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गन्ने की खेती का खर्च 50% घटाएं: 2026-27 में काम आने वाले 8 स्मार्ट यंत्र और 80% तक अनुदान की पूरी जानकारी

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 2, 2026 • 11 min read
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गन्ने की खेती का खर्च 50% घटाएं: 2026-27 में काम आने वाले 8 स्मार्ट यंत्र और 80% तक अनुदान की पूरी जानकारी
अंतिम अपडेट: October 2, 2026 9:12 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बिजनौर के एक किसान रामपाल सिंह ने पिछले सीजन 6 एकड़ गन्ना बोया था। बुवाई के समय मजदूर ढूंढने में चार दिन निकल गए, गन्ना कटाई के वक्त हालत और खराब — मजदूर आधे घंटे में गन्ने के बंध की सौदेबाजी करके जाते थे। उस सीजन उनका कुल खर्च बढ़कर इतना हो गया कि भुगतान की रकम का एक बड़ा हिस्सा मजदूरी में ही चला गया। इस बार उन्होंने ट्रेंच ओपनर और रैटून मैनेजर मशीन से बुवाई और पेड़ी प्रबंधन किया, और उनकी लागत पिछले साल के मुकाबले करीब आधी रह गई।

यह कहानी अकेली नहीं है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती की सबसे बड़ी चुनौती आज जमीन या बीज नहीं, बल्कि मजदूर और बढ़ती लागत है। इसका एक ही स्थायी इलाज है — यंत्रीकरण। सही यंत्र सही समय पर लग जाए तो गन्ने की खेती की लागत 40 से 50 प्रतिशत तक घट सकती है, काम समय पर होता है, और उपज भी बढ़ती है। इस गाइड में हम 2026-27 सीजन में काम आने वाले 8 स्मार्ट यंत्र, उनके अनुदान की पूरी प्रक्रिया और किराए पर यंत्र लेने का गणित — सब कुछ विस्तार से बता रहे हैं।

2026-27 का सबसे बड़ा सवाल: मजदूरी कहां से?

गन्ना एक मेहनत-मांग वाली फसल है। बुवाई से लेकर कटाई तक हर चरण में मजदूर चाहिए — खेत की तैयारी, बीज की कटाई और बुवाई, निराई-गुड़ाई, खाद देना, स्प्रे करना और आखिर में गन्ने की कटाई व छीलाई। जिस गति से ग्रामीण मजदूर शहरों की ओर जा रहे हैं, हर साल गन्ना क्षेत्र में मजदूरी बढ़ रही है। कटाई के समय कुछ इलाकों में गन्ना खड़ा रहता है क्योंकि मजदूर ही नहीं मिलते, और पर्ची का समय निकल जाता है।

दूसरी तरफ, सरकार और चीनी मिलें दोनों यंत्रीकरण को बढ़ावा दे रही हैं। कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) योजना के तहत व्यक्तिगत यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है, और फार्म मशीनरी बैंकों को 80 प्रतिशत तक सहायता मिलती है। यानी यंत्र अब पहले जैसा दूर का सपना नहीं रहा — सही योजना से हर किसान की पहुंच में है। सवाल सिर्फ यह है कि कौन-सा यंत्र आपके खेत के काम का है, और अनुदान कैसे मिलेगा।

पहला यंत्र: ट्रेंच ओपनर और ट्रेंच प्लांटर

शरदकालीन और वसंतकालीन बुवाई में ट्रेंच विधि आज सबसे सुझाई जाने वाली विधि है। ट्रेंच ओपनर ट्रैक्टर से चलने वाला यंत्र है जो एक बार में 90 से 120 सेंटीमीटर चौड़ी और गहरी नाली (ट्रेंच) खोद देता है। इस नाली में बीज गन्ना बोया जाता है।

ट्रेंच प्लांटर इससे एक कदम आगे है — यह नाली खोलता है, बीज गन्ने के टुकड़े काटकर नाली में डालता है, दवा/उपचार भी लगा सकता है, और ऊपर से मिट्टी ढक देता है। यानी बुवाई का पूरा काम एक ही चक्कर में। कई चीनी मिलें अपने गन्ना विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को इन यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही हैं। बुवाई की लागत इस यंत्र से करीब आधी घट जाती है और कतारों की दूरी एक समान होने से बाद में निराई-गुड़ाई और कटाई भी आसान होती है।

दूसरा यंत्र: ऑटोमैटिक केन प्लांटर (कटर कम प्लांटर)

यह मशीन बुवाई के काम को पूरी तरह बदल देती है। इसमें ऊपर से पूरे गन्ने के डंडे डाले जाते हैं, मशीन उन्हें सही लंबाई के टुकड़ों (सेट्स) में काटती है, नाली खोलकर टुकड़ों को सही दूरी पर डालती है, नाली में खाद भी डाल सकती है और मिट्टी से ढक देती है। बाजार में इनकी कीमत लगभग 35 हजार से ढाई लाख रुपये तक होती है, आकार और क्षमता के हिसाब से।

कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत इन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत और विशेष श्रेणी (अनुसूचित जाति/जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग) के किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। एक अनुमान के मुताबिक इस मशीन से गन्ने की बुवाई की लागत लगभग 53 प्रतिशत तक घट जाती है। हाथ से बुवाई में जो काम 10 मजदूर दो दिन में करते हैं, वह मशीन एक दिन में कर देती है।

तीसरा यंत्र: रैटून मैनेजर मशीन

पेड़ी (रटून) फसल उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की दूसरी कमाई है, लेकिन इसका प्रबंधन मुख्य फसल से अलग तरीके से करना पड़ता है। रैटून मैनेजर एक ट्रैक्टर-चालित यंत्र है जो कटाई के बाद एक ही चक्कर में कई काम कर देता है — ठूंठों के पास की मिट्टी को खोदकर हवा लगाना, खरपतवार काटना और खाद को जड़ क्षेत्र में डालना।

कई मिलें अपने क्षेत्र के किसानों को यह यंत्र अनुदान पर उपलब्ध करा रही हैं। पेड़ी में समय पर यह काम हो जाए तो कल्लों की संख्या बढ़ती है और उपज मुख्य फसल के बराबर तक पहुंच सकती है। ध्यान रहे — पेड़ी को मुख्य फसल से करीब 25 प्रतिशत अधिक नाइट्रोजन की जरूरत होती है, इसलिए खाद की मात्रा विशेषज्ञ की सलाह से ही तय करें।

चौथा यंत्र: पावर वीडर और इंटर-रो वीडर

निराई-गुड़ाई गन्ने की खेती का सबसे मजदूर-खपाऊ काम है। पावर वीडर एक छोटा इंजन-चालित यंत्र है जो कतारों के बीच की मिट्टी खोदकर खरपतवार निकाल देता है। इंटर-रो वीडर ट्रैक्टर से चलता है और बड़ी जोत में एक दिन में कई एकड़ की निराई कर देता है।

खरपतवारनाशी के सुरक्षित प्रयोग के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल करें — रासायनिक खरपतवारनाशी की सही मात्रा और छिड़काव के तरीके के लिए कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। यंत्र से निराई करने पर मिट्टी में हवा लगती है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और खरपतवार पर रसायन की निर्भरता भी घटती है।

पांचवां यंत्र: स्प्रेयर — ट्रैक्टर-माउंटेड और ड्रोन

गन्ने में समय-समय पर कीटनाशी, खरपतवारनाशी और पोषक तत्वों का छिड़काव करना पड़ता है। हाथ के स्प्रेयर से यह काम धीमा होता है और दवा बराबर नहीं पड़ती। ट्रैक्टर-माउंटेड बूम स्प्रेयर एक घंटे में कई एकड़ में एकसमान छिड़काव कर देता है — दवा की बचत होती है और फसल को बेहतर सुरक्षा मिलती है।

ड्रोन से छिड़काव अब नई तकनीक के रूप में आ रहा है, और SMAM योजना के तहत ड्रोन समेत यंत्रीकृत सेवाओं के लिए छोटे व सीमांत किसानों को प्रति हेक्टेयर 2000 रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के लिए स्प्रेयर मशीनों पर अनुदान की योजना भी चलाई है — पात्र किसान संबंधित विभाग की प्रक्रिया से आवेदन कर सकते हैं। दवा की सही मात्रा के लिए हमेशा कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

छठा यंत्र: गन्ना हार्वेस्टर

गन्ने की कटाई सबसे बड़ा खर्च है, और हार्वेस्टर इसका सबसे बड़ा समाधान — लेकिन यह सबसे महंगा यंत्र भी है। एक गन्ना हार्वेस्टर की कीमत करोड़ों में होती है, इसलिए यह व्यक्तिगत खरीद के बस की बात नहीं। इसका सही रास्ता है कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) या फार्म मशीनरी बैंक।

SMAM के तहत कस्टम हायरिंग सेंटरों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत (अधिकतम 250 लाख की परियोजना पर) और फार्म मशीनरी बैंकों को 80 प्रतिशत तक (अधिकतम 30 लाख पर) सहायता मिलती है। गांव स्तर पर FPO, स्वयं सहायता समूह या सहकारी समिति मिलकर मशीनरी बैंक बना सकते हैं, जहां से किसान किराए पर हार्वेस्टर ले सकते हैं। हार्वेस्टर से कटाई में समय की बचत होती है, गन्ना समय पर मिल पहुंचता है और वजन/रिकवरी का नुकसान घटता है।

सातवां यंत्र: चिजल प्लाउ और गहरी जुताई के यंत्र

गन्ना गहरी जड़ वाली फसल है। हर साल एक ही गहराई पर जुताई करने से मिट्टी में कठोर परत (हार्ड पैन) बन जाती है, जो जड़ों को नीचे जाने से रोकती है। चिजल प्लाउ मिट्टी की गहरी परत को तोड़े बिना पलटे — ऊपर की उपजाऊ मिट्टी वहीं रहती है और नीचे की कठोर परत टूट जाती है।

बुवाई से पहले हर 2-3 साल में एक बार चिजल प्लाउ से गहरी जुताई करने से जड़ों का विकास बेहतर होता है, पानी का रिसाव बढ़ता है और लंबे समय में उपज स्थिर रहती है। यह काम किराए के यंत्र से भी कराया जा सकता है — खरीदना जरूरी नहीं।

आठवां यंत्र: श्रेडर/मल्चर — पत्ती और कचरे का प्रबंधन

कटाई के बाद खेत में बची सूखी पत्तियां (ट्रैश) अक्सर जला दी जाती हैं, जिससे मिट्टी के जीवाणु मरते हैं और पोषक तत्व नष्ट होते हैं। श्रेडर या मल्चर इन पत्तियों को बारीक काटकर खेत में ही बिछा देता है। यह मल्च मिट्टी की नमी बचाता है, खरपतवार दबाता है और सड़कर जैविक खाद बन जाता है।

पराली प्रबंधन (CRM) योजना के तहत ऐसे यंत्रों पर भी अनुदान मिलता है। ट्रैश मल्चिंग पेड़ी फसल में विशेष रूप से फायदेमंद है — नमी बनी रहती है और शुरुआती कल्लों को ठंड/गर्मी से सुरक्षा मिलती है।

अनुदान का पूरा गणित: कहां, कितना, कैसे

अब सबसे जरूरी हिस्सा — पैसा कहां से आएगा। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में अनुदान की मुख्य श्रेणियां इस प्रकार हैं:

यंत्र/श्रेणीअनुदानकिसे मिलेगा
व्यक्तिगत कृषि यंत्रलागत का 40%सामान्य किसान
व्यक्तिगत कृषि यंत्रलागत का 50%SC/ST, छोटे-सीमांत, महिला किसान
कस्टम हायरिंग सेंटरपरियोजना लागत का 40%ग्रामीण उद्यमी, सहकारी समिति, FPO
फार्म मशीनरी बैंकपरियोजना लागत का 80%FPO, स्वयं सहायता समूह, किसान समिति
यूपी कृषि यंत्र अनुदान50% तकटोकन व्यवस्था से छोटे-सीमांत किसान
मिल गन्ना विकास कार्यक्रम50% तकसंबंधित मिल क्षेत्र के गन्ना किसान

उत्तर प्रदेश में कृषि यंत्र अनुदान के लिए किसान agriculture.up.gov.in या upagriculture.com पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं। कई योजनाओं में टोकन व्यवस्था और ई-लॉटरी से लाभार्थियों का चयन होता है, इसलिए आवेदन के समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, फोटो और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर तैयार रखें। अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के जरिए आती है।

एक और रास्ता आपकी चीनी मिल है। सीतापुर, बड़ौत जैसे क्षेत्रों में मिलों ने अपने गन्ना विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को ट्रेंच प्लांटर, रैटून मैनेजर, स्प्रेयर और छोटे ट्रैक्टर 50 प्रतिशत अनुदान पर वितरित किए हैं। अपनी मिल के गन्ना विभाग से संपर्क करें — कई बार मिल का अनुदान सरकारी योजना से तेज और आसान मिलता है।

खरीदें या किराए पर लें? सही फैसला ऐसे करें

हर यंत्र खरीदना जरूरी नहीं। एक सीधा नियम अपनाएं:

  • रोज/हर सीजन काम आने वाले यंत्र खरीदें — स्प्रेयर, पावर वीडर, छोटा ट्रैक्टर। इन पर 40-50% अनुदान लेकर मालिकाना हक सबसे फायदेमंद है।
  • साल में 1-2 बार काम आने वाले महंगे यंत्र किराए पर लें — हार्वेस्टर, चिजल प्लाउ, लेजर लैंड लेवलर। कस्टम हायरिंग सेंटर से किराए पर लेना खरीदने से सस्ता पड़ता है।
  • गांव स्तर पर समूह बनाएं — 8-10 किसान मिलकर FPO या समिति बनाकर फार्म मशीनरी बैंक के लिए 80% सहायता ले सकते हैं। एक मशीन 100-200 किसानों तक की सेवा दे सकती है।

छोटे और सीमांत किसानों के लिए समूह वाला रास्ता सबसे अच्छा है — न बड़ा कर्ज, न रखरखाव की टेंशन, और मशीन समय पर मिलती है।

यंत्र लेते समय 5 सावधानियां

  1. प्रशिक्षण जरूर लें — हर नया यंत्र चलाने से पहले डीलर या कृषि विभाग से संचालन का प्रशिक्षण लें। गलत इस्तेमाल से मशीन और फसल दोनों को नुकसान होता है।
  2. स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता जांचें — ऐसा यंत्र लें जिसके पुर्जे आपके जिले में आसानी से मिलते हों।
  3. वारंटी और सर्विस नेटवर्क — खरीद से पहले सर्विस सेंटर की दूरी और वारंटी की शर्तें लिखित में लें।
  4. ट्रैक्टर की क्षमता मिलाएं — हर इम्प्लीमेंट के लिए न्यूनतम HP की जरूरत होती है। कम HP के ट्रैक्टर पर भारी यंत्र लगाने से दोनों खराब होते हैं।
  5. अनुदान के नाम पर ठगी से बचें — अनुदान सिर्फ सरकारी पोर्टल या अधिकृत मिल कार्यक्रम से मिलता है। कोई एजेंट अग्रिम पैसे मांगे तो कृषि विभाग में शिकायत करें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: गन्ने की खेती में सबसे ज्यादा लागत किस काम में आती है? उत्तर: कटाई और बुवाई में सबसे ज्यादा मजदूरी लगती है। हार्वेस्टर से कटाई और प्लांटर से बुवाई करने पर यह लागत 40-50 प्रतिशत तक घट सकती है।

प्रश्न: छोटे किसान महंगे यंत्र कैसे अपनाएं? उत्तर: व्यक्तिगत खरीद की जगह कस्टम हायरिंग सेंटर से किराए पर यंत्र लें, या गांव के किसानों के साथ FPO/समिति बनाकर फार्म मशीनरी बैंक के लिए 80% सहायता लें।

प्रश्न: कृषि यंत्र पर अनुदान के लिए कहां आवेदन करें? उत्तर: उत्तर प्रदेश में agriculture.up.gov.in या upagriculture.com पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन होता है। कई योजनाओं में टोकन और ई-लॉटरी से चयन होता है। आधार कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो और आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर तैयार रखें।

प्रश्न: क्या चीनी मिल भी यंत्रों पर अनुदान देती है? उत्तर: हां, कई मिलें अपने गन्ना विकास कार्यक्रम के तहत ट्रेंच प्लांटर, रैटून मैनेजर मशीन, स्प्रेयर जैसे यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देती हैं। अपनी मिल के गन्ना विभाग से संपर्क करें।

प्रश्न: रैटून मैनेजर मशीन पेड़ी में कैसे मदद करती है? उत्तर: यह एक ही चक्कर में ठूंठों के पास मिट्टी खोदना, खरपतवार निकालना और जड़ क्षेत्र में खाद डालना — तीनों काम करती है। समय पर इस्तेमाल से कल्लों की संख्या बढ़ती है और पेड़ी की उपज सुधरती है।

प्रश्न: ड्रोन से छिड़काव पर भी अनुदान मिलता है? उत्तर: SMAM योजना के तहत ड्रोन समेत यंत्रीकृत सेवाओं के लिए छोटे व सीमांत किसानों को प्रति हेक्टेयर 2000 रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। दवा की सही मात्रा के लिए कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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