
गन्ने की फसल में खरपतवार एक बड़ी मुसीबत है। अगर बुआई के बाद पहले दो महीने ध्यान न दिया जाए, तो उपज 30-40% तक घट सकती है। खरपतवार गन्ने का पानी, खाद और धूप छीन लेते हैं — इससे गन्ना कमजोर रह जाता है और चीनी की मात्रा (Sugar Recovery) भी कम होती है।
यहां हम सात ऐसे तरीके बता रहे हैं जो असल में काम करते हैं। इन्हें मिलाकर चलाना सबसे फायदेमंद होता है।
खरपतवार से गन्ने को क्या नुकसान होता है? (Impact of Weeds on Sugarcane)
खरपतवार को हल्के में न लें। ये आपकी फसल को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं:
शारीरिक नुकसान (Physical Damage)
| प्रकार का नुकसान | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| पोषक तत्वों की चोरी | खरपतवार मिट्टी से नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), और पोटाश (K) सोख लेते हैं | गन्ने को सही से विकास नहीं मिल पाता, पत्तियां पीली पड़ती हैं |
| पानी का अवशोषण | सिंचाई का पानी खरपतवार पी जाते हैं | गन्ने को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, उपज घटती है |
| धूप रोकना | ऊंची घास गन्ने को छाया में रखती है | फोटोसंशश्शन कम होने सेgrowth रुकता है |
| कीट और रोग का आश्रय | खरपतवार में कीड़े और बीमारियां पनपती हैं | गन्ने की फसल में कीट हमले का खतरा बढ़ता है |
| गन्ने की गुणवत्ता कम | शर्करा मात्रा (Sugar Recovery) घटती है | चीनी मिल को कम sucrose मिलता है, आर्थिक नुकसान होता है |
संख्यात्मक प्रभाव: शोधों के अनुसार, खरपतवार मुक्त खेत की तुलना में खरपतवारयुक्त खेत में 30-40% तक उपज कमी देखने को मिलती है। साथ ही, चीनी की मात्रा में भी 10-15% की कमी आती है।
1. रासायनिक नियंत्रण — नदीननाशक दवाएं (Herbicides)
रासायनिक तरीका सबसे तेज और प्रभावी है, विशेष रूप से बड़े किसानों के लिए। यह विधि समय की बचत करती है और uniform control प्रदान करती है।
बुआई के बाद, अंकुरण से पहले (Pre-Emergent)
इस विधि में मिट्टी में मौजूद खरपतवार के बीजों को अंकुरित होने से पहले मार दिया जाता है।
| दवा का नाम | मात्रा (प्रति एकड़) | कब डालें | विशेष नोट |
|---|---|---|---|
| एलाक्लोर (Alachlor) | 1.5-2 लीटर | बुआई के 2-3 दिन बाद | चौड़ी पत्ते वाली खरपतवार के लिए सर्वश्रेष्ठ |
| पेंडीमेथालिन (Pendimethalin) | 1-1.5 लीटर | बुआई के 2-3 दिन बाद | Most commonly used, long-lasting effect |
| एट्राजीन (Atrazine) | 500 ग्राम | बुआई के 3 दिन बाद | जंगली घास के लिए प्रभावी, सावधानी बरतें |
| आईमाजेपिक (Imazethapyr) | 100-150 मिलीलीटर | बुआई के 25-30 दिन बाद | दलहनी फसलें लगाने पर सुरक्षित |
सावधानी:
- दवा का छिड़काव हमेशा सुबह 6-9 बजे या शाम 4-6 बजे करें। तेज हवा में छिड़काव न करें।
- दवा की मात्रा ज्यादा न डालें — इससे गन्ने को नुकसान हो सकता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है।
- दवा छिड़कने के 24 घंटे के भीतर बारिश होने पर दोबारा छिड़काव करें।
- हमेशा दवा लेबल के अनुसार सही मात्रा का प्रयोग करें।
अंकुरण के बाद (Post-Emergent)
इस विधि में उगी हुई खरपतवार पर सीधे दवा का छिड़काव किया जाता है।
| दवा का नाम | मात्रा (प्रति एकड़) | कब छिड़कें | लक्ष्य |
|---|---|---|---|
| 2,4-D (सोडियम नमक) | 800 ग्राम | बुआई के 30-35 दिन बाद | चौड़ी पत्ते वाली खरपतवार के लिए |
| MCPA | 1-1.5 लीटर | बुआई के 25-30 दिन बाद | विकल्प के रूप में, कम जहरीली |
| फलॉक्सिपुर | 200-250 मिलीलीटर | बुआई के 40-45 दिन बाद | ग्रास वीड्स (घास जैसी खरपतवार) के लिए |
टिप: Post-emergent दवा तभी प्रभावी होती है जब खरपतवार 3-4 पत्ते वाली अवस्था में होती है। बड़े खरपतवार पर दवा का असर कम होता है।
2. मल्चिंग (Mulching) — प्राकृतिक और स्थायी तरीका
मल्चिंग का अर्थ है जमीन की सतह पर कुछ सामग्री बिछाना ताकि खरपतवार उगने न पाए। यह विधि धीरे-धीरे असर दिखाती है लेकिन बहुत टिकाऊ है।
मल्चिंग के प्रकार
| मल्च का प्रकार | विशेषताएं | लागत | प्रभावशीलता |
|---|---|---|---|
| पुआल / गन्ने की पत्तियां | किसानों के लिए मुफ्त, जैविक | ₹0-200/एकड़ | 60-70% खरपतवार कमी |
| काली प्लास्टिक मल्च शीट | 100 माइक्रोन मोटी, लंबे समय तक चलने वाली | ₹1,500-3,000/एकड़ | 80-90% खरपतवार कमी |
| गेहूं की पराली | उपलब्धता के आधार पर, मिट्टी के लिए फायदेमंद | ₹500-1,000/एकड़ | 50-70% खरपतवार कमी |
| पेपर मल्च | पर्यावरण के अनुकूल, एक ही सीजन के लिए | ₹2,000-3,500/एकड़ | 70-80% खरपतवार कमी |
मल्चिंग के फायदे
| लाभ | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| खरपतवार 70-80% तक कम | मल्च धूप को रोकता है, जिससे खरपतवार बीज अंकुरित नहीं हो पाते | Very High |
| मिट्टी में नमी बनी रहती है | मल्च पानी के वाष्पीकरण को रोकता है | High |
| मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है | गर्मी के मौसम में मिट्टी ठंडी रहती है | Medium |
| मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है | जैसे-जैसे मल्च सड़ता है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है | Long-term |
| कीट नियंत्रण | कुछ मल्च प्रकार कीटों को भी दूर रखते हैं | Medium |
कैसे करें मल्चिंग (Step-by-Step)
- खेत की तैयारी: बुआई के बाद खेत को हल्का जुताई करें और समतल करें।
- मल्च सामग्री का चयन: अपने बजट और उपलब्धता के अनुसार पुआल, गन्ने की पत्तियां, या प्लास्टिक शीट चुनें।
- बिछाना: बुआई के 3-5 दिन बाद मल्च बिछाएं। गन्ने की पंक्तियों के बीच पर्याप्त जगह छोड़ें।
- मोटाई: पुआल या घास की परत 4-6 इंच मोटी रखें। प्लास्टिक शीट की मोटाई 100 माइक्रॉन होनी चाहिए।
- फसल के बीच जगह: गन्ने के प्रत्येक पौधे के पास 6-8 इंच की जगह छोड़ें ताकि हवा और प्रकाश मिल सके।
- रखरखाव: सीजन के दौरान यदि मल्च टूटे तो उसे समय-समय पर ठीक करते रहें।
टिप: प्रथम सिंचाई के बाद मल्च बिछाना सबसे बेहतर रहता है, ताकि मिटकी में नमी पहले से जमा हो।
3. हाथ से निराई-गुड़ाई (Manual Weeding)
छोटे किसानों के लिए यह सबसे सस्ता और सुरक्षित तरीका है। इसमें किसी भी प्रकार का रसायन उपयोग नहीं करना पड़ता।
समय-सारिणी (Timeline)
| निराई की संख्या | समय | विवरण |
|---|---|---|
| पहली निराई | बुआई के 20-25 दिन बाद | खरपतवार छोटे होते हैं, आसानी से हट जाते हैं। इस चरण पर 80% खरपतवार हटा सकते हैं। |
| दूसरी निराई | बुआई के 45-50 दिन बाद | खरपतवार बड़ी होने लगती है, परंतु गन्ने की पंक्तियाँ स्पष्ट दिखने लगती हैं। |
| तीसरी निराई | बुआई के 70-80 दिन बाद | इस समय तक गन्ना लगभग 6-7 फुट ऊंचा हो जाता है, खरपतवार स्वतः दबने लगती है। |
टिप: गन्ने की प्रथम 60 दिन की अवधि सबसे महत्वपूर्ण है। इस समय खरपतवार को जरूर हटाएं। 60 दिन के बाद गन्ना इतना बड़ा हो जाता है कि खरपतवार खुद दब जाती है, अतिरिक्त निराई की आवश्यकता नहीं होती।
हाथ से निराई के फायदे
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| शून्य लागत | कोई दवा खरीदने की आवश्यकता नहीं |
| पूरक पोषक तत्व | निराई के दौरान उखड़ी हुई खरपतवार मिट्टी में organic matter add करती है |
| कीट मुक्त | रासायनिक दवाओं के बिना कीटों का खतरा नहीं |
| स्वास्थ्य सुरक्षित | किसान और परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षित |
| मिट्टी की गुणवत्ता | लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है |
निराई के उपकरण
| उपकरण | लागत | उपयुक्तता |
|---|---|---|
| हाथ का कुदाल | ₹200-500 | छोटे खेत (1-2 एकड़) के लिए |
| दहेजा (Weeding Hook) | ₹500-1000 | मध्यम किसान के लिए |
| बैटरी चलित निराई मशीन | ₹15,000-30,000 | बड़े किसान के लिए, समय की बचत |
4. अंतरफसल (Intercropping) — दोहरा फायदा
गन्ने के साथ दूसरी फसल उगाने से खरपतवार कम होती है और अतिरिक्त आय भी मिलती है। यह विधि किसान की कुल आय को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है।
अच्छी अंतरफसलें (Best Inter crops)
| फसल | फायदे | बुआई का समय | कटाई का समय |
|---|---|---|---|
| मूंग/मसूर (दाल) | नाइट्रोजन फिक्स करती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है | बुआई के 30 दिन बाद | फसल पकने पर |
| आलू | शुरुआती 90 दिन में तैयार, बाजार में अच्छी कीमत | बुआई के 45 दिन बाद | फसल पकने पर |
| प्याज/लहसुन | बाजार में अच्छी कीमत, कीट प्रतिरोधक गुण | बुआई के 60 दिन बाद | जब पत्तियां पीली होने लगें |
| हरी मिर्च | कम जगह में ज्यादा कमाई, निरंतर आय | बुआई के 45 दिन बाद | निरंतर कटाई |
कैसे करें अंतरफसल (Step-by-Step)
- पंक्ति (Row Spacing): गन्ने की पंक्तियों के बीच उचित दूरी सुनिश्चित करें (आमतौर पर 3-4 फीट तक Gap रखें)।
- बीज की मात्रा: अंतरफसल के बीज की मात्रा कम रखें (कुल बीज मात्रा का 10-15% )।
- बुआई का तरीका: गन्ने की कतारों के बीच में अंतरफसल के बीज बिखेरें या लाइन में लगाएं।
- पहला कटाई: गन्ने की 60 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अंतरफसल काट लें। इससे गन्ने पर कोई असर नहीं पड़ता और खरपतवार कम होती है।
- दूसरा चक्र: गन्ने की कटाई के बाद, खेत में अगली फसल या हरी खाद बो सकते हैं।
आर्थिक लाभ
| स्थिति | केवल गन्ना | गन्ना + अंतरफसल |
|---|---|---|
| एकड़ प्रति आय | ₹45,000-60,000 | ₹60,000-85,000 |
| लाभ में वृद्धि | — | 25-40% तक वृद्धि |
| मिट्टी की सेहत | केवल गन्ना निकलता है | मिट्टी स्वस्थ बनी रहती है |
5. जैविक नियंत्रण (Biological Control)
प्रकृति में कुछ ऐसे सूक्ष्मजीवी और कीट हैं जो खरपतवार को नष्ट करते हैं या उनकी वृद्धि रोकते हैं। यह विधि पर्यावरण के अनुकूल है और दीर्घकालीन लाभ देती है।
जैविक विधियां
| विधि | विवरण | प्रभावीता | लागत |
|---|---|---|---|
| ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) | मिट्टी में मिलाने वाला लाभकारी कवक | खरपतवार के बीजों को अंकुरित होने से रोकता है | ₹200-400/एकड़ |
| कवर क्रॉप | मूंग, उड़द जैसी तेजी से बढ़ने वाली फसलें | खरपतवार को दबा देती हैं, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है | ₹500-800/एकड़ |
| हैप्पी सीडर | गेहूं की कटाई के बाद तुरंत गन्ना बोने से खरपतवार कम होती है | एक ही समय में दो फसलें | ₹3,000-5,000/मशीन |
| पीरियम (Pyrethrin) | प्राकृतिक कीटनाशक, कुछ खरपतवार पर असरकारी | कुछ प्रकार की खरपतवार के लिए | ₹800-1,500/एकड़ |
ट्राइकोडर्मा का उपयोग कैसे करें
- मात्रा: एकड़ के हिसाब से 2-5 किलोग्राम Trichoderma Powder लें।
- मिलाना: इसे 20-25 किलोग्राम खाद या जैविक compost के साथ अच्छी तरह मिलाएं।
- समय: बुआई के पहले दिन मिट्टी में मिलाएं।
- वातावरण: नमी वाले मौसम में बेहतर परिणाम मिलता है।
- उपास्थि: इससे मिट्टी में फायदेमंद बैक्टीरिया की वृद्धि होती है और खरपतवार के बीजों का अंकुरण रुकता है।
कवर क्रॉप (Cover Crop)
| फसल | बुआई का समय | कटाई का समय | खरपत्वर नियंत्रण |
|---|---|---|---|
| मूंग | बुआई के 30 दिन बाद | फसल पकने पर | 70-80% तक कमी |
| उड़द | बुआई के 30 दिन बाद | फसल पकने पर | 60-70% तक कमी |
| सरसों | बुआई के 45 दिन बाद | फसल पकने पर | 50-60% तक कमी |
टिप: कवर क्रॉप को फसल काटने के बाद मिट्टी में मिला (Green Manure) दें, जिससे मिट्टी में nitrogen की मात्रा बढ़ेगी।
6. यांत्रिक नियंत्रण (Mechanical Control)
बड़े किसानों के लिए मशीनों का उपयोग फायदेमंद है और समय की बचत करता है।
उपकरण और उनका उपयोग
| उपकरण | लागत | उपयुक्तता | खरपतवार नियंत्रण |
|---|---|---|---|
| रोटावेटर | ₹50,000-2,00,000 | बुआई से पहले खेत की तैयारी में | 60-70% खरपतवार नष्ट |
| इंटरकल्टीवेटर | ₹30,000-1,00,000 | गन्ने की कतारों के बीच खरपतवार काटना | 70-80% तक कमी |
| पावर वीडर | ₹15,000-30,000 | छोटे और मध्यम किसानों के लिए | 50-60% तक कमी |
| हैप्पी सीडर | ₹30,000-50,000 | बिना जुताई के बुआई, खरपतवार कम | 80% तक कमी |
रोटावेटर का उपयोग
- समय: बुआई से 15-20 दिन पहले करें।
- गहराई: 6-8 इंच की गहराई तक जुताई करें।
- इफेक्ट: मिट्टी में मौजूद खरपतवार के बीज अंकुरित होते हैं और फिर मिट्टी में दब जाते हैं।
- फायदे: मिट्टी की संरचना सुधरती है और subsequent irrigation की आवश्यकता कम होती है।
इंटरकल्टीवेटर का उपयोग
- समय: बुआई के 30-45 दिन बाद और फिर 70-80 दिन बाद।
- गहराई: गन्ने की पंक्तियों के बीच में 3-4 इंच की गहराई।
- इफेक्ट: गन्ने को नुकसान पहुंचाए बिना खरपतवार को काट देता है।
- चाल: धीमी गति से चलाएं ताकि गन्ने की जड़ें सुरक्षित रहें।
7. एकीकृत खरपत्वर प्रबंधन (Integrated Weed Management - IWM)
सबसे अच्छा तरीका है कि आप कई तरीकों को मिलाकर उपयोग करें। एक ही विधि पर निर्भर रहने से खरपतवार उसमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है।
IWM Calendar ( पूरे सीजन का कैलेंडर)
| चरण | समय | कार्य | विधि |
|---|---|---|---|
| 1. खेत तैयारी | बुआई से पहले | रोटावेटर से जुताई | Mechanical |
| 2. प्रारंभिक नियंत्रण | बुआई के 2-3 दिन बाद | Pre-emergent herbicide | Chemical |
| 3. पहली निराई | बुआई के 20-25 दिन बाद | हाथ से गुड़ाई | Manual |
| 4. मध्यकालीन नियंत्रण | बुआई के 30-45 दिन बाद | Post-emergent herbicide + मल्चिंग | Chemical + Cultural |
| 5. दूसरी निराई | बुआई के 45-50 दिन बाद | हाथ से गुड़ाई | Manual |
| 6. अंतिम नियंत्रण | बुआई के 70-80 दिन बाद | इंटरकल्टीवेटर या मल्चिंग | Mechanical + Cultural |
| 7. सीजन अंत | कटाई के बाद | खेत साफ करें, green manure बोएं | Cultural |
IWM के फायदे
| लाभ | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| 90% तक खरपतवार कमी | Multiple methods combined | Very High |
| कीटनाशक उपयोग कम | Chemical dependency reduced | High |
| मिट्टी की सेहत सुधरती | Organic matter increases | Long-term |
| लागत बचत | Optimal chemical use | Medium-High |
| सतत कृषि | Environmentally friendly | Very High |
IWM लागू करने का सूत्र
IWM Formula: 40% Chemical + 30% Mechanical + 20% Cultural + 10% Biological
संदेश: एक ही विधि बार-बार न उपयोग करें। हर सीजन में कम से कम 2-3 विधियों को मिलाएं।
खरपत्वर नियंत्रण लागत तुलना (Cost Comparison)
| विधि | प्रति एकड़ लागत | प्रभावशीलता | लाभ-हानि |
|---|---|---|---|
| केवल रासायनिक | ₹800-1,500 | 70-80% | शीघ्र परिणाम, लेकिन मिट्टी के लिए हानिकारक |
| केवल मल्चिंग | ₹500-3,000 | 60-80% | धीरे-धीरे परिणाम, मिट्टी के लिए लाभदायक |
| केवल हाथ से निराई | ₹2,000-3,000 (श्रम लागत) | 50-70% | श्रम लागत अधिक, लेकिन स्वस्थ |
| IWM (एकीकृत) | ₹1,000-2,000 | 85-95% | संतुलित दृष्टिकोण, सबसे बेहतर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: गन्ने में सबसे अच्छा नदीननाशक कौन सा है?
उत्तर: बुआई के बाद पेंडीमेथालिन (Pre-emergent) और 30 दिन बाद 2,4-D (Post-emergent) सबसे अच्छा काम करता है। शुरुआत के लिए किसान पेंडीमेथालिन का उपयोग करें, यह सबसे किफायती और प्रभावी है।
Q2: खरपत्वर नियंत्रण का सही समय क्या है?
उत्तर: बुआई के पहले 60 दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं। इस समय खरपतवार जरूर हटाएं। 60 दिन के बाद गन्ना इतना बड़ा हो जाता है कि खरपतवार खुद दब जाती है।
Q3: जैविक तरीके से खरपत्वर कैसे हटाएं?
उत्तर: मल्चिंग, अंतरफसल और कवर क्रॉप सबसे अच्छे जैविक तरीके हैं। इनमें कोई रसायन नहीं प्रयोग करना पड़ता और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है।
Q3: 2,4-D गन्ने को नुकसान पहुंचाता है?
उत्तर: सही मात्रा में और सही समय पर डालने से नुकसान नहीं होता। लेकिन ज्यादा मात्रा डालने से गन्ने की पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और उपज घट सकती है। हमेशा लेबल के अनुसार मात्रा का उपयोग करें।
Q4: एक एकड़ में खरपत्वर नियंत्रण का खर्च कितना आता है?
उत्तर:
- रासायनिक तरीके से लगभग ₹800-1,500 प्रति एकड़।
- हाथ से निराई में ₹2,000-3,000 प्रति एकड़ (श्रम लागत शामिल)।
- IWM पद्धति में लगभग ₹1,000-2,000 प्रति एकड़ (मिश्रित दृष्टिकोण)।
Q5: क्या गन्ने के साथ मूंग उगाया जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल। अंतरफसल के रूप में मूंग/मसूर उगाना बहुत फायदेमंद होता है। इससे न केवल अतिरिक्त आय होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है और खरपतवार कम होती है।
Q6: खरपत्वर नियंत्रण के लिए सबसे सस्ता तरीका कौन सा है?
उत्तर: छोटे किसानों के लिए हाथ से निराई सबसे सस्ता विकल्प है, हालांकि इसमें श्रम लागत अधिक आती है। बड़े किसानों के लिए IWM पद्धति सबसे किफायती और प्रभावी है।
Q7: खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: दिन में सुबह 6-9 बजे या शाम 4-6 बजे। इस समय धूप तेज न होने के कारण दवा का छिड़काव uniform होता है और वाष्पीकरण कम होता है। दोपहर 12-3 बजे छिड़काव से बचें।
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निष्कर्ष (Conclusion)
खरपत्वर नियंत्रण गन्ने की खेती का सबसे महत्वपूर्ण काम है। एकीकृत तरीका (रासायनिक + यांत्रिक + जैविक) सबसे अच्छा काम करता है। पहले 60 दिन में खरपतवार पर ध्यान दें, बाकी सीजन में गन्ना खुद खरपतवार को दबा देगा।
मुख्य सुझाव:
- पहले 60 दिन: कठोर नियंत्रण करें (Chemical + Manual हमेशा करें)।
- 60-120 दिन: मल्चिंग और अंतरफसल अपनाएं।
- पूरा सीजन: IWM पद्धति का पालन करें।
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