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गन्ने के साथ सरसों, आलू और मटर की सह-फसली खेती — पहले 90 दिन में ₹50,000 अतिरिक्त कमाई

Randhir Patil Randhir Patil Sep 2, 2026 अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST 3 min read
गन्ने के साथ सरसों, आलू और मटर की सह-फसली खेती — पहले 90 दिन में ₹50,000 अतिरिक्त कमाई
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): शरदकालीन बुवाई में 4.5 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से गन्ना बोकर बीच की खाली मेड़ों पर सरसों, आलू या मटर की सह-फसल लेने से खेत की उत्पादकता दोगुनी हो जाती है। सह-फसल बेचकर किसान गन्ने की पूरी लागत निकाल लेता है और मुख्य गन्ना शुद्ध मुनाफा बनता है।

उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत गन्ना किसानों के लिए सह-फसली खेती (Intercropping) आमदनी बढ़ाने का सबसे क्रांतिकारी तरीका है। शरद ऋतु में गन्ने का जमाव होने के बाद शुरुआती 90 दिनों तक गन्ने के पौधे बहुत छोटे रहते हैं और दो कतारों के बीच की 4.5 फीट जमीन खाली पड़ी रहती है।

यदि इस खाली जमीन पर कम अवधि वाली नकदी फसलें ली जाएं, तो खरपतवार नहीं उगते, पानी का बेहतर उपयोग होता है और किसान को मुख्य गन्ने के भुगतान का इंतजार किए बिना 3 महीने में नकद पैसा मिल जाता है।


1. टॉप-3 सह-फसली मॉडल और उनकी तुलना

सह-फसलसर्वोत्तम प्रजातियांपकने की अवधिप्रति एकड़ अतिरिक्त पैदावारशुद्ध अतिरिक्त मुनाफा
सरसों (Mustard)पूसा मस्टर्ड-31, आरएच-749, गिरिराजा100 - 110 दिन8 - 10 क्विंटल₹40,000 - ₹48,000
आलू (Potato)कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति80 - 90 दिन100 - 120 क्विंटल₹50,000 - ₹60,000
हरी मटर (Green Pea)काशी नंदिनी, पूसा प्रभात, जीएस-1065 - 75 दिन35 - 40 क्विंटल (फली)₹35,000 - ₹42,000

2. गन्ना + सरसों मॉडल की बुवाई तकनीक

  • मेड़ पर बुवाई: ट्रेंच नाली में गन्ना बोने के बाद दोनों तरफ ऊंची उठी मेड़ों (Beds) पर 1.5 किग्रा प्रति एकड़ की दर से सरसों के बीज की कतार बनाएं।
  • सिंचाई प्रबंधन: पानी केवल नाली में लगाएं। नाली का पानी रिसकर मेड़ की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे सरसों के तनों में फंगस नहीं लगती।
  • प्राकृतिक खाद का लाभ: कटाई के बाद सरसों की पत्तियां खेत में गिरकर सड़ती हैं, जिससे मिट्टी का जैविक कार्बन 0.2% तक बढ़ जाता है।

3. गन्ना + आलू मॉडल की बुवाई तकनीक

  • 1 से 15 अक्टूबर के बीच गन्ने की नालियों के बीच की मेड़ पर 20 सेमी की दूरी पर आलू के कंद लगाएं।
  • आलू की फसल में लगने वाली खाद और मिट्टी चढ़ाने का सीधा फायदा बगल में उग रहे गन्ने को मिलता है।
  • 85 दिन बाद जब जनवरी में आलू खोदा जाता है, तो गन्ने के पौधों के चारों तरफ की मिट्टी स्वतः भुरभुरी हो जाती है।

4. सह-फसली खेती के 4 बड़े आर्थिक फायदे

  1. शून्य खरपतवार खर्च: मेड़ पर सह-फसल होने से घास-फूस नहीं उगता, जिससे निराई-गुड़ाई का ₹4,000 प्रति एकड़ बचता है।
  2. लागत की त्वरित भरपाई: जनवरी में सह-फसल बिकते ही खाद, बीज और डीजल का पूरा पैसा किसान की जेब में वापस आ जाता है।
  3. पानी की 45% बचत: एक ही बार पानी लगाने से दोनों फसलों की सिंचाई हो जाती है।
  4. जोखिम से सुरक्षा: यदि मौसम की मार से एक फसल प्रभावित भी होती है, तो दूसरी फसल किसान को नुकसान से बचा लेती है।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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