
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए गन्ने की खेती (Sugarcane Cultivation) केवल एक फसल नहीं, बल्कि पूरे साल की आजीविका की रीढ़ है। गन्ने की फसल खेत में लगभग 10 से 14 महीने तक खड़ी रहती है। यदि किसान सही समय पर खाद, पानी, कीट नियंत्रण और निराई-गुड़ाई न करें, तो पैदावार में 30% से 50% तक की भारी गिरावट आ सकती है।
इसीलिए, गन्ने से प्रति एकड़ 800 से 1000 क्विंटल तक बंपर उत्पादन लेने के लिए एक वैज्ञानिक और सटीक महीने-वार कृषि कैलेंडर (Month-by-Month Farming Calendar) का पालन करना अनिवार्य है। इस गाइड में हम जनवरी से दिसंबर तक हर महीने किए जाने वाले कृषि कार्यों, खाद-दवा के सही शेड्यूल, सिंचाई प्रबंधन और सावधानियों की पूरी जानकारी दे रहे हैं।
गन्ने की खेती के 5 मुख्य स्तंभ (Key Pillars of Sugarcane Farming)
गन्ने के पूरे 12 महीनों के चक्र को समझने से पहले इन 5 बुनियादी सिद्धांतों को जानना आवश्यक है:
- समय पर बुवाई (Timely Sowing): शरदकालीन (अक्टूबर-नवंबर) या वसंतकालीन (फरवरी-मार्च) बुवाई सही समय पर करें।
- संतुलित पोषण (Balanced Nutrition): मिट्टी जांच के आधार पर NPK, सल्फर, जिंक और जैविक खादों का संतुलित उपयोग।
- सटीक जल प्रबंधन (Precision Irrigation): कल्ले फूटते समय और भीषण गर्मी में नमी बनाए रखना तथा वर्षा ऋतु में जल निकासी।
- सक्रिय कीट व रोग रोकथाम (Pest & Disease Control): कंसुआ (Early Shoot Borer), चोटी बेधक (Top Borer) और पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng) का पूर्व-निवारक प्रबंधन।
- वैज्ञानिक पेड़ी प्रबंधन (Ratoon Management): कटाई के तुरंत बाद ठूंठ की छंटाई और पोषण देना।
गन्ने की खेती का 12 महीने का सम्पूर्ण कैलेंडर (January to December)
नीचे जनवरी से लेकर दिसंबर तक का विस्तृत कृषि कैलेंडर दिया गया है:
1. जनवरी (January) — कटाई, पेड़ी प्रबंधन व शरद गन्ने की देखभाल
जनवरी का महीना कड़ाके की ठंड और पाले का होता है। इस समय चीनी मिलों का पेराई सत्र चरम पर होता है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • परिपक्व गन्ने की जमीन की सतह से कटाई • पेड़ी (Ratoon) गन्ने के ठूंठों की छंटाई (Stubble Shaving) • शरदकालीन गन्ने में ओस/पाले से बचाव | • पेड़ी खेत में 50 किग्रा यूरिया + 50 किग्रा SSP प्रति एकड़ • ट्राइकोडर्मा 2 किग्रा/एकड़ गोबर खाद में मिलाकर डालें | 15-20 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई (पाले से सुरक्षा हेतु) | • गन्ने की कटाई हमेशा जमीन से सटाकर करें ताकि नई कोंपलें मजबूत निकलें • सूखी पत्तियों को खेत में न जलाएं, मल्चिंग करें |
विशेष टिप: जनवरी में रात का तापमान गिरने पर पाले का खतरा रहता है। खेत की उत्तर-पश्चिम दिशा में धुआं करें और शाम के समय हल्की सिंचाई करें।
2. फरवरी (February) — वसंतकालीन बुवाई की तैयारी व शुरुआत
फरवरी में तापमान बढ़ने लगता है और यह वसंतकालीन गन्ने (Spring Sugarcane) की बुवाई का सबसे आदर्श समय शुरू होने का संकेत है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • खेत की 4-5 बार गहरी जुताई व पाटा • ट्रेंच विधि से 4 से 5 फीट की दूरी पर नाली बनाना • बीज चयन (2 या 3 आंख वाले टुकड़े) व बीज शोधन | • बेसल डोज (प्रति एकड़): 1 बैग DAP + 1 बैग MOP + 25 किग्रा यूरिया + 10 किग्रा जिंक सल्फेट + 10 किग्रा फेरस सल्फेट • बीज शोधन: कार्बेंडाजिम (2 ग्राम/लीटर) + इमिडाक्लोप्रिड | बुवाई के तुरंत बाद पहली हल्की सिंचाई (नाली में पानी) | • रोगग्रस्त गन्ने (जैसे लाल सड़न / Red Rot प्रभावित) का बीज कभी न चुनें • गन्ने की उन्नत किस्में जैसे Co 0118, Co 15023, CoLk 14201 का चुनाव करें |
3. मार्च (March) — मुख्य वसंतकालीन बुवाई व अंकुरण देखभाल
मार्च का महीना उत्तर प्रदेश में वसंतकालीन गन्ने की बुवाई का पीक सीजन होता है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • वसंतकालीन गन्ने की शत-प्रतिशत बुवाई पूरी करना • फरवरी में बोए गन्ने में पहली निराई-गुड़ाई • दीमक व कंसुआ कीट (Shoot Borer) की निगरानी | • दीमक/कंसुआ रोकथाम: फिप्रोनिल 0.3% GR (8-10 किग्रा/एकड़) या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) 150 मिली/एकड़ नाली में डालें | 10-12 दिन के अंतराल पर नियमित सिंचाई रखें | • बुवाई के समय गन्ने के टुकड़ों को 2-3 इंच से ज्यादा गहरी मिट्टी में न दबाएं, अन्यथा अंकुरण प्रभावित होगा • खाली स्थानों (Gaps) पर तुरंत गैप फिलिंग करें |
4. अप्रैल (April) — कल्ले फूटना (Tillering) व खरपतवार नियंत्रण
अप्रैल में तेज धूप शुरू होती है और गन्ने में कल्ले (Tillers) तेजी से बनते हैं। यह फसल की नींव का समय है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • पहली टॉप ड्रेसिंग (Top Dressing) • खरपतवार नियंत्रण (Weed Control) • कल्ले बढ़ाने के लिए हल्की गुड़ाई | • 40-45 किग्रा यूरिया + 5 किग्रा जाइम / बायोविटा प्रति एकड़ • खरपतवार नाशक: एट्राजिन 50% WP (800 ग्राम/एकड़) बुवाई के 30 दिनों के भीतर | 8 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई जरूरी | • मिट्टी में दरारें न पड़ने दें, अन्यथा कल्ले सूखने लगेंगे • कंसुआ (Shoot Borer) के प्रकोप पर नजर रखें; ग्रसित पौधों को जमीन से काटकर नष्ट करें |
5. मई (May) — भीषण गर्मी प्रबंधन, टॉप बोरर रोकथाम व मल्चिंग
मई का महीना गन्ने के लिए सबसे कठिन परीक्षा का समय होता है। अत्यधिक तापमान और लू से फसल को बचाना प्राथमिक उद्देश्य है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • दूसरी टॉप ड्रेसिंग • सूखी पत्तियों या भूसे से मल्चिंग (Mulching) • चोटी बेधक (Top Borer) की तीसरी पीढ़ी पर नियंत्रण | • 45 किग्रा यूरिया + 10 किग्रा सल्फर 90% (WDG) प्रति एकड़ • चोटी बेधक हेतु: कोराजन (Coragen) 150 मिली या फर्टेरा 4 किग्रा/एकड़ जड़ों के पास देकर सिंचाई करें | 6 से 8 दिन के अंतराल पर लगातार पानी दें (ड्रिप सिंचाई सर्वोत्तम) | • दोपहर की तेज धूप में सिंचाई न करें; हमेशा सुबह या देर शाम पानी दें • चोटी बेधक के अंडों के समूह को पत्तियों से तोड़कर नष्ट करें |
6. जून (June) — अंतिम खाद, मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up) व बंधाई की तैयारी
मानसून से ठीक पहले जून में गन्ने को मजबूत बनाना और गिरने से बचाने की तैयारी करना सबसे जरूरी काम है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • गन्ने की जड़ों पर भारी मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up) • यूरिया की अंतिम खुराक पूरी करना • जल निकासी नालियों (Drainage Channels) की सफाई | • अंतिम खुराक: 40 किग्रा यूरिया + 20 किग्रा पोटाश (MOP) प्रति एकड़ जड़ों में डालकर तुरंत मिट्टी चढ़ाएं | बारिश न होने तक 7-8 दिन में सिंचाई जारी रखें | • जून के बाद जमीन में यूरिया डालना बंद करें, क्योंकि देर से यूरिया देने से कीट-रोग बढ़ते हैं और चीनी की रिकवरी घटती है • खेत के चारों ओर जलनिकासी नाली तैयार रखें |
7. जुलाई (July) — मानसून, जलभराव प्रबंधन व पोक्का बोइंग नियंत्रण
जुलाई में मूसलाधार बारिश होती है। गन्ने की लंबाई तेजी से बढ़ती है, लेकिन जलभराव और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • गन्ने की पहली बंधाई (Tying) — 2-3 थानों को आपस में बांधना • खेत से अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी • पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng) रोग का छिड़काव | • पोक्का बोइंग नियंत्रण: कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (500 ग्राम) या कार्बेन्डाजिम (250 ग्राम) प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें | प्राकृतिक वर्षा पर्याप्त; लंबे सूखे की स्थिति में ही सिंचाई करें | • खेत में 24 घंटे से अधिक पानी जमा न रहने दें; जलभराव से जड़ें सड़ने लगती हैं • गन्ने की पत्तियों को लपेटकर बांधने से बचें, केवल तनों को आपस में सहारा दें |
8. अगस्त (August) — दूसरी बंधाई व पत्तियों पर पोषण स्प्रे
अगस्त में गन्ना 8 से 10 फीट तक ऊंचा हो जाता है। तेज हवाओं और तूफानों में फसल को गिरने (Lodging) से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • गन्ने की दूसरी बंधाई (कैंचीनुमा बंधाई) • निचली पीली व सूखी पत्तियों को हटाना (Detrashing) • सूक्ष्म पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़काव (Foliar Spray) | • 19:19:19 (NPK) 1 किग्रा + 100 ग्राम बोरॉन प्रति एकड़ का फोलियर स्प्रे • लाल सड़न (Red Rot) प्रभावित पौधों को जड़ से उखाड़कर ब्लीचिंग पाउडर गड्ढे में डालें | वर्षा पर निर्भर; जल निकासी दुरुस्त रखें | • फसल को गिरने न दें; गिरा हुआ गन्ना 20% तक वजन और चीनी रिकवरी खो देता है • सूखी पत्तियां हटाने से खेत में हवा और धूप का संचार बेहतर होता है |
9. सितंबर (September) — शरदकालीन बुवाई की तैयारी व पोटाश स्प्रे
सितंबर में मानसून विदा होने लगता है और गन्ने में सुक्रोज (शर्करा) निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है। साथ ही शरदकालीन बुवाई (Autumn Sowing) की तैयारी शुरू होती है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • शरदकालीन गन्ने के लिए खेत की गहरी जुताई व तैयारी • खड़े गन्ने की तीसरी और अंतिम बंधाई • सफेद मक्खी (White Fly) व पायरिला (Pyrilla) की रोकथाम | • 0:0:50 (पोटेशियम सल्फेट) 1.5 किग्रा प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें (मिठास व वजन बढ़ाने हेतु) • पायरिला हेतु: इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL (60 मिली/एकड़) | बारिश रुकने पर 12-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई शुरू करें | • शरदकालीन बुवाई हेतु स्वस्थ और प्रमाणित नर्सरी/बीज की अग्रिम बुकिंग करें • 0:0:50 का स्प्रे गन्ने के वजन और शुगर रिकवरी में भारी वृद्धि करता है |
10. अक्टूबर (October) — शरदकालीन गन्ने की मुख्य बुवाई व सहफसली खेती
अक्टूबर गन्ने की शरदकालीन बुवाई (Autumn Planting) का सर्वोत्तम और स्वर्णिम महीना है। इसमें वसंतकालीन की तुलना में 20-25% अधिक उपज मिलती है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • शरदकालीन गन्ने की ट्रेंच विधि से बुवाई (दूरी 4.5 से 5 फीट) • सहफसली खेती (सरसों, आलू, मटर, लहसुन, चना की बुवाई) • खड़ी फसल में पकने की जांच | • शरद बुवाई बेसल डोज: 1.5 बैग DAP + 1 बैग पोटाश + 25 किग्रा यूरिया + 10 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति एकड़ • बीज उपचार: ट्राइकोडर्मा या बाविस्टिन से अनिवार्य रूप से करें | बुवाई उपरांत हल्की सिंचाई; खड़ी फसल में 15-20 दिन पर पानी | • सहफसल लेने से किसान को अतिरिक्त आमदनी होती है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं • ट्रेंच विधि अपनाने से सहफसलों के लिए पर्याप्त जगह और धूप मिलती है |
11. नवंबर (November) — पेराई सत्र का आरंभ, मिल पर्ची व कटाई
नवंबर में उत्तर प्रदेश की सभी चीनी मिलें शुरू हो जाती हैं। अगेती (Early) किस्मों की कटाई शुरू होती है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • चीनी मिल आपूर्ति कैलेंडर (eGanna / CaneUp) में सट्टा व पर्ची जांचना • अगेती प्रजातियों (Co 0238, Co 0118, Co 15023) की कटाई • कटाई के तुरंत बाद खेत की सफाई | • कटाई वाले खेत में किसी रासायनिक खाद की जरूरत नहीं • शरदकालीन नव-अंकुरित गन्ने में 25 किग्रा यूरिया की पहली खुराक | कटाई से 15-20 दिन पहले सिंचाई पूर्णतः बंद करें | • गन्ने की कटाई से पहले खेत में पानी न दें, इससे चीनी का प्रतिशत गिर जाता है • पर्ची मिलने के बाद ही गन्ना काटें ताकि गन्ने की ताजगी बनी रहे और वजन न घटे |
12. दिसंबर (December) — सर्दियों में कटाई, पेड़ी देखभाल व पाले से सुरक्षा
दिसंबर में कटाई का कार्य पूरे जोर-शोर से चलता है और खाली हुए खेतों में पेड़ी गन्ने का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है।
| प्रमुख कार्य / गतिविधि | खाद एवं दवा की मात्रा | सिंचाई का नियम | सावधानियां व विशेष टिप्स |
|---|---|---|---|
| • मुख्य फसल की जमीन की सतह से कटाई • पेड़ी (Ratoon) गन्ने के ठूंठ छांटना व अंतर-जुताई • शरदकालीन गन्ने में खरपतवार नियंत्रण | • पेड़ी फसल में: 50 किग्रा DAP + 50 किग्रा यूरिया + 25 किग्रा पोटाश + 10 किग्रा फेरस सल्फेट प्रति एकड़ • ठूंठों पर कार्बेंडाजिम 0.1% का छिड़काव | 20-25 दिन के अंतराल पर पाले से बचाव हेतु हल्की सिंचाई | • कटे हुए गन्ने को मिल तक 24-48 घंटे के भीतर पहुंचाएं (देरी से ड्रायेज व रिकवरी लॉस होता है) • पेड़ी की पत्तियों को मल्च बनाकर बिछाएं, कभी भी आग न लगाएं |
गन्ने की खेती के विशेष वैज्ञानिक मॉड्यूल
1. बुवाई तकनीक: ट्रेंच विधि बनाम पारंपरिक विधि
उत्तर प्रदेश में पारंपरिक 2-2.5 फीट की विधि के स्थान पर ट्रेंच विधि (Trench Method - 4 से 5 फीट) क्रांतिकारी साबित हुई है:
[नाली 1 (गन्ना)] <------ 4 से 5 फीट दूरी ------> [नाली 2 (गन्ना)]
| |
(गहराई 10-12 इंच) (गहराई 10-12 इंच)
| |
[बीच में सहफसल: आलू / सरसों / मटर / चना / लहसुन]
- ट्रेंच विधि के लाभ:
- हवा और सूर्य का प्रकाश हर पौधे तक पहुंचता है, जिससे कल्ले अधिक निकलते हैं।
- ड्रिप सिंचाई लगाना आसान होता है, जिससे 50-60% पानी की बचत होती है।
- आसानी से मिट्टी चढ़ाई जा सकती है, जिससे गन्ना गिरता नहीं है।
- बीच की खाली जगह में सहफसली खेती करके किसान प्रति एकड़ ₹30,000 से ₹50,000 की अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।
2. संतुलित उर्वरक प्रबंधन चार्ट (Fertilizer Schedule Per Acre)
| समय / अवस्था | यूरिया (Urea) | डीएपी (DAP) | पोटाश (MOP) | सूक्ष्म पोषक तत्व / अन्य |
|---|---|---|---|---|
| बुवाई के समय (Basal) | 25 किग्रा | 50 किग्रा (1 बैग) | 40-50 किग्रा | 10 किग्रा जिंक + 10 किग्रा फेरस + 5 टन गोबर खाद |
| बुवाई के 45 दिन बाद | 45 किग्रा | — | — | 5 किग्रा जाइम / सीवीड एक्सट्रैक्ट |
| बुवाई के 90 दिन बाद | 45 किग्रा | — | — | 10 किग्रा सल्फर 90% WDG |
| मिट्टी चढ़ाते समय (120 दिन) | 40 किग्रा | — | 20 किग्रा | — |
| अगस्त-सितंबर (स्प्रे) | — | — | — | 0:0:50 (1.5 किग्रा) + बोरॉन 100 ग्राम का स्प्रे |
3. प्रमुख कीट एवं रोग नियंत्रण सारणी (Pest & Disease Control)
| कीट / बीमारी | लक्षण | प्रभावी रोकथाम एवं रासायनिक उपचार |
|---|---|---|
| कंसुआ (Shoot Borer) | 1-3 महीने के पौधों में बीच की गोभ सूख जाती है (Dead Heart) | फिप्रोनिल 0.3% GR (8-10 किग्रा/एकड़) या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) 150 मिली प्रति 400 लीटर पानी में जड़ों के पास ड्रेन्चिंग |
| चोटी बेधक (Top Borer) | पत्तियों में छर्रे जैसे छेद, पौधे की बढ़वार रुकना, ‘बंची टॉप’ बनना | मई-जून में कोराजन 150 मिली/एकड़ या फर्टेरा 4 किग्रा/एकड़ जड़ों में डालें और तुरंत पानी दें |
| पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng) | शीर्ष पत्तियां विकृत, मुड़ी-तुड़ी और पीली-सफेद होकर सड़ने लगती हैं | कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP (500 ग्राम) या कार्बेंडाजिम 12% + मैंकोजेब 63% (500 ग्राम) प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में स्प्रे |
| लाल सड़न (Red Rot) | तीसरी-चौथी पत्ती पीली पड़कर सूखना, चीरने पर अंदर लाल रंग व सफेद धब्बे, सिरके जैसी बदबू | बीज शोधन (ट्राइकोडर्मा/कार्बेंडाजिम), रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर गड्ढे में जलाना व ब्लीचिंग पाउडर डालना; Co 0238 के स्थान पर Co 0118, Co 15023 लगाना |
4. वैज्ञानिक पेड़ी (Ratoon) प्रबंधन से अधिक मुनाफा
पेड़ी गन्ने में बुवाई और बीज का खर्च नहीं होता, इसलिए इसमें शुद्ध मुनाफा सबसे अधिक होता है:
- सटीक छंटाई: कटाई के तुरंत बाद जमीन से लगे ठूंठों को तेज हंसिए या स्टबल शेवर (Stubble Shaver) से जमीन की सतह से काटें।
- पत्ती प्रबंधन: पत्तियों को खेत में न जलाएं; ट्रैश कटर (Trash Cutter) से काटकर खेत में फैलाएं या दो पंक्तियों के बीच बिछाकर मल्च बनाएं।
- शुरुआती खुराक: पहले पानी के साथ 50 किग्रा DAP + 50 किग्रा यूरिया + 10 किग्रा सल्फर प्रति एकड़ अवश्य दें।
- गैप फिलिंग: जहां 1.5 फीट से ज्यादा जगह खाली हो, वहां सिंगल बड या पॉलीबैग में तैयार पौधों से तुरंत गैप भरें।
किसान चेकलिस्ट: क्या करें और क्या न करें (Dos and Don’ts)
✅ क्या करें (Dos)
- हमेशा प्रमाणित नर्सरी या शोध संस्थान से बीज लें और बीज शोधन के बाद ही बुवाई करें।
- कल्ले फूटते समय (मार्च-मई) खेत में निरंतर नमी बनाए रखें।
- मानसून से पहले (जून माह में) गन्ने की जड़ों पर पर्याप्त मिट्टी अवश्य चढ़ाएं।
- गन्ने की समय पर दो से तीन बार बंधाई करें ताकि तेज आंधी में फसल न गिरे।
- चीनी मिल आपूर्ति और पर्ची कैलेंडर के लिए CaneUp और eGanna App का नियमित उपयोग करें।
❌ क्या न करें (Don’ts)
- जुलाई के बाद जमीन में यूरिया खाद बिल्कुल न डालें।
- गन्ने की सूखी पत्तियों को खेत में कभी न जलाएं; इससे मित्र कीट मरते हैं और मिट्टी की उर्वरता घटती है।
- लाल सड़न (Red Rot) से ग्रसित खेत का गन्ना बीज के रूप में कभी प्रयोग न करें।
- कटाई से 15-20 दिन पहले सिंचाई न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुवाई का सबसे अच्छा महीना कौन सा है?
उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुवाई के दो मुख्य मौसम हैं:
- शरदकालीन बुवाई: 15 सितंबर से 31 अक्टूबर (सर्वोत्तम उपज एवं सहफसली खेती हेतु)।
- वसंतकालीन बुवाई: 15 फरवरी से 31 मार्च।
Q2. गन्ने की फसल में यूरिया कब तक देना चाहिए?
गन्ने की फसल में यूरिया की पूरी खुराक बुवाई के 90 से 100 दिनों के भीतर (अधिकतम जून के प्रथम सप्ताह तक) समाप्त कर देनी चाहिए। मानसून (जुलाई-अगस्त) में यूरिया डालने से गन्ने में कीट-रोग बढ़ते हैं और चीनी की मात्रा घट जाती है।
Q3. गन्ने को गिरने से बचाने के लिए सबसे सही समय क्या है?
गन्ने को गिरने से बचाने के लिए जून के अंत में पहली बार जड़ों पर मजबूत मिट्टी चढ़ाएं। इसके बाद जुलाई के अंत में पहली बंधाई और अगस्त के मध्य में दूसरी कैंचीनुमा बंधाई अवश्य करें।
Q4. गन्ने का वजन और मोटाई बढ़ाने के लिए क्या स्प्रे करें?
अगस्त-सितंबर के महीने में 0:0:50 (पोटेशियम सल्फेट) 1.5 किग्रा + 100 ग्राम बोरॉन प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने से गन्ने का वजन, मोटाई और सुक्रोज (मिठास) तेजी से बढ़ती है।
यह भी पढ़ें (Related Useful Guides)
- CaneUp — उत्तर प्रदेश गन्ना पर्ची व सट्टा कैलेंडर 2026-27
- eGanna App Download 2026 — नया वर्जन डाउनलोड करें
- गन्ने में सिंचाई का सही तरीका — पानी व लागत बचाने के टिप्स
- गन्ने में खरपतवार नियंत्रण — 7 असरदार रासायनिक व जैविक तरीके
- गन्ना MSP रेट 2026-27 — देखें प्रति क्विंटल ताजा भाव
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