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गन्ना सट्टा में नाम, बैंक खाता या वारिस कैसे बदलें — जरूरी दस्तावेज व पूरी प्रक्रिया

Randhir Patil Randhir Patil Sep 1, 2026 अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST 3 min read
गन्ना सट्टा में नाम, बैंक खाता या वारिस कैसे बदलें — जरूरी दस्तावेज व पूरी प्रक्रिया
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

इस आर्टिकल में: CaneUp पर इस पोस्ट में गन्ना किसानों के लिए उपयोगी जानकारी दी गई है — गन्ना पर्ची कैलेंडर, MSP/FRP रेट, भुगतान स्थिति, सरकारी योजनाएं, eGanna App, खेती के टिप्स, और बिज़नेस आइडियाज। यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary): यदि परिवार के मुख्य सट्टा धारक का निधन हो गया है या आप बैंक खाता और आईएफएससी कोड बदलना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग के नियमों के अनुसार 15 सितंबर से पहले वरासत दर्ज कराकर सट्टा अपने नाम करा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में हजारों किसान परिवारों में जमीन के बंटवारे या बुजुर्ग सट्टा धारक के देहांत के बाद सट्टे का नामांतरण (Warasat / Transfer) न होने के कारण पेराई सत्र में गन्ना पर्चियां रुक जाती हैं और बैंक भुगतान अटक जाता है।

गन्ना विकास विभाग ने सट्टा नामांतरण और बैंक खाता संशोधन की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बना दिया है। आइए जानते हैं कि सट्टा अपने नाम कैसे ट्रांसफर कराएं।


Cane Commissioner Uttar Pradesh
Cane Commissioner Uttar Pradesh
@Canecommission1
गन्ना सट्टा नामांतरण (वरासत) व बैंक खाता संशोधन की प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बना दिया गया है। किसान भाई 15 सितंबर तक अपनी समिति में आवेदन कर मृतक पूर्वज का सट्टा अपने नाम दर्ज करा सकते हैं। #Warasat #SattaSanshodhan

1. वरासत (मृत्यु के बाद सट्टा ट्रांसफर) कराने के नियम

यदि सट्टा धारक (पिता/दादा) का निधन हो गया है:

  • प्राथमिकता: कानूनी वारिस (पुत्र, पत्नी या नामांकित वारिस) के नाम पर सट्टा ट्रांसफर किया जाता है।
  • समयसीमा: 1 से 15 सितंबर के वार्षिक सट्टा आपत्ति अभियान के दौरान आवेदन करना सबसे उपयुक्त होता है।
  • बेसिक कोटे का लाभ: मृतक किसान का पूरा संचित बेसिक कोटा नए वारिस के सट्टे में स्वतः स्थानांतरित हो जाता है।

2. सट्टा नाम ट्रांसफर के लिए आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट

  1. राजस्व न्यायालय / तहसील द्वारा जारी अद्यतन वारिसान खतौनी (प्रमाणित प्रति)
  2. मृतक सट्टा धारक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
  3. सभी कानूनी वारिसों का शपथ पत्र (Affidavit) कि सट्टा आवेदक के नाम दर्ज करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
  4. नए आवेदक का आधार कार्ड और पैन कार्ड
  5. नए आवेदक के बैंक खाते की पासबुक या कैंसिल चेक (NPCI एक्टिवेट)।
  6. पुराना सट्टा पासबुक या किसान कोड विवरण।

3. सट्टे में बैंक खाता और IFSC कोड बदलने की विधि

यदि आपका पुराना बैंक बंद हो गया है या विलय हो गया है:

  • समिति में प्रपत्र-4 भरें: अपनी सहकारी गन्ना समिति के काउंटर पर ‘बैंक खाता संशोधन प्रपत्र’ प्राप्त करें।
  • पासबुक संलग्न करें: नए राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक की पासबुक की प्रति लगाएं जिसमें आईएफएससी कोड स्पष्ट हो।
  • आधार सीडिंग अनिवार्य: ध्यान रखें कि नया बैंक खाता आधार से लिंक (NPCI Mapped) होना चाहिए, अन्यथा डीबीटी भुगतान वापस लौट जाएगा।
  • 24 घंटे में पोर्टल पर अपडेट: समिति सचिव द्वारा सत्यापन के बाद enquiry.caneup.in पर नया खाता नंबर प्रदर्शित होने लगेगा।

4. संयुक्त सट्टे का विभाजन (Partition of Joint Satta)

यदि दो भाइयों का सट्टा संयुक्त था और अब वे अपनी-अपनी पर्चियां अलग चाहते हैं:

  • दोनों भाइयों के हिस्से की अलग-अलग खतौनी लगाएं।
  • कुल बेसिक कोटे का भूमि हिस्सेदारी के अनुपात में 50-50% विभाजन कर दिया जाएगा और दोनों को अलग-अलग नया 4 अंकों का किसान कोड आवंटित होगा।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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