
उत्तर प्रदेश में प्रत्येक पेराई सत्र की शुरुआत से पूर्व राज्य सरकार और गन्ना विकास विभाग द्वारा ‘गन्ना क्रय केंद्र आवंटन एवं आरक्षण नीति’ (Cane Purchase Center Allocation & Reservation Policy) जारी की जाती है। इस नीति के तहत तय किया जाता है कि किस गांव का गन्ना किस चीनी मिल को जाएगा और किसानों का गन्ना मिल के मुख्य गेट (Mill Gate) पर तौला जाएगा या गांव के निकट स्थापित किसी बाह्य क्रय केंद्र (Outstation Purchase Center) पर।
लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकांश किसान इस बात को लेकर भ्रमित रहते हैं कि मिल गेट पर गन्ना डालने और सेंटर पर डालने में भाव और भुगतान का क्या अंतर होता है? क्या चीनी मिल सेंटर पर गन्ना तौलने पर मनमाना ट्रांसपोर्ट भाड़ा (Freight / Transport Rebate) काट सकती है? यदि किसी किसान का क्रय केंद्र उसके घर से बहुत दूर आवंटित कर दिया गया है या संबंधित मिल समय पर भुगतान नहीं करती, तो क्या किसान अपना क्रय केंद्र या चीनी मिल बदलने का वैधानिक अधिकार रखता है?
इस 2200+ शब्दों की कानूनी और नीतिगत मार्गदर्शिका में हम उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धाराओं, हालिया गन्ना आयुक्त आदेशों और अपीलीय न्यायाधिकरण के फैसलों के आधार पर गेट बनाम सेंटर के नियम, अधिकृत ढुलाई कटौती की गणितीय दरें और क्रय केंद्र परिवर्तन की पूरी आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं।
मिल गेट (Mill Gate) बनाम बाह्य क्रय केंद्र (Purchase Center): 5 बड़े अंतर
चीनी मिल के मुख्य कारखाने के गेट पर बने वजन पुल और गांवों में बने बाहरी तौल केंद्रों के बीच निम्नलिखित बुनियादी अंतर होते हैं:
| तुलना का बिंदु | मिल गेट तौल (Mill Gate) | बाह्य क्रय केंद्र (Purchase Center) |
|---|---|---|
| भौगोलिक स्थान | सीधे चीनी मिल परिसर में स्थित। | मिल से 5 किमी से लेकर 40 किमी दूर ग्रामीण क्षेत्र में। |
| गन्ना मूल्य भुगतान (SAP) | किसान को सरकार द्वारा घोषित शत-प्रतिशत पूर्ण राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) मिलता है। | मिल से दूरी के अनुसार निर्धारित ढुलाई कटौती (Transport Rebate) काटकर भुगतान होता है। |
| तौल पर्ची की वैधता | पर्ची जारी होने के 3 दिन तक वैध। | सेंटर पर्ची 3 से 4 दिन तक वैध। |
| उठाव एवं ताज़गी | गन्ना सीधे यार्ड में अनलोड होकर पेराई में चला जाता है (सूखने का शून्य जोखिम)। | सेंटर पर तौल के बाद ट्रकों में भराई और मिल पहुंचने में 24-48 घंटे लगते हैं (वजन सूखने की आशंका)। |
| घटतौली का जोखिम | मिल के केंद्रीय सीसीटीवी और धर्मकांटों पर प्रशासनिक निगरानी सख्त होती है। | सुदूर ग्रामीण केंद्रों पर घटतौली और तौल लिपिकों की मनमानी की अधिक आशंका रहती है। |
ट्रांसपोर्ट भाड़ा (ढुलाई कटौती) के आधिकारिक सरकारी नियम
उत्तर प्रदेश गन्ना अधिनियम की धारा 17 और गन्ना खरीद नियमावली के नियम 49 के तहत, यदि कोई चीनी मिल किसी बाह्य क्रय केंद्र से अपने खर्च पर गन्ने की ढुलाई कर मिल तक लाती है, तो उसे सरकार द्वारा अनुमोदित दर पर ही ढुलाई कटौती (Transport Rebate) करने की अनुमति होती है।
शासन द्वारा पेराई सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित मानक कटौती स्लैब निम्नलिखित हैं:
$$ ext{किसान को देय शुद्ध मूल्य} = ext{घोषित SAP दर} - ext{अधिकृत ढुलाई कटौती (Rebate)}$$
| क्रय केंद्र की मिल गेट से दूरी | अधिकतम अनुमेय ढुलाई कटौती (₹/क्विंटल) | उदाहरण: ₹370 भाव पर किसान को शुद्ध भुगतान |
|---|---|---|
| 0 से 8 किलोमीटर तक | ₹0.00 (शून्य कटौती - मिल वहन करेगी) | ₹370.00 प्रति क्विंटल |
| 8 किमी से 15 किलोमीटर तक | अधिकतम ₹4.50 प्रति क्विंटल | ₹365.50 प्रति क्विंटल |
| 15 किमी से 25 किलोमीटर तक | अधिकतम ₹7.00 प्रति क्विंटल | ₹363.00 प्रति क्विंटल |
| 25 किलोमीटर से अधिक दूरी पर | अधिकतम ₹9.00 प्रति क्विंटल (सीलिंग सीमा) | ₹361.00 प्रति क्विंटल |
अति महत्वपूर्ण कानूनी चेतावनी: कोई भी चीनी मिल किसी भी परिस्थिति में ₹9.00 प्रति क्विंटल से अधिक ढुलाई भाड़ा नहीं काट सकती, चाहे क्रय केंद्र 50 किमी दूर ही क्यों न हो। यदि आपकी भुगतान पर्ची में ₹9 से अधिक कटौती की गई है, तो यह दंडनीय अपराध है और इसकी वसूली मिल से ब्याज सहित कराई जा सकती है।
क्रय केंद्र बदलने के लिए किसान के पास क्या कानूनी अधिकार हैं?
यदि आपके गांव का क्रय केंद्र ऐसी मिल को आवंटित हो गया है जो:
- पिछले सत्र का गन्ना भुगतान 14 दिन के भीतर नहीं करती और करोड़ों का डिफ़ॉल्टर है।
- क्रय केंद्र आपके खेत या गांव से 10-15 किमी दूर बीहड़ या खराब रास्ते पर स्थापित किया गया है।
- क्रय केंद्र पर लगातार घटतौली, कांटा बंद रहने या इंडेंट न मिलने की शिकायतें रहती हैं।
तो उत्तर प्रदेश गन्ना अधिनियम की धारा 15 (आरक्षण एवं परिसीमन आदेश) के तहत किसानों को क्रय केंद्र परिवर्तन (Transfer of Center / Tagging) कराने का पूरा कानूनी हक है।
क्रय केंद्र परिवर्तन हेतु 4-चरणीय आवेदन प्रक्रिया (Application Procedure)
चरण 1: ग्राम स्तर पर सामूहिक प्रस्ताव तैयार करना
क्रय केंद्र बदलने का आवेदन कभी भी एकल किसान के बजाय सामूहिक रूप से अधिक प्रभावी होता है।
- गांव के कम से कम 25 से 50 गन्ना उत्पादक किसान एक बैठक करें।
- सादे कागज पर प्रस्ताव लिखें कि हमारा वर्तमान क्रय केंद्र ‘X’ मिल को आवंटित है, जो भुगतान में डिफ़ॉल्टर है या अत्यधिक दूर है, जबकि पास की ‘Y’ मिल का गेट/सेंटर मात्र 3 किमी दूर है।
- सभी किसानों के नाम, किसान कोड, सट्टा रकबा और हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान लें।
चरण 2: जिला गन्ना अधिकारी (DCO) को प्रत्यावेदन
तैयार प्रस्ताव को संलग्न कर अपने जिले के जिला गन्ना अधिकारी (District Cane Officer) को पेराई सत्र शुरू होने से कम से कम 30 दिन पूर्व (15 सितंबर से 5 अक्टूबर के मध्य) प्रस्तुत करें।
- आवेदन में सड़क की वास्तविक दूरी का नक्शा और वर्तमान क्रय केंद्र की असुविधाओं का ठोस प्रमाण दें।
चरण 3: क्षेत्रीय जांच और सुनवाई
डीसीओ संबंधित क्षेत्र के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (CDI) को स्थलीय दूरी और किसानों की सुविधा की जांच हेतु मौके पर भेजेगा। जांच में देखा जाता है कि क्या प्रस्तावित नई मिल के पास अतिरिक्त गन्ने की पेराई क्षमता उपलब्ध है या नहीं।
चरण 4: गन्ना आयुक्त (Cane Commissioner) के समक्ष अंतिम अपील
यदि जिला गन्ना अधिकारी आपकी मांग को अस्वीकार कर देता है, तो अधिनियम की धारा 15(4) के तहत किसान को गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के समक्ष औपचारिक अपील (Statutory Appeal) दायर करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। गन्ना आयुक्त की अदालत दोनों पक्षों की सुनवाई कर 15 दिनों के भीतर अंतिम व बाध्यकारी आदेश पारित करती है।
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