
उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम (UP Sugarcane Supply and Purchase Act) के तहत जारी होने वाला गन्ना पर्ची कैलेंडर (Ganna Parchi Calendar) केवल एक साधारण सारणी नहीं है, बल्कि यह कृषि अर्थशास्त्र और सांख्यिकी का एक अत्यंत वैज्ञानिक और पारदर्शी मॉडल है।
हर साल जब अक्टूबर-नवंबर में चीनी मिलों के पहिए घूमने शुरू होते हैं, तो पश्चिमी यूपी, तराई और मध्य यूपी के गाँवों में चौपालों पर सबसे गरमा-गरम बहस इसी बात पर होती है: “रामफल की पर्ची नवंबर में ही कैसे आ गई? हमारी पर्ची चौथे पखवाड़े में क्यों डाली गई? हमारा 1000 क्विंटल गन्ना खड़ा है, लेकिन कैलेंडर में केवल 15 पर्चियां ही क्यों दिख रही हैं?”
किसानों के मन में यह आम धारणा होती है कि गन्ना पर्ची किसी बाबू, मिल अधिकारी या समिति के सचिव के हाथ में होती है और वे जिसे चाहें पहले पर्ची दे सकते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। स्मार्ट गन्ना किसान प्रणाली (Caneup.in) में पर्ची आवंटन 100% कम्प्यूटरीकृत एल्गोरिदम द्वारा होता है, जो बेसिक कोटा (Basic Quota), 12 पखवाड़ा चक्र (12 Fortnights Cycle), कॉलम 1 से 15 का विभाजन और पेड़ी बनाम पौधा अनुपात के गणितीय फॉर्मूले पर काम करता है।
यदि आप इस गणित को एक बार समझ लें, तो आप स्वयं एक डायरी और कैलकुलेटर लेकर बैठ सकते हैं और सीजन शुरू होने से पहले ही जान सकते हैं कि आपकी पर्ची किस महीने के किस सप्ताह में कटेगी। आइए इस 2100+ शब्दों के सम्पूर्ण मास्टरक्लास में इस गणित की एक-एक परत खोलते हैं।
1. बेसिक कोटा (Basic Quota): आपके सट्टे की रीढ़
गन्ना आपूर्ति व्यवस्था में बेसिक कोटा (Basic Quota) का वही स्थान है जो बैंकिंग में आपके क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर का होता है। यह आपकी ऐतिहासिक आपूर्ति क्षमता का प्रमाण पत्र है।
बेसिक कोटा की वैधानिक परिभाषा:
उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त द्वारा निर्धारित सट्टा नीति के अनुसार:
“किसी भी गन्ना उत्पादक किसान का बेसिक कोटा उसके द्वारा पिछले तीन पेराई सत्रों में संबंधित चीनी मिल को की गई वास्तविक गन्ना आपूर्ति का गणितीय औसत होता है।”
बेसिक कोटा का आधिकारिक फॉर्मूला:
$$\text{Basic Quota} = \frac{\text{वर्ष 1 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 2 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 3 की आपूर्ति}}{3}$$
वास्तविक व्यावहारिक उदाहरण:
आइए मेरठ के एक मध्यम किसान ‘चौधरी चरण सिंह’ का उदाहरण लेते हैं:
- पेराई सत्र 2023-24 में आपूर्ति: 720 क्विंटल
- पेराई सत्र 2024-25 में आपूर्ति: 850 क्विंटल
- पेराई सत्र 2025-26 में आपूर्ति: 770 क्विंटल
अब सत्र 2026-27 के लिए उनका बेसिक कोटा इस प्रकार निकाला जाएगा: $$\text{कुल 3 वर्षों की आपूर्ति} = 720 + 850 + 770 = 2340\text{ क्विंटल}$$ $$\text{बेसिक कोटा} = \frac{2340}{3} = 780\text{ क्विंटल}$$
अर्थात, आगामी सत्र में चौधरी चरण सिंह का सट्टा अधिकतम 780 क्विंटल के लिए स्वतः बंधेगा।
यदि किसी वर्ष सूखा या बाढ़ आ जाए तो क्या होगा?
विभाग ने किसानों के हित में एक विशेष सुरक्षा नियम (Safety Clause) बनाया है: यदि किसी एक वर्ष में अत्यधिक बारिश, रेड रॉट (लाल सड़न) या सूखे के कारण किसान की आपूर्ति सामान्य से 50% से अधिक घट जाती है, तो किसान प्रार्थना पत्र देकर उस खराब वर्ष के आंकड़े को हटवा सकता है और शेष दो वर्षों के औसत के आधार पर बेसिक कोटा निर्धारित करवा सकता है।
2. सट्टा बाइंडिंग और कुल पर्चियों की गणना
बेसिक कोटा तय होने के बाद अगला कदम होता है — कुल पर्चियों (Total Slips) की संख्या निकालना।
यहाँ सबसे बड़ा खेल होता है आपके आपूर्ति के साधन (Mode of Supply) का। सरकार ने प्रत्येक वाहन के लिए मानक वजन तय किया हुआ है:
| आपूर्ति साधन | मानक वजन प्रति पर्ची | पर्ची की वैधता अवधि | उपयोग की पात्रता |
|---|---|---|---|
| बग्गी / बैलगाड़ी (Bullock Cart) | 18 क्विंटल (कुछ मिलों में 20 क्विंटल) | 72 घंटे (3 दिन) | छोटे व सीमांत किसान (1-2 एकड़ तक) |
| छोटा ट्रैक्टर (2-व्हील ट्रॉली) | 45 क्विंटल | 120 घंटे (5 दिन) | मध्यम काश्तकार (2-5 एकड़) |
| बड़ा ट्रैक्टर (4-व्हील भारी ट्रॉली) | 80 से 90 क्विंटल | 120 घंटे (5 दिन) | बड़े किसान (5 एकड़ से अधिक) |
पर्चियों की संख्या निकालने का फॉर्मूला:
$$\text{कुल पर्चियां} = \frac{\text{बाउंडेड सट्टा (बेसिक कोटा)}}{\text{साधन का मानक वजन}}$$
उदाहरण 1: यदि आपूर्ति ट्रैक्टर ट्रॉली (45 क्विंटल) से है: चौधरी चरण सिंह का बेसिक कोटा 780 क्विंटल है: $$\text{पर्चियां} = \frac{780}{45} = 17.33$$ विभाग के राउंडिंग नियम के अनुसार, 0.5 से अधिक होने पर इसे पूर्णांक 18 माना जाएगा। यानी उन्हें पूरे सीजन में 18 पर्चियां मिलेंगी।
उदाहरण 2: यदि वही किसान बग्गी (18 क्विंटल) का सट्टा रखता: $$\text{पर्चियां} = \frac{780}{18} = 43.33 \approx 43\text{ पर्चियां}$$
3. 12 पखवाड़ा कैलेंडर चक्र (The 12 Fortnights Framework)
चीनी मिल का पेराई सत्र अमूमन 150 से 180 दिन (लगभग 5 से 6 महीने) चलता है। विभाग ने इस पूरे समय को 15-15 दिनों के 12 कालखंडों में विभाजित किया है, जिसे पखवाड़ा (Fortnight) कहा जाता है।
आइए देखें कि किस पखवाड़े में चीनी मिल किस रणनीति से गन्ने की मांग करती है:
| पखवाड़ा | अनुमानित कैलेंडर तारीख | मिल पेराई की अवस्था | किस गन्ने को प्राथमिकता? |
|---|---|---|---|
| पखवाड़ा 1 | 25 अक्टूबर से 08 नवंबर | मिल का शुभारंभ व ट्रायल | अगेती पेड़ी (Early Ratoon Co-0118, Co-15023) |
| पखवाड़ा 2 | 09 नवंबर से 23 नवंबर | मिल गति पकड़ना | पेड़ी गन्ना (गेहूं बुवाई हेतु खेत खाली करना) |
| पखवाड़ा 3 | 24 नवंबर से 08 दिसंबर | पूर्ण क्षमता संचालन | पेड़ी गन्ना 85% + अगेती पौधा 15% |
| पखवाड़ा 4 | 09 दिसंबर से 23 दिसंबर | पीक पेराई काल | पेड़ी गन्ना समापन + सामान्य पौधा गन्ना |
| पखवाड़ा 5 | 24 दिसंबर से 07 जनवरी | पीक पेराई काल | पौधा गन्ना (Plant Cane) |
| पखवाड़ा 6 | 08 जनवरी से 22 जनवरी | भीषण सर्दी व उच्चतम रिकवरी | पौधा गन्ना |
| पखवाड़ा 7 | 23 जनवरी से 06 फरवरी | मध्य सीजन | पौधा गन्ना |
| पखवाड़ा 8 | 07 फरवरी से 21 फरवरी | मध्य सीजन | पौधा गन्ना |
| पखवाड़ा 9 | 22 फरवरी से 08 मार्च | बसंतकालीन पेराई | अवशेष पौधा गन्ना |
| पखवाड़ा 10 | 09 मार्च से 23 मार्च | सीजन का अंतिम चरण | अतिरिक्त सट्टा पर्चियां (Additional Bonding) |
| पखवाड़ा 11 | 24 मार्च से 07 अप्रैल | समापन की ओर | फ्री सट्टा (Free Satta) |
| पखवाड़ा 12 | 08 अप्रैल से मिल बंदी तक | अंतिम सफाई | अवशेष खड़े गन्ने की अंतिम पर्चियां |
4. कॉलम 1 से 15 का गणित: पर्ची कटने का दिन कैसे तय होता है?
जब आप Caneup.in पर अपना कैलेंडर खोलते हैं, तो आपको ऊपर क्षैतिज रूप में 1 से लेकर 15 तक के कॉलम दिखाई देते हैं। प्रत्येक कॉलम पखवाड़े के 15 दिनों में से किसी एक दिन को दर्शाता है।
कैलेंडर कॉलम की कार्यप्रणाली:
- कॉलम 1: पखवाड़े का पहला दिन (Day 1)।
- कॉलम 7: पखवाड़े का पहला सप्ताह समाप्त होने का दिन (Day 7)।
- कॉलम 15: पखवाड़े का अंतिम दिन (Day 15)।
पेड़ी और पौधा गन्ने का वितरण नियम (The Golden Ratio):
सरकार की सट्टा नीति का सबसे बड़ा नियम यह है कि:
“किसान के कुल गन्ने में से पेड़ी गन्ने (Ratoon Cane) की पर्चियों को पखवाड़ा 1 से 4 के भीतर 80% तक निपटा दिया जाना चाहिए, ताकि किसान समय पर रबी फसलों (गेहूं, सरसों) की बुवाई कर सके।”
इसलिए:
- यदि आपके पास 60% पेड़ी और 40% पौधा गन्ना है, तो आपकी अधिकांश पर्चियां पखवाड़ा 1, 2, 3 और 4 के विभिन्न कॉलमों में सघन रूप से सजी हुई दिखाई देंगी।
- यदि आपके पास केवल पौधा गन्ना (New Plant) है, तो आपकी पर्चियां पखवाड़ा 4 से पखवाड़ा 9 के बीच फैली होंगी। शुरुआती पखवाड़ों में आपके कॉलम खाली (Blank) दिखाई देंगे।
5. बेसिक कोटा कैसे बढ़ाएं? (Additional Satta Guidelines)
यदि किसी काश्तकार ने इस वर्ष नई तकनीकों जैसे ट्रेंच विधि (Trench Sowing) से बुवाई करके पैदावार 500 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 800 क्विंटल प्रति एकड़ कर ली है, लेकिन उसका बेसिक कोटा पिछले साल के खराब रिकॉर्ड के कारण केवल 300 क्विंटल ही बंधा है, तो वह क्या करे?
अतिरिक्त सट्टा स्वीकृत कराने की 4-चरणीय प्रक्रिया:
- सट्टा प्रदर्शन मेला (1 से 15 सितंबर): प्रत्येक वर्ष गन्ना विकास परिषद द्वारा 1 से 15 सितंबर के बीच सट्टा प्रदर्शन शिविर आयोजित किए जाते हैं।
- प्रपत्र 16 (आपत्ति फॉर्म) भरें: शिविर में जाकर प्रपत्र 16 प्राप्त करें और उसमें अपने वास्तविक खड़े गन्ने का रकबा और अनुमानित पैदावार दर्ज करें।
- सत्यापन एवं संयुक्त जांच (Physical Verification): गन्ना पर्यवेक्षक (Cane Supervisor) और चीनी मिल का फील्ड ऑफिसर संयुक्त रूप से आपके खेत का जीपीएस सर्वे करेंगे।
- अतिरिक्त कोटा आवंटन: यदि खेत में वास्तविक गन्ना खड़ा पाया जाता है और चीनी मिल के पास पेराई क्षमता अवशेष है, तो गन्ना आयुक्त की सट्टा नीति की धारा 12 के तहत आपके बेसिक कोटे में 20% से लेकर 50% तक की बढ़ोतरी तुरंत स्वीकृत कर दी जाती है।
6. कैलेंडर में प्रयुक्त संकेतों और रंगों का अर्थ
CaneUp कैलेंडर को समझने के लिए इन संकेतों को याद रखें:
- अंक ‘1’ या ‘2’: इसका अर्थ है कि उस विशिष्ट पखवाड़े के उस कॉलम में आपकी 1 या 2 पर्ची कटना तय है।
- तारांक (*): इसका मतलब है कि यह पर्ची स्पेशल या प्राथमिकता कोटे के तहत जारी की गई है।
- हरा रंग (Green Highlight): यह पर्ची जारी (Issued) हो चुकी है और इसका एसएमएस आपके मोबाइल पर भेजा जा चुका है।
- नीला रंग (Blue Highlight): यह पर्ची तौल केंद्र पर सफलतापूर्वक तौली जा चुकी है।
- लाल रंग (Red Highlight): यह पर्ची नियत समय (72 या 120 घंटे) में तौल न कराने के कारण व्यपगत (Lapsed) हो चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ - Ganna Parchi Calendar)
प्र.1: यदि मेरी पर्ची लैप्स (Lapse) हो जाए तो क्या वह दोबारा मिल सकती है?
उत्तर: हाँ, यदि किसी अपरिहार्य कारण (जैसे- दुर्घटना, वर्षा, बीमारी) से आपकी पर्ची व्यपगत हो जाती है, तो आप 48 घंटे के भीतर संबंधित गन्ना विकास परिषद के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (CDO/SCII) को आवेदन दे सकते हैं। वे जांच के बाद आपकी पर्ची को आगामी पखवाड़े में री-वैलिडेट (Revalidate) कर सकते हैं।
प्र.2: क्या मैं अपनी ट्रैक्टर पर्ची को दो बग्गी पर्चियों में बदलवा सकता हूँ?
उत्तर: सट्टा प्रदर्शन मेले (15 सितंबर से पूर्व) के दौरान आप लिखित आवेदन देकर अपना ‘मोड ऑफ सप्लाई’ ट्रैक्टर से बग्गी या बग्गी से ट्रैक्टर में परिवर्तित करवा सकते हैं। पेराई सत्र शुरू होने के बाद बीच में साधन बदलना संभव नहीं होता।
प्र.3: क्या छोटे किसानों (1 एकड़ से कम) के लिए कोई विशेष प्राथमिकता है?
उत्तर: जी हाँ! उत्तर प्रदेश सट्टा नीति में छोटे व सीमांत किसानों के लिए विशेष प्रावधान है कि उनका पूरा गन्ना पहले 6 पखवाड़ों के भीतर शत-प्रतिशत पेराई के लिए ले लिया जाए, ताकि वे समय पर गेहूं की फसल ले सकें।
निष्कर्ष (Key Takeaways)
गन्ना पर्ची कैलेंडर 12 पखवाड़ा और बेसिक कोटा का गणित पूरी तरह से पारदर्शी और न्यायसंगत है। इसमें किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप या पक्षपात की गुंजाइश नहीं है।
सभी किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे सत्र शुरू होते ही caneup.in पर अपना कैलेंडर डाउनलोड करें, अपनी पेड़ी व पौधा पर्चियों की तारीखें अपनी डायरी में नोट करें और उसी के अनुसार अपने गन्ने की कटाई और छिलाई का कार्यक्रम बनाएं ताकि खेत में गन्ना सूखने न पाए और समय पर तौल हो सके।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


