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गन्ने में यूरिया की आखिरी डोज़ कब दें? देर से खाद डालने से चीनी घटती है — टॉप ड्रेसिंग का पूरा कैलेंडर 2026-27

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 24, 2026 • 8 min read
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गन्ने में यूरिया की आखिरी डोज़ कब दें? देर से खाद डालने से चीनी घटती है — टॉप ड्रेसिंग का पूरा कैलेंडर 2026-27
अंतिम अपडेट: October 24, 2026 1:00 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान हर साल खाद पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन एक सवाल का जवाब बहुत कम किसानों के पास है — गन्ने में यूरिया की आखिरी डोज़ कब तक डालनी चाहिए? सच्चाई यह है कि समय पर डाली गई खाद से ज्यादा महत्वपूर्ण है समय से पहले रोकी गई खाद। गन्ना अनुसंधान केंद्रों के ट्रायल बताते हैं कि परिपक्वता के नज़दीक दिया गया अतिरिक्त नाइट्रोजन गन्ने की चीनी (सुक्रोज) प्रतिशत को 1 से 1.5 अंक तक घटा सकता है — यानी वही गन्ना, वही खेत, सिर्फ गलत समय की खाद की वजह से मिल में कम भाव और कम रिकवरी।

इस गाइड में हम समझेंगे कि गन्ने की फसल को नाइट्रोजन कब-कब चाहिए, टॉप ड्रेसिंग का सही कैलेंडर क्या है, और देर से यूरिया देने से कौन-कौन से 5 नुकसान होते हैं।

गन्ने की फसल को नाइट्रोजन कब-कब चाहिए

गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है — बुवाई से कटाई तक 10 से 12 महीने। इस पूरी अवधि में फसल की नाइट्रोजन की ज़रूरत एक जैसी नहीं रहती। मोटे तौर पर फसल के 4 चरण होते हैं:

चरणअवधि (बुवाई के बाद)नाइट्रोजन की ज़रूरत
अंकुरण व जड़ विकास0–45 दिनकम (बीज में संचित पोषण काफी)
कल्ले निकलना (टिलरिंग)45–120 दिनसबसे ज्यादा — कल्लों की संख्या यहीं तय होती है
गांठ बनना व लंबाई बढ़ना120–270 दिनमध्यम — मोटाई और वजन बढ़ता है
परिपक्वता व चीनी संचय270 दिन के बादबहुत कम — ज्यादा नाइट्रोजन नुकसानदेह

यानी नाइट्रोजन की असली ज़रूरत फसल के पहले 4-5 महीनों में होती है। इसके बाद फसल को चीनी जमा करने का काम करने देना चाहिए, न कि नई पत्तियां निकालने पर मजबूर करना चाहिए।

यूरिया की डोज़ का मानक विभाजन

कृषि विज्ञान केंद्रों और गन्ना शोध संस्थानों की सामान्य सिफारिश है कि गन्ने की कुल नाइट्रोजन डोज़ को 2 से 3 किस्तों में बांटकर दें:

  • पहली किस्त (बुवाई के समय): कुल नाइट्रोजन का लगभग एक-तिहाई — कतारों में बीज के नीचे या बगल में। यह शुरुआती जड़ और अंकुर विकास को गति देती है।
  • दूसरी किस्त (कल्ले निकलते समय, 45–60 दिन): एक-तिहाई — यह सबसे महत्वपूर्ण डोज़ है क्योंकि स्वस्थ कल्लों की संख्या ही अंतिम उपज तय करती है।
  • तीसरी किस्त (बड़ी गांठ बनते समय, 90–120 दिन): बची हुई एक-तिहाई — गन्नों की मोटाई और लंबाई बढ़ाने के लिए।

ध्यान दें: यह एक सामान्य ढांचा है। आपके खेत की मिट्टी, पिछली फसल और मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के हिसाब से सटीक मात्रा तय करें — मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

आखिरी डोज़ की समय-सीमा: 120-150 दिन का नियम

याद रखने का सबसे आसान नियम: बुवाई की तारीख से 120 से 150 दिन के भीतर यूरिया की आखिरी डोज़ पूरी कर लें। इसके बाद फसल को “नाइट्रोजन-फ्री” छोड़ दें ताकि वह परिपक्वता की ओर बढ़े और चीनी जमा करे।

बुवाई के मौसम के हिसाब से आखिरी डोज़ की अंतिम तारीख:

बुवाई का समयबुवाई माहआखिरी यूरिया डोज़ की अंतिम तारीख
शरदकालीन बुवाईअक्टूबरफरवरी–मार्च
बसंतकालीन बुवाईफरवरी–मार्चजून–जुलाई
ग्रीष्म/देर बुवाईअप्रैल–मईअगस्त–सितंबर

शरदकालीन (अक्टूबर) बुवाई वाले किसान ध्यान दें: अक्टूबर में बोई फसल सर्दियों में धीमी बढ़ती है, इसलिए किसान अक्सर सोचते हैं कि “फसल अभी छोटी है, खाद बाद में डालेंगे।” यही सबसे बड़ी गलती है — मार्च के बाद डाली गई यूरिया फसल को हरा तो रखती है, पर चीनी घटा देती है।

देर से यूरिया देने के 5 बड़े नुकसान

1. चीनी प्रतिशत (सुक्रोज) घट जाता है

नाइट्रोजन फसल को हरियाली और नई वृद्धि की ओर धकेलता है, जबकि चीनी संचय के लिए फसल का “पकना” ज़रूरी है। परिपक्वता के समय अतिरिक्त नाइट्रोजन से रस में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ते हैं और सुक्रोज प्रतिशत 1–1.5 अंक तक गिर सकता है। मिल में भाव और रिकवरी दोनों इसी पर निर्भर हैं।

2. गन्ना देर से पकता है

ज्यादा नाइट्रोजन वाली फसल लंबे समय तक हरी रहती है — किसान को लगता है फसल अच्छी है, लेकिन असल में परिपक्वता टल रही है। इससे कटाई का सही समय चूक जाता है और पेराई सत्र की शुरुआत में गन्ना देने का फायदा नहीं मिलता।

3. कीट और रोग का हमला बढ़ता है

नरम, रसीली और हरी पत्तियां टॉप बोरर, पायरिला और सफेद मक्खी जैसे कीटों को आकर्षित करती हैं। देर से नाइट्रोजन पाई फसल में कीट प्रबंधन का खर्च भी बढ़ जाता है।

4. लोटपोट (लॉजिंग) का खतरा

अत्यधिक नाइट्रोजन से गन्ने लंबे लेकिन कमज़ोर और खोखले होते हैं। हवा या बारिश में ऐसी फसल आसानी से गिर जाती है, और गिरी फसल में चीनी तेजी से घटती है।

5. पेड़ी (रटून) में अनचाहा फूल आना

परिपक्व अवस्था में नाइट्रोजन का असंतुलन पुष्पन (फूल आना) को बढ़ावा दे सकता है, जिससे गन्ने का वजन और चीनी दोनों घटते हैं।

पेड़ी (रटून) फसल में टॉप ड्रेसिंग का कैलेंडर

पेड़ी की फसल में समय और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पेड़ी की जड़ प्रणाली पहले से विकसित होती है और वह नाइट्रोजन को तेजी से उठाती है:

  1. कटाई के तुरंत बाद (0–15 दिन): ठूंठ प्रबंधन के बाद पहली डोज़ — नई कोंपलों को तेज शुरुआत देती है।
  2. कोंपल निकलने पर (30–45 दिन): दूसरी डोज़ — कल्लों की संख्या बढ़ाने के लिए।
  3. बंसेई/मिट्टी चढ़ाने के समय (75–90 दिन): आखिरी डोज़ — इसके बाद पेड़ी में यूरिया बंद।

पेड़ी में भी वही नियम: कटाई के 90–120 दिन के बाद यूरिया न डालें। पेड़ी की फसल वैसे भी जल्दी पकती है, इसलिए देर से खाद का नुकसान उसमें और ज्यादा होता है।

यूरिया डालने का सही तरीका

सिर्फ समय ही नहीं, तरीका भी मायने रखता है:

  • नमी वाली मिट्टी में डालें: सूखी मिट्टी पर यूरिया डालने से नाइट्रोजन हवा में उड़ जाती है। सिंचाई से पहले या हल्की नमी में डालना सबसे अच्छा है।
  • शाम के समय डालें: तेज धूप में यूरिया का नुकसान ज्यादा होता है।
  • मिट्टी में मिलाएं: संभव हो तो हल्की गुड़ाई करके यूरिया को मिट्टी में मिला दें — सतह पर पड़ी यूरिया का 20–30% नाइट्रोजन बर्बाद हो सकता है।
  • बारिश के पूर्वानुमान पर डालें: हल्की बारिश से पहले डाली यूरिया मिट्टी में अच्छी तरह घुल जाती है, लेकिन तेज बारिश में बह भी सकती है — मौसम देखकर निर्णय लें।

नैनो यूरिया और पत्ती छिड़काव की भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में नैनो यूरिया का पत्ती पर छिड़काव लोकप्रिय हुआ है। इसे समझना ज़रूरी है:

  • नैनो यूरिया पूरक है, विकल्प नहीं। यह पारंपरिक यूरिया की पूरी डोज़ की जगह नहीं ले सकता।
  • इसका सबसे अच्छा उपयोग कल्ले निकलने और गांठ बनने के चरण में 1–2 छिड़काव के रूप में है।
  • परिपक्वता के नज़दीक नैनो यूरिया का छिड़काव भी वही नुकसान करेगा जो दानेदार यूरिया करता है — इसलिए आखिरी छिड़काव भी 120–150 दिन की सीमा के भीतर रखें।

किसान भाइयों के लिए 7 सूत्री चेकलिस्ट

  1. बुवाई की तारीख एक डायरी में लिखें — उसी से 150 दिन गिनकर आखिरी डोज़ की तारीख तय करें।
  2. कुल नाइट्रोजन को 3 किस्तों में बांटें, एक बार में पूरी डोज़ न डालें।
  3. मिट्टी परीक्षण करवाएं — जिस खेत में जैविक कार्बन ज्यादा है, वहां नाइट्रोजन की ज़रूरत कम होती है।
  4. आखिरी डोज़ के बाद फसल को “पकने दें” — हरी फसल देखकर दोबारा यूरिया डालने का लालच न करें।
  5. देर से खाद मांगने वाली फसल में पहले कीट-रोग की जांच करें — कई बार पीलापन नाइट्रोजन की कमी नहीं, जड़ या कीट की समस्या होती है।
  6. पेड़ी में समय-सीमा और सख्त रखें (90–120 दिन)।
  7. खाद की दुकानदार की सलाह पर नहीं, मिट्टी परीक्षण और कृषि विज्ञान केंद्र की सिफारिश पर मात्रा तय करें — मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ/कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

आपके सवाल

सवाल: क्या अक्टूबर में बोए गन्ने में जनवरी में यूरिया डाल सकते हैं? जवाब: हां, डाल सकते हैं — जनवरी अक्टूबर बुवाई के लगभग 90वें दिन पड़ता है, जो आखिरी डोज़ की सीमा (120–150 दिन) के भीतर है। बस इसके बाद दोबारा यूरिया न डालें।

सवाल: फसल पीली दिख रही है, क्या यूरिया डाल दूं? जवाब: पहले कारण जांचें। पीलापन नाइट्रोजन की कमी के अलावा जलभराव, जड़ गलन, दीमक या आयरन की कमी से भी होता है। गलत निदान पर यूरिया डालना पैसे और फसल दोनों की बर्बादी है।

सवाल: क्या DAP और पोटाश पर भी यही समय-सीमा लागू होती है? जवाब: फॉस्फोरस (DAP) बुवाई के समय ही पूरा दे देना सबसे अच्छा है, क्योंकि वह जड़ विकास में काम आता है और धीरे-धीरे उपलब्ध होता है। पोटाश को दो किस्तों में (बुवाई + 90 दिन) देना ठीक रहता है — पोटाश चीनी प्रतिशत बढ़ाने में मदद करता है, इसलिए उसे देर तक देना नुकसानदेह नहीं है।

सवाल: पेड़ी में कटाई के कितने दिन बाद तक यूरिया दे सकते हैं? जवाब: अधिकतम 90–120 दिन। पेड़ी जल्दी पकती है, इसलिए पौध फसल से भी पहले खाद बंद कर दें।

सवाल: यूरिया की जगह सिर्फ गोबर की खाद से काम चल जाएगा? जवाब: गोबर की खाद मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी है, लेकिन उसमें नाइट्रोजन धीरे-धीरे और कम मात्रा में मिलता है। गन्ने जैसी भारी खपत वाली फसल में संतुलित दृष्टिकोण सबसे अच्छा है — जैविक खाद आधार बनाएं, रासायनिक खाद समय पर पूरक के रूप में दें।

सवाल: देर से यूरिया डाल ही दिया है, अब क्या करें? जवाब: घबराएं नहीं। अब और नाइट्रोजन न डालें, पोटाश की संतुलित डोज़ पर ध्यान दें (यह चीनी संचय में मदद करता है), सिंचाई नियंत्रित रखें और कटाई सही परिपक्वता पर करें। अगली बार कैलेंडर बनाकर चलें।


नोट: इस गाइड में दी गई समय-सीमाएं गन्ना अनुसंधान की सामान्य सिफारिशों पर आधारित हैं। आपके क्षेत्र, मिट्टी और किस्म के हिसाब से मामूली अंतर हो सकता है — सटीक मात्रा और समय के लिए अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या गन्ना विकास विभाग से सलाह ज़रूर लें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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