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गन्ने की उन्नत किस्में 2026 — सबसे अच्छी और ज़्यादा उत्पादन देने वाली किस्में

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 31, 2026 • 6 min read
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गन्ने की उन्नत किस्में 2026 — सबसे अच्छी और ज़्यादा उत्पादन देने वाली किस्में
अंतिम अपडेट: August 31, 2026 10:10 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ने की उन्नत किस्में चुनना गन्ने की खेती में सफलता की पहली सीढ़ी है। 2026 में कई नई और बेहतर किस्में उपलब्ध हैं जो अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधकता और बेहतर चीनी रिकवरी देती हैं। इस लेख में हम भारत में उगाई जाने वाली सभी प्रमुख गन्ने की किस्मों की पूरी जानकारी देंगे — कौन सी किस्म कहाँ उगाएं, कितना उत्पादन देती है, और कौन सी बीमारियों से बचाती है।


गन्ने की किस्म चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें

सही किस्म चुनने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:

  1. क्षेत्र का मौसम — गर्म, ठंडा या मध्यम
  2. मिट्टी का प्रकार — दोमट, बलुआई, चिकनी
  3. सिंचाई की सुविधा — सिंचित या असिंचित
  4. बीमारियों का प्रकोप — कौन सी बीमारी ज़्यादा होती है
  5. उत्पादन का लक्ष्य — कितना टन प्रति एकड़
  6. चीनी की रिकवरी — कितनी चीनी मिलेगी
  7. बुवाई का समय — खरीफ या रबी

उत्तर भारत की प्रमुख किस्में

1. Co-0238

विशेषताविवरण
विकसितIISR, लखनऊ
अवधि12-14 महीने
उत्पादन80-100 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी11-12%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषताअधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधी
उपयुक्त क्षेत्रउत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब
प्रतिरोधीलाल सड़न, पत्ता झुलसा

फायदे:

  • सबसे ज़्यादा उत्पादन देने वाली किस्म
  • चीनी की रिकवरी अच्छी
  • रोग प्रतिरोधी
  • अच्छा रस

नुकसान:

  • पानी की ज़्यादा ज़रूरत
  • लंबी अवधि

2. Co-0118

विशेषताविवरण
विकसितIISR, लखनऊ
अवधि10-12 महीने
उत्पादन70-90 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2-2.5 मीटर
विशेषतामध्यम अवधि, अच्छी गुणवत्ता
उपयुक्त क्षेत्रउत्तर प्रदेश, बिहार
प्रतिरोधीलाल सड़न

फायदे:

  • मध्यम अवधि, जल्दी तैयार
  • अच्छी गुणवत्ता
  • रोग प्रतिरोधी

नुकसान:

  • Co-0238 से कम उत्पादन

3. CoS-767

विशेषताविवरण
विकसितशाहजहाँपुर
अवधि12-14 महीने
उत्पादन70-85 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषताप्रतिरोधी, अच्छा रस
उपयुक्त क्षेत्रउत्तर प्रदेश, पंजाब
प्रतिरोधीलाल सड़न, पत्ता झुलसा

4. CoJ-64

विशेषताविवरण
विकसितजालंधर
अवधि10-12 महीने
उत्पादन65-80 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2-2.5 मीटर
विशेषताजल्दी पकने वाली
उपयुक्त क्षेत्रपंजाब, हरियाणा
प्रतिरोधीपत्ता झुलसा

5. CoH-160

विशेषताविवरण
विकसितहिसार
अवधि12-14 महीने
उत्पादन70-85 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषताप्रतिरोधी, अच्छा उत्पादन
उपयुक्त क्षेत्रहरियाणा, पंजाब
प्रतिरोधीलाल सड़न

दक्षिण भारत की प्रमुख किस्में

6. Co-86032

विशेषताविवरण
विकसितCoimbatore
अवधि14-16 महीने
उत्पादन80-100 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी11-13%
ऊँचाई3-3.5 मीटर
विशेषतालंबी अवधि, उच्च चीनी
उपयुक्त क्षेत्रमहाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु
प्रतिरोधीलाल सड़न, पत्ता झुलसा

फायदे:

  • चीनी की रिकवरी सबसे ज़्यादा
  • अधिक उत्पादन
  • रोग प्रतिरोधी

नुकसान:

  • लंबी अवधि
  • पानी की ज़्यादा ज़रूरत

7. Co-85019

विशेषताविवरण
विकसितCoimbatore
अवधि12-14 महीने
उत्पादन70-90 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-12%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषतामध्यम अवधि
उपयुक्त क्षेत्रकर्नाटक, आंध्र प्रदेश
प्रतिरोधीलाल सड़न

8. Co-94012

विशेषताविवरण
विकसितCoimbatore
अवधि12-14 महीने
उत्पादन75-95 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी11-12%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषताअच्छा उत्पादन
उपयुक्त क्षेत्रतमिलनाडु, केरल
प्रतिरोधीपत्ता झुलसा

पूर्वी भारत की प्रमुख किस्में

9. Co-09004

विशेषताविवरण
विकसितIISR, लखनऊ
अवधि12-14 महीने
उत्पादन70-90 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2.5-3 मीटर
विशेषतानई किस्म, अच्छा उत्पादन
उपयुक्त क्षेत्रबिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल
प्रतिरोधीलाल सड़न

10. Co-05011

विशेषताविवरण
विकसितIISR, लखनऊ
अवधि12-14 महीने
उत्पादन65-80 टन/हेक्टेयर
चीनी रिकवरी10-11%
ऊँचाई2-2.5 मीटर
विशेषतामध्यम अवधि
उपयुक्त क्षेत्रबिहार, ओडिशा
प्रतिरोधीलाल सड़न

सभी किस्मों का तुलनात्मक सारांश

किस्मउत्पादन (टन/हेक्टेयर)चीनी रिकवरी (%)अवधि (महीने)प्रतिरोधीउपयुक्त क्षेत्र
Co-023880-10011-1212-14लाल सड़न, पत्ता झुलसाUP, बिहार, पंजाब
Co-011870-9010-1110-12लाल सड़नUP, बिहार
Co-8603280-10011-1314-16लाल सड़न, पत्ता झुलसामहाराष्ट्र, कर्नाटक
CoS-76770-8510-1112-14लाल सड़न, पत्ता झुलसाUP, पंजाब
CoJ-6465-8010-1110-12पत्ता झुलसापंजाब, हरियाणा
CoH-16070-8510-1112-14लाल सड़नहरियाणा, पंजाब
Co-8501970-9010-1212-14लाल सड़नकर्नाटक, आंध्र
Co-9401275-9511-1212-14पत्ता झुलसातमिलनाडु, केरल
Co-0900470-9010-1112-14लाल सड़नबिहार, झारखंड
Co-0501165-8010-1112-14लाल सड़नबिहार, ओडिशा

क्षेत्रवार अनुशंसित किस्में

उत्तर प्रदेश

  1. Co-0238 (सर्वश्रेष्ठ)
  2. Co-0118
  3. CoS-767

बिहार

  1. Co-0238
  2. Co-09004
  3. Co-0118

पंजाब

  1. Co-0238
  2. CoJ-64
  3. CoH-160

हरियाणा

  1. Co-0238
  2. CoH-160
  3. CoJ-64

महाराष्ट्र

  1. Co-86032 (सर्वश्रेष्ठ)
  2. Co-85019
  3. Co-94012

कर्नाटक

  1. Co-86032
  2. Co-85019
  3. Co-94012

तमिलनाडु

  1. Co-86032
  2. Co-94012
  3. Co-85019

पश्चिम बंगाल

  1. Co-09004
  2. Co-05011
  3. Co-0238

नई और आधुनिक किस्में (2024-2026)

हाल ही में विकसित किस्में

किस्मसालविशेषताउपयुक्त क्षेत्र
Co-150232024अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधीUP, बिहार
Co-150122024जल्दी पकने वालीपंजाब, हरियाणा
Co-150092024उच्च चीनीमहाराष्ट्र
Co-150062024सूखा प्रतिरोधीराजस्थान, गुजरात
Co-150012024नमक सहनशीलतटीय क्षेत्र

भविष्य की किस्में

  • जैव प्रौद्योगिकी किस्में — जीन एडिटिंग से विकसित
  • सूखा प्रतिरोधी किस्में — कम पानी में अच्छा उत्पादन
  • नमक सहनशील किस्में — तटीय क्षेत्रों के लिए
  • जल्दी पकने वाली किस्में — 8-10 महीने में तैयार

प्रो टिप: नई किस्में लगाने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह ज़रूर लें। हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग किस्में उपयुक्त होती हैं।


किस्म चुनने में गलतियाँ

सामान्य गलतियाँ

  1. बिना जाँच के किस्म चुनना — अपने क्षेत्र के अनुसार चुनें
  2. सस्ता बीज लेना — गुणवत्ता वाला बीज लें
  3. एक ही किस्म लगाना — 2-3 किस्में मिलाकर लगाएं
  4. बीमारी का ध्यान न रखना — प्रतिरोधी किस्में चुनें
  5. मौसम का ध्यान न रखना — अपने मौसम के अनुसार चुनें

कैसे चुनें

  1. अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें
  2. पड़ोसी किसानों से पूछें
  3. विश्वविद्यालय की सिफारिशें देखें
  4. छोटे स्तर पर परीक्षण करें
  5. फिर बड़े स्तर पर लगाएं

प्रो टिप: एक ही खेत में 2-3 किस्में मिलाकर लगाएं। इससे अगर एक किस्म में बीमारी लगे तो बाकी बच जाएंगी।


बीज कहाँ से लें

सरकारी स्रोत

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
  • राज्य कृषि विश्वविद्यालय
  • गन्ना अनुसंधान केंद्र
  • राष्ट्रीय बीज निगम

निजी स्रोत

  • प्रमाणित बीज विक्रेता
  • गन्ना किसान संघ
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

बीज की गुणवत्ता जाँचें

  • तना मोटा और स्वस्थ हो
  • कम से कम 3-4 गाँठें हों
  • कोई बीमारी न हो
  • अंकुर स्वस्थ हों
  • ताज़ा कटाई का हो

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: गन्ने की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?

उत्तर: यह आपके क्षेत्र पर निर्भर करता है। उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए Co-0238 सबसे अच्छी है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए Co-86032 सबसे अच्छी है। पंजाब और हरियाणा के लिए CoJ-64 और CoH-160 अच्छी हैं।

Q2: Co-0238 किस्म की विशेषता क्या है?

उत्तर: Co-0238 भारत की सबसे लोकप्रिय गन्ने की किस्म है। इसका उत्पादन 80-100 टन/हेक्टेयर है, चीनी रिकवरी 11-12% है, और यह लाल सड़न और पत्ता झुलसा जैसी बीमारियों से प्रतिरोधी है। यह 12-14 महीने में तैयार होती है।

Q3: गन्ने की नई किस्में कौन सी हैं?

उत्तर: 2024-2026 में कई नई किस्में विकसित की गई हैं जैसे Co-15023, Co-15012, Co-15009, Co-15006 और Co-15001। ये किस्में अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधकता और सूखा सहनशीलता के लिए विकसित की गई हैं।

Q4: गन्ने का बीज कहाँ से लें?

उत्तर: गन्ने का बीज कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), राज्य कृषि विश्वविद्यालय, गन्ना अनुसंधान केंद्र या प्रमाणित बीज विक्रेता से लें। बीज की गुणवत्ता ज़रूर जाँचें — तना मोटा, स्वस्थ और बीमारी रहित होना चाहिए।


निष्कर्ष

गन्ने की उन्नत किस्में चुनना गन्ने की खेती में सफलता की पहली सीढ़ी है। 2026 में Co-0238, Co-0118, Co-86032 जैसी किस्में सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद हैं। अपने क्षेत्र, मिट्टी, मौसम और सिंचाई की सुविधा के अनुसार सही किस्म चुनें। कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें और प्रमाणित बीज ही इस्तेमाल करें। याद रखें, अच्छी किस्म + अच्छी खेती = अच्छा उत्पादन = अच्छी आमदनी।


यह लेख CaneUp टीम द्वारा तैयार किया गया है। अधिक जानकारी के लिए अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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