
रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी, पोटाश) की लगातार बढ़ती कीमतों, कालाबाजारी की समस्याओं और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में आ रही भारी गिरावट के बीच उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए चीनी मिलों का सह-उत्पाद गन्ने की मैली (Pressmud / Filter Cake) और खोई (Bagasse) एक चमत्कारी वरदान साबित हो रहे हैं। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ और कृषि विश्वविद्यालयों के मृदा वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि यदि किसान चीनी मिल से निकलने वाली कच्ची मैली का वैज्ञानिक विधि से उपचार कर उसे ‘सुपर बायो-कंपोस्ट’ में बदल लें, तो खेत में रासायनिक खादों की जरूरत 50% तक घट जाती है और गन्ने की पैदावार में प्रति एकड़ 20% से 30% की जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज होती है।
लेकिन अज्ञानतावश अधिकांश किसान चीनी मिल से कच्ची मैली (Fresh Pressmud) सीधे लाकर खेतों में डाल देते हैं। कच्ची मैली में अत्यधिक गर्मी (Heat), मीथेन गैस, मोम (Cane Wax) और फंगस के बीजाणु होते हैं, जो सीधे खेत में डालने पर गन्ने के बीजों को सड़ा देते हैं और दीमक व सफेद गिडार (White Grub) को आकर्षित करते हैं।
इस 2200+ शब्दों की प्रामाणिक कृषि गाइड में हम जानेंगे कि गन्ने की मैली और खोई से मात्र 60 दिनों में गंधहीन, चाय की पत्ती जैसी भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर सुपर जैविक खाद कैसे तैयार की जाए, इसका कार्बन-नाइट्रोजन (C:N) अनुपात कैसे संतुलित करें और प्रति एकड़ इसका सही उपयोग कैसे किया जाए।
गन्ने की मैली (Pressmud) क्या है और इसमें कौन से पोषक तत्व होते हैं?
चीनी मिल में जब गन्ने के रस को साफ करने के लिए उसमें चूना (Lime) और सल्फर डाइऑक्साइड मिलाकर उबाला जाता है, तो रस की सारी अशुद्धियां, मैल, मोम और रेशे नीचे बैठ जाते हैं। इसे रोटरी वैक्यूम फिल्टर (Rotary Vacuum Filter) द्वारा अलग कर लिया जाता है, जिसे बोलचाल में ‘मैली’ या ‘प्रेसमड’ कहा जाता है।
सल्फेटेशन प्रक्रिया (Sulfitation Process) से निकलने वाली मैली में पौधों के विकास के लिए आवश्यक सभी मुख्य और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में विद्यमान होते हैं:
| पोषक तत्व (Nutrient) | कच्ची मैली में प्रतिशत (%) | तैयार कंपोस्ट में प्रतिशत (%) | गोबर की खाद (FYM) से तुलना |
|---|---|---|---|
| जैविक कार्बन (Organic Carbon) | 35.0% - 40.0% | 25.0% - 30.0% | गोबर की खाद से 3 गुना अधिक |
| नाइट्रोजन (N) | 1.20% - 1.80% | 2.00% - 2.50% | गोबर खाद (0.5%) से 4 गुना अधिक |
| फॉस्फोरस (P₂O₅) | 1.50% - 2.50% | 2.50% - 3.20% | गोबर खाद (0.2%) से 12 गुना अधिक |
| पोटाश (K₂O) | 1.00% - 1.50% | 1.50% - 2.00% | गोबर खाद (0.5%) से 3 गुना अधिक |
| कैल्शियम एवं सल्फर | 3.0% - 5.0% | 4.0% - 6.0% | मिट्टी के पीएच को संतुलित करता है |
| सूक्ष्म पोषक तत्व (Zinc, Fe, Mn) | 250 - 450 ppm | 500 - 800 ppm | फसल का पीलापन तुरंत मिटाता है |
कच्ची मैली सीधे खेत में क्यों नहीं डालनी चाहिए? 3 बड़े खतरे
अक्सर किसान मिल से ट्रॉली भरकर लाते हैं और बुवाई से पहले खेत में बिखेर देते हैं। यह तरीका अत्यंत विनाशकारी हो सकता है:
- तीव्र ऊष्मा और बीजों का सड़न (Extreme Heat): कच्ची मैली में किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया चलती रहती है, जिससे ढेर के भीतर तापमान 65 से 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यदि इस पर गन्ने के टुकड़े पड़ जाएं, तो आंखें जल जाती हैं और जमाव 40% भी नहीं हो पाता।
- दीमक और सफेद गिडार का निमंत्रण: कच्ची मैली में शर्करा (Sugar Content 5-8%) शेष रह जाती है। मीठे की गंध से जमीन में दीमक और व्हाइट ग्रब के भृंग (Beetles) अंडे देने आ जाते हैं।
- अघुलनशील मोम (Cane Wax): गन्ने के तने पर जो प्राकृतिक सफेद मोम होता है, वह मैली में 8 से 12% तक होता है। जब तक यह मोम बैक्टीरिया द्वारा विघटित नहीं होता, तब तक मिट्टी में पानी का रिसाव बाधित रहता है।
60 दिन में सुपर कंपोस्ट तैयार करने की 5-चरणीय वैज्ञानिक विधि (Aerobic Windrow Method)
प्रेसमड कंपोस्ट बनाने के लिए ‘वायवीय विंड्रो विधि’ (Aerobic Windrow Method) सबसे सस्ती, तेज और सर्वोत्तम मानी जाती है।
आवश्यक सामग्री (5 टन खाद बनाने हेतु)
- कच्ची प्रेस मड (चीनी मिल से प्राप्त): 4 टन
- सूखी खोई (Bagasse) या गन्ने की सूखी पत्तियां: 1 टन (यह कार्बन और वायु संचार बढ़ाती है)
- गाय का ताजा गोबर या गोमूत्र: 200 किग्रा / 50 लीटर
- ट्राइकोडर्मा हरजिएनम (Trichoderma): 2 किग्रा (फंगसनाशक व सड़ाने वाला जैव एजेंट)
- पीएसबी कल्चर (Phosphate Solubilizing Bacteria): 2 किग्रा
- डीकंपोजर या गुड़ का शीरा: 5 किग्रा
चरण 1: उचित स्थान का चयन और विंड्रो ढेर बनाना
- खेत के किसी ऊंचे, छायादार स्थान पर जमीन को समतल कर लें जहां बारिश का पानी न भरता हो।
- नीचे 6 इंच मोटी गन्ने की खोई या बारीक कटी सूखी पत्तियों की परत बिछाएं।
- इसके ऊपर 1 फीट मोटी कच्ची मैली की परत फैलाएं।
- इस प्रकार परत-दर-परत बनाते हुए लंबाई 20 फीट, चौड़ाई 6 फीट और ऊंचाई 4 फीट का एक लंबा विंड्रो (ढेर) तैयार कर लें।
चरण 2: बायो-कल्चर घोल का छिड़काव
- एक 200 लीटर के ड्रम में पानी भरें। इसमें 5 किग्रा गुड़, 2 किग्रा ट्राइकोडर्मा, 2 किग्रा पीएसबी कल्चर और 50 लीटर गोमूत्र अच्छी तरह घोल लें।
- इस घोल को हजारे (Sprinkling Can) की मदद से विंड्रो ढेर के प्रत्येक परत पर समान रूप से छिड़कें।
- ढेर में नमी की मात्रा 55% से 60% होनी चाहिए। (जांचने का तरीका: मुट्ठी में खाद को दबाने पर पानी टपकना नहीं चाहिए, लेकिन लड्डू बंध जाना चाहिए)।
चरण 3: पहली और दूसरी पलटाई (Aeration Turning)
- 15वें दिन: ढेर के अंदर तापमान 60 डिग्री तक पहुंचेगा। कस्सी या ट्रैक्टर लोडर की सहायता से पूरे ढेर को उलट-पुलट दें ताकि बाहरी हिस्सा अंदर और अंदर का हिस्सा बाहर आ जाए। इससे एरोबिक बैक्टीरिया को ताजी ऑक्सीजन मिलती है।
- 30वें दिन: दूसरी पलटाई करें और यदि नमी कम लगे तो हल्का पानी छिड़कें। इस समय तक मैली का रंग गहरे भूरे से काले रंग में बदलने लगेगा और गर्मी कम होने लगेगी।
चरण 4: तीसरी पलटाई और सूक्ष्म जीवाणु संवर्धन
- 45वें दिन: तीसरी और अंतिम पलटाई करें। इस समय खाद का तापमान सामान्य (30-35 डिग्री) हो जाएगा। अब इसमें 50 किग्रा नीम की खली (Neem Cake Powder) मिला दें। नीम की खली मिलाने से खाद में मौजूद नाइट्रोजन धीरे-धीरे निकलती है और जमीन के कीड़े-मकोड़े पूरी तरह मर जाते हैं।
चरण 5: परिपक्वता परीक्षण (60वां दिन)
60 दिन पूरे होते ही आपकी सुपर कंपोस्ट तैयार है:
- खाद का रंग बिल्कुल गहरा काला (Dark Black) हो जाएगा।
- छूने पर यह चाय की पत्ती जैसी दानेदार और भुरभुरी लगेगी।
- इसमें से किसी भी प्रकार की दुर्गंध नहीं आएगी, बल्कि पहली बारिश के बाद गीली मिट्टी जैसी सौंधी खुशबू आएगी।
गन्ने की फसल में प्रयोग की विधि और मात्रा (Application Schedule)
तैयार प्रेसमड सुपर कंपोस्ट का प्रयोग गन्ने की विभिन्न अवस्थाओं में इस प्रकार करें:
| प्रयोग का समय | प्रयोग विधि | प्रति एकड़ अनुशंसित मात्रा | लाभ |
|---|---|---|---|
| खेत की अंतिम जुताई के समय | पूरे खेत में बिखेरकर पाटा लगाएं | 2.5 से 3.0 टन / एकड़ | मिट्टी का जीवांश कार्बन बढ़ता है, जलधारण क्षमता 35% बढ़ती है। |
| ट्रेंच बुवाई के समय (नालियों में) | नालियों में गन्ने के टुकड़ों के नीचे या ऊपर डालें | 1.5 टन / एकड़ | अंकुरण 95% से अधिक होता है, जड़ों का जाल तेजी से फैलता है। |
| पहली निराई-गुड़ाई (45 दिन बाद) | थानों की जड़ों के पास डालकर मिट्टी चढ़ाएं | 1.0 टन / एकड़ | कल्ले (Tillers) मोटे निकलते हैं और यूरिया की जरूरत आधी रह जाती है। |
रासायनिक खादों में 50% की सीधी बचत का गणित
यदि आप प्रति एकड़ 3 टन सुपर प्रेसमड कंपोस्ट का उपयोग करते हैं, तो आपकी रासायनिक खाद की बचत का वित्तीय विश्लेषण:
- डीएपी (DAP) की बचत: प्रेसमड में मौजूद जैविक फॉस्फोरस के कारण बुवाई के समय लगने वाली 2 बोरी डीएपी में से 1 बोरी डीएपी (बचत ₹1,350) पूरी तरह घटाई जा सकती है।
- यूरिया (Urea) की बचत: कंपोस्ट में 2.5% धीमे छूटने वाली नाइट्रोजन होती है, जिससे टॉप ड्रेसिंग में लगने वाली 3 बोरी यूरिया में से 1.5 बोरी यूरिया (बचत ₹400) कम हो जाती है।
- सल्फर व जिंक की बचत: अलग से ₹1,500 के सल्फर और जिंक डालने की कतई आवश्यकता नहीं रहती।
- शुद्ध बचत: प्रति एकड़ कम से कम ₹3,500 से ₹4,000 की रासायनिक खाद की सीधी बचत होती है, जबकि मिट्टी की उर्वरा शक्ति अगले 3 वर्षों के लिए सुधर जाती है।
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