
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गन्ने की खेती करने वाले परिवारों के सामने आने वाली सबसे जटिल और संवेदनशील प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक गन्ना सट्टा वरासत (Sugarcane Satta Inheritance / Name Transfer) और नया सट्टा आवंटन (New Grower Code Registration) है। जब परिवार के मुखिया (जिसके नाम पर दशकों से सहकारी गन्ना विकास समिति में सट्टा चल रहा होता है) का देहांत हो जाता है, तो उनके पुत्रों, पत्नी या विधिक वारिसानों के बीच सट्टे का समय पर नामांतरण न होने से भारी संकट खड़ा हो जाता है।
यदि वरासत समय पर दर्ज नहीं कराई जाती, तो बैंक खाता फ्रीज होने से डीबीटी भुगतान अटक जाता है और सबसे बुरा यह होता है कि विभागीय सॉफ्टवेयर में आधार लिंकिंग न होने के कारण सट्टा ‘मृतक खाता’ (Deceased Account) घोषित होकर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप पेराई सत्र में किसान का करोड़ों रुपये का गन्ना खेतों में सूखने की कगार पर पहुंच जाता है।
इस 2200+ शब्दों की कानूनी और तकनीकी गाइड में हम उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 के तहत सट्टा वरासत कराने, बेसिक कोटे का वारिसानों में न्यायसंगत विभाजन करने, प्रपत्र-5 व प्रपत्र-7 भरने और नए किसान द्वारा पहली बार गन्ना सट्टा खोलने की संपूर्ण ए-टू-जेड प्रक्रिया को सरल भाषा में समझा रहे हैं।
गन्ना सट्टा वरासत क्या है और इसके 2 मुख्य स्वरूप क्या हैं?
सट्टा वरासत का अर्थ है कि मृतक किसान के नाम पर दर्ज गन्ना आपूर्ति अधिकार (Basic Quota & Bonding) और समिति की सदस्यता को उसके कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) के नाम हस्तांतरित करना।
धरातल पर यह प्रक्रिया दो प्रकार से संपन्न होती है:
- एकल वरासत (Single Name Transfer): परिवार के सभी वारिसान आपसी सहमति से किसी एक व्यक्ति (जैसे मृतक की पत्नी या बड़े बेटे) के नाम सट्टा जारी रखने का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे देते हैं। इसमें पुराना किसान कोड और बेसिक कोटा यथावत बना रहता है।
- विभाजित वरासत (Quota Division / Multiple Codes): यदि भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा हो चुका है और सभी अपने अलग-अलग सट्टे और अलग-अलग बैंक खाते चाहते हैं, तो राजस्व खतौनी में दर्ज अंश (Share) के अनुपात में पुराने बेसिक कोटे को विभाजित कर नए किसान कोड (New Grower Codes) जारी किए जाते हैं।
सट्टा वरासत हेतु आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों की चेकलिस्ट
गन्ना समिति के सचिव के पास आवेदन प्रस्तुत करते समय निम्नलिखित दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित छायाप्रतियां संलग्न करना अनिवार्य है:
| क्रम | आवश्यक दस्तावेज | जारीकर्ता प्राधिकरण / विवरण |
|---|---|---|
| 1 | मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) | नगर निगम / ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VDO) द्वारा जारी मूल प्रति। |
| 2 | राजस्व वरासत खतौनी (R-6 / P-11) | तहसील द्वारा ऑनलाइन दर्ज की गई नई खतौनी जिसमें वारिसानों के नाम दर्ज हों। |
| 3 | पारिवारिक रजिस्टर की नकल | संबंधित ब्लॉक / ग्राम पंचायत द्वारा जारी परिवार रजिस्टर नकल। |
| 4 | वारिसानों का शपथ पत्र (Affidavit) | ₹10 या ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पर नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र। |
| 5 | अन्य वारिसानों की अनापत्ति (NOC) | यदि सट्टा किसी एक वारिस के नाम होना है, तो अन्य सभी का सहमति पत्र। |
| 6 | सभी वारिसानों के आधार व बैंक पासबुक | आधार कार्ड और बैंक खाते की स्पष्ट प्रति (IFSC कोड सहित)। |
| 7 | विभागीय प्रपत्र-5 एवं प्रपत्र-7 | गन्ना समिति से प्राप्त निर्धारित आवेदन पत्र। |
सट्टा वरासत कराने की 5-चरणीय चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step Procedure)
चरण 1: राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराना (तहसील स्तर)
गन्ना समिति में जाने से पहले यह अनिवार्य है कि मृतक किसान के स्थान पर राजस्व परिषद के पोर्टल bor.up.nic.in पर धारा-33 के तहत वरासत दर्ज हो चुकी हो। जब तक भूलेख खतौनी में वारिसानों के नाम नहीं चढ़ेंगे, गन्ना विभाग सट्टा ट्रांसफर नहीं कर सकता।
चरण 2: समिति से प्रपत्र-5 और प्रपत्र-7 प्राप्त करना
अपनी संबंधित सहकारी गन्ना विकास समिति के कार्यालय जाएं और लिपिक से प्रपत्र-5 (वरासत आवेदन प्रपत्र) और प्रपत्र-7 (आपत्ति आमंत्रण सूचना) प्राप्त करें।
- प्रपत्र में मृतक का नाम, समिति का नाम, पुराना गांव कोड, किसान कोड और कुल बेसिक कोटा भरें।
- नीचे सभी कानूनी वारिसानों के नाम, आयु, संबंध और उनके हिस्से में आने वाले रकबे का स्पष्ट विवरण भरें।
चरण 3: गन्ना पर्यवेक्षक (Supervisor) की स्थलीय रिपोर्ट
आवेदन पत्र तैयार होने के बाद अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक से संपर्क करें।
- पर्यवेक्षक मौके पर खेत पर जाकर जांच करेगा कि संबंधित गाटा संख्या में वास्तव में गन्ने की फसल खड़ी है या नहीं।
- पर्यवेक्षक अपनी जांच आख्या (Inspection Report) प्रपत्र पर दर्ज कर हस्ताक्षर और मुहर लगाएगा।
चरण 4: 15 दिन की सार्वजनिक आपत्ति अवधि (Public Notice)
गन्ना समिति के नोटिस बोर्ड पर प्रपत्र-7 चस्पा किया जाता है, जिसमें 15 दिनों का समय दिया जाता है कि यदि परिवार के किसी अन्य सदस्य को इस वरासत या कोटे के बंटवारे पर कोई आपत्ति हो, तो वह साक्ष्य प्रस्तुत करे। यदि 15 दिन में कोई आपत्ति नहीं आती, तो सचिव फाइल को आगे बढ़ा देता है।
चरण 5: समिति सचिव की संस्तुति और नया किसान कोड जनरेट होना
समिति की प्रबंध समिति (Management Committee) की मासिक बैठक में प्रस्ताव पारित कर मृतक का कोड बंद कर दिया जाता है और वारिसानों को नए किसान कोड (New Grower Codes) आवंटित कर दिए जाते हैं। नया कोड जनरेट होते ही किसान का मोबाइल नंबर CaneUp सिस्टम में पंजीकृत हो जाता है और उस पर एसएमएस पर्ची आनी शुरू हो जाती है।
बेसिक कोटे का विभाजन कैसे होता है? (Quota Distribution Mathematics)
यदि मृतक पिता के नाम कुल बेसिक कोटा 600 क्विंटल था और खतौनी में 3 भाइयों का बराबर 1/3 हिस्सा दर्ज हुआ है, तो विभाग द्वारा कोटे का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है:
$$ ext{प्रत्येक भाई का नया बेसिक कोटा} = rac{ ext{कुल मूल बेसिक कोटा}}{ ext{वारिसानों की संख्या}} = rac{600}{3} = 200 ext{ क्विंटल}$$
- यदि किसी भाई के पास गन्ने का रकबा अधिक है और दूसरे के पास कम, तो वे आपसी सहमति से खतौनी के रकबे के आधार पर 300, 200 और 100 क्विंटल का अनुपात भी तय कर सकते हैं, बशर्ते तीनों भाई नोटरी हलफनामे पर हस्ताक्षर करें।
नया गन्ना सट्टा (New Satta Registration) पहली बार कैसे खोलें?
यदि आप एक नए किसान हैं और पहली बार गन्ने की खेती कर चीनी मिल को गन्ना बेचना चाहते हैं, तो नया सट्टा खोलने के नियम:
- समिति की सदस्यता शेयर खरीदना: जिस चीनी मिल के आरक्षित क्षेत्र (Reserved Area) में आपका खेत आता है, उस क्षेत्र की सहकारी गन्ना समिति में जाकर ₹100 से ₹500 का सदस्यता शुल्क जमा कर ‘शेयर होल्डर’ (Shareholder) बनें।
- सट्टा नीति के अनुसार नया कोटा आवंटन: नए किसान को पहले वर्ष उसके कुल सर्वेक्षित गन्ना रकबे के आधार पर औसत उत्पादन का 85% हिस्सा बेसिक कोटा के रूप में अनंतिम (Provisional) आवंटित किया जाता है।
- अंतिम तिथि: नया सट्टा खोलने और वरासत दर्ज कराने की अंतिम तिथि विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष 30 सितंबर निर्धारित की जाती है। अतः पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही यह कार्य पूर्ण करा लें।
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