
मिल में गन्ना डालने के बाद खेत में जो ऊंचे-नीचे ठूंठ (स्टबल) रह जाते हैं, वही अगले सीजन की पेड़ी फसल की किस्मत तय करते हैं। ज्यादातर किसान कटाई के बाद खेत को ऐसे ही छोड़ देते हैं — ठूंठ ऊंचे रहते हैं, सूखी पत्ती का ढेर किनारे पड़ा रहता है, और फुटाव धीरे-धीरे, असमान तरीके से होता है। नतीजा: पेड़ी में कल्ले कमजोर, खाली जगह (गैप) ज्यादा और उपज प्लांट क्रॉप से 20 से 30 प्रतिशत तक कम।
लेकिन ICAR-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ के शोध से पता चलता है कि कटाई के 10 से 15 दिन के भीतर ठूंठों की शेविंग कर दी जाए और उसके बाद सही खाद-सिंचाई दी जाए, तो पेड़ी का फुटाव तेज और एकसमान होता है — और पेड़ी की उपज पहली फसल के करीब पहुंच सकती है। इस गाइड में जानिए स्टबल शेविंग क्या है, ट्रैक्टर चालित स्टबल शेवर कैसे काम करता है, शेविंग का सही समय और विधि, शेविंग के बाद गैप फिलिंग-खाद-सिंचाई का पूरा शेड्यूल, सूखी पत्ती का सही उपयोग और वे गलतियां जिनसे पेड़ी बर्बाद होती है।
ऊंचे ठूंठ पेड़ी को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं
कटाई के समय गन्ना जमीन से कुछ ऊंचाई पर काटा जाता है, इसलिए हर गुच्छे (क्लंप) पर 10 से 20 सेंटीमीटर ऊंचा ठूंठ रह जाता है। यह ठूंठ जितना ऊंचा और सूखा होता है, पेड़ी को उतना ही नुकसान होता है:
- फुटाव धीमा और असमान: ऊंचे सूखे ठूंठ से नई कोंपलें नीचे की आंखों से निकलने के बजाय ऊपर से निकलती हैं, जो कमजोर होती हैं और धूप-हवा में सूखने लगती हैं।
- कल्ले कमजोर: जो कल्ले ऊंचे ठूंठ से निकलते हैं, उनकी जड़ें जमीन में गहराई तक नहीं जातीं — ऐसे कल्ले हवा में गिरने (लॉजिंग) और सूखे के प्रति संवेदनशील रहते हैं।
- रोग-कीट का घर: पुराने ठूंठों में लाल सड़न (रेड रॉट), उकठा (विल्ट) और तना छेदक जैसे रोग-कीट पनपते हैं और नई फसल में फैलते हैं।
- खाद-पानी की बर्बादी: असमान फुटाव वाले खेत में खाद और सिंचाई का बंटवारा बराबर नहीं होता — जहां कल्ले नहीं हैं, वहां की खाद बेकार जाती है।
इसलिए पेड़ी प्रबंधन का पहला और सबसे सस्ता कदम है — ठूंठों की शेविंग। शेविंग का मतलब है ठूंठ को जमीन के बिल्कुल करीब (लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर ऊंचाई पर) काट देना, ताकि नई कोंपलें नीचे की स्वस्थ आंखों से निकलें और जमीन के संपर्क में रहकर मजबूत जड़ें बनाएं।
स्टबल शेविंग क्या है और IISR का यंत्र कैसे काम करता है
स्टबल शेविंग पारंपरिक रूप से तेज फावड़े या हंसिए से की जाती थी — एक-एक गुच्छे का ठूंठ हाथ से काटना। छोटे खेत में यह आज भी चलता है, लेकिन बड़े रकबे में इसमें बहुत मजदूरी और समय लगता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए ICAR-IISR, लखनऊ ने ट्रैक्टर चालित ट्रैश मल्चर-कम-स्टबल शेवर यंत्र विकसित किया है, जो एक ही बार में तीन काम करता है — सूखी पत्ती (ट्रैश) की कटाई-बारीकी, उस पर तरल अपघटक का छिड़काव और दो कतारों के ठूंठों की एकसमान शेविंग। खेत परीक्षणों में इस यंत्र ने लगभग 25 मिलीमीटर ऊंचाई पर शेविंग की, करीब 95 प्रतिशत एकसमान कटाई दर्ज की और 2.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर लगभग 0.3 हेक्टेयर प्रति घंटा की कार्यक्षमता दिखाई। ईंधन खपत लगभग 4.5 लीटर प्रति घंटा रही। यानी एक हेक्टेयर खेत की शेविंग करीब 3 से 3.5 घंटे में पूरी हो जाती है, जबकि हाथ से यही काम कई मजदूरों के कई दिन ले लेता है।
छोटे किसानों के लिए राहत की बात यह है कि यह यंत्र किराये पर भी उपलब्ध हो सकता है — कृषि यंत्र बैंक, FPO या सहकारी समितियों के जरिये। अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या गन्ना विकास विभाग से पूछें कि आपके पास स्टबल शेवर किराये पर मिलता है या नहीं।
शेविंग का सही समय: कटाई के 10 से 15 दिन
समय ही इस काम की सबसे अहम शर्त है। कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिश के अनुसार कटाई के 10 से 15 दिन के भीतर ठूंठों की शेविंग कर देनी चाहिए। देर करने पर ठूंठ सूखकर सख्त हो जाते हैं — फिर शेविंग में ज्यादा ताकत लगती है, ब्लेड जल्दी घिसते हैं और फुटाव पहले ही असमान तरीके से शुरू हो चुका होता है।
| कटाई के बाद का समय | स्थिति | क्या करें |
|---|---|---|
| 0–3 दिन | खेत में पत्ती और ठूंठ बिखरे | पत्ती हटाएं या कतारों के बीच फैलाएं, खेत सूखने दें |
| 4–10 दिन | ठूंठ अभी नरम, फुटाव शुरू नहीं | शेविंग का सबसे अच्छा समय |
| 10–15 दिन | ठूंठ सूखने लगे | शेविंग अभी भी फायदेमंद, देर न करें |
| 15 दिन के बाद | ठूंठ सख्त, असमान फुटाव | शेविंग का फायदा घटता है, गैप फिलिंग पर जोर दें |
ध्यान रखें: शेविंग तभी करें जब खेत की मिट्टी हल्की नमी वाली हो — न तो कीचड़ हो, न ही बिल्कुल सूखी धूल। गीले खेत में ट्रैक्टर फंसेगा और सूखे में ठूंठ टूटने के बजाय उखड़ सकते हैं।
शेविंग की सही विधि: 5 जरूरी स्टेप
स्टेप 1 — खेत तैयार करें: कटाई के बाद बिखरी सूखी पत्ती को कतारों के बीच में एकसमान फैला दें। अगर पत्ती का ढेर गुच्छों पर पड़ा है तो शेवर के ब्लेड अटकेंगे। बड़े ढेर हटा दें।
स्टेप 2 — शेविंग की ऊंचाई तय करें: ब्लेड को इस तरह सेट करें कि ठूंठ जमीन से लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर ऊपर कटे। बहुत नीचे काटने से आंखें (बड) कट जाती हैं, बहुत ऊपर काटने से शेविंग का फायदा ही नहीं मिलता। IISR के परीक्षणों में 25 मिलीमीटर ऊंचाई पर सबसे एकसमान परिणाम मिले।
स्टेप 3 — सही रफ्तार रखें: ट्रैक्टर को धीमी और एकसमान रफ्तार (लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर प्रति घंटा) पर चलाएं। तेज रफ्तार में ब्लेड ठूंठ को काटने के बजाय चीर देते हैं, जिससे गुच्छा फट जाता है और फुटाव बिगड़ता है।
स्टेप 4 — रोगी गुच्छे अलग करें: जिन गुच्छों में लाल सड़न, उकठा या सड़न के लक्षण दिखें, उन्हें शेविंग के समय ही खोदकर खेत से बाहर निकाल दें और जला दें। रोगी ठूंठ को शेव करके छोड़ना नई फसल में रोग फैलाने जैसा है।
स्टेप 5 — हाथ वाली शेविंग में धार जरूरी: अगर फावड़े या हंसिए से शेविंग कर रहे हैं तो औजार तेज धार वाला रखें। कुंद औजार ठूंठ को कुचल देता है, जिससे आंखें दब जाती हैं और फुटाव देर से होता है।
शेविंग के बाद पेड़ी की 4 जरूरी देखभाल
शेविंग आधी जीत है — असली उपज इसके बाद की देखभाल से तय होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पेड़ी फसल को प्लांट क्रॉप से लगभग 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए होती है, क्योंकि पुरानी जड़ों को दोबारा सक्रिय करना होता है।
1. गैप फिलिंग (खाली जगह भरना)
कटाई और शेविंग के बाद खेत में जहां-जहां गुच्छे खाली रह गए हैं, वहां 50 सेंटीमीटर के हर गैप में 1 से 3 आंख वाले गन्ने के टुकड़े लगाएं, या 45 से 60 दिन पुरानी पॉलीबैग नर्सरी की पौध रोपें। गैप फिलिंग शेविंग के 2 से 3 सप्ताह के भीतर कर दें — देर से लगाई पौध बाकी फसल से पिछड़ जाती है।
2. खाद का शेड्यूल
पेड़ी में खाद की दो मुख्य खुराकें कटाई के बाद तय समय पर दें:
| खुराक | समय | क्या दें |
|---|---|---|
| पहली खुराक | कटाई के 25 दिन के भीतर | पूरा फॉस्फोरस + आधी नाइट्रोजन + आधी पोटाश; मिट्टी में मिलाकर |
| दूसरी खुराक | कटाई के 75 दिन के आसपास | बची हुई नाइट्रोजन + पोटाश; गुच्छों के पास डालकर मिट्टी चढ़ाएं |
सटीक मात्रा के लिए अपनी मिट्टी जांच रिपोर्ट या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लें — हर खेत की जरूरत अलग होती है।
3. सिंचाई
शेविंग के तुरंत बाद हल्की सिंचाई दें ताकि नई कोंपलों को नमी मिले। इसके बाद प्लांट क्रॉप जैसा ही सिंचाई शेड्यूल रखें — सर्दियों में 20 से 25 दिन के अंतर पर, गर्मियों में 10 से 12 दिन के अंतर पर। पेड़ी में पानी की कमी कल्लों को सीधे मारती है, इसलिए नमी का तनाव न आने दें।
4. बंसेई (मिट्टी चढ़ाना)
दूसरी खाद के समय गुच्छों पर मिट्टी चढ़ा दें (बंसेई/बांधाई)। इससे नई जड़ें मिट्टी में पकड़ बनाती हैं, कल्ले मजबूत होते हैं और फसल गिरने का खतरा कम होता है।
सूखी पत्ती का सही उपयोग: जलाने की बजाय खाद बनाएं
गन्ने की कटाई के बाद प्रति हेक्टेयर क्विंटलों में सूखी पत्ती (ट्रैश) निकलती है। इसे जलाना सबसे आसान लगता है, लेकिन इससे मिट्टी के लाभकारी जीवाणु मर जाते हैं, नाइट्रोजन उड़ जाती है और आसपास प्रदूषण फैलता है — कई जिलों में पराली की तरह गन्ने की पत्ती जलाने पर भी रोक है।
बेहतर तरीका यह है: शेविंग के बाद पत्ती को कतारों के बीच एकसमान बिछा दें (ट्रैश मल्चिंग)। इससे नमी बची रहती है, खरपतवार दबते हैं और धीरे-धीरे पत्ती सड़कर खाद बनती है। सड़न तेज करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सिफारिश के अनुसार प्रति हेक्टेयर लगभग 10 किलोग्राम अपघटक कल्चर के साथ 80 किलोग्राम यूरिया और 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट पत्ती पर डालकर हल्की सिंचाई कर दें। 2 से 3 महीने में पत्ती सड़कर मिट्टी में मिल जाती है और अगली जुताई में जैविक खाद का काम करती है। किसी भी रसायन या कल्चर की मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।
लागत का हिसाब: हाथ से बनाम मशीन से शेविंग
| बिंदु | हाथ से शेविंग (फावड़ा/हंसिया) | ट्रैक्टर स्टबल शेवर |
|---|---|---|
| एक हेक्टेयर में समय | कई मजदूरों के कई दिन | लगभग 3 से 3.5 घंटे |
| कटाई की एकसमानता | मजदूर पर निर्भर, असमान | लगभग 95% एकसमान (परीक्षण परिणाम) |
| ईंधन/मजदूरी खर्च | मजदूरी बढ़ने पर महंगा | लगभग 4.5 लीटर डीजल प्रति घंटा |
| छोटे खेत (1 एकड़ से कम) | व्यावहारिक और सस्ता | किराये पर मिले तो ही फायदेमंद |
| बड़ा रकबा | समय पर काम पूरा होना मुश्किल | एक दिन में कई हेक्टेयर |
छोटे किसान के लिए सबसे समझदारी का रास्ता है — FPO, सहकारी समिति या कृषि यंत्र बैंक से यंत्र किराये पर लेना, या 4-5 किसान मिलकर एक यंत्र का साझा इस्तेमाल करना। कई राज्यों में कृषि यंत्रीकरण पर अनुदान भी मिलता है; अपने जिले के कृषि विभाग से वर्तमान योजना की जानकारी लें।
6 गलतियां जो पेड़ी की उपज खराब करती हैं
- शेविंग में 1 महीने की देरी — ठूंठ सूखकर सख्त हो जाते हैं, फुटाव असमान हो चुका होता है।
- रोगी गुच्छों को शेव करके छोड़ देना — लाल सड़न और उकठा नई फसल में फैलता है।
- पत्ती जला देना — मिट्टी की सेहत और मुफ्त की जैविक खाद दोनों का नुकसान।
- गैप फिलिंग न करना — खाली जगह में खरपतवार पनपते हैं और प्रति हेक्टेयर पौध संख्या घटती है।
- पेड़ी में प्लांट क्रॉप जितनी ही खाद देना — पेड़ी को 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए होती है।
- 2 से ज्यादा पेड़ी लेना — आमतौर पर दो से ज्यादा पेड़ी फसलों में रोग-कीट बढ़ते हैं और उपज गिरती है; इसके बाद खेत में फसल चक्र अपनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या हर पेड़ी में शेविंग जरूरी है? उत्तर: हां। पहली, दूसरी — हर पेड़ी कटाई के बाद शेविंग फायदेमंद है। ऊंचे ठूंठ हर बार वही नुकसान दोहराते हैं — धीमा फुटाव, कमजोर कल्ले और रोग का खतरा।
प्रश्न: शेविंग के बाद फुटाव कितने दिन में दिखता है? उत्तर: सही नमी और मौसम में शेविंग के 10 से 15 दिन में नई कोंपलें साफ दिखने लगती हैं। अगर 20 दिन बाद भी फुटाव न दिखे तो गैप फिलिंग तुरंत करें।
प्रश्न: क्या शेविंग से गन्ने की आंखें कटने का डर नहीं? उत्तर: सही ऊंचाई (2 से 3 सेंटीमीटर) पर शेविंग करने से नीचे की स्वस्थ आंखें सुरक्षित रहती हैं। डर तब होता है जब ब्लेड बहुत नीचे सेट हो या रफ्तार बहुत तेज हो।
प्रश्न: छोटे किसान महंगा यंत्र कैसे लाएं? उत्तर: खरीदना जरूरी नहीं — कृषि यंत्र बैंक, FPO या सहकारी समिति से किराये पर लें, या पड़ोसी किसानों के साथ मिलकर एक यंत्र साझा करें। अपने कृषि विज्ञान केंद्र से किराये की उपलब्धता पूछें।
प्रश्न: पत्ती पर अपघटक डालने से दीमक तो नहीं बढ़ेगी? उत्तर: सही तरीके से सड़ाई गई पत्ती (नमी के साथ मल्चिंग) में दीमक का खतरा जलाई गई या सूखे ढेर वाली पत्ती से कम होता है। फिर भी शंका हो तो कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
प्रश्न: पेड़ी में सिंचाई का अंतर कितना रखें? उत्तर: सर्दियों में 20 से 25 दिन और गर्मियों में 10 से 12 दिन के अंतर पर सिंचाई दें — बिल्कुल प्लांट क्रॉप की तरह। शेविंग के तुरंत बाद एक हल्की सिंचाई जरूर दें।
पेड़ी: किसान का सबसे सस्ता मुनाफा
गन्ने की पेड़ी (रटून) फसल किसान के लिए सबसे कम लागत वाली फसल है — इसमें न तो खेत की जुताई-तैयारी का खर्च है, न बीज का, न बुवाई की मजदूरी का। प्लांट क्रॉप में जो खर्च बीज, जुताई और बुवाई पर होता है, वह पेड़ी में लगभग शून्य हो जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि पेड़ी का हर क्विंटल अतिरिक्त उपज सीधे जेब में जाता है।
लेकिन यही पेड़ी सबसे ज्यादा उपेक्षा भी झेलती है। किसान प्लांट क्रॉप में जितनी मेहनत करता है, पेड़ी में उसका आधा भी नहीं करता — खाद देर से, सिंचाई अनियमित, गैप फिलिंग नाम की चीज नहीं। नतीजा यह कि पहली पेड़ी में उपज 15 से 20 प्रतिशत और दूसरी पेड़ी में 25 से 30 प्रतिशत तक गिर जाती है। अच्छी खबर यह है कि यह गिरावट किस्मत नहीं, प्रबंधन की कमी है — और इसका सबसे सस्ता इलाज कटाई के 15 दिन के भीतर ठूंठों की शेविंग है।
शेविंग का विज्ञान: नीचे की आंखें क्यों बेहतर कल्ले देती हैं
गन्ने के हर ठूंठ पर कई आंखें (कलियां) होती हैं — नीचे जमीन के पास वाली और ऊपर ठूंठ के सिरे वाली। पौधों में एक नियम काम करता है: ऊपर की आंख सक्रिय होकर नीचे वालों को दबा देती है। ऊंचे ठूंठ में ऊपर की कमजोर आंख से कोंपल निकलती है, जो जमीन से दूर होने के कारण अपनी जड़ें ठीक से नहीं जमा पाती। ऐसी कोंपल धूप में झुलसती है, हवा में हिलती है और सूखे में सबसे पहले मरती है।
जब ठूंठ को जमीन के बिल्कुल करीब काट दिया जाता है, तो ऊपर की दबाव वाली आंख हट जाती है और नीचे की स्वस्थ, जमीन के संपर्क वाली आंखें एक साथ फूटती हैं। इनसे निकलने वाले कल्ले जमीन में गहरी जड़ें बनाते हैं, मोटे और एकसमान होते हैं, और तेज हवा में भी टिके रहते हैं। यही कारण है कि शेविंग के बाद फुटाव न सिर्फ तेज होता है, बल्कि एकसमान भी होता है — पूरा खेत एक साथ हरा दिखता है, जिससे खाद-पानी का प्रबंधन भी आसान हो जाता है।
मशीन से शेविंग: किराये पर लेने से पहले 7 जांच
अगर आप ट्रैक्टर चालित स्टबल शेवर किराये पर लेने या खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले ये 7 बातें जांच लें:
- कतार की दूरी से मेल: यंत्र आपकी बुवाई की कतार-दूरी (आमतौर पर 75 से 90 सेंटीमीटर) पर फिट होना चाहिए, वरना ब्लेड गुच्छों को चीर देगा।
- कटाई ऊंचाई का समायोजन: ब्लेड की ऊंचाई 20 से 30 मिलीमीटर के बीच सेट होनी चाहिए — IISR के परीक्षणों में 25 मिलीमीटर पर सबसे एकसमान कटाई मिली।
- ब्लेड की धार और मजबूती: घिसे ब्लेड ठूंठ काटने के बजाय कुचलते हैं। किराये पर लेते समय ब्लेड की धार जरूर जांचें।
- ट्रैक्टर की शक्ति: शेवर चलाने के लिए पर्याप्त एचपी वाला ट्रैक्टर चाहिए; कमजोर ट्रैक्टर पर इंजन पर ज्यादा लोड पड़ेगा और कटाई असमान होगी।
- पत्ती प्रबंधन की व्यवस्था: अच्छा यंत्र शेविंग के साथ पत्ती की बारीकी (मल्चिंग) भी करता है — इससे अलग से पत्ती हटाने का झंझट खत्म होता है।
- खेत की नमी: शेविंग के दिन खेत में हल्की नमी होनी चाहिए। बिल्कुल सूखे खेत में ब्लेड जल्दी घिसते हैं और ठूंठ उखड़ने लगते हैं।
- रखरखाव और स्पेयर: खरीद रहे हैं तो स्पेयर ब्लेड और सर्विस की उपलब्धता पहले पता करें — सीजन में एक दिन का रुकना भी 15 दिन की खिड़की को छोटा कर देता है।
हाथ से शेविंग की पूरी तकनीक
जिन किसानों के पास छोटा खेत है या यंत्र उपलब्ध नहीं है, उनके लिए हाथ से शेविंग आज भी सबसे भरोसेमंद तरीका है — बशर्ते तकनीक सही हो:
- औजार: तेज धार वाला फावड़ा या भारी हंसिया इस्तेमाल करें। कुंद औजार से ठूंठ कुचलता है, कटता नहीं।
- काटने की दिशा: ठूंठ को एक ही झटके में जमीन के समांतर काटें — आड़े-तिरछे वार से गुच्छा फट जाता है।
- ऊंचाई: जमीन से 2 से 3 सेंटीमीटर ऊपर काटें। जड़ के बिल्कुल पास काटने से आंखें क्षतिग्रस्त होती हैं।
- रोगी गुच्छे: लाल सड़न या सड़न वाले गुच्छों को काटकर अलग ढेर में रखें और खेत से बाहर निकालकर नष्ट करें — इन्हें शेव करके छोड़ना खतरनाक है।
- गति: एक अनुभवी मजदूर एक दिन में सीमित क्षेत्र ही कवर कर पाता है, इसलिए कटाई खत्म होते ही शेविंग शुरू कर दें — 15 दिन की खिड़की हाथ से काम करने वालों के लिए और भी अहम है।
पेड़ी का 100-दिन कैलेंडर: कटाई से कल्ले बनने तक
| दिन | काम | विवरण |
|---|---|---|
| 0 (कटाई का दिन) | पत्ती समेटें | पत्ती को कतारों के बीच फैलाएं, गुच्छों पर ढेर न रहने दें |
| 1–10 | शेविंग | ठूंठ 2–3 सेमी पर काटें; रोगी गुच्छे हटाएं |
| 10–15 | हल्की सिंचाई | फुटाव के लिए नमी दें |
| 15–25 | पहली खाद | पूरा फॉस्फोरस + आधी नाइट्रोजन + आधी पोटाश, मिट्टी में मिलाकर |
| 20–30 | गैप फिलिंग | 50 सेमी के गैप में 1–3 आंख के टुकड़े या पॉलीबैग पौध |
| 30–45 | निराई-गुड़ाई | खरपतवार निकालें, पत्ती की मल्चिंग बनी रहने दें |
| 60–75 | दूसरी खाद + बंसेई | बची नाइट्रोजन-पोटाश गुच्छों के पास डालकर मिट्टी चढ़ाएं |
| 75–100 | नियमित सिंचाई | गर्मी में 10–12 दिन, सर्दी में 20–25 दिन के अंतर पर |
30-60-90 दिन: सफलता कैसे पहचानें
शेविंग और देखभाल सही हुई है या नहीं, इसका पता इन लक्षणों से चलता है:
- 30वें दिन: हर गुच्छे से 4 से 6 स्वस्थ कोंपलें निकल आई हों, खेत एकसमान हरा दिखे। जहां गैप हैं, वहां फिलिंग की पौध लग चुकी हो।
- 60वें दिन: कल्ले मोटे और सीधे खड़े हों, पत्तियां गहरी हरी हों। पीली या मुरझाई पत्तियां खाद या पानी की कमी का संकेत हैं।
- 90वें दिन: कतारें बंद होने लगें (कैनोपी क्लोजर), खरपतवार दब जाएं, गुच्छे मजबूत जड़ों से जमीन में पकड़े हों। इस अवस्था में फसल अपना आकार ले चुकी होती है और आगे का प्रबंधन प्लांट क्रॉप जैसा ही चलता है।
प्रश्न: शेविंग के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा है? उत्तर: गन्ना कटाई नवंबर से मार्च के बीच होती है — शेविंग कटाई के तुरंत बाद करनी है, मौसम का इंतजार नहीं करना। सर्दियों में फुटाव धीमा होता है, इसलिए नमी बनाए रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है।
प्रश्न: क्या शेविंग के बाद तुरंत खाद डाल सकते हैं? उत्तर: शेविंग के 2 से 3 दिन बाद हल्की सिंचाई दें, फिर 15 से 25 दिन के भीतर पहली खाद डालें। एकदम तुरंत भारी खाद देने से नन्ही कोंपलों को नुकसान हो सकता है।
प्रश्न: पत्ती की मल्चिंग से सांप-बिच्छू का डर तो नहीं? उत्तर: कतारों के बीच पतली परत में बिछी पत्ती में यह डर कम होता है; दिक्कत तब होती है जब पत्ती के मोटे ढेर गुच्छों पर पड़े रहते हैं। पत्ती हमेशा फैलाकर बिछाएं, ढेर न लगाएं।
प्रश्न: एक ही खेत में कितनी बार पेड़ी ले सकते हैं? उत्तर: आमतौर पर दो पेड़ी तक उपज अच्छी रहती है। तीसरी पेड़ी में रोग-कीट और उपज गिरने का खतरा बढ़ जाता है — इसके बाद फसल चक्र अपनाकर खेत को आराम दें।
नोट: किसी भी रसायन, अपघटक कल्चर या कीटनाशक की मात्रा के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें। ऊपर दी गई जानकारियां प्रकाशित कृषि सिफारिशों और ICAR-IISR, लखनऊ के शोध पर आधारित सामान्य मार्गदर्शन हैं।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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