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शरदकालीन बुवाई में दीमक खा जाता है 25-30% बीज: अक्टूबर 2026 के 7 सुरक्षा उपाय, अंकुरण 90% पार करें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 8 min read
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शरदकालीन बुवाई में दीमक खा जाता है 25-30% बीज: अक्टूबर 2026 के 7 सुरक्षा उपाय, अंकुरण 90% पार करें
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 5:46 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अक्टूबर का महीना यूपी के गन्ना किसानों के लिए शरदकालीन बुवाई का समय है। खेत तैयार, बीज चुना हुआ, कतारें नप चुकीं — और किसान को लगता है कि काम का बड़ा हिस्सा हो गया। लेकिन कृषि विस्तार अधिकारियों के अनुभव के मुताबिक, जिन खेतों में बीज की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता, वहां दीमक और सफेद गिडार जैसे मिट्टी के कीट बुवाई के बाद के पहले 3-4 हफ्तों में 25 से 30 प्रतिशत तक गन्ने के सेट्स (टुकड़े) नष्ट कर सकते हैं। यानी हर चौथा बीज मिट्टी में ही खत्म — और किसान को इसका पता तब चलता है जब कतारों में खाली जगहें दिखने लगती हैं।

अच्छी खबर यह है कि यह नुकसान पूरी तरह रोका जा सकता है। नीचे दिए गए 7 व्यावहारिक उपाय — बीज उपचार से लेकर नमी प्रबंधन तक — अगर बुवाई के समय अपनाए जाएं, तो अंकुरण दर 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचाई जा सकती है। ये उपाय महंगे नहीं हैं, ज्यादातर किसान इन्हें अपने मौजूदा संसाधनों से ही कर सकते हैं।

1. पहले दुश्मन को पहचानें: दीमक और सफेद गिडार के लक्षण

दीमक (टर्माइट) जमीन के अंदर रहती है और गन्ने के सेट्स के मुलायम ऊतकों को खाती है। इसके हमले के लक्षण:

  • बुवाई के 2-3 हफ्ते बाद भी कतारों में अंकुरण न होना, जबकि नमी पर्याप्त है
  • मिट्टी खोदने पर सेट्स पर मिट्टी की बारीक परत (दीमक मिट्टी की “गैलरी” बनाकर खाती है)
  • सूखे मौसम में नुकसान ज्यादा — दीमक नमी की तलाश में सेट्स की ओर आती है

सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब) मई-जून में अंडे देती है, और इसके लार्वा सितंबर-अक्टूबर में जड़ों और सेट्स को कुतरते हैं। लक्षण:

  • अंकुरित पौधे अचानक मुरझाना, खींचने पर आसानी से उखड़ जाना
  • जड़ों पर कटे-फटे निशान, मिट्टी में सफेद, C-आकार के मोटे लार्वा दिखना
  • एक वर्ग मीटर में 2-3 से ज्यादा लार्वा मिलें तो आर्थिक नुकसान की सीमा पार मानी जाती है

पहचान इसलिए जरूरी है क्योंकि दोनों के उपाय अलग हैं — दीमक सूखी मिट्टी में ज्यादा सक्रिय है, जबकि गिडार नमी वाली मिट्टी में भी पनपता है।

2. बुवाई से पहले खेत की सफाई और गहरी जुताई

सबसे सस्ता और सबसे असरदार उपाय खेत की तैयारी ही है:

  • गहरी जुताई (20-25 सेमी): बुवाई से 2-3 हफ्ते पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। इससे दीमक के बिल और गिडार के लार्वा धूप में आ जाते हैं और चिड़ियां व धूप उन्हें नष्ट कर देती हैं।
  • फसल अवशेष हटाएं: पिछले सीजन की सूखी पत्तियां, जड़ें और खूंट (स्टबल) दीमक का पसंदीदा भोजन हैं। खेत से इन्हें साफ करें या अच्छी तरह सड़ाकर खाद बनाएं — अधसड़े अवशेष दीमक को आकर्षित करते हैं।
  • खेत की मेड़ों की सफाई: मेड़ों पर उगी झाड़ियां और पुरानी लकड़ियां दीमक के स्थायी ठिकाने बनती हैं। बुवाई से पहले इन्हें हटा दें।
  • गोबर की खाद पूरी तरह सड़ी हो: कच्ची या अधसड़ी गोबर की खाद में दीमक तेजी से पनपती है। केवल अच्छी तरह सड़ी खाद ही डालें।

यह तैयारी अकेले दीमक-गिडार का दबाव आधा कर सकती है, और इसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं है।

3. बीज (सेट्स) का उपचार — सबसे अहम कदम

बुवाई से ठीक पहले बीज उपचार वह कदम है जो अंकुरण को 70 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक ले जाता है:

  • फफूंदनाशी उपचार: सेट्स को बुवाई से पहले फफूंदनाशी घोल में 10-15 मिनट डुबोएं। इससे रेड रॉट जैसी बीमारियों के साथ-साथ सेट्स की सड़न भी रुकती है। (सटीक मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।)
  • कीटनाशी उपचार: दीमक-प्रभावित क्षेत्रों में सेट्स का कीटनाशी उपचार बेहद असरदार है। उपचारित सेट्स के आसपास मिट्टी में कीटनाशी की एक सुरक्षा परत बन जाती है जो 3-4 हफ्तों तक दीमक को दूर रखती है — ठीक वह अवधि जब सेट्स सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। (मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।)
  • जैविक विकल्प — ट्राइकोडर्मा: रासायनिक उपचार नहीं चाहते तो सेट्स को ट्राइकोडर्मा विरिडी के घोल में उपचारित करें। यह फफूंद जनित रोगों से बचाता है और मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।
  • ताजे और स्वस्थ बीज चुनें: 8-10 महीने की फसल से, मोटे और रोग-मुक्त गन्ने के ऊपरी व मध्य भाग के सेट्स लें। पतले, सूखे या घायल सेट्स पर कीट जल्दी हमला करते हैं।

बीज उपचार में लगने वाला समय प्रति एकड़ मुश्किल से आधा घंटा है, लेकिन इसका फायदा पूरे सीजन दिखता है।

4. जैविक उपाय: मेटाराइजियम और नीम की खली

जो किसान जैविक या कम-रसायन खेती चाहते हैं, उनके लिए ये विकल्प हैं:

  • मेटाराइजियम एनिसोप्ली (हरी फफूंद): यह एक कीट-मारक फफूंद है जो सफेद गिडार के लार्वा को संक्रमित करके मारती है। बुवाई के समय खेत में इसका प्रयोग गिडार की आबादी को काफी घटा देता है। (मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।)
  • नीम की खली: बुवाई के समय कतारों में नीम की खली डालने से दीमक दूर रहती है। नीम में मौजूद अजाडिरैक्टिन कीटों के प्रजनन और भोजन को बाधित करता है, साथ ही यह धीमी गति से नाइट्रोजन भी देती है।
  • ब्यूवेरिया बैसियाना: एक और कीट-मारक फफूंद, जो मिट्टी के कीटों के खिलाफ असरदार है। मेटाराइजियम के साथ इसका संयुक्त प्रयोग कई क्षेत्रों में अपनाया जाता है।

जैविक उपायों का असर रासायनिक उपायों से धीमा दिखता है, इसलिए इन्हें बुवाई के समय ही — या उससे पहले — लगाना जरूरी है, नुकसान दिखने के बाद नहीं।

5. रासायनिक उपाय: जरूरत हो तभी, सही तरीके से

जहां दीमक या गिडार का प्रकोप ज्यादा है, वहां मिट्टी में कीटनाशी का प्रयोग मान्य विकल्प है:

  • बुवाई के समय कतारों में प्रयोग: कीटनाशी दानों को बीज के साथ कतार में डालें, पूरे खेत में बिखेरने के बजाय। इससे दवा सीधे कीट के संपर्क क्षेत्र में पहुंचती है और खर्च भी कम होता है।
  • सिंचाई के पानी के साथ: कुछ कीटनाशी सिंचाई के पानी के साथ भी दी जा सकती हैं — यह तरीका जड़ क्षेत्र तक दवा पहुंचाता है।
  • सुरक्षा: कीटनाशी छिड़कते समय दस्ताने और मास्क पहनें, हवा के विपरीत दिशा में न चलें, और खाली डिब्बे खेत में न फेंकें।

ध्यान रहे: कीटनाशी आखिरी विकल्प है, पहला नहीं। ऊपर के 4 उपाय अपना लिए जाएं तो ज्यादातर खेतों में रासायनिक प्रयोग की जरूरत ही नहीं पड़ती। (किसी भी कीटनाशी की मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।)

6. नमी प्रबंधन: दीमक का सबसे बड़ा दुश्मन पानी है

दीमक सूखी मिट्टी में सबसे ज्यादा सक्रिय होती है — यह तथ्य आपके हक में इस्तेमाल किया जा सकता है:

  • बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई: सेट्स को अंकुरण के लिए नमी चाहिए ही; साथ में यह नमी दीमक की गतिविधि भी घटाती है।
  • पहले 30 दिन नमी बनाए रखें: अंकुरण की अवधि में खेत को पूरी तरह सूखने न दें। 10-12 दिन के अंतर पर हल्की सिंचाई का चक्र रखें।
  • जलभराव से बचें: ज्यादा पानी भी नुकसानदायक है — सेट्स सड़ सकते हैं। नमी “नम” रहे, “दलदल” नहीं। खेत में पानी 24 घंटे से ज्यादा न ठहरे।
  • ट्रैश मल्चिंग: बुवाई के बाद कतारों के बीच गन्ने की सूखी पत्तियों की मल्चिंग नमी बचाती है, खरपतवार दबाती है और मिट्टी का तापमान स्थिर रखती है — तीनों फायदे एक साथ।

सही नमी प्रबंधन अकेले दीमक के नुकसान को बहुत हद तक रोक देता है, और यह पूरी तरह मुफ्त है।

7. निगरानी और गैप फिलिंग: खाली जगह न छोड़ें

बुवाई के बाद 3 हफ्तों तक हर 4-5 दिन में खेत का चक्कर लगाएं:

  • जहां अंकुरण नहीं हुआ, वहां मिट्टी खोदकर देखें — सेट सड़ा है या कीट ने खाया है, कारण समझ आएगा
  • गैप फिलिंग: खाली जगहों पर 3-4 हफ्ते के भीतर नए सेट्स लगाएं। देर से भरे गए गैप में पौधे छोटे रह जाते हैं और उपज घटती है
  • अगर किसी हिस्से में नुकसान 10 प्रतिशत से ज्यादा है, तो वहां कीटनाशी का लक्षित प्रयोग करें — पूरे खेत में नहीं
  • निगरानी के दौरान दिखे गिडार के लार्वा को नष्ट करें और दीमक के बिलों को चिह्नित करें

एक नजर में: 7 उपायों की तुलना

उपायखर्चअसर दिखने का समयसबसे अच्छा कब
गहरी जुताई व सफाईशून्यबुवाई से पहलेहर खेत में अनिवार्य
बीज उपचारबहुत कमबुवाई के साथहर बुवाई में अनिवार्य
जैविक (मेटाराइजियम/नीम)कम2-3 हफ्तेकम-रसायन खेती में
रासायनिक प्रयोगमध्यमतुरंतज्यादा प्रकोप वाले खेत
नमी प्रबंधनशून्यतुरंतदीमक-प्रभावित क्षेत्र
निगरानी व गैप फिलिंगशून्य3-4 हफ्तेहर खेत में अनिवार्य

आपके सवाल

सवाल: क्या हर खेत में दीमक का खतरा एक जैसा होता है? जवाब: नहीं। रेतीली और हल्की मिट्टी, सूखे क्षेत्र, और जिन खेतों में पहले दीमक का प्रकोप रहा है — वहां खतरा ज्यादा है। चिकनी मिट्टी और नियमित सिंचाई वाले खेतों में दीमक कम सक्रिय रहती है। अपने खेत का इतिहास सबसे अच्छा संकेतक है।

सवाल: बीज उपचार के बाद कितने दिनों तक सुरक्षा रहती है? जवाब: कीटनाशी उपचार आमतौर पर बुवाई के बाद 3-4 हफ्तों तक सुरक्षा देता है — ठीक वह अवधि जब सेट्स सबसे कमजोर होते हैं। इसके बाद अंकुरित पौधे खुद मजबूत हो जाते हैं और दीमक का खतरा काफी घट जाता है।

सवाल: क्या जैविक उपाय अकेले काफी हैं? जवाब: हल्के से मध्यम प्रकोप में हां — खासकर अगर खेत की तैयारी (गहरी जुताई, सफाई) और नमी प्रबंधन भी साथ हो। लेकिन जहां पहले भारी नुकसान हुआ है, वहां पहले साल रासायनिक और जैविक उपायों का संयोजन सुरक्षित रहता है।

सवाल: सफेद गिडार के लार्वा कब सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं? जवाब: सितंबर से नवंबर के बीच, जब लार्वा पूरी तरह विकसित होते हैं और भोजन की तलाश में जड़ों व सेट्स को कुतरते हैं। यही वजह है कि शरदकालीन बुवाई में इनसे बचाव खास तौर पर जरूरी है।

सवाल: क्या ये उपाय बसंतकालीन (फरवरी-मार्च) बुवाई में भी काम करेंगे? जवाब: हां, सभी 7 उपाय बसंतकालीन बुवाई में भी उतने ही असरदार हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि बसंत में तापमान बढ़ने से दीमक की सक्रियता और बढ़ जाती है, इसलिए नमी प्रबंधन तब और भी अहम हो जाता है।

शरदकालीन बुवाई में लगाया गया हर स्वस्थ बीज अगले साल की पेराई में क्विंटलों में बदलता है। दीमक और सफेद गिडार से बीज की रक्षा कोई महंगा तकनीकी काम नहीं — यह सिर्फ समय पर सही कदम उठाने का नाम है। इस अक्टूबर अपनी बुवाई को इन 7 उपायों की सुरक्षा दें, और 90 प्रतिशत से ऊपर अंकुरण का फर्क खुद देखें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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