होम आर्टिकल्स गन्ना पेड़ी (Ratoon) प्रबंधन: पहली कटाई …

गन्ना पेड़ी (Ratoon) प्रबंधन: पहली कटाई के बाद 500 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार का सीक्रेट फॉर्मूला 2026

Aamir Raza Aamir Raza Sep 12, 2026 6 min read
गन्ना पेड़ी (Ratoon) प्रबंधन: पहली कटाई के बाद 500 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार का सीक्रेट फॉर्मूला 2026
अंतिम अपडेट: September 12, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में कुल गन्ना क्षेत्रफल का 50% से अधिक हिस्सा पेड़ी गन्ने (Ratoon Sugarcane) के अंतर्गत आता है। पौधा गन्ने (Plant Cane) की तुलना में पेड़ी गन्ने की खेती किसान के लिए सबसे बड़ा मुनाफे का सौदा हो सकती है, क्योंकि इसमें खेत की गहरी जुताई, पाटा, नाली निर्माण और सबसे महत्वपूर्ण गन्ने के महंगे बीज (Seed Cane) की लागत शून्य हो जाती है। यदि वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो पेड़ी गन्ने की उत्पादन लागत पौधा गन्ने से 45% से 50% कम आती है और यह पौधा फसल से 25 से 30 दिन पहले पककर चीनी मिल जाने के लिए तैयार हो जाती है।

लेकिन दुर्भाग्यवश, राज्य के अधिकांश किसान पेड़ी फसल को ‘लावारिस’ समझकर छोड़ देते हैं। पौधा गन्ना कटने के बाद खेत में सूखी पत्तियों को आग लगा देते हैं और न तो ठूंठों की छंटाई करते हैं और न ही समय पर पोषक तत्व देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि पेड़ी की औसत पैदावार घटकर 200 से 250 क्विंटल प्रति एकड़ पर सिमट जाती है और किसान इसे घाटे की खेती मानने लगता है।

इस 2200+ शब्दों की व्यावहारिक और वैज्ञानिक मार्गदर्शिका में हम गन्ना शोध परिषद (UPCSR) और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के अनुसंधानों के आधार पर पेड़ी गन्ने से प्रति एकड़ 500 क्विंटल से अधिक बंपर पैदावार लेने का 6-सूत्रीय मास्टर प्लान प्रस्तुत कर रहे हैं।


पौधा बनाम पेड़ी: उत्पादन लागत और मुनाफे का वित्तीय विश्लेषण

पेड़ी गन्ने की सही अहमियत समझने के लिए दोनों फसलों के प्रति एकड़ खर्च और आय की सीधी तुलना देखें:

मद (Parameter)पौधा गन्ना (Plant Cane)पेड़ी गन्ना (Ratoon Cane)पेड़ी में किसान की बचत
खेत की तैयारी (जुताई/पाटा/ट्रेंच)₹4,500₹0 (शून्य)₹4,500 बचत
बीज लागत (30 क्विंटल @ ₹340)₹10,200₹0 (शून्य)₹10,200 बचत
बुवाई व बीज शोधन मजदूरी₹3,500₹0 (शून्य)₹3,500 बचत
उर्वरक व खाद प्रबंधन₹6,500₹5,500₹1,000 बचत
सिंचाई व बिजली/डीजल₹5,000₹4,000₹1,000 बचत
निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण₹4,000₹2,000 (मल्चिंग से)₹2,000 बचत
कुल उत्पादन लागत (प्रति एकड़)₹33,700₹11,500₹22,200 की सीधी बचत (-65%)
अनुमानित पैदावार (क्विंटल/एकड़)480 क्विंटल500 क्विंटल+ 20 क्विंटल अतिरिक्त
सकल आय (@ ₹380 प्रति क्विंटल)₹1,82,400₹1,90,000+ ₹7,600
शुद्ध मुनाफा (Net Profit)₹1,48,700₹1,78,500₹29,800 अधिक शुद्ध मुनाफा

पेड़ी में 500 क्विंटल पैदावार के 6 वैज्ञानिक स्तंभ (The 6 Pillars)

स्तंभ 1: जमीन की सतह से कटाई (Ground Level Harvesting)

पेड़ी की आधी किस्मत पौधा गन्ने की कटाई के तरीके पर तय हो जाती है।

  • पौधा गन्ना हमेशा जमीन की सतह से 2 से 3 सेंटीमीटर नीचे (धरातल से सटाकर) तेज धारदार दरांती या गंडासे से काटना चाहिए।
  • यदि कटाई जमीन से 4 से 6 इंच ऊपर की जाती है, तो ऊपरी गांठों से निकलने वाले कल्ले कमजोर, पतले और हवा में सूखने वाले होते हैं। जबकि जमीन के नीचे की गांठों से निकलने वाले कल्ले गहरे, मोटे और मजबूत जड़ों वाले होते हैं।

स्तंभ 2: ठूंठ छंटाई (Stubble Shaving)

यदि कटाई ऊंची हो गई है, तो कटाई के 48 घंटे के भीतर धारदार कुदाल या ट्रैक्टर चालित ‘स्टबल शेवर’ (Stubble Shaver) से ऊपरी ठूंठों को जमीन के बराबर छांट दें।

  • छंटाई के तुरंत बाद कटे हुए ठूंठों पर बाविस्टिन (कार्बेंडाजिम) 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम प्रति लीटर का स्प्रे करें ताकि फंगस का संक्रमण जमीन के भीतर न फैले।

स्तंभ 3: पत्तियों को कभी न जलाएं — ट्रैश मल्चिंग (Trash Mulching) अपनाएं

पौधा गन्ना कटने के बाद खेत में प्रति एकड़ लगभग 3 से 4 टन सूखी पत्तियां (Trash) बचती हैं।

  • आग लगाने के नुकसान: आग लगाने से खेत के मित्र कीट, केंचुए और मिट्टी के लाभकारी बैक्टीरिया जलकर राख हो जाते हैं तथा 80 किग्रा नाइट्रोजन और 40 किग्रा पोटाश धुएं में उड़ जाता है।
  • मल्चिंग की सही विधि: पत्तियों को गन्ने की कतारों के बीच की खाली जमीन में 4 इंच मोटी परत के रूप में समान रूप से बिछा दें। थानों (Stubble) को खुला रखें ताकि धूप सीधे जड़ों पर पड़े।
  • फायदे: ट्रैश मल्चिंग से खेत में खरपतवार 90% रुक जाते हैं, मिट्टी में नमी 15 दिन तक बनी रहती है और 3 माह बाद पत्तियां सड़कर 2 टन सर्वोत्तम कंपोस्ट में तब्दील हो जाती हैं।

स्तंभ 4: मेड़ों की छंटाई और जड़ों की कटाई (Root Pruning / Off-Barring)

पौधे गन्ने की पुरानी जड़ें कठोर और मृतप्राय हो जाती हैं।

  • कतारों के दोनों किनारों पर देसी हल या कल्टीवेटर चलाकर पुरानी जड़ों की 20-25% कटाई (Root Pruning) कर दें।
  • पुरानी जड़ें कटते ही पौधे से नई सफेद बाल जैसी पोषक जड़ें (Feeder Roots) तेजी से फूटती हैं, जो खाद को तुरंत सोखने लगती हैं।

स्तंभ 5: गैप फिलिंग (Gap Filling) — 100% पौधों की संख्या सुनिश्चित करें

पेड़ी में पैदावार घटने का दूसरा सबसे बड़ा कारण होता है ‘नागे’ (Gaps) पड़ जाना।

  • यदि खेत में 1 मीटर से अधिक जगह खाली दिखे, तो तुरंत पॉलीट्रे में तैयार की गई सिंगल बड की 25-30 दिन पुरानी पौध या खेत के किनारे तैयार नर्सरी से पौधे लाकर रोपाई करें।
  • प्रति एकड़ कम से कम 35,000 से 40,000 स्वस्थ मिल योग्य गन्ने (Millable Canes) खेत में खड़े होने चाहिए।

पेड़ी फसल का संपूर्ण खाद एवं पोषण चार्ट (Fertilizer Schedule 2026)

पेड़ी गन्ने की जड़ें पहले से विकसित होती हैं, इसलिए इसे पौधा गन्ने की तुलना में 25% अधिक नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है:

अवस्था / समयउर्वरक की मात्रा (प्रति एकड़)प्रयोग विधि
कटाई के 7 से 10 दिन बाद (पहला बेसल डोज)- 1 बोरी DAP (50 किग्रा)
- 1 बोरी यूरिया (45 किग्रा)
- 1 बोरी MOP पोटाश (50 किग्रा)
- 10 किग्रा फेरस सल्फेट (लोहा तत्व)
थानों के दोनों तरफ 10 सेमी दूर डालकर मिट्टी से ढकें और हल्की सिंचाई करें।
कटाई के 35 से 45 दिन बाद (कल्ले फूटते समय)- 1.5 बोरी यूरिया (65 किग्रा)
- 5 किग्रा बेंटोनाइट सल्फर (90%)
- 4 किग्रा दानेदार फिप्रोनिल 0.3% GR (दीमक व बोरर से सुरक्षा हेतु)
कतारों में बिखेरकर दूसरी सिंचाई करें।
कटाई के 75 से 90 दिन बाद (तीसरी खुराक)- 1 बोरी यूरिया (45 किग्रा)
- 1 किग्रा ह्यूमिक एसिड (98%)
सिंचाई के पानी के साथ चलाएं या जड़ों के पास डालें।
मानसून से पूर्व (मई-जून)- 00:00:50 (पोटेशियम सल्फेट) 1.5 किग्रा + 100 ग्राम बोरॉन प्रति 200 लीटर पानीपत्तियों पर पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray) करें।

पेड़ी गन्ने में पीलापन (Iron Chlorosis) का तुरंत इलाज

फरवरी-मार्च में कटाई के बाद जब पेड़ी के नए कल्ले निकलते हैं, तो अक्सर उनकी ऊपरी पत्तियां बिल्कुल सफेद या पीली पड़ जाती हैं। इसे ‘आयरन क्लोरोसिस’ कहा जाता है।

  • कारण: ठंड और मिट्टी का पीएच 7.5 से अधिक होने पर पौधे जमीन से लोहा (Iron) नहीं ले पाते।
  • अचूक उपचार: 1 किग्रा फेरस सल्फेट (हरा कसीस) और 1 किग्रा यूरिया को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़कें। मात्र 72 घंटे के भीतर पूरा खेत गहरा हरा लहलहा उठेगा।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में