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गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) की पहचान और तुरंत इलाज — लक्षण, फफूंदनाशक स्प्रे व बचाव

Randhir Patil Randhir Patil Sep 3, 2026 अपडेट: Sep 5, 2026 10:00 AM IST 3 min read
गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) की पहचान और तुरंत इलाज — लक्षण, फफूंदनाशक स्प्रे व बचाव
अंतिम अपडेट: September 5, 2026 10:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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मुख्य बिंदु (Quick Summary): लाल सड़न (Red Rot) को गन्ने का कैंसर कहा जाता है जो कुछ ही हफ्तों में पूरे खेत को सुखा देता है। यदि समय रहते इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर अनुशंसित फफूंदनाशक का फोलियर व ड्रेंचिंग स्प्रे किया जाए और जलभराव रोका जाए, तो फसल को भारी तबाही से बचाया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में पिछले 3 वर्षों के दौरान गन्ने के रकबे और उत्पादन में आई गिरावट का 70% कारण लाल सड़न (Red Rot - Colletotrichum falcatum) रोग है। यह फंगस गन्ने के संवहनी ऊतकों (Vascular Bundles) को बंद कर देती है, जिससे पौधे को जमीन से पानी और पोषक तत्व मिलना बंद हो जाते हैं और पूरा गन्ना सूखकर लाठी बन जाता है।

आइए जानते हैं कि अपने खेत में लाल सड़न की समय पर पहचान कैसे करें और तुरंत क्या इलाज करें।


UP Council of Sugarcane Research
UP Council of Sugarcane Research
@UPCSR_Shahjahan
चेतावनी: गन्ने में लाल सड़न (Red Rot) रोग दिखने पर तुरंत संक्रमित पौधे को उखाड़कर नष्ट करें और कार्बेंडाजिम अथवा थायोफेनेट मिथाइल का स्प्रे करें। रोगग्रस्त खेत से अगले वर्ष बीज न लें। #PlantProtection #RedRotAlert

1. लाल सड़न (Red Rot) के 4 प्रमुख लक्षण

  1. तीसरी और चौथी पत्ती का पीला पड़ना: पौधे के ऊपरी हिस्से की पत्तियां किनारों से सूखने लगती हैं और मध्य शिरा (Midrib) पर लाल रंग के लंबे धब्बे पड़ जाते हैं।
  2. तने को चीरने पर लाल गूदा व सफेद पट्टियां: जब संक्रमित गन्ने को लंबाई में चीरा जाता है, तो अंदर का गूदा गहरा लाल दिखाई देता है और उसमें आड़ी सफेद पट्टियां (White Patches) दिखती हैं।
  3. अल्कोहल या सिरके जैसी तीखी बदबू: संक्रमित तने से सड़े हुए शीरे या शराब जैसी खट्टी गंध आती है।
  4. खोखला तना: गन्ना सूखकर हल्का हो जाता है और हिलाने पर आसानी से टूट जाता है।

2. तुरंत करने योग्य रासायनिक उपचार (Emergency Chemical Spray)

यदि खेत में 5 से 10% पौधों में लक्षण दिख रहे हैं:

[स्प्रे 1] ➔ पायराक्लोस्ट्रोबिन + एपॉक्सीकोनाज़ोल (Opera / Headline) - 200 मिली प्रति एकड़ (200 लीटर पानी)
[स्प्रे 2 (12 दिन बाद)] ➔ एज़ोक्सीस्ट्रोबिन + टेबुकोनाज़ोल (Custodia) - 300 मिली प्रति एकड़
[जड़ों में ड्रेंचिंग] ➔ कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% WP - 500 ग्राम प्रति एकड़ सिंचाई के पानी के साथ

3. खेत से रोग का प्रसार रोकने के 4 सुनहरे नियम

  1. संक्रमित पौधों को उखाड़कर जलाएं: जिस पौधे में लाल सड़न के लक्षण दिखें, उसे जड़ समेत उखाड़कर खेत से बाहर ले जाएं और जला दें। उस गड्ढे में 50 ग्राम बुझा हुआ चूना या ब्लीचिंग पाउडर डाल दें।
  2. जलभराव तुरंत निकालें: बरसात का ठहरा हुआ पानी इस फंगस के बीजाणुओं को एक पौधे से दूसरे पौधे तक बहाकर ले जाता है। खेत में जल निकासी की नाली अवश्य बनाएं।
  3. संक्रमित खेत की पेड़ी (Ratoon) न रखें: जिस खेत में लाल सड़न आ चुका है, उसमें अगली पेड़ी फसल कतई न लें; खेत को जोतकर फसल चक्र (सरसों या धान) अपनाएं।
  4. बीमार खेत से बीज न लें: रोगग्रस्त खेत के गन्ने को बीज के रूप में प्रयोग करने की भूल कभी न करें।

Randhir Patil
लेखक

Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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