराज होती है, जबकि ज्यादा पका (अति-परिपक्व) गन्ना सूखने लगता है।
पके गन्ने के 5 संकेत:
- उम्र: अगेती फसल 10 से 12 महीने और पेड़ी फसल 10 महीने के आसपास पकती है।
- पत्तियां: नीचे की पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगती हैं, ऊपर की 4-5 पत्तियां हरी रहती हैं।
- तना: तने का रंग किस्म के अनुसार गहरा हो जाता है, छूने पर सख्त लगता है।
- आंखें (बड): गन्ने की आंखें फूलने लगती हैं — यह पकने का अच्छा संकेत है।
- रस का स्वाद: रस चखने पर तेज मिठास आए, खट्टापन बिल्कुल न हो।
जिस खेत का गन्ना पहले पका है, कटाई वहीं से शुरू करें। खेत के अलग-अलग हिस्सों में पकने का समय अलग हो सकता है — एक साथ पूरा खेत काटने की जल्दबाजी न करें।
तैयारी 2: कटाई श्रमिकों की अग्रिम बुकिंग — अक्टूबर में ही बात पक्की करें
पेराई सत्र शुरू होते ही कटाई मजदूरों की मांग आसमान छू जाती है। हर साल नवंबर-दिसंबर में श्रमिकों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनती है — दरें बढ़ जाती हैं और मनमानी शर्तें रखी जाती हैं।
अभी से क्या करें:
- अपने क्षेत्र के कटाई दलों (जोड़ी/टोली) से अक्टूबर में ही बात करके तारीख पक्की कर लें।
- दर पहले से तय कर लें — प्रति क्विंटल या प्रति बीघा, जो भी स्थानीय चलन हो, लिखित में नोट कर लें।
- ठेके पर कटाई करवाते समय यह स्पष्ट करें कि कटाई के साथ बंधाई (बंडल बनाना) और ट्रॉली/ट्रक तक लदाई भी शामिल है या नहीं।
- 2-3 दलों से बात करके रखें, ताकि एक दल न आए तो विकल्प मौजूद हो।
एक अनुभवी कटाई दल एक दिन में 80 से 120 क्विंटल गन्ना काट सकता है। अपने खेत के रकबे के हिसाब से हिसाब लगाकर दल की संख्या तय करें — ताकि मिल की स्लिप (इंडेंट) वाली तारीख से पहले कटाई पूरी हो जाए।
तैयारी 3: हार्वेस्टर मशीन की बुकिंग — बड़ी जोत वालों के लिए जरूरी
अगर आपकी जोत 5 एकड़ से ज्यादा है, तो हार्वेस्टर मशीन पर गंभीरता से विचार करें। मशीन से कटाई तेज होती है, श्रमिकों की झंझट खत्म होती है और समय पर गन्ना मिल पहुंचता है।
मशीन बुकिंग के विकल्प:
| विकल्प | फायदा | ध्यान देने वाली बात |
|---|---|---|
| सहकारी समिति/गन्ना समिति से बुकिंग | किराया कम, भरोसेमंद | पहले आओ-पहले पाओ — अक्टूबर में ही नाम लिखवाएं |
| FPO/किसान उत्पादक संगठन | समूह में सस्ती दर | अपने क्षेत्र के FPO से संपर्क करें |
| निजी हार्वेस्टर मालिक | समय पर उपलब्धता | दर पहले से लिखित में तय करें |
| कृषि यंत्र बैंक (कस्टम हायरिंग सेंटर) | सरकारी दर पर किराया | ब्लॉक कृषि कार्यालय से जानकारी लें |
ध्यान रहे — हार्वेस्टर से कटाई में गन्ने की पत्ती (ट्रैश) खेत में ही बिछ जाती है, जिसे मल्चिंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे अगली फसल में नमी बची रहती है और खरपतवार कम होते हैं।
तैयारी 4: तौल और पर्ची की तैयारी — घटतौली से बचने का पूरा बंदोबस्त
कटाई के बाद सबसे अहम कड़ी है सही तौल। हर साल घटतौली (कम तौलने) की शिकायतें आती हैं। अक्टूबर में ही अपनी तैयारी पक्की कर लें।
तौल से पहले की चेकलिस्ट:
- अपना गन्ना क्रय केंद्र (गेट/सेंटर) पहले से तय कर लें — कौन सा केंद्र आपके खेत के सबसे नजदीक है और वहां तौल की व्यवस्था कैसी है।
- तौल पर्ची संभालकर रखें — हर ट्रॉली/ट्रक की तौल पर्ची की फोटो अपने मोबाइल में भी सेव करें।
- तौल के समय खुद या कोई विश्वसनीय व्यक्ति मौजूद रहे — यह आपका कानूनी अधिकार है।
- खाली और भरी गाड़ी दोनों की तौल (टेयर वेट) की पर्ची लें, ताकि शुद्ध वजन का हिसाब साफ रहे।
- अगर घटतौली का शक हो, तो तुरंत गन्ना समिति या मिल के गन्ना अधिकारी से लिखित शिकायत करें।
याद रखें — तौल पर्ची ही आपके भुगतान का आधार है। पर्ची खो जाए तो डुप्लीकेट पर्ची के लिए तुरंत आवेदन करें, देर न करें।
तैयारी 5: मिल इंडेंट/कैलेंडर — caneup पोर्टल पर अपनी स्लिप पहले से चेक करें
उत्तर प्रदेश में गन्ना आपूर्ति पर्ची (सप्लाई टिकट/इंडेंट) कैलेंडर के हिसाब से मिलती है। कटाई उसी क्रम में करें जिस क्रम में आपकी पर्ची/स्लिप आनी है — बिना स्लिप के काटा गन्ना मिल नहीं लेगी और खेत में सूखेगा।
अक्टूबर में पोर्टल पर क्या देखें:
- caneup.in या enquiry.caneup.in पर जाकर अपना पेराई सत्र 2026-27 का कैलेंडर चेक करें।
- अपना ग्रोअर कोड और सट्टा विवरण वेरिफाई कर लें — नाम, रकबा, किस्म में कोई गलती हो तो तुरंत सुधार करवाएं।
- e-Ganna ऐप में लॉगिन करके पर्ची कैलेंडर और SMS अलर्ट चालू कर लें — स्लिप जारी होते ही SMS मिल जाता है।
- अगर पर्ची कैलेंडर में कोई गड़बड़ी दिखे, तो गन्ना समिति में जाकर प्री-कैलेंडर आपत्ति दर्ज कराएं — सत्र शुरू होने के बाद सुधार मुश्किल होता है।
जरूरी हेल्पलाइन नंबर (सत्यापित): टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर गन्ना विभाग से जुड़ी जानकारी मिल सकती है। SMS जानकारी के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 का इस्तेमाल करें। कोई भी नया नंबर मिलने पर पहले आधिकारिक स्रोत (upcane.gov.in या caneup.in) से वेरिफाई जरूर करें।
तैयारी 6: कटाई की सही विधि — जमीन से काटें, पत्ती हटाएं, जल्दी भेजें
कटाई की विधि सीधे वजन और चीनी पर असर डालती है। जल्दबाजी में गलत कटाई से क्विंटलों का नुकसान हो जाता है।
सही कटाई के 6 नियम:
- जमीन की सतह से काटें — ऊपर से काटने पर नीचे का मीठा हिस्सा खेत में रह जाता है। नीचे का हिस्सा सबसे ज्यादा चीनी वाला होता है।
- सूखी पत्तियां हटाएं — पत्ती के साथ तौलने से वजन तो बढ़ता है, लेकिन मिल में कटौती होती है और बदनामी अलग।
- गन्ने को लंबा रखें — छोटे-छोटे टुकड़े करने से रस सूखता है; मिल की लंबाई के हिसाब से 2-3 टुकड़े ही करें।
- कटाई के बाद छांव में रखें — धूप में पड़ा गन्ना तेजी से सूखता है।
- 24-48 घंटे में मिल भेजें — यही सुनहरा नियम है। जितनी देरी, उतना वजन और चीनी का नुकसान।
- रात की कटाई से बचें — अंधेरे में कटाई में चोट का खतरा और गलत कटाई दोनों बढ़ते हैं।
कटाई के दिन का प्लान स्लिप की तारीख से 1 दिन पहले का रखें — ताकि तौल केंद्र पर लाइन और ट्रांसपोर्ट में लगने वाला समय भी कवर हो जाए।
तैयारी 7: भुगतान की तैयारी — खाता, DBT और 14 दिन का नियम
आखिरी तैयारी सबसे जरूरी है — भुगतान की। गन्ना बेचने के बाद पैसा समय पर मिले, इसके लिए कागजी तैयारी पहले से होनी चाहिए।
भुगतान चेकलिस्ट:
- बैंक खाता आधार से लिंक और DBT के लिए सक्रिय हो — गन्ना भुगतान सीधे खाते में आता है।
- खाते में नाम, मोबाइल नंबर और IFSC सही हो — एक छोटी गलती से भुगतान अटक सकता है।
- हर तौल पर्ची का रिकॉर्ड (तारीख, वजन, केंद्र का नाम) एक डायरी या मोबाइल नोट में रखें।
- 14 दिन का नियम याद रखें — गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर भुगतान का नियम है; इससे ज्यादा देरी पर ब्याज का प्रावधान है।
- भुगतान न आए तो पहले caneup पोर्टल पर स्टेटस चेक करें, फिर मिल और गन्ना समिति में लिखित शिकायत दें।
भाव (रेट) पर एक जरूरी नोट: 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है — जैसे ही सरकार आधिकारिक घोषणा करेगी, हम caneup.xyz पर अपडेट देंगे। पिछले सत्र की दर को इस सत्र की दर समझने की गलती न करें।
अक्टूबर की 4-हफ्ते की एक्शन टाइमलाइन
| हफ्ता | करने वाले काम |
|---|---|
| हफ्ता 1 (अक्टूबर शुरू) | पके गन्ने की पहचान; श्रमिक दलों से बातचीत शुरू |
| हफ्ता 2 | श्रमिक/हार्वेस्टर बुकिंग पक्की; caneup पोर्टल पर कैलेंडर वेरिफाई |
| हफ्ता 3 | तौल केंद्र तय; बैंक खाता-DBT चेक; कटाई की तारीखें फाइनल |
| हफ्ता 4 | पहली स्लिप का इंतजार; कटाई दल तैयार; ट्रांसपोर्ट (ट्रॉली/ट्रक) बुक |
जवाब जानिए
सवाल: कटाई के कितने समय बाद गन्ना मिल पहुंचना चाहिए? जवाब: आदर्श रूप से 24 से 48 घंटे के अंदर। जितनी देरी होगी, वजन घटेगा और चीनी की मात्रा भी कम होगी। इसलिए कटाई का प्लान मिल की स्लिप (इंडेंट) की तारीख से जोड़कर बनाएं।
सवाल: हार्वेस्टर से कटाई करवाना फायदेमंद है या मजदूरों से? जवाब: 5 एकड़ से ज्यादा जोत पर हार्वेस्टर आमतौर पर तेज और किफायती पड़ता है, और समय पर कटाई की गारंटी मिलती है। छोटी जोत पर अनुभवी श्रमिक दल बेहतर रहता है, क्योंकि मशीन का किराया प्रति एकड़ ज्यादा पड़ सकता है।
सवाल: तौल में गड़बड़ी लगे तो क्या करें? जवाब: तौल के समय खुद मौजूद रहें, खाली-भरी दोनों गाड़ियों की पर्ची लें और हर पर्ची की फोटो मोबाइल में सेव करें। गड़बड़ी पर तुरंत गन्ना समिति या मिल के गन्ना अधिकारी को लिखित शिकायत दें।
सवाल: बिना पर्ची/स्लिप के गन्ना काट लें तो क्या होगा? जवाब: बिना सप्लाई टिकट (इंडेंट) के मिल गन्ना नहीं लेगी। कटा गन्ना खेत में पड़ा रहेगा और सूखकर वजन-चीनी दोनों गंवाएगा। इसलिए कटाई हमेशा पर्ची कैलेंडर के क्रम में ही करें।
सवाल: e-Ganna ऐप में पर्ची कैलेंडर कैसे देखें? जवाब: e-Ganna ऐप में अपने ग्रोअर कोड से लॉगिन करें — वहां पर्ची कैलेंडर, सट्टा विवरण और SMS अलर्ट की सुविधा मिलती है। स्लिप जारी होते ही SMS आ जाता है, जिससे कटाई का प्लान बनाना आसान होता है।
सवाल: गन्ना भुगतान में देरी हो रही है, कहां शिकायत करें? जवाब: पहले caneup.in या enquiry.caneup.in पर भुगतान स्टेटस चेक करें। फिर संबंधित चीनी मिल और गन्ना समिति में लिखित शिकायत दें। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर भी जानकारी ले सकते हैं।
पेराई सत्र में जीत उसी किसान की होती है जिसकी तैयारी पहले से होती है। अक्टूबर के ये 4 हफ्ते आपकी पूरी सीजन की कमाई तय करेंगे — श्रमिक बुक कर लीजिए, पोर्टल पर कैलेंडर चेक कर लीजिए, तौल की व्यवस्था पक्की कर लीजिए। कटाई के दिन फिर कोई भागदौड़ नहीं होगी, सिर्फ काम होगा।
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