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गन्ना सट्टा प्री-कैलेंडर में रकबा व अगेती प्रजाति संशोधन: अंतिम 5 दिन में आपत्ति दर्ज करने का तरीका

Randhir Patil Randhir Patil Sep 10, 2026 10 min read
गन्ना सट्टा प्री-कैलेंडर में रकबा व अगेती प्रजाति संशोधन: अंतिम 5 दिन में आपत्ति दर्ज करने का तरीका
अंतिम अपडेट: September 10, 2026 8:06 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास विभाग द्वारा पेराई सत्र 2026-27 के लिए जारी की गई समयसारिणी के अनुसार वर्तमान में राज्य की सभी 168 सहकारी गन्ना विकास समितियों में सट्टा प्री-कैलेंडर प्रदर्शन एवं आपत्ति निस्तारण मेला अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। 15 सितंबर 2026 की समयसीमा समाप्त होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष बचे हैं। यदि इस निर्धारित अवधि के भीतर किसी किसान ने अपने सट्टे में दर्ज गलतियों—जैसे सर्वे रकबे में कमी, अगेती प्रजाति का सामान्य में दर्ज होना, गलत गाटा संख्या या बैंक खाते की त्रुटि—को नहीं सुधरवाया, तो आगामी पेराई सत्र में उसे भारी आर्थिक नुकसान और पर्चियों की भारी कटौती का सामना करना पड़ेगा।

डिजिटल क्रांति के इस दौर में गन्ना विभाग ने caneup और cane up.in (विशेषकर enquiry.caneup.in) पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक किसान का प्री-कैलेंडर सार्वजनिक कर दिया है। पहले किसानों को अपने आंकड़े देखने के लिए गांव के चौपाल पर लगने वाले सट्टा प्रदर्शन रजिस्टर या समिति के नोटिस बोर्ड पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां अक्सर पन्ने फटे होने या स्याही फैल जाने के कारण सही जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब किसान अपने स्मार्टफोन पर घर बैठे यह देख सकता है कि विभाग के जीपीएस सर्वेयर ने उसके खेत का कितना रकबा नापा है और कंप्यूटर में कौन-सा विवरण दर्ज हुआ है।

इस 2200+ शब्दों की विस्तृत मार्गदर्शिका में हम सट्टा प्री-कैलेंडर में होने वाली 6 सबसे गंभीर त्रुटियों, उनके कानूनी व वित्तीय दुष्परिणामों, enquiry.caneup.in पर गलतियों की पहचान करने की तकनीक, प्रपत्र 16 (आपत्ति पत्र) भरने की विधि और समिति स्तर पर 48 घंटे में सुधार कराने की संपूर्ण कार्ययोजना प्रस्तुत कर रहे हैं।


सट्टा प्री-कैलेंडर क्या है और इसमें जांचना क्या जरूरी है?

पेराई सत्र शुरू होने से पहले जब किसान का अंतिम 12 पखवाड़े का मुख्य गन्ना पर्ची कैलेंडर लॉक किया जाता है, उससे ठीक पहले विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला कच्चा मसौदा (Draft Calendar) ही प्री-कैलेंडर (Pre-Calendar) कहलाता है।

प्री-कैलेंडर का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसान अपने आंकड़ों का स्वयं ऑडिट कर ले। इसमें निम्नलिखित 5 प्रमुख बिंदुओं का शत-प्रतिशत सही होना जीवन-मरण का प्रश्न है:

  1. कुल सर्वेक्षित रकबा (Surveyed Acreage): आपके खेत का वास्तविक क्षेत्रफल और पोर्टल पर दर्ज क्षेत्रफल एक समान होना चाहिए।
  2. पौधा (Plant) व पेड़ी (Ratoon) का पृथक रकबा: यदि आपके पास 1 हेक्टेयर पेड़ी और 1 हेक्टेयर पौधा है, तो दोनों का अलग-अलग सही अंकन होना चाहिए।
  3. प्रजाति वर्गीकरण (Variety Classification): Co-15023, Co-0118, Co-98014 जैसी उच्च शर्करा वाली किस्में ‘अगेती’ (Early) कॉलम में ही होनी चाहिए।
  4. भूलेख खतौनी गाटा विवरण: खतौनी की खाता संख्या और गाटा संख्या का शुद्ध अंकन।
  5. सक्रिय मोबाइल नंबर व बैंक खाता: जिस पर एसएमएस पर्ची और डीबीटी भुगतान आना है।

2 सबसे घातक गलतियां जिनसे किसानों को भारी नुकसान होता है

गलती 1: अगेती प्रजाति का ‘सामान्य’ (General) में दर्ज होना

यह उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के साथ होने वाली सबसे आम लेकिन सबसे विनाशकारी लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) है।

  • नियम: चीनी मिलें जब अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह में पेराई का चक्का घुमाती हैं, तो पहले 20 से 30 दिनों तक केवल अगेती प्रजाति (Early Variety) की ही पर्चियां काटी जाती हैं।
  • नुकसान: यदि आपका Co-15023 गन्ना गलती से कंप्यूटर में ‘सामान्य’ दर्ज हो गया, तो आपका खेत पककर तैयार होने के बावजूद आपको नवंबर और दिसंबर के शुरुआती पखवाड़ों में एक भी पर्ची नहीं मिलेगी। आपकी पर्ची जनवरी या फरवरी में आएगी, तब तक खेत सूखने लगेगा और आप गेहूं की बुवाई से वंचित रह जाएंगे।

गलती 2: रकबा कम दर्ज होना (Area Under-reporting)

जीपीएस सर्वे के दौरान कई बार सिग्नल कमजोर होने, मेड़ पर पेड़ होने या सर्वेयर की लापरवाही से 1.20 हेक्टेयर के खेत को 0.80 हेक्टेयर दर्ज कर दिया जाता है।

  • नुकसान: बेसिक कोटे का 85% नियम सीधे कुल रकबे से बंधा होता है। यदि रकबा 30% कम दर्ज हुआ, तो आपकी कुल पर्चियों में से 30% पर्चियां कंप्यूटर एल्गोरिद्म द्वारा स्वतः काट दी जाएंगी।

enquiry.caneup.in पर प्री-कैलेंडर की विसंगति कैसे पकड़ें?

त्रुटि सुधार के लिए सबसे पहले आपको पोर्टल पर जाकर अपनी कमी का ठोस प्रमाण निकालना होगा:

स्टेप 1: enquiry.caneup.in खोलें ➔ कैप्चा दर्ज करें
स्टेप 2: जिला ➔ समिति ➔ गांव ➔ किसान कोड चुनें
स्टेप 3: मुख्य स्क्रीन पर 'प्री-कैलेंडर' (Pre-Calendar) टैब पर क्लिक करें
स्टेप 4: 'सर्वे डाटा' (Survey Data) टैब खोलें और प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल देखें
स्टेप 5: यदि कोई भी अंतर दिखे, तो उस स्क्रीन का स्क्रीनशॉट या प्रिंट ले लें

प्रपत्र 16: सट्टा आपत्ति प्रार्थना पत्र भरने का प्रारूप

यदि आपके आंकड़ों में कोई भी गलती पाई जाती है, तो आपको अपनी सहकारी गन्ना विकास समिति में प्रपत्र-16 (Objection Form) जमा करना होगा। नीचे इस आवेदन का मानक प्रारूप दिया जा रहा है:

सेवा में,
    श्रीमान ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक / सचिव महोदय,
    सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड ................................
    जिला: ...................................., उत्तर प्रदेश।

विषय: सट्टा प्री-कैलेंडर 2026-27 में रकबा / अगेती प्रजाति संशोधन हेतु आपत्ति पत्र।

महोदय,
    सविनय निवेदन है कि प्रार्थी .................................... पुत्र श्री .................................... 
    ग्राम ...................................., समिति कोड संख्या ................ व कृषक कोड संख्या ................ 
    का एक नियमित गन्ना आपूर्तिकर्ता सदस्य है।

    प्रार्थी द्वारा caneup.in पोर्टल पर अपने सट्टा प्री-कैलेंडर 2026-27 की जांच की गई, जिसमें निम्नलिखित 
    गंभीर विसंगति पाई गई है:
    1. वर्तमान में पोर्टल पर दर्ज विवरण: गाटा सं. ............ में रकबा ............ हेक्टेयर (सामान्य प्रजाति)।
    2. वास्तविक स्थलीय स्थिति: गाटा सं. ............ में वास्तविक रकबा ............ हेक्टेयर है और खेत में 
       उन्नत अगेती प्रजाति (Co-15023 / Co-0118) खड़ी है।

    अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि क्षेत्रीय गन्ना पर्यवेक्षक से स्थलीय पुनः सत्यापन (Re-survey) करवाकर 
    प्रार्थी के सट्टा प्री-कैलेंडर में यथोचित संशोधन कराने की कृपा करें, जिससे पेराई सत्र में पर्चियां बाधित न हों।

संलग्नक:
1. अद्यतन प्रमाणित खतौनी नकल
2. जीपीएस सर्वे पर्ची की छायाप्रति
3. आधार कार्ड व बैंक पासबुक प्रति

दिनांक: ........................                                           भवदीय,
                                                                   हस्ताक्षर / अंगूठा: ........................
                                                                   नाम: ....................................
                                                                   मो. नं.: ................................

समिति स्तर पर त्वरित निस्तारण के 4 चरण

  1. आपत्ति दर्ज कर रसीद प्राप्त करें: अपना प्रपत्र-16 समिति के आपत्ति पटल (Objection Counter) पर जमा करें और क्लर्क से मुहर लगी हुई डायरी नंबर (Receipt No.) अवश्य लें।
  2. पर्यवेक्षक को स्थलीय जांच का आदेश: सीडीआई द्वारा उसी दिन संबंधित सर्किल के गन्ना पर्यवेक्षक को पुनः नाप का निर्देश दिया जाता है।
  3. खेत पर भौतिक सत्यापन: पर्यवेक्षक आपके साथ खेत पर आकर जीपीएस मशीन से खेत के चारों कोनों का री-वेरिफिकेशन करेगा और फसल की प्रजाति की जांच कर अपनी ‘पंचनामा आख्या’ तैयार करेगा।
  4. डेटाबेस में ऑनलाइन सुधार: पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर समिति का कंप्यूटर ऑपरेटर ERP सॉफ्टवेयर में संशोधन दर्ज करेगा। 48 घंटे के भीतर आपके eGanna App पर संशोधित रकबा दिखने लगेगा।

15 सितंबर के बाद क्या होगा? (Post-Deadline Scenario)

कई किसान सोचते हैं कि “पेराई शुरू होने पर मिल गेट पर जाकर सुधार करवा लेंगे।” यह एक बहुत बड़ा भ्रम है।

  • 15 सितंबर की मध्यरात्रि को डेटा फ्रीजिंग: गन्ना आयुक्त के आदेशानुसार 15 सितंबर को पूरे उत्तर प्रदेश का सट्टा डेटाबेस लॉक (Freeze) कर दिया जाता है।
  • इसके बाद कंप्यूटर द्वारा 12 पखवाड़े का मुख्य पर्ची कैलेंडर जनरेट करने की स्वचालित प्रक्रिया शुरू हो जाती है। एक बार मुख्य कैलेंडर बनने के बाद किसी भी स्तर पर रकबा या प्रजाति बदलना तकनीकी रूप से असंभव हो जाता है। इसलिए बचे हुए 5 दिनों का एक-एक मिनट कीमती है।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या सट्टा आपत्ति दर्ज कराने के लिए कोई सरकारी शुल्क देना पड़ता है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। सट्टा प्री-कैलेंडर में त्रुटि सुधार और आपत्ति निस्तारण पूरी तरह से निःशुल्क है। यदि कोई कर्मचारी पैसे की मांग करता है तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत करें।

Q2. यदि खतौनी में मेरे पिता का नाम है जिनकी मृत्यु हो चुकी है, तो सट्टा मेरे नाम कैसे होगा?

उत्तर: राजस्व विभाग द्वारा जारी वरासत (Varasat) की प्रमाणित खतौनी नकल और मृत्यु प्रमाण पत्र लेकर समिति में जाएं। वारिसान के आधार पर सट्टा तुरंत आपके नाम हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

Q3. क्या मोबाइल नंबर में बदलाव के लिए भी 15 सितंबर अंतिम तारीख है?

उत्तर: मोबाइल नंबर और बैंक खाता सुधार पेराई सत्र के दौरान भी कराया जा सकता है, लेकिन एसएमएस पर्ची का निर्बाध लाभ पाने के लिए इसे 15 सितंबर से पहले सही करा लेना ही समझदारी है।

Q4. मेरी समिति काफी दूर है, क्या ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराने का कोई पोर्टल है?

उत्तर: हां, enquiry.caneup.in पर लॉगिन करके ‘Grievance / Complaint’ विकल्प के माध्यम से भी आप अपनी आपत्ति डिजिटल रूप में दर्ज कर सकते हैं, हालांकि समिति में व्यक्तिगत संपर्क से निस्तारण अधिक तीव्र गति से होता है।


निष्कर्ष

गन्ना किसानों की समृद्धि उनके जागरूक होने में निहित है। cane up.in और caneup पोर्टल ने आपको अपने अधिकारों की निगरानी का पारदर्शी औजार दिया है। आगामी 5 दिनों के भीतर अपने प्री-कैलेंडर की सघन जांच करें, किसी भी गलती पर तुरंत प्रपत्र-16 भरकर आपत्ति दर्ज कराएं और पेराई सत्र 2026-27 में अपनी प्रत्येक पर्ची और गन्ने के एक-एक दाने का सही मूल्य सुनिश्चित करें।


उत्तर प्रदेश की 168 गन्ना समितियों में सट्टा प्रदर्शन मेले का जमीनी सच

उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त कार्यालय के अनुसार हर साल लगभग 12 से 15 लाख आपत्तियां सट्टा प्री-कैलेंडर प्रदर्शन के दौरान दर्ज की जाती हैं। इनमें से 75% आपत्तियां अकेले रकबे की कमी और अगेती प्रजाति के गलत अंकन से संबंधित होती हैं:

1. जीपीएस सर्वेयर की सामान्य मानवीय चूकें

  • मेड़ों पर बड़े पेड़ और सिग्नल लॉस: जब सर्वेयर हैंडहेल्ड जीपीएस मशीन लेकर खेत की सीमाओं पर चलता है, तो घने पेड़ों या बादलों के कारण सैटेलाइट ट्रैकिंग 1 से 2 मीटर भटक जाती है। यदि 5 बीघे के खेत में 10 मीटर का भी अंतर आया, तो कंप्यूटर में 0.150 हेक्टेयर रकबा कम हो जाता है।
  • साझा चक (Joint Plots): दो सगे भाइयों के खेत के बीच यदि कोई पक्की मेड़ नहीं है, तो सर्वेयर अक्सर पूरे चक को एक भाई के नाम नाप देता है और दूसरे भाई का सट्टा शून्य रह जाता है। इस स्थिति में दोनों भाइयों को संयुक्त रूप से उपस्थित होकर मौके पर मेड़बंदी दिखानी होती है।

2. समिति कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा लिपिकीय विसंगतियां

  • सॉफ्टवेयर में प्रजाति कोड प्रविष्ट करते समय कोड ‘01’ (अगेती) के स्थान पर गलती से ‘02’ (सामान्य) दब जाने से पूरी फसल सामान्य श्रेणी में तब्दील हो जाती है।
  • चूंकि पेराई सत्र के शुरुआती 30 दिनों में केवल कोड ‘01’ वाले किसानों की पर्चियां काटी जाती हैं, इसलिए यह एक छोटी-सी टाइपिंग गलती किसान को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा देती है।

सट्टा शुद्धिकरण की 5 प्रमुख श्रेणियों का निवारण चार्ट

सट्टा विसंगति की प्रकृतिआवश्यक सहायक प्रमाणसक्षम प्राधिकारीनिस्तारण की निर्धारित अवधि
सर्वे रकबे में कमीखतौनी नकल + जीपीएस पुनः सर्वेक्षण आख्यागन्ना पर्यवेक्षक व सीडीआई3 कार्यदिवस
अगेती प्रजाति सुधार (Co-15023/0118)शोधित बीज खरीद रसीद अथवा स्थलीय निरीक्षणगन्ना पर्यवेक्षक48 घंटे
वारिसान / सट्टा नाम परिवर्तनमृत्यु प्रमाण पत्र + वरासत खतौनी + सहमति पत्रसमिति सचिव (Secretary)5 कार्यदिवस
बैंक खाता व IFSC सुधारबैंक पासबुक की स्व-प्रमाणित प्रति + कैंसिल चेकसमिति कंप्यूटर ऑपरेटरतुरंत (Real-time)
नया सट्टा / बेसिक कोटा आवंटननई खतौनी + घोषणा पत्र + समिति सदस्यता रसीदसट्टा निर्धारण उप-समिति7 कार्यदिवस

15 सितंबर तक आपत्तियों के सुरक्षित निस्तारण हेतु किसान गाइड

  • मूल दस्तावेजों की 2 प्रतियां रखें: अपनी खतौनी, आधार कार्ड और जीपीएस रसीद की फोटोकॉपी कराकर एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखें जिस पर समिति बाबू के हस्ताक्षर और प्राप्ति मुहर लगी हो।
  • ऑनलाइन स्टेटस री-चेक करें: समिति में फॉर्म जमा करने के 48 घंटे बाद दोबारा enquiry.caneup.in खोलें। यदि आपके सट्टे में सुधार नहीं हुआ है, तो सीधे ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से व्यक्तिगत भेंट करें।
  • हेल्पलाइन का उपयोग: यदि समिति का कोई कर्मचारी फॉर्म लेने से मना करे या किसी अवैध शुल्क की मांग करे, तो तुरंत लखनऊ मुख्यालय के नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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Randhir Patil
लेखक एवं मुख्य संपादक

Randhir Patil

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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