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गन्ना प्रेसमड (मैली) से जैविक खाद बनाने का अचूक फॉर्मूला 2026 — ₹100 में तैयार करें 1 टन सुपर कम्पोस्ट

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 2, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
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गन्ना प्रेसमड (मैली) से जैविक खाद बनाने का अचूक फॉर्मूला 2026 — ₹100 में तैयार करें 1 टन सुपर कम्पोस्ट
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): चीनी मिलों से निकलने वाली कच्ची मैली को सीधे खेत में डालने से दीमक और फंगस लगती है। जानिए वेस्ट डीकंपोजर व ट्राइकोडर्मा से मात्र 45 दिनों में काला सोना (Bio-Compost) बनाने का अचूक तरीका।

उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में चीनी मिलों के पेराई सत्र के दौरान गन्ने के रस की सफाई (Clarification Process) के उपरांत भारी मात्रा में एक उप-उत्पाद निकलता है जिसे स्थानीय भाषा में ‘मैली’, ‘प्रेसमड’ या ‘फिल्टर केक (Pressmud / Filter Cake)’ कहा जाता है। राज्य की 122 चीनी मिलों से प्रतिवर्ष लगभग 40 से 50 लाख टन प्रेसमड निकलता है जो किसानों को मिल गेट पर मात्र ₹100 से ₹200 प्रति ट्रॉली या कई बार बिल्कुल मुफ्त मिल जाता है।

अधिकांश किसान अज्ञानतावश इस कच्ची मैली को सीधे ट्रैक्टर ट्रॉली से लाकर अपने खेत में बिखेर देते हैं। कच्ची मैली में अत्यधिक गर्मी, मोम (Cane Wax), कच्ची शर्करा और अधूरा अपघटन होने के कारण यह खेत में जाते ही भयंकर दीमक (Termite), सफेद लट (White Grub) और लाल सड़न (Red Rot) की फंगस को आकर्षित करती है, जिससे फसल को फायदे के बजाय भारी नुकसान होता है।

यदि किसान भाई वैज्ञानिक तरीके से वेस्ट डीकंपोजर (Waste Decomposer) और ट्राइकोडर्मा का उपयोग करके इस मैली को मात्र 45 दिनों में ‘सुपर बायो-कम्पोस्ट (Super Bio-Compost)’ में बदल लें, तो यह बाजार की ₹1,350 वाली डीएपी और यूरिया से भी 10 गुना अधिक शक्तिशाली जैविक खाद बन जाती है। इस विस्तृत वैज्ञानिक गाइड में हम प्रेसमड कम्पोस्टिंग का 45-दिवसीय फॉर्मूला, पोषक तत्वों का विश्लेषण और खेत में प्रयोग की विधि समझेंगे।

1. प्रेसमड (मैली) का पोषक तत्व विश्लेषण — यह ‘काला सोना’ क्यों है?

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ के प्रयोगशाला परीक्षणों के अनुसार अच्छी तरह सड़ी हुई प्रेसमड कम्पोस्ट में पारंपरिक गोबर की खाद (FYM) की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं:

पोषक तत्व का नाम (Nutrient)साधारण गोबर खाद (FYM)प्रेसमड कम्पोस्ट (Pressmud Bio-Compost)किसान को फायदा
जैविक कार्बन (Organic Carbon)10% से 15%30% से 35% (सर्वोच्च स्तर)बंजर जमीन को उपजाऊ व भुरभुरा बनाना
नाइट्रोजन (N)0.5% से 0.8%2.0% से 2.5%यूरिया की खपत में 40% की सीधी बचत
फास्फोरस ($P_2O_5$)0.2% से 0.4%1.8% से 2.5%डीएपी की जगह प्राकृतिक जैविक फास्फोरस
पोटाश ($K_2O$)0.5% से 0.8%1.4% से 1.8%गन्ने की मोटाई, वजन और मिठास में वृद्धि
कैल्शियम व मैग्नीशियम0.5%3.0% से 4.5%मिट्टी के अम्लीय/क्षारीय पीएच को संतुलित करना
सल्फर (सल्फर तत्व)0.05%1.5% से 2.0%गन्ने में सुक्रोज और चीनी परता बढ़ाना
सूक्ष्म पोषक तत्व (Zn, Fe, Mn)सूक्ष्म मात्राप्रचुर मात्रा में (100% चीलेटेड रूप में)पत्तियों में गहरा हरापन व रोग प्रतिरोधकता

2. कच्ची मैली सीधे खेत में डालने के 4 भयंकर खतरे

  1. दीमक और सफेद लट की नर्सरी बनना: कच्ची मैली में बचे हुए गन्ने के मीठे रस की गंध से जमीन में दीमक और सफेद लट का भयंकर प्रकोप होता है जो गन्ने की आंखों को चट कर जाती हैं।
  2. जड़ों का जलना (Root Scorch): कच्ची मैली जब मिट्टी में सड़ना शुरू होती है, तो उसका आंतरिक तापमान 65°C से 70°C तक बढ़ जाता है जिससे गन्ने की नई कोमल जड़ें झुलसकर मर जाती हैं।
  3. भूमि में ऑक्सीजन की कमी: अधूरा अपघटन मिट्टी की सारी ऑक्सीजन सोख लेता है जिससे पौधों का दम घुटने लगता है और बढ़वार रुक जाती है।
  4. हानिकारक कवक का फैलाव: कच्ची मैली में कई हानिकारक फंगस सुप्त अवस्था में रहते हैं जो खेत में पहुंचकर लाल सड़न और उकठा रोग फैलाते हैं।

3. 45 दिनों में सुपर प्रेसमड कम्पोस्ट बनाने की 4-चरणीय वैज्ञानिक विधि

[छायादार स्थान पर 3-4 ट्रॉली मैली का ढेर] ➔ [वेस्ट डीकंपोजर + ट्राइकोडर्मा घोल का छिड़काव] ➔ [हफ्ते में 1 बार पलटी व नमी 50%] ➔ [45 दिन में काला भुरभुरा कम्पोस्ट तैयार]

आवश्यक सामग्री (प्रति 5 टन मैली के लिए):

  • कच्ची प्रेसमड (मैली): 5 टन (लगभग 2 से 3 ट्रॉली)।
  • वेस्ट डीकंपोजर (National Centre of Organic Farming - NCOF): 200 लीटर तैयार घोल।
  • ट्राइकोडर्मा विरिडी पाउडर: 2 किलोग्राम।
  • पीएसबी (फास्फेट सोल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया): 1 लीटर / 1 किग्रा।
  • पुराना गुड़: 2 किलोग्राम (घोल में मिलाने हेतु)।

चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया:

  1. चरण 1 (बेड बनाना): खेत के किसी किनारे या पेड़ की छाया में 20 फीट लंबा, 6 फीट चौड़ा और 3 फीट ऊंचा मैली का चबूतरा (Windrow Heap) बनाएं।
  2. चरण 2 (जैविक घोल का छिड़काव): 200 लीटर पानी में 2 किग्रा गुड़, 2 किग्रा ट्राइकोडर्मा और वेस्ट डीकंपोजर घोलें। इस घोल को हजारे (Sprinkling Can) की मदद से मैली की परतों पर समान रूप से छिड़कें।
  3. चरण 3 (नमी व तापमान नियंत्रण): ढेर में 50% से 60% नमी बनाए रखें (हाथ में मुट्ठी बांधने पर लड्डू बने लेकिन पानी न टपके)। ढेर को जूट की पुरानी बोरियों या तिरपाल से ढक दें।
  4. चरण 4 (15-15 दिन पर 2 बार पलटी):
    • 15वें दिन फावड़े या जेसीबी से ढेर को पूरी तरह पलट दें ताकि हवा (Oxygen) अंदर जा सके।
    • 30वें दिन दूसरी बार पलटी करें और हल्का पानी छिड़कें।
    • 45वें दिन मैली का तापमान सामान्य हो जाएगा, बदबू पूरी तरह खत्म हो जाएगी और वह चाय की पत्ती जैसी काली, भुरभुरी और सौंधी खुशबू वाली ‘सुपर बायो-कम्पोस्ट’ में बदल जाएगी।

4. खेत में प्रयोग की सही मात्रा और समय (Dose per Acre)

  • बुवाई के समय बेसल डोज: प्रति एकड़ 2 से 3 टन (1 से 1.5 ट्रॉली) सड़ी हुई प्रेसमड कम्पोस्ट ट्रेंच नाली में या अंतिम जुताई के समय खेत में समान रूप से बिखेरें।
  • रासायनिक खादों में कटौती: यदि आपने 2 ट्रॉली कम्पोस्ट डाली है, तो आपको बुवाई में डीएपी की मात्रा 50% (आधी बोरी) और पोटाश की मात्रा 30% कम कर देनी चाहिए।
  • पेड़ी गन्ने में प्रयोग: पेड़ी गन्ने की पहली सिंचाई के बाद कतारों के बीच 1 टन कम्पोस्ट डालकर गुड़ाई करने से पेड़ी में बंपर कल्ले फूटते हैं।

5. प्रेसमड कम्पोस्ट खाद के प्रयोग से जमीन में होने वाले 6 जादुई बदलाव

  1. मिट्टी की जलधारण क्षमता में 40% वृद्धि: प्रेसमड में मौजूद ह्यूमस मिट्टी में स्पंज की तरह काम करता है जिससे भयंकर गर्मी में भी जमीन में 15 दिनों तक नमी बनी रहती है और 2 सिंचाइयों की बचत होती है।
  2. केंचुओं (Earthworms) की प्राकृतिक वापसी: जैविक कार्बन बढ़ने से खेत में देशी केंचुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है जो जमीन में गहरी सुरंगें बनाकर प्राकृतिक जुताई करते हैं।
  3. मिट्टी का पीएच मान (pH Buffer): अम्लीय मिट्टी में चूने की तरह और क्षारीय मिट्टी में जिप्सम की तरह काम करके पीएच को आदर्श 7.0 के करीब लाता है।
  4. जड़ों का 2 गुना अधिक फैलाव: भुरभुरी मिट्टी में गन्ने की प्राथमिक और द्वितीयक जड़ें 3 से 4 फीट गहराई तक जाती हैं जिससे पौधा जमीन से पूरा पोषण खींचता है।
  5. गन्ने की छाल में प्राकृतिक चमक व वजन: प्रेसमड में मौजूद सल्फर और सिलिका गन्ने को ठोस बनाते हैं जिससे प्रति गन्ने का वजन 300 से 500 ग्राम बढ़ जाता है।
  6. रासायनिक खादों के जहर से मुक्ति: लगातार 3 वर्ष प्रेसमड कम्पोस्ट का उपयोग करने से खेत की यूरिया और डीएपी पर निर्भरता 60% तक समाप्त हो जाती है।

6. प्रेसमड कम्पोस्ट निर्माण में अक्सर होने वाली 4 गलतियां व समाधान

  • गलती 1: पानी की अत्यधिक मात्रा: ढेर में कीचड़ न बनने दें। अधिक पानी से बदबू आती है और उपयोगी जीवाणु मर जाते हैं।
  • गलती 2: खुली धूप में छोड़ना: ढेर को कभी भी बिना ढके न छोड़ें। जूट की बोरियों से ढकने पर तापमान 50°C-55°C पर स्थिर रहता है जो पैथोजेन्स को मारता है।
  • गलती 3: समय पर पलटी न करना: 15वें और 30वें दिन फावड़े से पलटी करना अनिवार्य है ताकि एरेशन (हवा) मिलती रहे।
  • गलती 4: रासायनिक कीटनाशक मिलाना: कम्पोस्ट बनाते समय कभी भी क्लोरपायरीफॉस या फोरेट जैसी जहरीली दवाएं न डालें, क्योंकि इससे ट्राइकोडर्मा और मित्र बैक्टीरिया मर जाएंगे।

7. प्रेसमड कम्पोस्ट बनाम वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) का वैज्ञानिक तुलनात्मक अध्ययन

तुलनात्मक मानकप्रेसमड सुपर कम्पोस्ट (Pressmud Bio-Compost)वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost / केंचुआ खाद)साधारण गोबर खाद (FYM)
निर्माण समयमात्र 40 से 45 दिन60 से 75 दिन6 से 8 माह (लंबा समय)
कच्चे माल की लागतलगभग ₹100 से ₹200 प्रति टन (चीनी मिल से)₹2,000 से ₹3,000 प्रति टन (गोबर + केंचुआ)₹800 से ₹1,200 प्रति ट्रॉली
जैविक कार्बन (OC)30% से 35% (सर्वाधिक)18% से 22%10% से 12%
नाइट्रोजन तत्व (N)2.0% से 2.5%1.5% से 1.8%0.5% से 0.7%
सल्फर व सूक्ष्म तत्व1.5% सल्फर + प्रचुर जिंक व फेरस0.4% सल्फरनाममात्र सूक्ष्म तत्व
गन्ना फसल में प्रभावगन्ने का वजन व मिठास 20% बढ़ाता हैपौधों का विकास अच्छा करता हैसामान्य प्रभाव
प्रति एकड़ कुल बचत₹4,000 से ₹6,000 रासायनिक खाद की बचत₹2,000 की बचत₹1,000 की बचत

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

क्या चीनी मिल से निकली कच्ची मैली को सीधे खेत में डाल सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। कच्ची मैली सीधे डालने से खेत में दीमक, सफेद लट और फंगस लगती है तथा अत्यधिक गर्मी से पौधों की जड़ें जल जाती हैं।

मैली को सड़ने में सामान्यतः कितने दिनों का समय लगता है?

वेस्ट डीकंपोजर और ट्राइकोडर्मा का उपयोग करने पर मैली मात्र 40 से 45 दिनों में उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट में बदल जाती है।

एक एकड़ गन्ने के लिए कितनी प्रेसमड कम्पोस्ट खाद पर्याप्त होती है?

एक एकड़ गन्ने के लिए 2 से 3 टन (लगभग 1 से 1.5 ट्रॉली) कम्पोस्ट खाद प्रतिवर्ष पर्याप्त होती है।

क्या प्रेसमड कम्पोस्ट से डीएपी (DAP) खाद की बचत होती है?

हां, प्रेसमड में 2.5% तक प्राकृतिक जैविक फास्फोरस होता है, जिससे रासायनिक डीएपी की आवश्यकता 50% तक कम हो जाती है।

वेस्ट डीकंपोजर (Waste Decomposer) कहां से मिलता है?

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र (NCOF) गाजियाबाद अथवा किसी भी राजकीय कृषि रक्षा केंद्र पर मात्र ₹20 में वेस्ट डीकंपोजर की बोतल मिलती है।

क्या प्रेसमड खाद क्षारीय (कलर) जमीन को सुधार सकती है?

हां, प्रेसमड में सल्फर और कार्बनिक अम्ल होते हैं जो ऊसर और क्षारीय मिट्टी के पीएच मान को घटाकर उसे उपजाऊ बनाते हैं।

तैयार कम्पोस्ट खाद की पहचान कैसे करें?

तैयार खाद का रंग गहरा काला/भूरा होता है, उसमें से कोई बदबू नहीं आती और छूने पर चाय की पत्ती की तरह भुरभुरी होती है।

क्या कम्पोस्ट बनाते समय ढेर को ढकना जरूरी है?

हां, जूट की बोरियों से ढकने पर नमी बनी रहती है और लाभदायक जीवाणु धूप से मरने के बजाय तेजी से काम करते हैं।

क्या प्रेसमड में ट्राइकोडर्मा मिलाने से लाल सड़न रुकती है?

हां, ट्राइकोडर्मा युक्त प्रेसमड खाद जब खेत में डाली जाती है तो वह मिट्टी में मौजूद लाल सड़न के फंगस को खाकर समाप्त कर देती है।

चीनी मिलों से प्रेसमड कैसे प्राप्त करें?

पेराई सत्र के दौरान किसान अपनी नजदीकी चीनी मिल के गेट पर जाकर पर्ची कटवाकर नाममात्र दर पर सीधे ट्रॉली से मैली ला सकते हैं।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

8. प्रेसमड जैविक खाद के प्रयोगशाला विश्लेषण मानक और खेत में उपयोग की ऋतुवार विधि

प्रेसमड से बनी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (Enriched Bio-Compost) की उर्वरक क्षमता का मूल्यांकन भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के मानकों के अनुसार किया जाता है:

(क) एनरिच्ड प्रेसमड खाद का पोषक तत्व विश्लेषण (Lab Analysis):

पोषक तत्व / पैरामीटरसामान्य कच्ची मैली (Raw Pressmud)उपचारित एनरिच्ड जैविक खाद (Enriched Compost)
ऑर्गेनिक कार्बन (Organic Carbon)18% - 22% (कच्चा/गर्म)28% - 32% (स्थिर व ह्यूमस युक्त)
नाइट्रोजन (Total Nitrogen - N)1.0% - 1.2%1.8% - 2.4%
फास्फोरस (Available P₂O₅)1.5% - 2.0%2.5% - 3.5%
पोटाश (Available K₂O)0.8% - 1.0%1.5% - 2.0%
सी:एन अनुपात (C:N Ratio)25:1 से 30:112:1 से 15:1 (पौधों द्वारा तुरंत अवशोषक)
हानिकारक रोगाणु / खरपतवार बीजउपस्थित (कवक व दीमक का खतरा)100% नष्ट (उच्च तापमान के कारण)

(ख) विभिन्न फसलों में उपयोग की अनुशंसित मात्रा (Dose per Acre):

  1. गन्ना बुवाई (शरद/बसंत): 3 से 4 टन प्रति एकड़। ट्रेंच की नालियों में डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें। इससे रासायनिक डीएपी की मात्रा 50% तक कम की जा सकती है।
  2. पेड़ी गन्ना (Ratoon Management): 2 से 3 टन प्रति एकड़। पहली सिंचाई और गुड़ाई के समय ठूंठों के पास कतारों में बिखेरें।
  3. सब्जियां व सह-फसलें (आलू/सरसों/मटर): 1.5 से 2 टन प्रति एकड़। खेत की अंतिम जुताई के समय पूरे खेत में समान रूप से बिखेर कर पाटा लगाएं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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