होम › आर्टिकल्स › गन्ने के साथ सरसों, आलू और मटर की …

गन्ने के साथ सरसों, आलू और मटर की सह-फसली खेती — कम लागत में डबल मुनाफा गाइड

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 1, 2026 • अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST • 10 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
गन्ने के साथ सरसों, आलू और मटर की सह-फसली खेती — कम लागत में डबल मुनाफा गाइड
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): शरदकालीन गन्ने की 4.5 फीट ट्रेंच बुवाई के बीच सरसों, आलू या मटर लगाकर किसान बिना किसी अतिरिक्त जमीन के पहले 90 दिनों में ₹40,000 से ₹80,000 का अतिरिक्त शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। जानिए संपूर्ण वैज्ञानिक फसल चक्र व खाद प्रबंधन।

उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती करने वाले छोटे, सीमांत और प्रगतिशील किसानों के लिए केवल गन्ने की एकल फसल पर निर्भर रहना अब आर्थिक दृष्टि से जोखिम भरा साबित हो रहा है। गन्ने की फसल खेत में तैयार होने में 12 से 14 महीने का लंबा समय लेती है, जिसके दौरान किसान को खाद, बीज, सिंचाई, कीटनाशक और निराई-गुड़ाई पर लगातार भारी पूंजी लगानी पड़ती है, जबकि आमदनी पेराई सत्र के अंत में ही मिल पाती है। इस आर्थिक अंतर (Cash Flow Gap) को पाटने और प्रति एकड़ आमदनी को दोगुना करने के लिए गन्ने के साथ सह-फसली खेती (Intercropping in Sugarcane) सबसे सटीक, आजमाया हुआ और अत्यधिक लाभकारी कृषि मॉडल बन चुका है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR, लखनऊ) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के विस्तृत शोध अध्ययनों के अनुसार, शरदकालीन गन्ने में 4 से 5 फीट की ट्रेंच विधि से बुवाई करने पर बीच की 70% खाली जमीन का सर्वोत्तम उपयोग सरसों, आलू, मटर, लहसुन या धनिया जैसी अल्पकालिक (60 से 90 दिन) फसलों को उगाकर किया जा सकता है। इससे गन्ने की मुख्य उपज पर बिना कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े प्रति एकड़ ₹40,000 से ₹80,000 का शुद्ध अतिरिक्त मुनाफा प्राप्त होता है।

1. गन्ने में सह-फसली खेती के 5 बड़े कृषि वैज्ञानिक लाभ

  1. शून्य अतिरिक्त भूमि व सिंचाई खर्च: सह-फसली फसलों के लिए अलग से खेत तैयार करने या अलग से सिंचाई लगाने की आवश्यकता नहीं होती। गन्ने को दिए जाने वाले पानी और खाद की नमी से ही सह-फसलें भरपूर पोषण प्राप्त कर लेती हैं।
  2. खरपतवारों का 60% प्राकृतिक दमन (Weed Suppression): जब गन्ने की दो कतारों के बीच सरसों, आलू या मटर की घनी पत्तियां फैल जाती हैं, तो खेत में धूप सीधे जमीन तक नहीं पहुंचती, जिससे मोथा, दूब और बथुआ जैसे हानिकारक खरपतवार अंकुरित ही नहीं हो पाते।
  3. भूमि की उर्वरा शक्ति व जैविक नाइट्रोजन में वृद्धि: जब किसान गन्ने के बीच मटर, चना या राजमा जैसी दलहनी फसलें लगाते हैं, तो उनकी जड़ों में मौजूद राइजोबियम बैक्टीरिया (Rhizobium Bacteria) वायुमंडलीय नाइट्रोजन को खींचकर मिट्टी में स्थिर (Fix) करते हैं, जिससे गन्ने को 20-30 किग्रा प्राकृतिक नाइट्रोजन मुफ्त मिलती है।
  4. 90 दिनों में शत-प्रतिशत लागत वापसी: गन्ने की कटाई से 9 महीने पहले ही नवंबर-दिसंबर में मटर, जनवरी में आलू और फरवरी में सरसों की बिक्री से किसान के हाथ में नकदी आ जाती है, जिससे वह गन्ने की अगली खादों व कीटनाशकों का खर्च बिना किसी बैंक लोन के उठा लेता है।
  5. कीटों व बीमारियों के प्राकृतिक फैलाव पर रोक: मिश्रित फसल चक्र से गन्ने के तना छेदक (Shoot Borer) और कंसुआ के कीटों का प्राकृतिक चक्र टूट जाता है।

2. गन्ने के साथ टॉप 4 सह-फसली मॉडल्स का संपूर्ण विवरण व टाइम-टेबल

(क) मॉडल 1: गन्ना + पूसा सरसों (Pusa Mustard 31/32)

  • बुवाई का उपयुक्त समय: 25 सितंबर से 20 अक्टूबर
  • कतारों की व्यवस्था: गन्ने की 4 फीट चौड़ी कतारों के बीच सरसों की ठीक 1 कतार लगाएं। पौधों से पौधे की दूरी 10-12 सेमी रखें।
  • सरसों की उन्नत किस्में: पूसा सरसों 31 (Pusa Mustard 31), पूसा महक, आरएच-725 या वरदान।
  • अवधि व पैदावार: 105 से 115 दिन में पककर तैयार। प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल सरसों की उपज।
  • आर्थिक गणित: 5.5 क्विंटल @ ₹6,000/क्विंटल = ₹33,000 अतिरिक्त आय।

(ख) मॉडल 2: गन्ना + अगेती आलू (Kufri Pukhraj / Surya)

  • बुवाई का उपयुक्त समय: 1 अक्टूबर से 25 अक्टूबर
  • कतारों की व्यवस्था: ट्रेंच नालियों के बीच उठी हुई 2 फीट चौड़ी मेड़ (Ridge) पर आलू की 1 या 2 कतारें 20 सेमी की दूरी पर लगाएं।
  • आलू की उन्नत किस्में: कुफरी पुखराज (Kufri Pukhraj), कुफरी ख्याति, कुफरी चिपसोना-1।
  • अवधि व पैदावार: 75 से 85 दिन में खुदाई। प्रति एकड़ 80 से 100 पैकेट (50 किग्रा प्रति पैकेट) यानी 40-50 क्विंटल आलू।
  • आर्थिक गणित: 90 पैकेट @ ₹600/पैकेट = ₹54,000 सकल आय (शुद्ध मुनाफा लगभग ₹35,000/एकड़)।

(ग) मॉडल 3: गन्ना + अगेती हरी मटर (GS-10 / AP-3)

  • बुवाई का उपयुक्त समय: 15 अक्टूबर से 5 नवंबर
  • कतारों की व्यवस्था: गन्ने की मेड़ों पर मटर की 2 कतारें लगाएं। बीज की गहराई 3-4 सेमी रखें।
  • मटर की उन्नत किस्में: एडवांटा जीएस-10 (Advanta GS-10), आजाद मटर-3, काशी नंदिनी।
  • अवधि व पैदावार: 60 से 70 दिन में पहली तुड़ाई। प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल हरी फलियां।
  • आर्थिक गणित: 25 क्विंटल @ ₹30/किग्रा = ₹75,000 (शुद्ध मुनाफा लगभग ₹50,000/एकड़)।

(घ) मॉडल 4: गन्ना + लहसुन व प्याज (Garlic / Onion Intercropping)

  • बुवाई का उपयुक्त समय: अक्टूबर अंत से नवंबर प्रथम सप्ताह
  • उन्नत किस्में: यमुना सफेद (G-1), भीमा डार्क रेड (प्याज)।
  • अवधि व पैदावार: 120-130 दिन। प्रति एकड़ 25-30 क्विंटल लहसुन।
  • आर्थिक गणित: ₹80,000 से ₹1,00,000 तक का बंपर मुनाफा।

3. प्रति एकड़ सह-फसली खेती का तुलनात्मक लागत एवं मुनाफा चार्ट

सह-फसल का प्रकारफसल अवधि (दिन)बीज दर प्रति एकड़कुल अतिरिक्त लागत (₹)कुल उत्पादन प्रति एकड़बाजार भाव (अनुमानित)शुद्ध अतिरिक्त मुनाफा (₹)
पूसा सरसों 31110 दिन1.5 किग्रा₹3,5005.5 क्विंटल₹6,000 / क्विंटल₹29,500
कुफरी पुखराज आलू80 दिन8 क्विंटल (छोटा कंद)₹16,00090 पैकेट (45 क्विंटल)₹700 / पैकेट₹47,000
जीएस-10 हरी मटर65 दिन25 किग्रा₹6,50028 क्विंटल (फलियां)₹32 / किग्रा₹83,100
देसी लहसुन (G-1)135 दिन1.5 क्विंटल कली₹20,00025 क्विंटल₹5,000 / क्विंटल₹1,05,000
शरबती धनिया (पत्ती)45 दिन8 किग्रा₹2,00018 क्विंटल पत्ती₹20 / किग्रा₹34,000

4. पोषक तत्व व खाद प्रबंधन: गन्ने और सह-फसल को कब क्या दें?

सह-फसली खेती में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्य गन्ने की फसल और सह-फसल दोनों को संतुलित पोषक तत्व मिलें ताकि आपस में कोई प्रतिस्पर्धा न हो:

  1. बुवाई के समय बेस डोज: गन्ने की नाली में 1.5 बोरी DAP + 1 बोरी MOP + 5 किग्रा जिंक सल्फेट डालें।
  2. सह-फसल की विशेष खाद:
    • सरसों के लिए: 10 किग्रा सल्फर 90% बुवाई के समय अवश्य दें, जिससे तेल की मात्रा 42% तक बढ़ती है।
    • आलू के लिए: 1 बोरी सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और 20 किग्रा अतिरिक्त पोटाश मेड़ पर डालें।
    • मटर के लिए: राइजोबियम कल्चर (Rhizobium Culture 200 ग्राम) से बीज उपचारित करें, यूरिया की बहुत कम (15 किग्रा) आवश्यकता होती है।
  3. सह-फसल कटाई के बाद गन्ने की टॉप ड्रेसिंग: जैसे ही जनवरी-फरवरी में आलू या मटर की फसल कट जाए, खेत की गहरी गुड़ाई करके प्रति एकड़ 1 बोरी यूरिया + 500 मिली नैनो डीएपी का स्प्रे करें, जिससे गन्ने के कल्ले तेजी से फूटते हैं।

5. किसान सह-फसली खेती में क्या 5 बड़ी गलतियां करते हैं?

  1. गन्ने की पारंपरिक संकरी कतार (2.5 फीट) में सह-फसल लगाना: कम दूरी में सह-फसल लगाने से दोनों फसलें दब जाती हैं और गन्ने की पैदावार 40% घट जाती है। हमेशा 4 से 5 फीट ट्रेंच दूरी रखें।
  2. लंबी अवधि वाली फसलों (जैसे गेहूं) का चयन करना: गन्ने के बीच गेहूं बोने से मार्च-अप्रैल तक खेत बंधा रहता है और गन्ने के कल्ले बिल्कुल नहीं निकल पाते।
  3. अत्यधिक नाइट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग: बहुत ज्यादा यूरिया डालने से सरसों या मटर की वानस्पतिक बढ़वार बहुत ज्यादा हो जाती है और वे गन्ने पर लटक जाती हैं।
  4. कीटनाशक छिड़काव में लापरवाही: सरसों पर माहू (Aphid) का प्रकोप होने पर डाइमेथोएट का स्प्रे केवल सरसों पर करें, गन्ने पर अनावश्यक केमिकल न डालें।
  5. सह-फसल कटाई में देरी करना: पकने के तुरंत बाद फसल की कटाई कर लें ताकि फरवरी के बढ़ते तापमान में गन्ने को पूरी धूप मिल सके।

6. उत्तर प्रदेश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में सह-फसली मॉडल्स का चयन

क्षेत्र का नामप्रमुख जनपदसर्वोत्तम सह-फसली मॉडलअपेक्षित अतिरिक्त आय (₹/एकड़)
पश्चिमी उत्तर प्रदेशमुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बागपतगन्ना + पूसा सरसों 31 / कुफरी पुखराज आलू₹45,000 - ₹60,000
रुहेलखंड क्षेत्रबिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुरगन्ना + मेंथा (पिपरमिंट) / अगेती मटर₹40,000 - ₹55,000
तराई क्षेत्रलखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइचगन्ना + तोरिया (लाही) / मसूर₹35,000 - ₹50,000
मध्य उत्तर प्रदेशसीतापुर, हरदोई, लखीमपुर, उन्नावगन्ना + अगेती आलू / लहसुन₹50,000 - ₹75,000
पूर्वी उत्तर प्रदेशकुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बस्तीगन्ना + राजमा / धनिया / फ्रेंच बीन₹40,000 - ₹65,000

7. सह-फसली खेती में सिंचाई और ड्रिप प्रणाली का वैज्ञानिक समन्वय

गन्ने में सह-फसली खेती के दौरान पानी लगाने का सबसे संवेदनशील समय सह-फसल के अंकुरण और फल बनने की अवस्था होती है। ट्रेंच नाली में केवल 3-4 इंच पानी लगाने से नालियों के दोनों तरफ की मेड़ों पर कैपिलरी एक्शन (केशिका क्रिया) से पर्याप्त नमी पहुंच जाती है, जिससे आलू के कंद या मटर की जड़ों में पानी भरे बिना सर्वोत्तम फुलाव मिलता है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Top 10 FAQs)

क्या गन्ने के बीच सह-फसली खेती से गन्ने की पैदावार घटती है?

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यदि कतार से कतार की दूरी 4 से 5 फीट रखी जाए तो गन्ने की उपज घटने के बजाय 10 से 15% बढ़ती है क्योंकि खेत की निराई-गुड़ाई और पोषण बेहतर होता है।

क्या गन्ने के साथ गेहूं की सह-फसली खेती की जा सकती है?

कृषि वैज्ञानिक गन्ने में गेहूं की सह-फसली खेती की सिफारिश नहीं करते क्योंकि गेहूं की जड़ें बहुत घनी होती हैं जो गन्ने के फुटाव को पूरी तरह दबा देती हैं।

सह-फसली खेती के लिए सबसे उत्तम सिंचाई विधि कौन सी है?

ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) सबसे उत्तम है क्योंकि यह गन्ने की जड़ और सह-फसल की मेड़ दोनों पर समान रूप से नमी बनाए रखती है।

सरसों की कटाई के बाद गन्ने में क्या प्रबंधन करें?

सरसों की कटाई के तुरंत बाद खेत में रोटावेटर चलाकर अवशेषों को मिट्टी में मिला दें, 1 बोरी यूरिया डालें और हल्की सिंचाई करें।

क्या सह-फसली खेती पर कृषि विभाग से कोई अनुदान मिलता है?

हां, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) और दलहन-तिलहन प्रोत्साहन योजना के तहत सरसों व मटर के प्रमाणित मिनीकिट बीज निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

क्या गन्ने के साथ मेंथा (पिपरमिंट) लगाया जा सकता है?

बसंतकालीन गन्ने (मार्च बुवाई) में मेंथा की सह-फसली खेती पश्चिमी यूपी (मुरादाबाद, संभल, रामपुर) में बहुत सफल है, जिससे 60 दिन में मेंथा ऑयल का अतिरिक्त लाभ मिलता है।

आलू की खुदाई के समय गन्ने की जड़ों को नुकसान से कैसे बचाएं?

आलू की बुवाई नाली के बजाय मेड़ पर करें ताकि आलू डिगर या खुरपी से आलू निकालते समय गन्ने की निचली जड़ें सुरक्षित रहें।

क्या जैविक विधि से सह-फसली खेती संभव है?

बिल्कुल, प्रेसमड खाद, जीवामृत और ट्राइकोडर्मा के प्रयोग से बिना किसी रासायनिक उर्वरक के प्रीमियम ऑर्गेनिक मटर और आलू उगाए जा सकते हैं।

सह-फसली में खरपतवार नाशक (Weedicide) का चयन कैसे करें?

गन्ना + सरसों में केवल पेंडीमेथालिन (Pendimethalin 30% EC) का प्री-इमर्जेंस स्प्रे करें। एट्राजिन का प्रयोग न करें क्योंकि यह सरसों को जला देता है।

1 एकड़ से गन्ना और सह-फसल मिलाकर कुल कितनी वार्षिक आय हो सकती है?

600 क्विंटल गन्ना (@ ₹370 = ₹2,22,000) + मटर/आलू (₹50,000) = ₹2,72,000 प्रति एकड़ सकल आय, जिसमें शुद्ध बचत ₹1,80,000 से ₹2,00,000 तक होती है।


📞 महत्वपूर्ण हेल्पलाइन और संपर्क सूत्र

  • उत्तर प्रदेश गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-121-3203
  • गन्ना आयुक्त मुख्यालय लखनऊ कंट्रोल रूम: 0522-2236403
  • ई-गन्ना ऐप एवं सट्टा पोर्टल: enquiry.caneup.in
  • विभागीय पोर्टल: upcane.gov.in

8. सह-फसली खेती में खरपतवार नियंत्रण एवं कीटनाशक प्रबंधन के कड़े नियम

सह-फसली खेती में किसान भाइयों को यह विशेष सावधानी रखनी होती है कि गन्ने में डाला जाने वाला कोई भी खरपतवारनाशक (Herbicide) मुख्य सह-फसल (सरसों, आलू या मटर) को नुकसान न पहुंचाए:

(क) खरपतवारनाशक चयन में आवश्यक सावधानियां:

  • सरसों के साथ: गन्ने में एट्राजिन (Atrazine) का छिड़काव कभी न करें, क्योंकि एट्राजिन सरसों की फसल को पूरी तरह सुखा देता है। इसके स्थान पर बुवाई के तुरंत बाद (48 घंटे के भीतर) पेंडीमेथालिन (Pendimethalin 30% EC) 1.0 से 1.25 लीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें।
  • आलू के साथ: आलू की बुवाई और मिट्टी चढ़ाने के बाद मेट्रिब्यूजिन (Metribuzin 70% WP) 100 से 150 ग्राम प्रति एकड़ का प्री-इमर्जेंस स्प्रे किया जा सकता है, जो दोनों फसलों को सुरक्षित रखता है।
  • मटर के साथ: केवल पेंडीमेथालिन का ही प्रयोग करें और अंकुरण के बाद हाथ से खुरपी द्वारा एक बार हल्की निराई-गुड़ाई अवश्य कराएं।

(ख) शुद्ध लाभ का 1 एकड़ विस्तृत बहीखाता (Economics of Intercropping):

मद / फसल विवरणलागत (₹/एकड़)कुल उत्पादनसकल आय (Gross Revenue)शुद्ध लाभ (Net Profit)
गन्ना (ट्रेंच शरदकालीन)₹35,000550 क्विंटल @ ₹370/क्विंटल₹2,03,500₹1,68,500
सह-फसल (पीली सरसों - 31)₹6,0006.5 क्विंटल @ ₹6,200/क्विंटल₹40,300₹34,300
संयुक्त परिणाम (Combined Total)₹41,000—₹2,43,800₹2,02,800

इस प्रकार सह-फसली खेती अपनाने से किसान का प्रति एकड़ शुद्ध लाभ ₹2 लाख के पार पहुंच जाता है और सरसों की बिक्री से प्राप्त नकद आय से गन्ने की खाद और सिंचाई की पूरी लागत पहले ही निकल आती है।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में