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गन्ना किसान को 50% अनुदान पर ₹52,500 में खेत-तालाब: 2026-27 में बरसात का पानी बचाएं, सिंचाई की गारंटी और मछली पालन से दोहरी कमाई

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 6, 2026 • 8 min read
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गन्ना किसान को 50% अनुदान पर ₹52,500 में खेत-तालाब: 2026-27 में बरसात का पानी बचाएं, सिंचाई की गारंटी और मछली पालन से दोहरी कमाई
अंतिम अपडेट: October 6, 2026 10:58 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अक्टूबर का महीना है। मानसून के आखिरी बादल छंट रहे हैं, और हर गन्ना किसान के मन में एक ही सवाल घूम रहा है — शरदकालीन बुवाई और पेड़ी फसल की सिंचाई का इंतजाम कैसे होगा? नहर की बारी कब आएगी, इसका भरोसा नहीं। डीजल का भाव आसमान पर है, और ट्यूबवेल का बिल हर महीने बढ़ता जा रहा है। इस बीच जून से सितंबर तक आसमान से जो करोड़ों लीटर पानी आपके खेत में गिरा, वह बिना कुछ दिए नाली-नालों से बह गया।

यहीं पर खेत-तालाब काम आता है। उत्तर प्रदेश सरकार की खेत तालाब योजना 2026-27 के तहत किसान को ₹1,05,000 की लागत वाले तालाब पर 50% यानी ₹52,500 का अनुदान मिल रहा है — सीधे बैंक खाते में, दो किस्तों में। एक ही तालाब से तीन फायदे: बरसात का पानी संचय होकर शुष्क महीनों में जीवनरक्षक सिंचाई देगा, भूजल रिचार्ज होगा, और उसी पानी में मछली पालन व सिंघाड़ा जैसी फसलों से अतिरिक्त आय भी बनेगी। 2017-18 से अब तक प्रदेश में इस योजना के तहत 37,403 खेत-तालाब बन चुके हैं (कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार) — यह कोई प्रयोग नहीं, आजमाई हुई व्यवस्था है। इस गाइड में जानिए अनुदान का पूरा हिसाब, तालाब की सही डिजाइन, सिंचाई की गणित, आवेदन की प्रक्रिया और दोहरी कमाई के तरीके।

खेत-तालाब योजना 2026-27: अनुदान का पूरा हिसाब

यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” घटक के “अदर इंटरवेंशन” उपघटक के तहत चल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिलों में लक्ष्य तय किए गए हैं — जैसे हरदोई में 27, शामली में 7 और प्रयागराज में 12 तालाबों का लक्ष्य मिला है। आवेदन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होते हैं, इसलिए देर करने से लक्ष्य भर जाता है।

विवरणराशि/माप
मानक तालाब का आकार22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर
कुल निर्धारित लागत₹1,05,000
सरकारी अनुदान (50%)₹52,500
किसान का हिस्सा₹52,500
पहली किस्त (खुदाई पूरी होने पर)₹39,375
दूसरी किस्त (पक्का इनलेट बनने पर)₹13,125
टोकन मनी (आवेदन के समय)₹1,000
पंपसेट पर सहायता (50%, अधिकतम)₹15,000

दोनों किस्तें डीबीटी (सीधे बैंक खाते) के माध्यम से मिलती हैं। खुदाई की प्रगति और इनलेट का निर्माण भूमि संरक्षण अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाता है — geo-tagging के साथ। योजना की शर्त है कि तालाब के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर प्रणाली लगाना अनिवार्य है, जिस पर उद्यान/कृषि विभाग से 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। पानी निकालने के लिए पंपसेट खरीदने पर भी 50% या अधिकतम ₹15,000 की सहायता उपलब्ध है।

गन्ना किसान को तालाब से क्या मिलेगा: सिंचाई की गणित

आइए सीधा हिसाब लगाएं। 22 × 20 × 3 मीटर का तालाब = 1320 घन मीटर यानी 13,20,000 लीटर पानी। अब गन्ने की पानी की जरूरत से जोड़िए:

  • 1 हेक्टेयर खेत में 1 सेमी पानी देने पर ≈ 1,00,000 लीटर खर्च होता है।
  • 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) में 5 सेमी की एक जीवनरक्षक सिंचाई ≈ 2,00,000 लीटर।
  • यानी एक पूरा भरा तालाब ≈ 5-6 बार जीवनरक्षक सिंचाई (रिसाव और वाष्पीकरण घटाकर)।

गन्ने की फसल को अंकुरण, टिलरिंग और ग्रोथ स्टेज में 6-8 सिंचाइयां चाहिए होती हैं। नहर की बारी छूटी या ट्यूबवेल खराब हुआ, तो तालाब का पानी उस संकट को टाल देता है। अक्टूबर-नवंबर में शरदकालीन बुवाई के समय अंकुरण के लिए पानी सबसे नाजुक होता है — उसी समय तालाब सबसे ज्यादा काम आता है। तालाब से निकला पानी ड्रिप के साथ दें, तो फर्टिगेशन (पानी के साथ खाद) भी एक साथ हो जाता है और पानी की बचत दोगुनी हो जाती है।

यह समझना जरूरी है कि तालाब जीवनरक्षक सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत है, पूरे सीजन की हर सिंचाई का विकल्प नहीं। मानसून में भरकर यह फरवरी-मार्च के शुष्क दौर और बुवाई के नाजुक चरण को संभालता है — ठीक वही दौर जब गन्ने की पैदावार तय होती है।

तालाब की सही डिजाइन: जगह, आकार और निर्माण के 7 नियम

  1. जगह का चुनाव: खेत के सबसे निचले कोने में तालाब बनाएं, जहां बरसात का पानी प्राकृतिक रूप से बहकर आता हो। खेत की मेड़ या नाली से पानी लाने का रास्ता साफ रखें।
  2. मानक माप अपनाएं: योजना के अनुसार 22 × 20 × 3 मीटर का आकार अनुदान की पात्रता के लिए तय है। अपने खेत के हिसाब से बड़ा तालाब बनाना हो तो अतिरिक्त लागत किसान को वहन करनी होगी।
  3. ढलान (स्लोप) रखें: दीवारें एकदम सीधी न खुदवाएं — दोनों तरफ हल्का ढलान रखें ताकि मिट्टी ढहे नहीं और बारिश में किनारे न कटें।
  4. इनलेट और आउटलेट अनिवार्य: पानी भरने का पक्का इनलेट और अतिरिक्त पानी निकालने का आउटलेट बनाएं। दूसरी किस्त (₹13,125) पक्का इनलेट बनने के बाद ही मिलती है — इसे नजरअंदाज न करें।
  5. रिसाव रोकें: रेतीली मिट्टी में पानी जल्दी रिसता है। ऐसी जमीन पर तालाब के तल और दीवारों पर पॉलीथीन लाइनिंग या मिट्टी की पक्की परत लगवाएं। विभागीय मार्गदर्शन लें।
  6. सुरक्षा बाड़ लगाएं: तालाब के चारों ओर कंटीली तार या बांस की बाड़ लगाना जरूरी है — बच्चों और पशुओं की सुरक्षा के लिए। यह लापरवाही का विषय नहीं है।
  7. पेड़ी/गन्ना खेत से दूरी: तालाब गन्ने के मुख्य खेत से 20-30 मीटर से ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन की लंबाई और पंपिंग का खर्च कम रहे।

आवेदन की प्रक्रिया: 7 स्टेप में बुकिंग से किस्त तक

  1. फार्मर रजिस्ट्री पूरी करें: योजना के लिए किसान का फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकरण अनिवार्य है। अगर अभी तक नहीं कराया, तो पहले यही काम करवाएं।
  2. पोर्टल पर जाएं: कृषि विभाग के दर्शन (DARSHAN) पोर्टल — agriculture.up.gov.in — पर वित्तीय वर्ष 2026-27 की खेत तालाब बुकिंग लिंक खोलें।
  3. ऑनलाइन बुकिंग व टोकन: अपनी जमीन का विवरण भरकर बुकिंग करें और टोकन जनरेट करें। टोकन के 10 दिनों के भीतर ₹1,000 टोकन मनी ऑनलाइन जमा करनी होगी।
  4. चयन: चयन ई-लॉटरी या ऑटो-कंफर्म प्रक्रिया से होता है। जिले का लक्ष्य भरने पर बुकिंग बंद हो जाती है।
  5. खुदाई करवाएं: चयन के बाद तालाब की खुदाई करवाएं। मानक माप का पालन करें — विभागीय अधिकारी माप सत्यापित करते हैं।
  6. पहली किस्त: खुदाई पूरी और सत्यापित होने पर ₹39,375 डीबीटी से खाते में आते हैं।
  7. इनलेट व दूसरी किस्त: पक्का इनलेट व आउटलेट बनवाएं, geo-tagging व सत्यापन के बाद ₹13,125 की दूसरी किस्त मिलती है।

आवेदन के समय जमीन के कागजात, बैंक खाता विवरण और पहचान पत्र तैयार रखें। किसी भी दलाल को पैसा न दें — पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और निःशुल्क (टोकन मनी को छोड़कर) है।

तालाब से दोहरी कमाई: मछली, सिंघाड़ा और मेंढ़ की खेती

तालाब सिर्फ सिंचाई का टैंक नहीं, आय का स्रोत भी है। प्रयागराज जैसे जिलों में विभाग खुद किसानों को तालाब में मत्स्य पालन, सिंघाड़ा और मखाना की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

  • मत्स्य पालन: तालाब में रोहू-कतला जैसी मिश्रित मछली पालन से सालाना अतिरिक्त आय। मछली का चारा और प्रबंधन स्थानीय मत्स्य विभाग से सीखें।
  • सिंघाड़ा: अक्टूबर-नवंबर में सिंघाड़े की रोपाई होती है — तालाब के उथले हिस्से में यह सर्दियों की नकदी फसल है।
  • मेंढ़ पर चारा-सब्जी: तालाब की मेंढ़ पर नेपियर घास या मौसमी सब्जी लगाएं — पशुओं का चारा और घर की सब्जी, दोनों मुफ्त।
  • ड्रिप के साथ तालाब: तालाब के पानी को ड्रिप से जोड़ने पर 80-90% अनुदान वाली सूक्ष्म सिंचाई से पानी की हर बूंद गन्ने की जड़ तक पहुंचती है।

एक तालाब से सिंचाई + मछली + सिंघाड़ा — तीनों मिलकर किसान की जोखिम क्षमता बढ़ाते हैं। जिस साल गन्ने का भाव या भुगतान अटके, उस साल तालाब की आय घर का खर्च संभालती है।

तालाब की देखभाल: 5 जरूरी काम

  1. हर साल सफाई: मानसून से पहले तालाब की तली की गाद (सिल्ट) निकालें — गाद भरेगी तो क्षमता घटेगी।
  2. जलीय खरपतवार हटाएं: पानी पर जलकुंभी जैसी वनस्पति फैले तो समय पर निकालें, वरना वाष्पीकरण बढ़ता है और मछलियों को ऑक्सीजन नहीं मिलती।
  3. बांध की मरम्मत: हर बारिश के बाद किनारों की कटान देखें और मिट्टी भरकर ठीक करें।
  4. पानी का स्तर प्रबंधित करें: अत्यधिक बारिश में आउटलेट से अतिरिक्त पानी निकालें ताकि बांध पर दबाव न पड़े।
  5. मछली पालन में संतुलन: जरूरत से ज्यादा मछली न डालें — अधिक घनत्व से पानी खराब होता है। स्थानीय मत्स्य अधिकारी से स्टॉकिंग दर पूछें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या खेत-तालाब के लिए मेरी जमीन पात्र है? आम तौर पर स्वयं की कृषि भूमि पर तालाब बनवाया जा सकता है। जमीन के कागजात, फार्मर रजिस्ट्री और बैंक खाता आवश्यक है। विस्तृत पात्रता शर्तें जिले के भूमि संरक्षण कार्यालय या दर्शन पोर्टल पर देखें।

₹52,500 का अनुदान कब-कब मिलेगा? दो किस्तों में — खुदाई पूरी व सत्यापित होने पर ₹39,375 और पक्का इनलेट बनने के बाद ₹13,125। दोनों किस्तें सीधे आपके बैंक खाते में (डीबीटी) आती हैं।

क्या तालाब के साथ ड्रिप लगाना जरूरी है? हां, योजना की शर्त के अनुसार तालाब के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर प्रणाली लगाना अनिवार्य है। अच्छी बात यह है कि इस पर 80-90% तक अनुदान मिलता है।

एक तालाब कितने एकड़ गन्ने की सिंचाई कर सकता है? 22×20×3 मीटर के मानक तालाब में करीब 13.2 लाख लीटर पानी आता है, जो लगभग 1 एकड़ गन्ने को 5-6 बार जीवनरक्षक सिंचाई दे सकता है। यह पूरे सीजन का विकल्प नहीं, बल्कि संकट के समय का भरोसेमंद सहारा है।

टोकन मनी ₹1,000 वापस मिलती है? टोकन मनी आवेदन की गंभीरता के लिए ली जाती है। चयन न होने या योजना से बाहर होने की स्थिति में नियमानुसार प्रक्रिया विभाग तय करता है — आवेदन से पहले पोर्टल पर शर्तें जरूर पढ़ें।

तालाब में मछली पालन के लिए अलग से अनुमति चाहिए? छोटे निजी तालाब में मत्स्य पालन आम तौर पर किसान स्वयं कर सकता है। बीज, चारा और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए जिले के मत्स्य विभाग से संपर्क करें — कई जगह मत्स्य पालन पर भी अनुदान योजनाएं चलती हैं।

क्या बटाईदार या पट्टे की जमीन पर तालाब बन सकता है? आम तौर पर योजना का लाभ भूमि के स्वामी को मिलता है। पट्टे की जमीन पर स्थिति जिले के नियमों पर निर्भर करती है — आवेदन से पहले भूमि संरक्षण कार्यालय से स्पष्ट कर लें।


निष्कर्ष: अक्टूबर में जब मानसून विदा ले रहा है, यही सबसे सही समय है खेत-तालाब की योजना बनाने का। ₹52,500 का अनुदान, 5-6 जीवनरक्षक सिंचाइयों का भरोसा और मछली-सिंघाड़े की अतिरिक्त आय — एक तालाब, तीन फायदे। दर्शन पोर्टल पर 2026-27 की बुकिंग पहले आओ-पहले पाओ पर है, इसलिए अपने जिले का लक्ष्य भरने से पहले आवेदन करें। बरसात का एक-एक बूंद बचाइए — यही पानी फरवरी-मार्च में आपके गन्ने की जान बचाएगा।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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