
मुख्य बिंदु (Quick Summary): उत्तर प्रदेश के 50 लाख गन्ना किसानों के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर समझना बेहद जरूरी है। 12 पखवाड़ों (Fortnights) और कॉलम 1 से 15 के गणित से आप घर बैठे पता लगा सकते हैं कि आपकी किस तारीख को कितनी पर्चियां निर्गत होंगी और आपका कुल बेसिक कोटा कितना है।
उत्तर प्रदेश में गन्ना पेराई सत्र 2026-27 के दौरान राज्य की 122 चीनी मिलों में अपनी गन्ने की उपज को पारदर्शी व सुचारु रूप से बेचने के लिए प्रत्येक पंजीकृत किसान के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर (Parchi Supply Calendar) और बेसिक कोटा (Basic Quota) की कार्यप्रणाली को समझना अत्यंत अनिवार्य है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, बुलंदशहर) से लेकर तराई और मध्य-पूर्वी उत्तर प्रदेश (लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई, गोंडा, बस्ती, देवरिया) तक लाखों किसान भाई प्रतिवर्ष पर्ची कैलेंडर की जटिलताओं को न समझ पाने के कारण समय पर अपनी फसल नहीं काट पाते हैं, जिससे उनकी गेहूं की बुवाई में देरी होती है अथवा गन्ने का वजन सूखने से भारी आर्थिक नुकसान होता है।
इस विस्तृत एवं संपूर्ण गाइड में हम गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा निर्धारित सट्टा एवं आपूर्ति नियमावली के आधार पर 12 पखवाड़ों, 15 कॉलमों, बेसिक कोटे के निर्धारण, पेड़ी और पौधा गन्ने के पर्ची आवंटन अनुपात और अतिरिक्त सट्टे के एक-एक गणितीय फॉर्मूले को अत्यंत सरल और व्यावहारिक भाषा में समझेंगे।
1. ‘बेसिक कोटा’ (Basic Quota) क्या है और इसका सटीक फॉर्मूला क्या है?
गन्ना आपूर्ति व्यवस्था में बेसिक कोटा किसी भी किसान के सट्टे की रीढ़ (Backbone) होता है। यह वह मानक मात्रा (क्विंटल में) है जो चीनी मिल द्वारा आपके पंजीकृत सट्टे पर कानूनी रूप से खरीदने के लिए बाध्यकारी होती है।
(क) बेसिक कोटा निर्धारण का 3-वर्षीय औसत फॉर्मूला:
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 के अनुसार, किसी भी पुराने पंजीकृत किसान का बेसिक कोटा उसके द्वारा पिछले 3 पेराई सत्रों में संबंधित चीनी मिल को की गई वास्तविक गन्ना आपूर्ति का औसत निकाल कर तय किया जाता है:
$$\text{बेसिक कोटा} = \frac{\text{वर्ष 1 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 2 की आपूर्ति} + \text{वर्ष 3 की आपूर्ति}}{3} \times 85%$$
- नियम 85% का सिद्धांत: यदि किसी किसान ने पिछले 3 वर्षों में औसतन 1,000 क्विंटल गन्ना प्रतिवर्ष मिल को सप्लाई किया है, तो उसका स्थायी बेसिक कोटा $1000 \times 0.85 = 850$ क्विंटल निर्धारित किया जाएगा।
- कैलेंडर वर्ष ड्रॉपिंग नियम: यदि किसी एक वर्ष में सूखा, बाढ़ या अत्यधिक बीमारी (जैसे रेड रॉट) के कारण किसान की आपूर्ति 50% से कम रह जाती है, तो किसान समिति में प्रार्थना पत्र देकर उस आपदा वर्ष को औसत गणना से बाहर करवा सकता है।
(ख) नए गन्ना किसानों के लिए बेसिक कोटा निर्धारण:
यदि कोई किसान पहली बार गन्ना सट्टा बनवा रहा है (New Grower), तो उसका बेसिक कोटा उसके राजस्व खतौनी में दर्ज कुल जोत और जीपीएस सर्वे में दर्ज वास्तविक गन्ना रकबे के आधार पर निर्धारित किया जाता है:
- सीमांत किसान (1 हेक्टेयर तक): अधिकतम 600 क्विंटल तक प्रारंभिक बेसिक कोटा।
- लघु किसान (1 से 2 हेक्टेयर): अधिकतम 1,200 क्विंटल तक प्रारंभिक कोटा।
- वृहत किसान (2 हेक्टेयर से अधिक): अधिकतम 2,400 क्विंटल तक का कोटा प्रति सट्टा मान्य होता है।
2. ‘12 पखवाड़े’ (12 Fortnights) का संपूर्ण कैलेंडर चार्ट
उत्तर प्रदेश में सामान्यतः पेराई सत्र 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच प्रारंभ होता है और अप्रैल-मई तक कुल 180 दिन (6 माह) चलता है। विभाग ने इस पूरे 6 महीने के समय को 15-15 दिनों के 12 समान पखवाड़ों (Fortnights) में विभाजित किया है:
| पखवाड़ा क्रम | अवधि (समय सीमा) | माह का पक्ष | कौन सा गन्ना प्राथमिकता पर लिया जाता है? | पर्ची का प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| पखवाड़ा 1 | 1 नवंबर से 15 नवंबर | नवंबर प्रथम पक्ष | अगेती प्रजाति की पेड़ी (Early Ratoon) | कुल कोटे का 5% |
| पखवाड़ा 2 | 16 नवंबर से 30 नवंबर | नवंबर द्वितीय पक्ष | पेड़ी गन्ना व खाली होने वाले खेत (गेहूं बुवाई) | कुल कोटे का 8% |
| पखवाड़ा 3 | 1 दिसंबर से 15 दिसंबर | दिसंबर प्रथम पक्ष | मुख्य पेड़ी गन्ना (Ratoon Sugarcane) | कुल कोटे का 10% |
| पखवाड़ा 4 | 16 दिसंबर से 31 दिसंबर | दिसंबर द्वितीय पक्ष | पेड़ी गन्ना समाप्ति व अगेती पौधा | कुल कोटे का 12% |
| पखवाड़ा 5 | 1 जनवरी से 15 जनवरी | जनवरी प्रथम पक्ष | सामान्य पौधा गन्ना (Early/General Plant) | कुल कोटे का 12% |
| पखवाड़ा 6 | 16 जनवरी से 31 जनवरी | जनवरी द्वितीय पक्ष | मुख्य पौधा गन्ना व शरदकालीन गन्ना | कुल कोटे का 12% |
| पखवाड़ा 7 | 1 फरवरी से 15 फरवरी | फरवरी प्रथम पक्ष | सामान्य पौधा गन्ना (Mid-Season Crop) | कुल कोटे का 10% |
| पखवाड़ा 8 | 16 फरवरी से 28 फरवरी | फरवरी द्वितीय पक्ष | पौधा गन्ना व पछेती किस्में | कुल कोटे का 10% |
| पखवाड़ा 9 | 1 मार्च से 15 मार्च | मार्च प्रथम पक्ष | अवशेष पौधा गन्ना व अतिरिक्त सट्टा (Free Parchi) | कुल कोटे का 8% |
| पखवाड़ा 10 | 16 मार्च से 31 मार्च | मार्च द्वितीय पक्ष | अतिरिक्त सट्टा पर्चियां (Additional Quota) | कुल कोटे का 6% |
| पखवाड़ा 11 | 1 अप्रैल से 15 अप्रैल | अप्रैल प्रथम पक्ष | टेल-एंड सप्लाई व अंतिम खेत कटाई | कुल कोटे का 4% |
| पखवाड़ा 12 | 16 अप्रैल से सत्र समाप्ति | अप्रैल द्वितीय पक्ष | सत्र समापन व विशेष आरक्षित पर्चियां | कुल कोटे का 3% |
3. कैलेंडर के ‘कॉलम 1 से 15’ की कार्यप्रणाली समझें
जब आप अपने मोबाइल पर enquiry.caneup.in या eGanna App v6.2 पर अपना 12 पखवाड़े का सट्टा कैलेंडर खोलते हैं, तो आपको एक बड़ा ग्रिड (सारणी) दिखाई देता है। इस सारणी में ऊपर 1 से लेकर 15 तक संख्याएं (कॉलम) लिखी होती हैं:
[पखवाड़ा 1] ➔ | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
[पखवाड़ा 2] ➔ | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
...
[पखवाड़ा 12]➔ | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
कॉलम और अंकों का वास्तविक अर्थ:
- कॉलम 1 से 15 का तात्पर्य: प्रत्येक पखवाड़े में ठीक 15 दिन होते हैं। कॉलम संख्या 1 पखवाड़े के पहले दिन को, कॉलम 2 दूसरे दिन को और कॉलम 15 पखवाड़े के अंतिम (15वें) दिन को प्रदर्शित करता है।
- ग्रिड बॉक्स में लिखे नंबर: यदि पखवाड़ा संख्या 4 के कॉलम संख्या 9 के बॉक्स में ‘1’ लिखा है, तो इसका स्पष्ट अर्थ है कि चौथे पखवाड़े के 9वें दिन (यानी 24 दिसंबर को) आपकी 1 पर्ची (Cane Supply Ticket) कंप्यूटर द्वारा निर्गत (Issue) की जाएगी।
- यदि बॉक्स में ‘2’ लिखा हो: इसका अर्थ है कि उस विशिष्ट दिन आपको 2 पर्चियां एक साथ प्राप्त होंगी (बड़ी जोत वाले किसानों के मामले में)।
- यदि बॉक्स खाली (-) हो: इसका अर्थ है कि उस दिन आपकी कोई पर्ची नहीं कटेगी।
4. पेड़ी (Ratoon) और पौधा (Plant) गन्ने का पर्ची आवंटन अनुपात
उत्तर प्रदेश गन्ना नियमावली के तहत चीनी मिलों को पेराई सत्र के शुरुआती चरणों में पेड़ी गन्ने को प्राथमिकता पर निपटाने का वैधानिक नियम है ताकि किसान अपने खेतों को खाली करके समय पर रबी गेहूं की बुवाई कर सकें:
- पेड़ी गन्ना आवंटन (60% कोटा): किसान के कुल बेसिक कोटे का लगभग 60% हिस्सा पखवाड़ा 1 से पखवाड़ा 4 के बीच आवंटित किया जाता है।
- पौधा गन्ना आवंटन (40% कोटा): शेष 40% बेसिक कोटा और अतिरिक्त सट्टे की पर्चियां पखवाड़ा 5 से पखवाड़ा 10 के बीच वितरित की जाती हैं।
- पेड़ी-पौधा रकबा मिलान: यदि आपके जीपीएस सर्वे में 70% पेड़ी और 30% पौधा दर्ज है, तो आपकी शुरुआती पर्चियों की संख्या उसी अनुपात में स्वतः बढ़ जाएगी।
5. पर्ची वजन और वाहन श्रेणी का निर्धारण (Mode of Supply)
सट्टे में दर्ज वाहन श्रेणी (Mode) के आधार पर प्रत्येक पर्ची का आधिकारिक तौल वजन तय होता है:
| वाहन श्रेणी (Mode) | कोड | मानक पर्ची वजन (क्विंटल) | 450 क्विंटल बेसिक कोटे पर कुल पर्ची |
|---|---|---|---|
| बैलगाड़ी / बुग्गी | CRT | 18 से 20 क्विंटल | 22 से 25 पर्चियां |
| छोटा 2-पहिया ट्रेलर | TRL-S | 27 से 30 क्विंटल | 15 से 16 पर्चियां |
| मानक 4-पहिया ट्रैक्टर-ट्रॉली | TRL-M | 45 क्विंटल | 10 पर्चियां |
| बड़ी हैवी ड्यूटी 4-पहिया ट्रॉली | TRL-L | 60 से 72 क्विंटल | 6 से 8 पर्चियां |
| ट्रक (सेंटर से मिल सप्लाई) | TRK | 90 से 120 क्विंटल | 4 से 5 पर्चियां |
महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि आपने सट्टे में ‘बैलगाड़ी’ दर्ज करा रखी है और आप ट्रैक्टर-ट्रॉली से गन्ना लेकर मिल पहुंच जाते हैं, तो तौल कंप्यूटर पर्ची को अस्वीकृत (Reject) कर देगा। इसलिए 15 सितंबर से पहले समिति में जाकर अपना सप्लाई मोड (वाहन प्रकार) अवश्य अपडेट करा लें।
6. ऑनलाइन enquiry.caneup.in पर पर्ची कैलेंडर देखने की 5-चरणीय प्रक्रिया
- आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: अपने मोबाइल के गूगल क्रोम ब्राउज़र में enquiry.caneup.in खोलें।
- कैप्चा कोड दर्ज करें: स्क्रीन पर प्रदर्शित 6 अंकों के सुरक्षा कैप्चा को भरें और ‘View’ बटन दबाएं।
- यूजीसी / किसान कोड या ड्रॉपडाउन चयन:
- अपना जिला (District) चुनें (उदा. Muzaffarnagar).
- अपनी गन्ना विकास समिति (Society) चुनें.
- अपनी चीनी मिल (Factory) चुनें (उदा. Mansurpur).
- अपना ग्राम (Village) और किसान का नाम (Grower Code) चुनें।
- किसान डैशबोर्ड विवरण: स्क्रीन पर किसान का नाम, पिता का नाम, बैंक खाता (अंतिम 4 अंक), कुल बेसिक कोटा, बॉन्डिंग रकबा और सर्वे गाटा संख्या दिखाई देगी।
- ‘गन्ना कैलेंडर’ टैब पर क्लिक करें: डैशबोर्ड के 5वें टैब ‘गन्ना कैलेंडर’ पर टैप करें। 12 पखवाड़े का रंगीन चार्ट खुल जाएगा। इसका पीडीएफ डाउनलोड कर लें या प्रिंट निकाल लें।
7. किसान अक्सर क्या 5 बड़ी गलतियां करते हैं?
- सट्टा सर्वे में पेड़ी और पौधे का गलत अनुपात दर्ज कराना: यदि किसान ने पेड़ी को पौधा लिखवा दिया, तो उसकी पर्चियां जनवरी-फरवरी में आएंगी और नवंबर में खेत खाली नहीं हो पाएगा।
- मोबाइल नंबर बंद होना या DND एक्टिव होना: पर्ची जारी होने का 12 अंकों का सीक्रेट पर्ची नंबर एसएमएस द्वारा आता है। नंबर बंद होने पर पर्ची लैप्स हो जाती है।
- सप्लाई मोड (वाहन) गलत रखना: बुग्गी की पर्ची पर ट्रैक्टर ले जाना या ट्रैक्टर की पर्ची पर बुग्गी ले जाना तौल केंद्र पर वजन रिजेक्शन का कारण बनता है।
- 15 सितंबर के बाद सट्टा संशोधन के लिए भटकना: 15 सितंबर के बाद राज्य स्तर पर डेटा फ्रीज हो जाता है, जिसके बाद कैलेंडर में बदलाव असंभव हो जाता है।
- कॉलम की तारीख से पहले गन्ना छीलना: कई किसान कॉलम तारीख से 4 दिन पहले गन्ना काटकर ढेर लगा देते हैं, जिससे धूप व हवा से गन्ने का वजन 10% तक घट जाता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)
यदि किसी पखवाड़े में दर्ज होने के बावजूद पर्ची SMS न आए तो क्या करें?
तुरंत eGanna App खोलें और ‘तौल पर्ची’ टैब में जांचें कि पर्ची जारी हुई है या नहीं। यदि ऐप में दिख रही है लेकिन एसएमएस नहीं आया, तो ऐप में प्रदर्शित 12 अंकों के पर्ची नंबर से ही तौल कराई जा सकती है।
क्या एक पखवाड़े की पर्ची को दूसरे पखवाड़े में ट्रांसफर कराया जा सकता है?
हां, 1 से 15 सितंबर के सट्टा आपत्ति निस्तारण मेले के दौरान किसान अपनी गेहूं बुवाई या विशेष आवश्यकता का प्रार्थना पत्र देकर पखवाड़े का पुनर्निर्धारण (Rescheduling) करा सकते हैं।
एक पर्ची की वैधता (Validity Period) कितने घंटे होती है?
मिल गेट तौल के लिए पर्ची जारी होने के बाद 72 घंटे (3 दिन) और बाह्य क्रय केंद्र (Outstation Purchase Center) के लिए 96 घंटे (4 दिन) की वैधता होती है। समय सीमा बीतने पर पर्ची ‘Expired’ हो जाती है।
बेसिक कोटे से अधिक गन्ने की पर्चियां कैसे मिलती हैं?
जब चीनी मिल में गन्ने की भारी मांग होती है और किसान का सर्वे रकबा अधिक होता है, तो पखवाड़ा 8 के बाद विभाग द्वारा ‘अतिरिक्त सट्टा पर्चियां’ (Free Parchi / Additional Quota) जारी की जाती हैं।
यदि संयुक्त खाते में दो भाइयों का नाम हो तो पर्ची कैसे बंटेगी?
संयुक्त सट्टे में पर्चियां एक ही कैलेंडर में आती हैं। यदि दोनों भाई अलग-अलग पर्ची चाहते हैं, तो 15 सितंबर तक खतौनी और सहमति पत्र देकर सट्टा विभाजन (Partition) करा लें।
क्या गन्ने की किस्म (अगेती या सामान्य) से पर्ची की तारीख तय होती है?
हां, अगेती प्रजाति (Early Varieties जैसे Co 15023, Co 0118) की पर्चियां शुरुआती पखवाड़ों (1 से 4) में आती हैं, जबकि सामान्य प्रजातियों की पर्चियां पखवाड़ा 5 के बाद जारी होती हैं।
यदि तौल केंद्र (Purchase Center) बदलना हो तो क्या नियम हैं?
15 सितंबर से पहले किसान प्रार्थना पत्र देकर अपने खेत के सबसे नजदीकी बाह्य क्रय केंद्र या मिल गेट पर अपना सेंटर ट्रांसफर करा सकता है।
प्रति हेक्टेयर अधिकतम कितनी पर्चियां मिल सकती हैं?
उत्तर प्रदेश में सिंचित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर मानक उत्पादकता 850 क्विंटल मानी जाती है। तदनुसार 1 हेक्टेयर पर अधिकतम 18 से 20 ट्रैक्टर ट्रॉलियों की पर्चियां आवंटित होती हैं।
क्या पर्ची कटने के बाद किसी अन्य किसान को दी जा सकती है?
कानूनन गन्ना पर्ची अहस्तांतरणीय (Non-Transferable) होती है। किसी अन्य किसान की पर्ची पर गन्ना तौल कराना धोखाधड़ी (IPC 420) माना जाता है और सट्टा हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट हो सकता है।
बंद पड़ी पर्ची (Lapsed Parchi) को दोबारा कैसे चालू कराएं?
यदि बीमारी या दुर्घटना के कारण पर्ची 72 घंटे में नहीं तुल पाई, तो अगले 24 घंटे के भीतर समिति सचिव के पास जाकर ‘पुनर्निर्गमन (Re-issue) फॉर्म’ भरकर पर्ची को पुनः एक्टिवेट कराया जा सकता है।
📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र
- उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
- गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
- ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
- विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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