
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बीच हर साल पेराई सत्र शुरू होने से पहले एक सवाल सबसे ज्यादा गूंजता है: “हमारे खेत में गन्ने की पैदावार 800 क्विंटल है, लेकिन सट्टे में हमारा बेसिक कोटा केवल 350 क्विंटल दर्ज है। क्या हमारी पर्चियां कम कटेंगी और बाकी गन्ना औने-पौने दाम पर कोल्हू-क्रशर को बेचना पड़ेगा?” यह चिंता पूरी तरह स्वाभाविक है। गन्ना सट्टा प्रणाली में बेसिक कोटा (Basic Quota) ही वह रीढ़ की हड्डी है जो यह तय करती है कि आपको पूरे 12 पखवाड़ों में कुल कितनी गन्ना पर्ची (Ganna Parchi) आवंटित की जाएंगी।
यदि किसी किसान का बेसिक कोटा उसकी वास्तविक फसल क्षमता से कम है, तो चीनी मिल उसके पूरे गन्ने की खरीद के लिए समय पर इंडेंट जारी नहीं कर पाएगी। परिणामतः किसान का गन्ना खेतों में सूखता रहेगा या उसे ₹220-₹250 प्रति क्विंटल के सस्ते भाव में निजी गुड़ कोल्हू पर बेचना पड़ेगा, जबकि सरकारी राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) ₹370 प्रति क्विंटल तक है।
लेकिन बहुत कम किसान यह जानते हैं कि उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद नियमावली के अंतर्गत बेसिक कोटा कोई पत्थर की लकीर नहीं है। यदि आपने चालू वर्ष में गन्ने का रकबा बढ़ाया है, नई उन्नत प्रजाति (जैसे Co-15023 या Co-0118) बोकर पैदावार दोगुनी की है, या पिछले वर्षों में लगातार मिल को नियमित आपूर्ति की है, तो आप नियमानुसार अपना बेसिक कोटा बढ़वा सकते हैं। आधिकारिक पोर्टल caneup और cane up.in पर अपने बेसिक कोटे का सही गणित समझना और सहकारी समिति में समय रहते आवेदन करना ही आपकी सभी पर्चियों को सुरक्षित कराने की कुंजी है।
इस 2200+ शब्दों के विस्तृत शोध-परक लेख में हम बेसिक कोटे के निर्धारण का सटीक गणितीय फॉर्मूला, 85% त्रैवार्षिक आपूर्ति नियम, अतिरिक्त रकबे के लिए बंध-पत्र (Bonding) की शर्तें और समिति में प्रार्थना पत्र देने की पूरी कानूनी प्रक्रिया विस्तार से समझाएंगे।
बेसिक कोटा क्या है? (What is Sugarcane Basic Quota?)
सरल शब्दों में, बेसिक कोटा किसी किसान द्वारा पिछले वर्षों में चीनी मिल को की गई वास्तविक गन्ना आपूर्ति का वह प्रमाणित आधार है जिसके आधार पर चालू पेराई सत्र के लिए उसकी आपूर्ति क्षमता (Supply Entitlement) तय की जाती है।
गन्ना विकास विभाग द्वारा बेसिक कोटा निर्धारित करने का मुख्य उद्देश्य चीनी मिल और किसानों के बीच न्यायसंगत संतुलन बनाना है। यदि किसी मिल की कुल पेराई क्षमता 50 लाख क्विंटल है और क्षेत्र के 10,000 किसानों का कुल बेसिक कोटा 60 लाख क्विंटल बनता है, तो मिल अपनी दैनिक पेराई क्षमता के अनुपात में 12 पखवाड़ों के कैलेंडर में प्रत्येक किसान को समानुपातिक पर्चियां आवंटित करती है।
बेसिक कोटे की तीन मूलभूत श्रेणियां
- स्थिर बेसिक कोटा (Standard Basic Quota): जो किसान पिछले 3 या अधिक वर्षों से नियमित रूप से चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति कर रहे हैं, उनका कोटा पिछले 3 पेराई सत्रों की आपूर्ति का औसत निकालकर तय होता है।
- प्रारंभिक बेसिक कोटा (Initial Quota for New Farmers): जो किसान पहली बार गन्ना समिति के सदस्य बने हैं और जिन्होंने नया सट्टा चालू कराया है, उनका कोटा उनके सर्वेक्षित गन्ने के रकबे और उस क्षेत्र की औसत उत्पादकता के 85% के आधार पर पहले साल निर्धारित किया जाता है।
- संशोधित बेसिक कोटा (Enhanced/Adjusted Quota): जब कोई पुराना किसान अपनी कृषि भूमि बढ़ाता है, नया नलकूप लगाकर सिंचाई क्षमता बढ़ाता है, या उपज बढ़ाने वाली तकनीकी अपनाता है, तो जांच के उपरांत उसका कोटा बढ़ाया जाता है।
बेसिक कोटा निर्धारण का आधिकारिक गणितीय फॉर्मूला
उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पेराई सट्टा नीति के अनुसार बेसिक कोटा की गणना निम्नलिखित फॉर्मूलों के आधार पर की जाती है:
1. त्रैवार्षिक औसत आपूर्ति नियम (3-Year Average Supply Rule)
पुराने पंजीकृत किसानों के लिए पिछले 3 पेराई सत्रों (जैसे 2023-24, 2024-25, और 2025-26) में चीनी मिल को की गई कुल आपूर्ति का औसत निकाला जाता है:
$$ ext{बेसिक कोटा} = rac{ ext{सत्र 1 आपूर्ति} + ext{सत्र 2 आपूर्ति} + ext{सत्र 3 आपूर्ति}}{3}$$
उदाहरण से समझें:
- वर्ष 2023-24 में आपूर्ति: 450 क्विंटल
- वर्ष 2024-25 में आपूर्ति: 520 क्विंटल
- वर्ष 2025-26 में आपूर्ति: 590 क्विंटल
- कुल 3 वर्षों का योग = 1560 क्विंटल
- नया बेसिक कोटा = $1560 \div 3 = 520 ext{ क्विंटल}$
2. 85% पेराई क्षमता सीमा नियम (The 85% Capacity Ceiling)
यदि किसी वर्ष किसान के क्षेत्र में सूखा, बाढ़ या रेड रॉट जैसी बीमारी आ गई और वह सामान्य आपूर्ति नहीं कर सका, तो विभाग किसान के सर्वोत्तम दो वर्षों का औसत लेता है। इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष में किसान के खेत में खड़े गन्ने के कुल अनुमानित उत्पादन के 85% से अधिक बेसिक कोटा नहीं दिया जा सकता।
$$ ext{अधिकतम अनुमन्य कोटा} = ext{कुल सर्वेक्षित गन्ना उत्पादन (क्विंटल)} imes 0.85$$
यदि आपके 2 हेक्टेयर खेत में अनुमानित उत्पादन 1600 क्विंटल आंका गया है, तो आपका अधिकतम सट्टा कोटा $1600 imes 0.85 = 1360 ext{ क्विंटल}$ तक ही स्वीकृत हो सकता है। शेष 15% गन्ने को बीज, घरेलू गुड़ और चारे के लिए आरक्षित माना जाता है।
बेसिक कोटा और पर्चियों (Parchi) की संख्या का संबंध
बहुत से किसान यह नहीं जानते कि बेसिक कोटे से पर्चियों की संख्या कैसे निकलती है। उत्तर प्रदेश में एक मानक गन्ना पर्ची (सप्लाई टिकट) का वजन वाहन के प्रकार पर निर्भर करता है:
| आपूर्ति का साधन (Mode of Transport) | मानक वजन प्रति पर्ची (Standard Weight) | 600 क्विंटल कोटे में कुल पर्चियां |
|---|---|---|
| बैलगाड़ी / बुग्गी (Bullock Cart) | 9 क्विंटल से 18 क्विंटल | ~33 से 66 पर्चियां |
| ट्रैक्टर-ट्रॉली (2-व्हील) | 27 क्विंटल (मानक) | ~22 पर्चियां |
| ट्रैक्टर-ट्रॉली (4-व्हील / बड़ा ट्रिप) | 45 क्विंटल से 54 क्विंटल | ~11 से 13 पर्चियां |
जब cane up.in या enquiry.caneup.in पर आपका 12 पखवाड़े का कैलेंडर तैयार होता है, तो आपके बेसिक कोटे के अनुसार कुल पर्चियों को 12 पखवाड़ों (Fortnights) और प्रत्येक पखवाड़े के 15 कॉलमों में कंप्यूटर एल्गोरिद्म द्वारा समान रूप से फैलाया जाता है। यदि बेसिक कोटा कम होगा, तो कैलेंडर में कई पखवाड़े खाली (Blank) रह जाएंगे, जिससे फसल कटाई में लंबा अंतराल आएगा।
बेसिक कोटा बढ़ाने के लिए 4 कानूनी आधार (Valid Grounds)
गन्ना समिति में केवल यह कहने से कोटा नहीं बढ़ता कि “मेरी फसल अच्छी है।” आपको निम्नलिखित चार में से किसी एक कानूनी आधार पर अपने दावे को सिद्ध करना होगा:
- गन्ना रकबे में शुद्ध वृद्धि (Increase in Acreage): यदि आपने इस वर्ष अतिरिक्त जमीन खरीदी है, बटाई/लीज पर ली है, या पहले गेहूं-धान बोने वाले खेत में गन्ने की नई बुवाई की है।
- अगेती व उच्च पैदावार किस्म का रोपण: यदि आपने सामान्य किस्म हटाकर Co-15023, Co-0118, CoLk-14201 जैसी किस्में लगाई हैं जिनकी औसत उत्पादकता 450-500 क्विंटल प्रति एकड़ प्रमाणित है।
- सह-खातेदार का सट्टा विभाजन (Satta Partition): यदि पहले पिता या दादा के नाम पर एक संयुक्त सट्टा चल रहा था और अब पारिवारिक बंटवारे के बाद आपने अपने नाम पर पृथक सट्टा बनवाया है।
- सिंचाई साधनों का विस्तार: यदि आपने खेत में नया बोरवेल, सोलर पंप या टपक सिंचाई (Drip Irrigation) लगाई है जिससे पैदावार में 30% से अधिक की तकनीकी वृद्धि दर्ज हुई है।
बेसिक कोटा बढ़वाने की स्टेप-बाय-स्टेप आवेदन प्रक्रिया
यदि आप चालू पेराई सत्र 2026-27 के लिए अपना बेसिक कोटा बढ़वाना चाहते हैं, तो 15 सितंबर से पहले निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी करें:
चरण 1: enquiry.caneup.in पर वर्तमान आंकड़े जांचें
सबसे पहले पोर्टल पर लॉगिन करके अपना वर्तमान बेसिक कोटा, पिछले 3 वर्षों की आपूर्ति और चालू वर्ष का सर्वेक्षित रकबा नोट करें। यदि सर्वेक्षित रकबा अधिक है और बेसिक कोटा काफी कम है, तो आपके पास ठोस आधार है।
चरण 2: प्रार्थना पत्र (Application) तैयार करें
सहकारी गन्ना विकास समिति के विशेष सचिव (Secretary) अथवा ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (CDI) के नाम एक औपचारिक प्रार्थना पत्र लिखें। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें:
- किसान का नाम, पिता का नाम, ग्राम व समिति कोड
- 14-अंकीय यूजीसी कोड / किसान कोड
- वर्तमान बेसिक कोटा कितना है?
- चालू वर्ष में कुल कितना गन्ना रकबा सर्वेक्षित है?
- आप बेसिक कोटा कितना बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और उसका ठोस कारण क्या है?
चरण 3: आवश्यक संलग्नक (Enclosures) जोड़ें
प्रार्थना पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज नत्थी करें:
- चालू वर्ष की जीपीएस सर्वे पर्ची की प्रति।
- प्रमाणित अद्यतन खतौनी की नकल।
- गन्ना घोषणा पत्र (Declaration Receipt) की पावती प्रति।
- यदि लीज भूमि है तो नोटरी शपथ पत्र।
- पिछले पेराई सत्रों की तौल रसीदें (यदि उपलब्ध हों)।
चरण 4: क्षेत्रीय गन्ना पर्यवेक्षक (Supervisor) से स्थलीय जांच
आवेदन समिति में जमा होने के बाद सचिव द्वारा क्षेत्रीय गन्ना पर्यवेक्षक को स्थलीय सत्यापन (Spot Verification) का आदेश दिया जाता है। पर्यवेक्षक आपके खेत पर आकर:
- फसल की सघनता और स्वास्थ्य की जांच करेगा।
- जीपीएस मशीन से खेत की सीमाओं का पुनः सत्यापन करेगा।
- अपनी संस्तुति आख्या (Verification Report) में लिखेगा कि “किसान के खेत में वास्तव में X क्विंटल गन्ना खड़ा है, अतः बेसिक कोटा Y क्विंटल बढ़ाया जाना न्यायसंगत है।”
चरण 5: समिति बोर्ड द्वारा स्वीकृति एवं पोर्टल पर अपडेशन
पर्यवेक्षक और सीडीआई की सकारात्मक रिपोर्ट के बाद समिति की सट्टा निर्धारण उप-समिति द्वारा संशोधित बेसिक कोटे को मंजूरी दी जाती है। इसके पश्चात caneup के केंद्रीय डेटाबेस में आपका नया कोटा फीड कर दिया जाता है, जो 24 से 48 घंटे के भीतर आपके eGanna App और ऑनलाइन कैलेंडर पर दिखने लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)
Q1. बेसिक कोटा बढ़ाने का प्रार्थना पत्र देने की अंतिम तिथि क्या है?
उत्तर: बेसिक कोटा संशोधन और सट्टा आपत्तियों के निस्तारण की आधिकारिक अंतिम तिथि सामान्यतः 15 सितंबर होती है। इसके बाद प्री-कैलेंडर फ्रीज कर दिया जाता है।
Q2. क्या बिना रकबा बढ़ाए भी केवल अच्छी फसल के आधार पर बेसिक कोटा बढ़ सकता है?
उत्तर: हां, यदि आपने ट्रेंच विधि या उन्नत किस्म लगाकर प्रति हेक्टेयर उत्पादकता सामान्य औसत से अधिक प्राप्त की है, तो पर्यवेक्षक की ‘क्रॉप कटिंग’ या सघन स्थलीय निरीक्षण आख्या के आधार पर अधिकतम 20% तक कोटा बढ़ाया जा सकता है।
Q3. यदि पिछले वर्ष मिल हड़ताल या खराबी के कारण गन्ना नहीं ले सकी, तो क्या उस वर्ष की कम आपूर्ति से कोटा घट जाएगा?
उत्तर: नहीं, गन्ना आयुक्त के विशेष आदेशों के तहत मिल की तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उस सत्र को ‘शून्य वर्ष’ मानकर शेष सामान्य वर्षों के आधार पर कोटा सुरक्षित रखा जाता है।
Q4. क्या एक किसान का बेसिक कोटा दूसरे रिश्तेदार के सट्टे में ट्रांसफर हो सकता है?
उत्तर: केवल पारिवारिक बंटवारे, पिता की मृत्यु के बाद वारिसों में विभाजन, या रक्त संबंधियों के बीच वैध भूमि हस्तांतरण की स्थिति में ही बेसिक कोटे का आनुपातिक विभाजन संभव है।
Q5. बेसिक कोटा बढ़ने के बाद क्या नई पर्चियां तुरंत मिलेंगी?
उत्तर: बेसिक कोटा बढ़ते ही आपके 12 पखवाड़े के मुख्य कैलेंडर में अतिरिक्त पर्चियां उन पखवाड़ों में जोड़ दी जाएंगी जहां पहले गैप (रिक्तता) था। जैसे ही मिल का पेराई सत्र शुरू होगा, आपको नियमानुसार एसएमएस पर्ची प्राप्त होगी।
निष्कर्ष
गन्ना किसानों के लिए बेसिक कोटा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उनकी पूरे साल की मेहनत को सही सरकारी मूल्य पर बेचने का वैध अधिकार पत्र है। caneup.in पोर्टल की पारदर्शी व्यवस्था का सदुपयोग करते हुए समय पर अपने कोटे की जांच करें और किसी भी विसंगति की स्थिति में 15 सितंबर की समयसीमा से पूर्व समिति में अपनी आपत्ति दर्ज कराएं। जागरूक किसान ही समृद्ध किसान बनता है।
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