
पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने वाला है और उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों के गेट पर फिर गन्ने से लदी ट्रॉलियों की कतारें लगेंगी। इस समय किसान की सबसे बड़ी चिंता भाव के साथ-साथ तौल की पारदर्शिता होती है — क्योंकि हर क्विंटल पर भाव तय होता है, तो तौल में हुई एक छोटी-सी गड़बड़ी भी सीधे जेब पर असर डालती है। अनुमान लगाइए: अगर आपकी एक ट्रॉली में सिर्फ 50 किलो वजन कम दिखाया गया और सीजन में आपने 40 ट्रॉली गन्ना भेजा, तो 2,000 किलो यानी 20 क्विंटल गन्ने का भुगतान आपको मिला ही नहीं। मौजूदा भाव पर यह हजारों रुपये का नुकसान है — और यही घटतौली की असली कीमत है।
अच्छी खबर यह है कि गन्ना विभाग ने घटतौली रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं — हर मिल पर 10 टन क्षमता का मैनुअल कांटा और सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज अनिवार्य है, तौल में डिजिटल लोड सेल का प्रयोग जरूरी किया गया है, और घटतौली पकड़े जाने पर तौल लिपिक का लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान है। किसानों को तौल और भुगतान की जानकारी एसएमएस से मिलती है और टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 पर सीधे शिकायत दर्ज की जा सकती है। इस गाइड में हम बताएंगे कि घटतौली होती कैसे है, तौल के समय आपको किन 7 बातों का ध्यान रखना है, और गड़बड़ी दिखे तो शिकायत कहां और कैसे करें।
घटतौली होती कैसे है? जानिए 6 आम तरीके
घटतौली रोकने से पहले यह समझना जरूरी है कि वजन में हेर-फेर के आम तरीके क्या हैं। गन्ना आयुक्त स्तर से जारी निर्देशों और अखबारों में आई कार्रवाई की खबरों के आधार पर ये तरीके सामने आए हैं:
1. सॉफ्टवेयर या इंडिकेटर में छेड़छाड़ — इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज के सॉफ्टवेयर या इंडिकेटर में ऐसी सेटिंग कर दी जाती है कि डिस्प्ले पर असली वजन से कम आंकड़ा दिखे। इसी वजह से विभाग ने एनॉलाग इंडिकेटर की जगह डिजिटल लोड सेल और इंडिकेटर का प्रयोग अनिवार्य किया है और मिल के आईटी कर्मियों को हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर को छेड़छाड़-रहित रखने के निर्देश दिए हैं।
2. टेयर वेट (खाली गाड़ी का वजन) में गड़बड़ी — गन्ना उतारने के बाद खाली ट्रॉली का वजन (टेयर वेट) ज्यादा दिखा दिया जाता है, तो शुद्ध गन्ने का वजन अपने आप कम निकलता है। यह घटतौली का सबसे आम और पकड़ में न आने वाला तरीका माना जाता है।
3. ट्रॉली का पूरा प्लेटफॉर्म पर न होना — तौल के समय ट्रॉली का अगला या पिछला पहिया प्लेटफॉर्म से बाहर रह जाए तो वजन कम आता है। सहकारी मिलों में एआई-आधारित तौल निगरानी के टेंडर में भी “फ्रंट व्हील क्रॉसिंग” और “ग्रॉस-टेयर वाहन मिसमैच” को संदिग्ध लेन-देन की श्रेणी में रखा गया है।
4. मानक बाटों का न होना या गलत अंशांकन — कांटे की जांच के लिए मानक बाट (स्टैंडर्ड वेट) नहीं रखे जाते, ताकि कोई भी तौल की सच्चाई परख न सके। निरीक्षण में कई केंद्रों पर मानक बाट न मिलने की बात सामने आई है।
5. तौल पर्ची या रसीद न देना — किसान को तौल की लिखित पर्ची नहीं दी जाती, ताकि बाद में वह वजन को चुनौती ही न दे सके। नियमों के अनुसार हर क्रय केंद्र पर उसी दिन तौले जाने वाले सप्लाई टिकटों की एक्नॉलेजमेंट शीट प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
6. लिपिक और ऑपरेटर की मिलीभगत — कुछ मामलों में तौल लिपिक, मिल कर्मी और उपकरण प्रदाता कंपनी के बीच सांठगांठ से वजन में हेर-फेर होता है। पकड़े जाने पर अब सिर्फ लिपिक ही नहीं, हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
2026-27 में घटतौली से बचाव के 7 पक्के तरीके
1. तौल पर्ची हर हाल में लें
गन्ना तौलने के बाद लिखित तौल पर्ची या रसीद लेना आपका अधिकार है। इस पर ट्रॉली नंबर, ग्रॉस वेट, टेयर वेट, नेट वेट, तारीख और समय दर्ज होना चाहिए। पर्ची के बिना बाद में कोई दावा साबित करना मुश्किल हो जाता है। कई किसानों की आदत होती है कि भीड़ में पर्ची लेना भूल जाते हैं — यही सबसे बड़ी गलती है।
2. तौल के समय खुद मौजूद रहें और डिस्प्ले देखें
जब आपकी ट्रॉली कांटे पर चढ़े, तो खुद वहां मौजूद रहें। ध्यान दें कि ट्रॉली के सभी पहिए प्लेटफॉर्म के अंदर हों और डिस्प्ले पर दिख रहा वजन पर्ची पर लिखे वजन से मेल खाए। डिजिटल इंडिकेटर पर वजन स्थिर होने के बाद ही आंकड़ा नोट करें।
3. एसएमएस अलर्ट से वजन का मिलान करें
विभाग के निर्देशों के अनुसार किसानों को तौल और भुगतान की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जाती है। तौल के कुछ समय बाद आने वाले एसएमएस में दर्ज वजन का अपनी पर्ची से मिलान जरूर करें। अगर एसएमएस न आए तो यह भी एक चेतावनी का संकेत है — इसकी शिकायत करें।
4. टेयर वेट पर खास नजर रखें
खाली ट्रॉली का वजन हर बार लगभग एक जैसा आना चाहिए। अगर किसी दिन टेयर वेट अचानक बढ़ा हुआ दिखे, तो तुरंत सवाल उठाएं और दोबारा तौल की मांग करें। अपनी ट्रॉली का सामान्य खाली वजन पहले से नोट करके रखें — यह आपका सबसे मजबूत हथियार है।
5. मानक बाट और अंशांकन प्रमाणपत्र की मांग करें
हर तौल केंद्र पर मानक बाट और कांटे के अंशांकन (कैलिब्रेशन) का वैध प्रमाणपत्र होना चाहिए। बाट-माप विभाग के अधिकारी समय-समय पर इनकी जांच करते हैं। अगर केंद्र पर मानक बाट न दिखें या प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो, तो यह गंभीर अनियमितता है।
6. मोबाइल पर तौल रिकॉर्ड खुद जांचें
स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल और ई-गन्ना ऐप के जरिए किसान अपने सर्वे विवरण, पर्ची, तौल रिकॉर्ड और भुगतान की स्थिति मोबाइल पर देख सकते हैं। तौल के बाद पोर्टल पर दर्ज वजन का अपनी पर्ची से मिलान करें — डिजिटल रिकॉर्ड में गड़बड़ी करना कागज से कहीं मुश्किल है।
7. शक हो तो तुरंत दोबारा तौल की मांग करें
अगर वजन में कुछ गड़बड़ लगे — जैसे ट्रॉली आधी प्लेटफॉर्म पर थी, डिस्प्ले जल्दी बदल गया, या पर्ची देने में आनाकानी हुई — तो मौके पर ही दोबारा तौल की मांग करें। एक वास्तविक मामले में किसानों ने क्रय केंद्र के बाहर निजी कांटे पर तौल कराई थी, लेकिन अधिकारियों के सामने दोबारा तौल से इनकार कर दिया, जिससे उनका दावा कमजोर पड़ गया। सबक साफ है: शक हो तो अधिकृत कांटे पर, अधिकारियों के सामने, तुरंत दोबारा तौल कराएं।
तौल के समय किसान की चेकलिस्ट
तौल केंद्र पर जाते समय इस छोटी-सी चेकलिस्ट को याद रखें:
| क्र.सं. | जांच का बिंदु | क्या देखना है |
|---|---|---|
| 1 | ट्रॉली की स्थिति | सभी पहिए वेब्रिज प्लेटफॉर्म के अंदर |
| 2 | डिस्प्ले रीडिंग | वजन स्थिर होने के बाद का आंकड़ा नोट करें |
| 3 | तौल पर्ची | ग्रॉस, टेयर, नेट वेट + तारीख-समय दर्ज हो |
| 4 | टेयर वेट | सामान्य खाली वजन से तुलना करें |
| 5 | मानक बाट | केंद्र पर मानक बाट मौजूद हों |
| 6 | एसएमएस | तौल के बाद एसएमएस में वजन का मिलान करें |
| 7 | पोर्टल रिकॉर्ड | ई-गन्ना/स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल पर वजन जांचें |
गड़बड़ी दिखे तो शिकायत कहां करें? 4 असरदार रास्ते
1. टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 — यह गन्ना किसानों की शिकायतों के लिए विभाग का आधिकारिक टोल फ्री नंबर है। हर चीनी मिल के कंट्रोल रूम से जुड़े इस नंबर पर तौल में गड़बड़ी की सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज कराते समय तारीख, क्रय केंद्र का नाम, ट्रॉली नंबर और तौल पर्ची का विवरण तैयार रखें।
2. जिला गन्ना अधिकारी — अपने जिले के जिला गन्ना अधिकारी के कार्यालय में लिखित शिकायत दें। विभाग औचक निरीक्षण करता है और घटतौली पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है।
3. caneup.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत — caneup.in पोर्टल पर शिकायत/ग्रीवांस दर्ज करने की सुविधा है, जहां शिकायत का टोकन नंबर मिलता है और उसकी स्थिति भी ट्रैक की जा सकती है।
4. निरीक्षण दल से मौके पर शिकायत — गन्ना एवं चीनी विभाग तथा बाट-माप विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से मिल गेट और बाहरी क्रय केंद्रों की जांच करते हैं। निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारी को मौके पर शिकायत दी जा सकती है।
कानून क्या कहता है? गन्ना तौल के नियम और सजा
गन्ना तौल में पारदर्शिता सिर्फ नैतिक मुद्दा नहीं, कानूनी बाध्यता है:
- गन्ना (आपूर्ति और क्रय) अधिनियम, 1953 और उ.प्र. नियमावली, 1954 — अनियमितता पाए जाने पर दोषी मिलों और तौल लिपिकों के खिलाफ नोटिस, जमानत जब्ती या सक्षम न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई होती है।
- विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 (Legal Metrology Act) — इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन के अंशांकन में छेड़छाड़ पाए जाने पर उपकरण निर्माता, सॉफ्टवेयर प्रदाता और एएमसी प्रदाता — तीनों की जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई होती है।
- तौल लिपिक का लाइसेंस निलंबन/निरस्तीकरण — घटतौली में दोषी पाए गए तौल लिपिकों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए जाते हैं। तौल लिपिकों की नियुक्ति और स्थानांतरण अब ऑनलाइन पोर्टल से होते हैं और एक ही केंद्र पर दोबारा तैनाती नहीं दी जाती।
- कंपनियों पर भी कार्रवाई — वेब्रिज या सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ मिली तो मिल प्रबंधन के साथ-साथ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनी के खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
आपके सवाल
प्रश्न 1: तौल पर्ची न दी जाए तो क्या करें? उत्तर: मौके पर ही तौल पर्ची की मांग करें — यह आपका अधिकार है। अगर पर्ची देने से इनकार किया जाए तो टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं और जिला गन्ना अधिकारी को लिखित में सूचित करें।
प्रश्न 2: एसएमएस में आया वजन पर्ची से अलग है तो क्या होगा? उत्तर: पर्ची और एसएमएस — दोनों को संभालकर रखें और अंतर की लिखित शिकायत जिला गन्ना अधिकारी को दें। डिजिटल रिकॉर्ड और पर्ची का अंतर जांच का मजबूत आधार बनता है।
प्रश्न 3: क्या किसान खुद कांटे की जांच की मांग कर सकता है? उत्तर: हां। मानक बाटों से तौल की जांच और अंशांकन प्रमाणपत्र देखने की मांग किसान कर सकता है। बाट-माप विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर औचक जांच करते हैं।
प्रश्न 4: टेयर वेट में गड़बड़ी कैसे पकड़ें? उत्तर: अपनी खाली ट्रॉली का सामान्य वजन पहले से नोट करके रखें। हर बार के टेयर वेट की तुलना इससे करें — अचानक बढ़ा हुआ टेयर वेट गड़बड़ी का संकेत है। शक होने पर अधिकारियों के सामने दोबारा तौल कराएं।
प्रश्न 5: शिकायत के बाद कितने समय में कार्रवाई होती है? उत्तर: टोल फ्री नंबर पर दर्ज शिकायत का निश्चित समय में निस्तारण की व्यवस्था है। गंभीर मामलों में औचक निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई की जाती है, जिसमें लाइसेंस निलंबन तक के प्रावधान हैं।
पेराई सत्र 2026-27 में गन्ना बेचते समय तौल पर्ची लेना, डिस्प्ले देखना और एसएमएस से मिलान करना — ये तीन आदतें आपकी मेहनत की पूरी कीमत दिलाएंगी। घटतौली कोई छोटी बात नहीं; हर किलो गन्ने पर आपका हक है, और कानून आपके साथ है।
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