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गन्ना-सरसों सह-फसली खेती गाइड 2026: गन्ने के साथ सरसों उगाकर प्रति एकड़ ₹80,000 अतिरिक्त शुद्ध मुनाफा

Randhir Patil Randhir Patil Sep 10, 2026 9 min read
गन्ना-सरसों सह-फसली खेती गाइड 2026: गन्ने के साथ सरसों उगाकर प्रति एकड़ ₹80,000 अतिरिक्त शुद्ध मुनाफा
अंतिम अपडेट: September 10, 2026 8:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

भारतीय कृषि और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के कृषि अर्थशास्त्र में जमीन की जोत का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है। आज राज्य के 80% से अधिक गन्ना किसानों के पास 1 से 2 एकड़ से भी कम कृषि भूमि है। ऐसे में यदि कोई किसान अपनी जमीन पर केवल गन्ने की एकल फसल (Monocropping) बोता है, तो उसे पूरे 12 से 14 महीने तक अपनी फसल के बिकने और चीनी मिल से भुगतान आने का इंतजार करना पड़ता है। इस लंबी अवधि के दौरान घर के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए अक्सर किसानों को महंगे ब्याज पर साहूकारों या बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है।

इस गंभीर आर्थिक चक्रव्यूह को तोड़ने का सबसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान है: शरदकालीन गन्ना + सरसों सह-फसली खेती (Autumn Sugarcane & Mustard Intercropping)। कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के अनुभवों से यह प्रमाणित हो चुका है कि यदि गन्ने को 4 से 4.5 फीट की दूरी पर ट्रेंच विधि से बोया जाए, तो दोनों पंक्तियों के बीच की खाली जमीन पर सरसों की एक या दो कतारें लगाकर किसान मात्र 100 से 110 दिनों में बिना किसी अतिरिक्त खेत या बड़े खर्च के प्रति एकड़ 6 से 8 क्विंटल सरसों पैदा कर सकता है।

वर्तमान में सरसों का बाजार भाव ₹5,500 से ₹6,500 प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि जनवरी-फरवरी के महीने में, जब गन्ने की फसल बढ़वार के शुरुआती दौर में होगी, किसान के हाथ में ₹35,000 से ₹48,000 की नकद आमदनी आ जाएगी, जिससे उसकी गन्ने की पूरी खाद, बीज और सिंचाई की लागत शून्य (Zero Net Cost) हो जाएगी।

इस 2200+ शब्दों के विस्तृत कृषि-आर्थिक विश्लेषण में हम गन्ना-सरसों सह-फसली मॉडल के वैज्ञानिक सिद्धांतों, सही किस्मों के चुनाव, पंक्ति से पंक्ति की दूरी, जल व उर्वरक प्रबंधन और प्रति एकड़ आय-व्यय के नफे-नुकसान का पूरा ब्योरा प्रस्तुत कर रहे हैं।


सह-फसली खेती क्यों काम करती है? (The Symbiotic Science)

बहुत से किसानों के मन में यह आशंका होती है कि “यदि हम गन्ने के बीच में सरसों बोएंगे, तो क्या सरसों गन्ने की खाद-पानी खींचकर गन्ने की बढ़वार को कमजोर नहीं कर देगी?”

कृषि विज्ञान के अनुसार यह धारणा पूरी तरह गलत है, बशर्ते आप सही तकनीकों का पालन करें:

  1. भिन्न जड़ प्रणाली (Root Architecture): गन्ने की शुरुआती जड़ें उथली (शुरुआती 10-15 सेमी) होती हैं, जबकि सरसों की मूसला जड़ (Tap Root) जमीन में 40 से 60 सेमी गहरी जाती है। दोनों फसलें मिट्टी की अलग-अलग गहराइयों से पोषक तत्व और नमी ग्रहण करती हैं, जिससे कोई आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं होती।
  2. धूप व स्थान का आदर्श उपयोग (Canopy Complementarity): सितंबर-अक्टूबर में बोया गया शरदकालीन गन्ना शुरुआती 90 दिनों तक बहुत धीमी गति से बढ़ता है और जमीन पर कोई छाया नहीं बनाता। सरसों इस खाली समय और धूप का पूरा उपयोग करके 100 दिन में पककर कट जाती है।
  3. जैविक खाद का स्वतः निर्माण: सरसों की कटाई के बाद उसकी पत्तियां और जड़ें खेत की मिट्टी में सड़कर प्रचुर मात्रा में जैविक कार्बन और बायोमास जोड़ती हैं, जिससे गन्ने की पेड़ी और पौधे में कल्ले फूटने की गति दोगुनी हो जाती है।
  4. कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा: सरसों के पीले फूल गन्ने के प्राकृतिक मित्र कीटों (परभक्षी ततैया और लेडीबर्ड बीटल) को आकर्षित करते हैं, जो गन्ने के शुरुआती तना छेदक (Early Shoot Borer) के अंडों और सूंडियों को प्राकृतिक रूप से नष्ट कर देते हैं।

उपयुक्त प्रजातियों का चयन (Varietal Selection)

सह-फसली खेती में सरसों की किस्म का चयन सबसे नाजुक कदम है। आपको कभी भी बहुत ज्यादा फैलने वाली या 140 दिन वाली देर से पकने वाली सरसों नहीं बोनी चाहिए, अन्यथा वह फरवरी में गन्ने को दबा लेगी।

फसलअनुशंसित प्रजातिविशेषताएं व परिपक्वता अवधिपैदावार प्रति एकड़
गन्ना (Sugarcane)Co-15023 अथवा Co-0118अगेती, सीधा खड़ा रहने वाला तना, उच्च शर्करा450 - 500 क्विंटल
पीली सरसों (Yellow Mustard)पूसा सरसों 30 / पीताम्बरी / एनआरसीएचबी 101100-105 दिन में पकने वाली, मध्यम फैलाव, उच्च तेल (42%)6 - 8 क्विंटल
काली/राई (Black Mustard)गिरिराज / आरएच-725 / पूसा बोल्ड110-115 दिन, पाले के प्रति सहनशील, मोटा दाना7 - 9 क्विंटल

विशेष टिप: पीली सरसों (जैसे पीताम्बरी) सह-फसली के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है क्योंकि इसके पौधे सीधे ऊपर बढ़ते हैं, गन्ने की नाली पर नहीं झुकते और इसका तेल बाजार में प्रीमियम भाव पर बिकता है।


ट्रेंच बुवाई और सरसों की कतारों का लेआउट (Field Layout)

सह-फसली मॉडल की सफलता सही ज्यामितीय लेआउट (Geometric Spacing) पर निर्भर करती है:

[मेड़ - 1.5 फीट] ─── (सरसों की पंक्ति 1) ─── [सरसों की पंक्ति 2] ─── [मेड़]
        │                                                              │
   [गन्ने की नाली - 1 फीट गहरी]                             [गन्ने की नाली - 1 फीट गहरी]
   (Co-15023 बुवाई तल में)                                  (Co-15023 बुवाई तल में)
        ◄─────────────────────── 4.5 फीट ────────────────────────►

लेआउट के मुख्य नियम

  • गन्ने की नाली से नाली की दूरी: ठीक 4.5 फीट (135 सेमी)।
  • गन्ने की बुवाई: नाली के तल में 25 सेमी गहराई पर।
  • सरसों की बुवाई: दो नालियों के बीच उठी हुई मेड़ (Ridge) के ऊपर। मेड़ पर सरसों की 1 या 2 कतारें लगाएं।
  • सरसों से सरसों की दूरी: यदि 2 कतारें लगा रहे हैं तो कतार से कतार 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 12 सेमी रखें।

बुवाई की समयसारिणी और बीज दर

  • बुवाई का आदर्श समय: 25 सितंबर से 20 अक्टूबर।
  • गन्ने की बीज दर: ट्रेंच विधि से 20 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ (दो आंख के शोधित टुकड़े)।
  • सरसों की बीज दर: केवल 1.5 किलोग्राम प्रति एकड़। (सरसों का बीज बहुत बारीक होता है, इसलिए इसे 5 किलो बारीक सूखी मिट्टी या बालू में मिलाकर मेड़ पर 1 सेमी गहराई पर बोएं)।

संतुलित खाद एवं जल प्रबंधन (Fertilizer & Irrigation)

सह-फसली खेती में गन्ने और सरसों दोनों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक है:

बेसल डोज (बुवाई के समय)

  • गन्ने की नाली में: 1 बोरी डीएपी (50 किग्रा) + 1 बोरी पोटाश (50 किग्रा) + 10 किग्रा जिंक सल्फेट।
  • सरसों की मेड़ पर: 25 किग्रा सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) + 10 किग्रा सल्फर पाउडर। (सल्फर से सरसों में तेल की मात्रा 3% तक बढ़ जाती है)।

सिंचाई का वैज्ञानिक फॉर्मूला

  • गन्ने की बुवाई और सरसों की बोआई के तुरंत बाद नाली में हल्का पानी लगाएं। पानी केवल नाली के तल में रहना चाहिए, मेड़ पर रखी सरसों को केवल नीचे से रिसने वाली नमी (Seepage Moisture) मिलनी चाहिए।
  • दूसरी सिंचाई 35 दिन बाद करें जब सरसों में फूल आने शुरू हों।
  • तीसरी सिंचाई दाना भरते समय (65-70 दिन) करें।

प्रति एकड़ सम्पूर्ण आर्थिक विश्लेषण (Balance Sheet)

नीचे दिए गए आंकड़े प्रगतिशील कृषकों के वास्तविक व्यावहारिक परिणामों पर आधारित हैं:

अतिरिक्त लागत (Additional Investment for Mustard)

  • सरसों का बीज (1.5 किग्रा हाइब्रिड): ₹600
  • अतिरिक्त फॉस्फेट व सल्फर: ₹1,200
  • सरसों कटाई व मड़ाई (Threshing): ₹3,500
  • कुल अतिरिक्त खर्च: ₹5,300

अतिरिक्त सकल आय (Gross Income from Mustard)

  • सरसों की कुल पैदावार: 7 क्विंटल प्रति एकड़
  • न्यूनतम बाजार भाव: ₹6,000 प्रति क्विंटल
  • सरसों से कुल प्राप्त आय: $7 imes 6000 = ₹42,000$
  • सरसों का भूसा (चारे/ईंधन हेतु): ₹2,500
  • सकल आय: ₹44,500

शुद्ध लाभ (Net Profit from Intercrop)

$$ ext{अतिरिक्त शुद्ध लाभ} = ₹44,500 - ₹5,300 = \mathbf{₹39,200 ext{ प्रति एकड़}}$$

यदि किसान के पास 2 एकड़ जमीन है, तो वह मात्र 100 दिनों में गन्ने को बिना कोई नुकसान पहुंचाए लगभग ₹80,000 की शुद्ध नकद बचत अपने बैंक खाते में जमा कर सकता है। इसके बाद गन्ने की मुख्य फसल से 450 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से ₹1,66,500 का सकल भुगतान अलग से प्राप्त होगा।


अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या सरसों की कटाई के बाद गन्ने की बढ़वार पर कोई असर पड़ता है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। जनवरी के अंत में जब सरसों कटती है, उस समय गन्ने में कल्ले फूटने का मुख्य चरण शुरू होता है। सरसों कटते ही गन्ने पर पहली मिट्टी चढ़ाएं और 35 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालकर पानी दें, गन्ना अभूतपूर्व गति से बढ़ेगा।

Q2. क्या सरसों में लगने वाले माहू (Aphids) से गन्ने को नुकसान होता है?

उत्तर: नहीं, सरसों का माहू केवल क्रूसीफेरी परिवार के पौधों पर रहता है, वह गन्ने (घास कुल) को कभी नुकसान नहीं पहुंचाता। माहू नियंत्रण के लिए सरसों पर डाईमेथोएट (Rogor) 1.5 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

Q3. क्या सरसों के स्थान पर आलू या लहसुन भी बोया जा सकता है?

उत्तर: हां, आलू, लहसुन, धनिया या मटर भी गन्ने के साथ उत्कृष्ट सह-फसलें हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई और मजदूरी की पर्याप्त व्यवस्था है, वे आलू लगाकर ₹60,000 तक अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं।


निष्कर्ष

खेती में आज वही किसान सफल है जो प्रति इकाई क्षेत्रफल और प्रति बूंद पानी से अधिकतम उत्पादन लेने की कला जानता है। पारंपरिक एकफसली पद्धति के बजाय गन्ना-सरसों सह-फसली खेती अपनाना आर्थिक समझदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उत्तम उदाहरण है। इस शरद ऋतु में अपनी जमीन पर यह मॉडल अपनाएं, caneup पर अपने सट्टे को मजबूत करें और अपनी कृषि आय को एक नए मुकाम पर पहुंचाएं।


सह-फसली खेती में वैज्ञानिक फसल सुरक्षा एवं खरपतवार प्रबंधन

गन्ने और सरसों दोनों की प्रकृति पूरी तरह भिन्न है—गन्ना एकबीजपत्री (Monocot) घास कुल का पौधा है जबकि सरसों द्विबीजपत्री (Dicot) तिलहन फसल है। इसलिए सह-फसली खेती में खरपतवारनाशी रसायनों का चयन अत्यधिक सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए:

1. खरपतवार नियंत्रण की सावधानी

  • रासायनिक चेतावनी: गन्ने की एकल फसल में किसान आमतौर पर एट्राजीन (Atrazine) या 2,4-डी का छिड़काव करते हैं। सावधान! यदि गन्ने के साथ सरसों बोई गई है, तो एट्राजीन या 2,4-डी का एक भी कतरा सरसों के अंकुरण को पूरी तरह जलाकर राख कर देगा।
  • सुरक्षित शाकनाशी: बुवाई के तुरंत बाद और अंकुरण से पहले (Pre-emergence) केवल पेंडीमेथालिन 30% ईसी (Stomp) 1.0 से 1.25 लीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर समान रूप से स्प्रे करें। यह रसायन गन्ने और सरसों दोनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और सभी मौसमी खरपतवारों को 30 से 40 दिनों तक जमने नहीं देता।

2. सरसों की प्रमुख कीट व्याधियां और उनका प्रबंधन

  • माहू / चेपा (Mustard Aphid): दिसंबर के अंत और जनवरी में जब बादल छाए रहते हैं, तो सरसों के फूलों पर हरे-काले माहू का हमला होता है।
    • उपचार: डाईमेथोएट 30% ईसी 350 मिली अथवा थायमेथोक्सम 25% डब्ल्यूजी 80 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। इसका गन्ने पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
  • सफेद रतुआ (White Rust): सरसों की पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफोले बनना।
    • उपचार: मैंकोजेब 75% डब्ल्यूपी (Dithane M-45) 500 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव करें।

उत्तर भारत के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में सह-फसली केस स्टडी

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ द्वारा पश्चिमी यूपी के मेरठ, बिजनौर और सहारनपुर में 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कराए गए सह-फसली प्रदर्शनों के आधिकारिक परिणाम नीचे दिए गए हैं:

उत्पादन एवं वित्तीय परिणाम (प्रति हेक्टेयर आधार पर)

  • एकल गन्ना (Monoculture): औसत उत्पादन 840 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, कुल सकल आय ₹3,10,800, शुद्ध बचत ₹1,85,000।
  • गन्ना + पीली सरसों (Intercrop): गन्ने का उत्पादन 865 क्विंटल (ट्रेंच विधि के कारण 25 क्विंटल अधिक!) + सरसों का उत्पादन 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
  • सरसों से अतिरिक्त आय: $18 imes ₹6,200 = ₹1,11,600$।
  • कुल शुद्ध बचत: ₹2,82,000 प्रति हेक्टेयर (अर्थात एकल गन्ने की तुलना में ₹97,000 प्रति हेक्टेयर का शुद्ध अतिरिक्त लाभ)।

यह स्पष्ट सिद्ध करता है कि सह-फसली खेती अपनाने से गन्ने के उत्पादन में रत्ती भर भी कमी नहीं आती, बल्कि ट्रेंच विधि में पौधों को मिलने वाली अतिरिक्त हवा और धूप से गन्ने का वजन और बढ़ जाता है।

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Randhir Patil
लेखक एवं मुख्य संपादक

Randhir Patil

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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