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गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) रोग का पक्का इलाज 2026 — 7 वैज्ञानिक उपाय, दवा स्प्रे व बीज शोधन

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 31, 2026 • 4 min read
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गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) रोग का पक्का इलाज 2026 — 7 वैज्ञानिक उपाय, दवा स्प्रे व बीज शोधन
अंतिम अपडेट: August 31, 2026 10:30 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ने का लाल सड़न रोग (Red Rot of Sugarcane), जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में किसान ‘गन्ने का कैंसर’ भी कहते हैं, फफूंद कोलेटोट्राइकम फाल्केटम (Colletotrichum falcatum) के कारण फैलता है। पिछले तीन वर्षों में पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय किस्म Co-0238 के बड़े रकबे में इस बीमारी के गंभीर प्रकोप से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। गन्ने के तने के अंदर का गूदा लाल होकर सड़ जाता है, रस सूख जाता है और चीनी की रिकवरी 40% तक गिर जाती है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR लखनऊ) और यूपी गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के पादप रोग वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित 7 वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर किसान भाई अपनी फसल को इस विनाशकारी बीमारी से 100% सुरक्षित रख सकते हैं।


1. गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) की पहचान कैसे करें? (लक्षण)

शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर इसका फैलाव रोका जा सकता है:

  1. पत्तियों का पीला पड़ना: पौधे की तीसरी और चौथी पत्ती ऊपर से सूखने लगती है और किनारों से अंदर की ओर मुड़ जाती है।
  2. मध्य शिरा पर लाल धब्बे: पत्ती की बीच वाली नस (Midrib) पर गहरे लाल-भूरे रंग के लंबे चकत्ते बन जाते हैं।
  3. तने को चीरने पर शराब जैसी बदबू: जब रोगी गन्ने को लंबाई में फाड़ा जाता है, तो अंदर का गूदा चमकीला लाल दिखता है, जिसमें बीच-बीच में सफेद चौड़ी धारियां (White Cross Bands) होती हैं और किण्वित शराब/अल्कोहल जैसी तीखी गंध आती है।
  4. तने का खोखला और हल्का होना: गन्ना सूखकर हल्का हो जाता है और हवा चलने पर बीच से टूट जाता है।

2. लाल सड़न की रोकथाम के 7 वैज्ञानिक उपाय

उपाय क्रमनियंत्रण विधिउपयोग की जाने वाली दवा / सामग्रीसही मात्रा व प्रयोग का समय
1. बीज शोधन (Seed Treatment)रासायनिक उपचारकार्बेंडाजिम 50% डब्ल्यूपी (Bavistin)2 ग्राम प्रति लीटर पानी (30 मिनट डुबोएं)
2. गर्म जल उपचार (HWT)थर्मल स्टरलाइजेशनहॉट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (52°C)52 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट
3. मिट्टी का जैविक उपचारबायो-कंट्रोलट्राइकोडर्मा हरजिएनम (Trichoderma)2.5 किग्रा प्रति एकड़ (100 किग्रा गोबर खाद में मिलाकर)
4. खड़ी फसल में स्प्रेफफूंदनाशक स्प्रेपाइराक्लोस्ट्रोबिन + मेटीराम (Cabrio Top)3 ग्राम प्रति लीटर पानी (जड़ों व तने पर)
5. रोगी पौधों का उखाड़नास्वच्छता प्रबंधनरोगी थान को जड़ सहित उखाड़कर जलाएंगड्ढे में ब्लीचिंग पाउडर या चूना डालें
6. जल निकासी व्यवस्थाएग्रोनॉमिक उपायखेत में जलभराव न होने देंमेड़ें ऊंची रखें और जलनिकासी नाली बनाएं
7. रोगरोधी किस्मों की बुवाईकिस्म प्रतिस्थापनCo-15023, CoS-17231, CoLk-14201Co-0238 का रकबा चरणबद्ध तरीके से घटाएं

3. ट्राइकोडर्मा से मिट्टी का उपचार करने की सही विधि

ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद है जो जमीन में पहुंचकर लाल सड़न के हानिकारक फंगस को खाकर नष्ट कर देती है:

  1. 100 किलोग्राम अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद लें।
  2. इसमें 2.5 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर और 2 किलोग्राम गुड़ का शीरा मिलाकर अच्छी तरह मिलाएं।
  3. इस मिश्रण पर हल्का पानी छिड़ककर जूट की बोरी से ढक दें और 7 दिनों तक छायादार स्थान पर रखें।
  4. 7 दिन बाद जब खाद पर हल्का हरा जाल फैल जाए, तो अंतिम जुताई के समय या बुवाई की नालियों (कूड़ों) में इसे समान रूप से बिखेर दें।

4. शरदकालीन बुवाई में ध्यान रखने योग्य सावधानियां

  • कभी भी ऐसे खेत से बीज न लें जहां पिछले साल लाल सड़न का प्रकोप रहा हो।
  • गन्ने के दो आंख वाले टुकड़ों (Two-bud setts) की ही बुवाई करें।
  • बुवाई से पूर्व गन्ने के सिरों को फफूंदनाशक घोल में 15 मिनट तक अवश्य डुबोएं।
  • खेत में एक ही फसल बार-बार न लें, गन्ने के बाद दलहनी फसलें (चना, मटर) या सरसों लेकर फसल चक्र अपनाएं।

उन्नत किस्मों के चयन के लिए हमारी Co-0238 की 5 श्रेष्ठ विकल्प किस्में गाइड पढ़ें और शरदकालीन बुवाई के लिए ट्रेंच विधि सह-फसल तकनीक देखें।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) — लाल सड़न (Red Rot)

Q1. क्या लाल सड़न से प्रभावित गन्ने का गुड़ या चीनी बन सकती है?

उत्तर: नहीं। संक्रमित गन्ने का सुक्रोज ग्लूकोज में बदल जाता है, जिससे रस खट्टा हो जाता है और गुड़ नहीं जमता। चीनी मिलें ऐसे गन्ने को रिजेक्ट कर देती हैं।

Q2. क्या खड़ी फसल में दवा छिड़कने से सूखा हुआ गन्ना दोबारा हरा हो सकता है?

उत्तर: जो पौधा पूरी तरह सूख चुका है, वह ठीक नहीं होता। फफूंदनाशक स्प्रे केवल आसपास के स्वस्थ पौधों में फंगस के फैलाव को रोकता है।

Q3. ट्राइकोडर्मा का प्रयोग किस मौसम में सबसे अधिक असरदार होता है?

उत्तर: ट्राइकोडर्मा का प्रयोग बुवाई के समय मिट्टी में या पहली-दूसरी सिंचाई के समय करने से यह जड़ों के चारों ओर सुरक्षा कवच बना लेता है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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